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सरकारी पोखरी पर कब्जे की शिकायत से गरमाया मामला, जांच के आदेश से बढ़ी हलचल
सिद्धार्थनगर में सरकारी जमीनों की सुरक्षा पर उठे सवाल, प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका क्षेत्र में सरकारी पोखरी और कथित अतिक्रमण को लेकर मामला अब प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक मौर्य ने जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन को लिखित शिकायत देकर संबंधित पोखरी की जमीनों की पैमाइश कराने, अभिलेखों की जांच करने तथा यदि अतिक्रमण की पुष्टि हो तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में सिविल लाइन स्थित शास्त्री नगर में पंजाब नेशनल बैंक के सामने सरकारी पोखरी की जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से कब्जे का प्रयास किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा शास्त्री नगर क्षेत्र में पोखरी की जमीन पर कथित कब्जे और निर्माण को लेकर भी शिकायत की गई है।

वाल्मीकि नगर की पोखरी को लेकर भी शिकायत
वार्ड संख्या-1 वाल्मीकि नगर निवासी बालमुकुंद त्रिपाठी ने भी पोखरी की जमीन के दायरे को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले करीब पांच बीघे की पोखरी बताई जाती थी, लेकिन समय के साथ इसका दायरा कम हुआ है।

उन्होंने गाटा संख्या 408, 409 और 410 से संबंधित जमीन को लेकर भी शिकायत की है और कुछ लोगों पर कथित रूप से पोखरी की जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगाए हैं।
बालमुकुंद त्रिपाठी का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायतें की हैं। उन्होंने कुछ लोगों की ओर से धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी व्यक्ति को इन आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।
DM ने गठित की जांच टीम
मामले में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अपर जिलाधिकारी न्यायिक की अगुवाई में टीम गठित किए जाने की जानकारी दी।

जिलाधिकारी के अनुसार जांच टीम मौके पर जाकर पूरे प्रकरण की जांच-पड़ताल करेगी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तथ्यों के आधार पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में जिन जमीनों का उल्लेख किया गया है, उनका राजस्व अभिलेखों में वास्तविक दर्जा क्या है और मौके पर उनकी स्थिति क्या है।

सबसे बड़ा सवाल
सरकारी पोखरी की जमीन आखिर कितनी सुरक्षित?
पोखरी और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में केवल शिकायत या आरोप के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेख, पैमाइश और मौके की जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।
यदि जांच में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की अगली जिम्मेदारी होगी। वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो जांच के जरिए स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
सारांश
सिद्धार्थनगर में सरकारी पोखरी की जमीन पर कथित कब्जे को लेकर शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है। भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक मौर्य ने जिलाधिकारी से शिकायत कर पैमाइश और कार्रवाई की मांग की है। वाल्मीकि नगर निवासी बालमुकुंद त्रिपाठी ने भी पोखरी की जमीन और गाटा संख्या 408, 409 व 410 को लेकर शिकायत की है। जिलाधिकारी ने ADM न्यायिक की अगुवाई में जांच टीम गठित करने की बात कही है। अब जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है।
संपादकीय टिप्पणी
सरकारी जमीन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती। पोखरी और तालाब जैसी सार्वजनिक संपत्तियां केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि कार्रवाई आरोप या प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड, मौके की पैमाइश और निष्पक्ष जांच के आधार पर हो।
अगर जांच में अतिक्रमण मिलता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और अगर शिकायत में लगाए गए आरोप सही नहीं मिलते तो वह तथ्य भी सामने आना चाहिए।
कानून सबके लिए समान है—सरकारी जमीन की सुरक्षा भी इसी सिद्धांत पर होनी चाहिए।
सिद्धार्थनगर में लोधी समाज की नई पहल, गांव-गांव पहुंच रहा जागरूकता का संदेश
अवंती बाई लोधी जयंती और कल्याण सिंह पुण्यतिथि कार्यक्रम को लेकर जनसंपर्क तेज, सदस्यता अभियान के साथ लगाए जा रहे जागरूकता बोर्ड
सिद्धार्थनगर। अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा की ओर से जिले में सामाजिक जागरूकता और संगठन विस्तार का अभियान तेज किया गया है। आगामी 16 अगस्त को वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी जयंती तथा 21 अगस्त को स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को लेकर समाज के लोगों के बीच जनसंपर्क किया जा रहा है। इसी क्रम में गांव-गांव पहुंचकर लोगों को संगठन से जोड़ने और महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया जा रहा है।
सिद्धार्थनगर में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा की गतिविधियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। संगठन की ओर से सामाजिक एकजुटता, जागरूकता और समाज के युवाओं को शिक्षा एवं सामाजिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाने को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
इसी अभियान के तहत अलग-अलग स्थानों पर जागरूकता एवं सदस्यता संबंधी बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिन पर संगठन से जुड़ने वाले लोगों के नाम अंकित किए जा रहे हैं। तस्वीरों में महासभा से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता बोर्ड लगाते तथा स्थानीय लोगों से संवाद करते दिखाई दे रहे हैं।
संगठन के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य समाज के लोगों को एक मंच पर जोड़ना और अपने महापुरुषों के जीवन, संघर्ष तथा विचारों से प्रेरणा लेने के लिए जागरूक करना बताया गया है।
बोर्ड पर वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी सहित समाज और देश के प्रेरणास्रोत महापुरुषों के चित्र लगाए गए हैं। इनके माध्यम से संगठन की ओर से समाज को अपने गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के योगदान से जोड़ने का संदेश दिया जा रहा है।
16 अगस्त को प्रस्तावित कार्यक्रम
महासभा की ओर से 16 अगस्त को महारानी अवंती बाई लोधी जयंती समारोह आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय में कार्यक्रम के साथ नगर पालिका क्षेत्र से रोड शो और जनसभा का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
वहीं 21 अगस्त को स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर से बड़ी संख्या में लोगों को पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। संगठन की ओर से दो हजार से अधिक लोगों के लखनऊ पहुंचने का लक्ष्य बताया गया है।
इसके लिए कार्यकर्ताओं की ओर से गांव-गांव संपर्क किया जा रहा है और समाज के लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।
शिक्षा से राजनीति तक आगे बढ़ने का संदेश
महासभा से जुड़े लोगों का कहना है कि समाज की तरक्की केवल संगठन की संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, आपसी सहयोग और युवाओं की भागीदारी से होगी।
संगठन की ओर से स्वर्गीय कल्याण सिंह के विचारों और समाज के अन्य महापुरुषों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अभियान में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिद्धार्थनगर में लोधी समाज के लोग लगातार संगठन से जुड़ रहे हैं और आने वाले समय में सामाजिक क्षेत्र में अपनी भागीदारी और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
| समाज के लिए संदेश
“महापुरुषों का सम्मान तभी सार्थक, जब उनके विचारों को जीवन में उतारें”
संगठन की यह पहल केवल कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित न रहकर यदि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सहयोग, युवाओं के मार्गदर्शन और जरूरतमंद परिवारों की मदद जैसे विषयों से भी जुड़ती है, तो इसका व्यापक सामाजिक प्रभाव दिखाई दे सकता है।
समाज की असली ताकत संख्या में नहीं, बल्कि शिक्षित, जागरूक और एक-दूसरे के सहयोगी समाज के निर्माण में है।
सारांश
सिद्धार्थनगर में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का जनसंपर्क अभियान तेज। 16 अगस्त को महारानी अवंती बाई लोधी जयंती समारोह और रोड शो-जनसभा की तैयारी। 21 अगस्त को कल्याण सिंह पुण्यतिथि कार्यक्रम के लिए लखनऊ जाने की तैयारी। गांव-गांव लगाए जा रहे जागरूकता बोर्ड, नए सदस्यों को संगठन से जोड़ने का अभियान जारी।
संपादकीय टिप्पणी
किसी भी समाज की पहचान केवल उसके इतिहास से नहीं, बल्कि उसके वर्तमान प्रयासों और आने वाली पीढ़ी के भविष्य से होती है।
महापुरुषों की तस्वीरें लगाना और जयंती-पुण्यतिथि मनाना अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके विचारों को शिक्षा, सामाजिक सेवा, अनुशासन, समान अवसर और युवाओं के विकास से जोड़ना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
सिद्धार्थनगर में चल रहा यह अभियान यदि इसी सोच के साथ आगे बढ़ता है और समाज के अधिक से अधिक लोग सकारात्मक सामाजिक कार्यों से जुड़ते हैं, तो निश्चित रूप से इसका लाभ आने वाली पीढ़ी को मिल सकता है।
एकजुट समाज वही है, जो अपने इतिहास का सम्मान करे, वर्तमान की जिम्मेदारी समझे और भविष्य की पीढ़ी के लिए रास्ता तैयार करे।
कहाँ हो मंगरू, अब कहाँ पर पढ़त हौ?
गुरु जी की कलम से — शिक्षा व्यवस्था पर करारा व्यंग्य
विशेष संवाददाता | FT News Digital
प्रदेश में शिक्षक पदों की रिक्तियों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की चर्चा है, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में शिक्षित अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। इसी तस्वीर को व्यंग्य के जरिए सामने लाता है मंगरू और गुरु जी का यह संवाद—जहाँ सवाल सीधा है, लेकिन जवाब तलाशना आसान नहीं।
सुबह-सुबह मिला मंगरू, माथे पर चिंता की लकीरें
सुबह-सुबह मंगरू मिला। चेहरे पर वही पुरानी मासूमियत थी, लेकिन माथे पर चिंता की लकीरें कुछ ज्यादा गहरी थीं।
मैंने पूछा—
“कहाँ हो मंगरू?”
वह बोला—
“यहीं हैं गुरुजी, लेकिन समझ में नहीं आ रहा कि अब पढ़ें कहाँ और पढ़ाएँ कौन?”
मैंने कहा—
“अरे, हुआ क्या?”
मंगरू ने जेब से अखबार निकाला और बोला—
“गुरुजी, खबरों में शिक्षक पदों की बड़ी संख्या में रिक्तियां बताई जा रही हैं। उधर लाखों पढ़े-लिखे लड़के-लड़कियां भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल में शिक्षक कम हैं और बेरोजगारों के घर में डिग्रियों का ढेर लगा है। अब आप ही बताइए—पढ़ा कहाँ जाए और पढ़ाए कौन?”
मैंने समझाते हुए कहा—
“धैर्य रखो मंगरू, भर्ती की प्रक्रिया और आयोग भी तो हैं।”
मंगरू मुस्कुराया और बोला—
“गुरुजी, हमारे यहां आयोग बनते-बनते बच्चे जवान हो जाते हैं और भर्ती निकलते-निकलते कई अभ्यर्थी उम्र की सीमा के करीब पहुंच जाते हैं।”
स्कूल में बच्चे हैं, शिक्षक कितने?
मंगरू की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि उसने शिक्षा व्यवस्था की दूसरी तस्वीर सामने रख दी।
वह बोला—
“गुरुजी, गांव के स्कूल में कई कक्षाएं हैं, बच्चों की संख्या भी अच्छी-खासी है, लेकिन शिक्षक सीमित हैं। अब एक शिक्षक पढ़ाए या हाजिरी संभाले? दूसरा बच्चों को पढ़ाए या सरकारी रिपोर्ट और ऑनलाइन पोर्टल पूरा करे?”
यही सवाल आज कई सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर होने वाली चर्चाओं के केंद्र में रहता है।
शिक्षकों पर पढ़ाने के अलावा विभिन्न प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ होने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। सवाल यह है कि यदि शिक्षक का ज्यादा समय रिपोर्टिंग, डाटा और दूसरे कामों में चला जाए तो कक्षा में बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय कैसे मिले?
मोबाइल बना नया गुरु!
इतने में चाय वाला बोल पड़ा—
“बाबूजी, अब बच्चों को मास्टर से ज्यादा मोबाइल पढ़ाता है।”
मंगरू जोर से हंसा और बोला—
“सही कह रहे हो चच्चा। बच्चा स्कूल में गुरुजी को कम और घर में इंटरनेट को ज्यादा गुरु मानता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इंटरनेट कभी छुट्टी नहीं लेता!”
मजाक के पीछे सवाल गंभीर था।
डिजिटल दौर में मोबाइल और इंटरनेट बच्चों के लिए जानकारी का बड़ा माध्यम बन चुके हैं। लेकिन तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं हो सकती। किताब, शिक्षक और तकनीक—तीनों का संतुलित इस्तेमाल ही शिक्षा को मजबूत बना सकता है।
| मंगरू का सवाल बड़ा है
“स्कूल है, बच्चे हैं, किताबें हैं…
फिर सवाल सिर्फ इतना क्यों है कि पढ़ाएगा कौन?”
मंगरू का कहना है कि शिक्षा सुधार की चर्चा केवल नीतियों और घोषणाओं तक सीमित न रहकर स्कूल की वास्तविक जरूरतों तक पहुंचनी चाहिए।
नियम बदलते हैं, बयान बदलते हैं… बच्चे का क्या?
मंगरू ने अखबार का एक और पन्ना खोला। उसमें शिक्षा से जुड़े नियमों और पाठ्यक्रम को लेकर चल रही चर्चाओं का जिक्र था।
वह बोला—
“गुरुजी, पढ़ाई के नियम बदल रहे हैं, व्यवस्थाएं बदल रही हैं, बयान बदल रहे हैं… लेकिन बच्चों की चिंता कौन करेगा?”
मैंने कहा—
“देखो मंगरू, शिक्षा में सुधार जरूरी है। व्यवस्था में बदलाव भी समय की जरूरत है।”
वह बोला—
“सुधार से किसे एतराज है गुरुजी? लेकिन सुधार किताबों में ज्यादा दिखाई देता है, जमीन पर कम। पहले स्कूल में पर्याप्त शिक्षक तो पहुंचें, फिर उनसे पूरी उम्मीद भी रखिए।”
उसकी बात में व्यंग्य जरूर था, लेकिन सवाल गंभीर था।
| समस्या की तस्वीर
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रमुख सवाल
रिक्त शिक्षक पदों को भरने की प्रक्रिया कितनी तेज हो?
भर्ती प्रक्रिया में लगने वाले समय को कैसे कम किया जाए?
शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से कितना मुक्त किया जाए?
ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक और छात्र का अनुपात कैसे सुधरे?
डिजिटल शिक्षा के साथ शिक्षक की भूमिका कैसे मजबूत हो?
बच्चों की पढ़ाई को प्रशासनिक प्रक्रियाओं से ऊपर कैसे रखा जाए?
आयोग, कोर्ट और कैलेंडर के बीच अभ्यर्थी
मंगरू बोला—
“गुरुजी, पढ़े-लिखे नौजवान नौकरी के लिए तैयारी करते हैं। फिर भर्ती का इंतजार करते हैं। उसके बाद परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज और कभी-कभी कानूनी प्रक्रिया… इसी बीच कैलेंडर बदलता रहता है।”
उसने मुस्कुराते हुए कहा—
“कई बार लगता है कि अभ्यर्थी नौकरी की तैयारी कम और इंतजार करने की तैयारी ज्यादा कर रहा है।”
व्यंग्य के इस अंदाज में भर्ती प्रक्रिया की देरी और अभ्यर्थियों की बेचैनी पर सवाल उठता है। हालांकि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में नियम, पात्रता, परीक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है।
असली सवाल कक्षा में बैठा बच्चा पूछता है
आज शिक्षा पर बहस खूब होती है। मंचों पर शिक्षा की योजनाओं की चर्चा होती है, सरकारी स्तर पर नई पहल और डिजिटल व्यवस्थाएं सामने आती हैं और अधिकारी अपने स्तर पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।
लेकिन असली सवाल तब सामने आता है, जब एक बच्चा स्कूल की कक्षा में बैठकर पूछता है—
“गुरुजी, आज कौन पढ़ाएगा?”
इस सवाल का जवाब किसी भाषण से नहीं, बल्कि स्कूल में मौजूद शिक्षक से मिलेगा।
मंगरू का आखिरी तीर
मंगरू जाने लगा तो मैंने पूछा—
“तो समाधान क्या है?”
वह पलटा और बोला—
“बहुत आसान है गुरुजी। पहले स्कूल में पर्याप्त शिक्षक भेजो, फिर शिक्षक को पढ़ाने दो। हर महीने नया आदेश, नया ऐप, नई रिपोर्ट और नया पोर्टल भेजने से पहले यह देखो कि बच्चे की कक्षा में गुरुजी मौजूद हैं या नहीं।”
मैं चुप रहा।
मंगरू ने जाते-जाते आखिरी तीर छोड़ा—
“सरकार कहती है—’सब पढ़ें, सब बढ़ें’… गांव वाले बस इतना पूछ रहे हैं—पहले यह तो बताइए, पढ़ाएगा कौन?”
मंगरू चला गया, लेकिन उसका सवाल वहीं रह गया।
स्कूल हैं, बच्चे हैं, किताबें हैं, योजनाएं हैं—अब जरूरत है कि कक्षा में पर्याप्त शिक्षक भी हों और उन्हें बच्चों को पढ़ाने का पूरा अवसर मिले।
गुरु जी की कलम से
यह व्यंग्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवालों को सामने रखने का एक रचनात्मक प्रयास है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि व्यवस्था पर विचार करने के लिए सवाल उठाना है।
संक्षिप्त सारांश
शिक्षक पदों की रिक्तियों, भर्ती की प्रतीक्षा और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर ‘गुरु जी की कलम से’ व्यंग्य के जरिए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। मंगरू के संवाद के माध्यम से पूछा गया है कि जब स्कूल और बच्चे मौजूद हैं, तो कक्षा में पर्याप्त शिक्षक कब होंगे?
पोखरे और नुकीले बांसों के बीच फंसे बेजुबान के लिए देवदूत बनी पुलिस और ग्रामीण
जान जोखिम में डालकर बैल को सुरक्षित निकाला, मौके पर बुलाया गया पशु चिकित्सक
सिद्धार्थनगर। विशेष संवाददाता।थाना शिवनगर डिडई क्षेत्र के ग्राम तिलौला में पुलिस और ग्रामीणों की मानवीय पहल सामने आई है। यहां एक गहरे पोखरे में नुकीले बांसों और दलदल के बीच फंसे बैल को पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने संयुक्त प्रयास से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू के बाद मौके पर पशु चिकित्सक को बुलाकर बैल का उपचार कराया गया।
रातभर पोखरे में फंसा रहा बैल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तिलौला स्थित एक पुराने पोखरे में रात के समय एक बैल गिर गया। पोखरे में दलदल और कटे हुए नुकीले बांस होने के कारण बैल उसमें बुरी तरह फंस गया। बताया गया कि पशु ने रातभर बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सका।
सुबह ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल थाना शिवनगर डिडई पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
सूचना मिलते ही थाना शिवनगर डिडई में तैनात मुख्य आरक्षी अजीत कुमार यादव, कांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमी और कांस्टेबल बृजेश यादव मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को भी रेस्क्यू अभियान में शामिल किया।
इसी दौरान ग्राम तिलौला निवासी दर्पण गौंड़ ने साहस का परिचय देते हुए दलदल और पोखरे में उतरकर बैल को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साथ कुणाल मिश्रा, दिलीप मिश्रा, संदीप मिश्रा, मायाराम मिश्रा, उमेश चंद्र मिश्रा, आनंद मिश्रा और पिंकू शर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने भी सहयोग किया।
पुलिस और ग्रामीणों के घंटों चले प्रयास के बाद बैल को बांस और कीचड़ के बीच से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
मौके पर बुलाया गया पशु चिकित्सक
रातभर पानी और ठंड में फंसे रहने के कारण बैल की हालत खराब बताई गई। इसके बाद कांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमी की ओर से स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क किया गया। चिकित्सक ने मौके पर पहुंचकर पशु की जांच की और आवश्यक उपचार एवं दवा दी।
इसके बाद ग्रामीणों से बातचीत कर बैल के स्वस्थ होने तक उसके खान-पान और देखभाल की जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात सामने आई।
रेस्क्यू में इन लोगों ने निभाई भूमिका
पुलिस टीम:मुख्य आरक्षी अजीत कुमार यादवकांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमीकांस्टेबल बृजेश यादव
ग्रामीण सहयोगी:दर्पण गौंड़, कुणाल मिश्रा, दिलीप मिश्रा, संदीप मिश्रा, मायाराम मिश्रा, उमेश चंद्र मिश्रा, आनंद मिश्रा और पिंकू शर्मा सहित अन्य ग्रामीण।
इंसानियत की मिसाल बना रेस्क्यू
बेजुबान पशु को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के एक साथ आने की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। घटना ने यह संदेश दिया कि संकट की घड़ी में सामूहिक प्रयास और संवेदनशीलता से किसी बेजुबान की भी मदद की जा सकती है।
नोट: खबर में किसी व्यक्ति पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। घटनाक्रम उपलब्ध जानकारी और बताए गए रेस्क्यू प्रयासों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
स्कूली बच्चों से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं तक दिखा देशभक्ति का जोश, ‘हर घर तिरंगा’ का दिया संदेश
स्कूली बच्चों से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं तक दिखा देशभक्ति का जोश, ‘हर घर तिरंगा’ का दिया संदे
सिद्धार्थनगर/कपिलवस्तु। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश लेकर विधानसभा कपिलवस्तु क्षेत्र के मोहाना चौक से भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे स्कूली बच्चों, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने यात्रा में सहभागिता की। तिरंगों से सजे माहौल में देशभक्ति के नारों के बीच यात्रा ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
मोहाना चौक से निकली तिरंगा यात्रा में स्कूली बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। बच्चों के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्रप्रेम, एकता और देश के प्रति सम्मान का संदेश दिया। आयोजकों के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य लोगों को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रति जागरूक करना और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए प्रेरित करना रहा।
प्रमुख सहभागिता
तिरंगा यात्रा में ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
मंडल प्रभारी रमेश मणि, सदर विधायक श्याम धनी रही के प्रतिनिधि सत्य प्रकाश रही जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा खालिक रहमान, मंडल अध्यक्ष नौगढ़ देहात सोनू गुप्ता सहित नरेंद्र पटेल, अब्दुल गनी, अरशद खान, वीरेंद्र कुमार, अनिल चौधरी, गगन श्रीवास्तव, अजय गुप्ता एवं होली प्रधान समेत अनेक भाजपा कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी यात्रा में शामिल रहे। इनके साथ स्कूली बच्चों ने भी तिरंगा यात्रा में सहभागिता की।
तिरंगे के साथ कदम से कदम मिलाते नजर आए बच्चे
मोहाना चौक से शुरू हुई यात्रा के दौरान स्कूली बच्चों के हाथों में लहराता तिरंगा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों की मौजूदगी ने कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का माहौल बनाया। वहीं भाजपा कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी भी राष्ट्रीय ध्वज लेकर यात्रा में शामिल हुए।
यात्रा के दौरान देशभक्ति की भावना से जुड़े नारों के साथ लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित किया गया। ‘हर घर तिरंगा’ के संदेश के साथ निकली यात्रा ने राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता की भावना को सामने रखा।
राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश
आयोजकों का कहना रहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
तिरंगा यात्रा में स्कूली बच्चों और कार्यकर्ताओं की सहभागिता ने यह संदेश भी दिया कि राष्ट्रप्रेम किसी एक वर्ग या आयु तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
संपादकीय टिप्पणी
तिरंगा हाथ में हो तो जिम्मेदारी भी साथ होनी चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज देश के गौरव और एकता का प्रतीक है। मोहाना चौक से निकली इस यात्रा में बच्चों की सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। ऐसे कार्यक्रम तभी सार्थक माने जाएंगे, जब तिरंगे के प्रति सम्मान और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी लोगों के व्यवहार में दिखाई दे।
जय हिंद! 🇮🇳
वंदे मातरम्! 🇮🇳
इन्द्री ग्रांट पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत, जांच के आदेश के बाद भी रिपोर्ट का इंतजार

14 बिंदुओं पर शिकायत के बाद डीएम ने जांच के दिए निर्देश, जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के अनुस्मारक के बावजूद जांच आख्या लंबित

सिद्धार्थनगर/इटवा।
विकास खंड इटवा की ग्राम पंचायत इन्द्री ग्रांट में वर्ष 2021 से 2026 के बीच हुए विकास कार्यों और सरकारी धन के खर्च को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। ग्राम पंचायत निवासी भोला मौर्य पुत्र घनश्याम मौर्य ने करीब करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए 14 बिंदुओं पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायत के साथ साक्ष्य और नोटरी शपथ-पत्र भी उपलब्ध कराया गया है।

मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार शिकायत पर प्रशासनिक स्तर से जांच की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डीएम ने जांच के लिए अधिकारी किया नामित
उपलब्ध सरकारी दस्तावेज के अनुसार जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर के कार्यालय से 22 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञाप संख्या 1272/7-पं0/शिका0/2026-27 के माध्यम से शिकायत में उल्लिखित तथ्यों की जांच के लिए जिला कृषि अधिकारी, सिद्धार्थनगर को जांच अधिकारी नामित किया गया।
पत्र में तकनीकी सहयोग के लिए अवर अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, इटवा को भी नामित करते हुए मामले की जांच कर स्पष्ट जांच आख्या शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
यानी शिकायत पर प्रशासन ने जांच के निर्देश तो जारी कर दिए, लेकिन अब मामला जांच रिपोर्ट के इंतजार में है।
अनुस्मारक के बाद भी नहीं आई जांच आख्या
मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र भी सामने आया है। 7 अगस्त 2026 के पत्र में पूर्व में जिलाधिकारी कार्यालय से जारी निर्देश का हवाला देते हुए कहा गया है कि ग्राम पंचायत इन्द्री ग्रांट की जांच कर स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जांच आख्या अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि इस संबंध में 6 अगस्त 2026 को अनुस्मारक जारी कर जिला कृषि अधिकारी से जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।
ऐसे में अब सवाल यह है कि जांच के लिए आदेश जारी होने और अनुस्मारक भेजे जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट आखिर किस स्तर पर लंबित है?
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता भोला मौर्य का आरोप है कि ग्राम पंचायत में वर्ष 2021 से 2026 के बीच सरकारी धन से कराए गए विभिन्न कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने संबंधित ग्राम प्रधान, सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अभी जांच रिपोर्ट से साबित होना बाकी है। उपलब्ध दस्तावेजों में प्रशासन ने भी फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया है, बल्कि शिकायत में लगाए गए तथ्यों की जांच के निर्देश दिए हैं।
शिकायतकर्ता ने सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
भोला मौर्य का कहना है कि वह वर्तमान में मुंबई में रहते हैं और उन्हें जांच के लिए गांव आने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ता ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताते हुए कहा है कि स्थानीय स्तर पर उन्हें खतरा महसूस होता है।
उनका आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति को आधार बनाकर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि FT News Digital द्वारा नहीं की गई है।
शिकायतकर्ता की मांग है कि उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध सरकारी अभिलेखों, भुगतान विवरण और विकास कार्यों की मौके पर जांच कर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की जाए।
दोष साबित हुआ तो कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो नियमानुसार सरकारी धन की रिकवरी और दोषियों के खिलाफ एफआईआर समेत वैधानिक कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी जांच रिपोर्ट है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है।
अब प्रशासन से बड़ा सवाल
जब जिलाधिकारी कार्यालय से जांच के निर्देश जारी हो चुके हैं और जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय को जांच आख्या के लिए अनुस्मारक भी जारी करना पड़ा है, तो इन्द्री ग्रांट पंचायत की जांच रिपोर्ट कब तक सामने आएगी?
जनता की निगाह अब जांच की निष्पक्षता और उसके नतीजे पर है। आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति भी साफ होनी चाहिए।
स्थान: ग्राम पंचायत इन्द्री ग्रांट, विकास खंड इटवा, सिद्धार्थनगर
👤 शिकायतकर्ता: भोला मौर्य पुत्र घनश्याम मौर्य
📋 शिकायत: 14 बिंदुओं पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
📅 शिकायत: 13 जून 2026
🏛️ डीएम आदेश: 22 जुलाई 2026
🔎 जांच अधिकारी: जिला कृषि अधिकारी, सिद्धार्थनगर
🛠️ तकनीकी सहयोग: अवर अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, इटवा
📨 अनुस्मारक: 6 अगस्त 2026
📄 स्थिति: उपलब्ध पत्रों के अनुसार जांच आख्या अभी प्राप्त नहीं
सारांश
इटवा की ग्राम पंचायत इन्द्री ग्रांट में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर 14 बिंदुओं पर शिकायत की गई। शिकायत के बाद जिलाधिकारी कार्यालय ने जिला कृषि अधिकारी को जांच अधिकारी नामित करते हुए तकनीकी सहयोग के लिए अवर अभियंता को निर्देशित किया। बाद में जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय ने जांच आख्या उपलब्ध कराने के लिए अनुस्मारक जारी किया। इसके बावजूद उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार जांच रिपोर्ट अभी लंबित है। अब जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं।
कानूनी रूप से सुरक्षित संपादकीय टिप्पणी
“यह रिपोर्ट उपलब्ध शिकायत एवं सरकारी पत्राचार पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों को सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच रिपोर्ट के बाद ही संभव होगा। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी खबर में उचित स्थान दिया जाएगा।”
रिपोर्ट: FT News Digital | सिद्धार्थनगर
तमिलनाडु में सड़क हादसे में महराजगंज के 32 वर्षीय युवक की मौत, गांव में पसरा मातम
परिवार की खुशहाली के लिए घर से दूर कर रहे थे मेहनत-मजदूरी, हादसे की खबर पहुंचते ही परिजनों में मचा कोहराम
महराजगंज।
परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर तमिलनाडु में मेहनत-मजदूरी कर रहे महराजगंज के एक 32 वर्षीय युवक की सड़क हादसे में मौत हो गई। घटना की सूचना जब उनके पैतृक गांव पहुंची तो परिवार सहित पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मिली जानकारी के अनुसार, कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम सभा बड़हरा, टोला सेमरहना निवासी अभिमन्यु मौर्य (32) तमिलनाडु में रहकर काम करते थे। वह परिवार के भरण-पोषण और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए घर से दूर रहकर मेहनत कर रहे थे। इसी दौरान सड़क हादसे में उनकी जान चली गई।
हादसे की खबर से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अभिमन्यु की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी ज्ञांति मौर्या का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं उनके दो छोटे बच्चे अभय मौर्य और रुद्राश मौर्य भी पिता की मौत से गहरे सदमे में हैं।
परिवार के लिए अभिमन्यु की असमय मौत बड़ा झटका बनकर सामने आई है। जिस व्यक्ति के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारियां थीं, उसके अचानक चले जाने से परिजनों के सामने भविष्य की चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।
गांव में भी शोक की लहर
घटना की जानकारी गांव में पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। ग्रामीणों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने की बात कही।
अभिमन्यु की असमय मौत से गांव में मातम का माहौल है। परिवार और ग्रामीण अब उनके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
रिपोर्ट: आशुतोष कुमार मौर्य
FT News | महराजगंज
नीचे आपकी FT News Digital / न्यूज़ पोर्टल के अखबारनुमा अंदाज में तैयार कॉपी है:

महरथा गांव में गरिमामय माहौल में आयोजित हुआ कार्यक्रम, वक्ताओं ने संघर्ष और सामाजिक न्याय के लिए उनके योगदान को किया याद
सिद्धार्थनगर/शोहरतगढ़।
शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के निषाद बाहुल्य गांव महरथा स्थित बंधे पर सोमवार को पूर्व सांसद फूलन देवी की जयंती कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान महिलाओं और पुरुषों को फूलन देवी के चित्र भी वितरित किए गए। वक्ताओं ने उनके जीवन से जुड़े संघर्षों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा करते हुए उनके विचारों को याद किया।
संघर्ष और सामाजिक न्याय को लेकर हुई चर्चा
कार्यक्रम के संयोजक एवं समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा ‘मशाल’ ने कहा कि फूलन देवी का जीवन महिलाओं और वंचित वर्गों के संघर्ष से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कहानी के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं से समाज को अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की ओर से प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर फूलन देवी की जयंती मनाई जा रही है। कार्यक्रम में उनके राजनीतिक जीवन और लोकसभा सांसद के रूप में निभाई गई भूमिका का भी उल्लेख किया गया।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम के आयोजन में शिव रतन निषाद और संतोष निषाद की भूमिका रही। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव कमरुज्जमा, जोन प्रभारी राकेश दूबे, छात्रसभा के राष्ट्रीय सचिव अजय चौरसिया, प्रदेश सचिव मंजूर खान सहित महिबुल्ला, राजू निषाद, मदन निषाद, राम रतन निषाद, राजेश निषाद, श्यामू निषाद, महेश निषाद, राजेन्द्र निषाद और रामविलास निषाद समेत अन्य कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान फूलन देवी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके जीवन और संघर्ष को याद किया गया। आयोजन शांतिपूर्ण एवं गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ।
नोट: यह समाचार उपलब्ध कार्यक्रम संबंधी जानकारी के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया है। इसमें किसी व्यक्ति के संबंध में कोई आपत्तिजनक या अप्रमाणित आरोप नहीं लगाया गया है।
सिद्धार्थनगर में ‘युवा संवाद’ से गूंजा राष्ट्र निर्माण का संदेश

संघ के शताब्दी वर्ष पर जुटे युवा, अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्तरंजन ने कहा—युवा शक्ति देश के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी
सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सिद्धार्थनगर में ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं, स्वयंसेवकों और मातृशक्ति ने सहभागिता की। संवाद के दौरान राष्ट्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन, सेवा और भारतीय संस्कृति जैसे विषयों पर युवाओं से संवाद किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्तरंजन उपस्थित रहे। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश की युवा शक्ति भारत के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं को राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता से ही मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
| युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर
युवा संवाद में युवाओं से भारतीय संस्कृति, परंपराओं और देश के इतिहास को समझने का आह्वान किया गया। वक्ता ने युवाओं के जीवन में अनुशासन, सेवा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों को महत्वपूर्ण बताते हुए इन्हें व्यवहार में उतारने की बात कही।
संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और संपर्क को व्यापक बनाने पर भी जोर दिया गया।
| सवाल-जवाब में सामने आई युवाओं की जिज्ञासा
कार्यक्रम केवल संबोधन तक सीमित नहीं रहा। ‘युवा संवाद’ के दौरान उपस्थित युवाओं ने राष्ट्र और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे और सवाल किए। मुख्य वक्ता की ओर से युवाओं के प्रश्नों पर संवाद करते हुए उन्हें समाजहित में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित किया गया।
बड़ी संख्या में युवाओं की रही सहभागिता
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभागार में युवाओं की मौजूदगी से कार्यक्रम में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रत्नाकर पाण्डेय ने की। संचालन जिला सह कार्यवाह मनोज ने किया, जबकि मंच पर विभाग संघचालक रामचंद्र चौधरी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के संयोजक जिला विद्यार्थी कार्य प्रमुख सौरभ त्रिपाठी रहे। कार्यक्रम की प्रस्तावना अभय सिंह ने रखी।
| शताब्दी वर्ष में संवाद पर फोकस
कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने और उन्हें सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार, युवा संवाद का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी भूमिका को समझने तथा सकारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा।
मंच से दिया सेवा और अनुशासन का संदेश
मुख्य वक्ता ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति समझ विकसित करने के साथ सामाजिक जीवन में सेवा और अनुशासन को महत्व देने का आह्वान किया।
उन्होंने युवाओं को देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित होने और वर्तमान समय में समाज के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने की बात कही।
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और अन्य प्रतिभागियों ने भी संवाद में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
कार्यक्रम में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक प्रमुख डॉ. अवधेश, विभाग प्रचारक राजीव नयन, सह विभाग प्रचारक अजीत, जिला प्रचारक राघवेंद्र, नगर प्रचारक सौरभ, जिला कार्यवाह शिवेंद्र, सह विभाग कार्यवाह हरिश्चन्द्र, सह जिला कार्यवाह अविनाश, मातृशक्ति प्रमुख सीमा मिश्रा, राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति की विभाग कार्यवाहिका उमा सिंह सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा विकास पाण्डेय, नगर कार्यवाह अभय त्रिपाठी, धनञ्जय रस्तोगी, अभिषेक त्रिपाठी, डॉ. मयंक कुशवाहा, आनंद शिवा पाण्डेय, पंकज सिंह, विपुल सिंह, मनीष राय, प्रदीप दुबे, वाचस्पति मिश्र, शशिकांत द्विवेदी, प्रवीण मिश्रा, राम प्रकाश त्रिपाठी, विवेक श्रीवास्तव, सुरेश रैना, अभिषेक पाण्डेय, रणजीत चौधरी, अमित श्रीवास्तव, सत्यम द्विवेदी, सुरेश गुप्ता, धीरेन्द्र, सत्यम शुक्ला, विश्वजीत पाण्डेय, महेश्वर पाण्डेय और सूरज जायसवाल समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
सारांश
सिद्धार्थनगर में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में युवाओं को राष्ट्र निर्माण, सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। मुख्य वक्ता स्वान्तरंजन ने युवाओं को देश के भविष्य की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, स्वयंसेवक और मातृशक्ति शामिल हुए।
छोटी दमदार हेडिंग
युवा संवाद में गूंजा राष्ट्र निर्माण का संदेश
English Heading
#Siddharthnagar #YuvaSamvad #RSS #YouthDialogue #SiddharthnagarNews #UPNews
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सिद्धार्थनगर में आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद वक्ता एवं सभागार में उपस्थित प्रतिभागी।
सिद्धार्थनगर की ‘रामकटोरी’ को मिलेगी नई उड़ान, जिले की मिठास को ब्रांड बनाने में जुटे स्थानीय कारोबारी

ODOC में चयन के बाद बढ़ा उत्साह, युवा कंटेंट क्रिएटर्स ने संभाली डिजिटल प्रचार की कमान
सिद्धार्थनगर। काला नमक चावल के बाद अब सिद्धार्थनगर की पारंपरिक मिठाई ‘रामकटोरी’ जिले की नई पहचान बनने की राह पर है। एक जिला, एक उत्पाद (ODOC) योजना में रामकटोरी को स्थान मिलने के बाद स्थानीय मिष्ठान कारोबारियों में उत्साह बढ़ा है। इसी कड़ी में स्थानीय व्यवसायी कृष्णा कुमार गुप्ता की ओर से रामकटोरी को जिले की सीमाओं से बाहर प्रदेश और देश तक पहुंचाने की मुहिम शुरू की गई है।
इस पहल को डिजिटल मंच से गति देने के लिए रविवार, 9 अगस्त को सिद्धार्थनगर में क्रिएटर मीटअप आयोजित किया गया, जिसमें जिले के साथ-साथ आसपास के जनपदों से आए युवा कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का फोकस साफ था—स्थानीय मिठाई को स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय उसकी कहानी, स्वाद और पहचान को सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना।
लीड | परंपरा से ब्रांड तक का सफर
सिद्धार्थनगर की पहचान लंबे समय से काला नमक चावल से जुड़ी रही है। अब रामकटोरी को भी जिले की पहचान के रूप में स्थापित करने की कोशिश शुरू हुई है। ODOC में चयन के बाद स्थानीय कारोबारियों ने इसे अवसर के रूप में लिया है।
कृष्णा स्वीट्स से जुड़े कृष्णा कुमार गुप्ता के अनुसार, उनका प्रतिष्ठान लंबे समय से रामकटोरी तैयार कर रहा है और अब इसे बड़े स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इनसेट | 40 साल पुराना कारोबार, अब नई सोच
आयोजकों के मुताबिक कृष्णा कुमार गुप्ता करीब चार दशक से मिष्ठान कारोबार से जुड़े हैं। उनका कहना है कि रामकटोरी को सिर्फ एक मिठाई के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की स्थानीय पहचान के रूप में लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।
इसी उद्देश्य से युवा डिजिटल क्रिएटर्स को कार्यक्रम में जोड़ा गया, ताकि स्थानीय उत्पाद की कहानी सोशल मीडिया के माध्यम से दूर-दराज के लोगों तक पहुंच सके।
क्रिएटर मीटअप में जुटे आसपास के जिलों के युवा
कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर के अलावा महाराजगंज, बलरामपुर, गोरखपुर और संत कबीर नगर समेत आसपास के जिलों से करीब दो दर्जन कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के शामिल होने की जानकारी दी गई।
क्रिएटर्स को रामकटोरी के इतिहास, इसकी विशेषताओं और तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद लाइव सेटअप के माध्यम से देशी घी से तैयार रामकटोरी का स्वाद भी चखाया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मिठाई खिलाना नहीं, बल्कि क्रिएटर्स को उत्पाद की पूरी कहानी से जोड़ना था, ताकि वे इसे अपनी डिजिटल सामग्री के माध्यम से लोगों तक पहुंचा सकें।
इनबॉक्स | रामकटोरी के कितने फ्लेवर?
आयोजक कृष्णा कुमार की ओर से दावा किया गया कि उनके प्रतिष्ठान पर देशी घी से तैयार रामकटोरी करीब 10 अलग-अलग फ्लेवर में उपलब्ध है।
उनका कहना है कि अलग-अलग स्वाद और उम्र के लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए इसके विभिन्न फ्लेवर तैयार किए गए हैं।
महिला क्रिएटर्स की भी रही भागीदारी
कार्यक्रम में महिला कंटेंट क्रिएटर्स की भी अच्छी भागीदारी रही। क्रिएटर्स ने स्थानीय उत्पादों को डिजिटल माध्यम से बढ़ावा देने की पहल को जिले के युवाओं के लिए उपयोगी बताया।
उनका कहना था कि किसी क्षेत्र की पहचान केवल बड़े उद्योगों से नहीं बनती, बल्कि स्थानीय उत्पाद, स्थानीय हुनर और उसकी कहानी भी उस क्षेत्र को अलग पहचान दिला सकती है।
कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में गोरखपुर से इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर डॉ. सैफ असलम और भोजपुरी गायिका आस्था त्रिपाठी के शामिल होने की जानकारी दी गई।
इसके अलावा समाजसेवी, व्यापारी और अन्य स्थानीय लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज के प्रबंधक राजेश चंद्र शर्मा, टीम यशोभूमि के प्रबंधक संतोष श्रीवास्तव, व्यवसायी राजन कसौधन, रवि अग्रहरि, शुभम पैराडाइस के शुभम श्रीवास्तव और उज्जवल श्रीवास्तव, जावेद अख्तर, जेन कंप्यूटर के वामिक सर तथा श्री कृष्णा आयुर्वेदिक चिकित्सालय के वैद्य डॉ. सौरभ गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर शामिल कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया गया।
स्थानीय मिठाई से जिले की पहचान तक की कोशिश
रामकटोरी को ODOC में स्थान मिलने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इसे केवल सरकारी सूची तक सीमित न रहने देने की है। इसके लिए स्थानीय कारोबारियों के साथ-साथ डिजिटल क्रिएटर्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि रामकटोरी की पारंपरिक पहचान, स्वाद, निर्माण प्रक्रिया और स्थानीय जुड़ाव को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया जाता है तो यह सिद्धार्थनगर के लिए एक नए स्थानीय ब्रांड की संभावनाएं पैदा कर सकती है।
आयोजकों की उम्मीद है कि जिस तरह काला नमक चावल ने सिद्धार्थनगर को अलग पहचान दिलाई, उसी तरह रामकटोरी भी जिले की ‘मिठास’ को प्रदेश और देश तक पहुंचाने में कामयाब होगी।
सारांश | खबर की 5 बड़ी बातें
• सिद्धार्थनगर की पारंपरिक मिठाई रामकटोरी का ODOC में चयन।
• स्थानीय कारोबारियों में बढ़ा उत्साह।
• डिजिटल प्रचार के लिए क्रिएटर मीटअप आयोजित।
• आसपास के जिलों से करीब दो दर्जन कंटेंट क्रिएटर्स की भागीदारी।
• रामकटोरी को सिद्धार्थनगर की नई पहचान और बड़े ब्रांड के रूप में स्थापित करने की कोशिश।
फैक्ट बॉक्स | ODOC क्या है?
एक जिला, एक उत्पाद (One District One Product) पहल का उद्देश्य किसी क्षेत्र के विशिष्ट स्थानीय उत्पादों को पहचान, बाजार और व्यापक पहुंच दिलाने के लिए प्रोत्साहित करना है। सिद्धार्थनगर में काला नमक चावल के बाद रामकटोरी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर इसी तरह की पहचान बनाने की कोशिश सामने आई है।
फोटो कैप्शन
सिद्धार्थनगर में आयोजित क्रिएटर मीटअप में स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स एवं अतिथियों के साथ आयोजक।
छोटी दमदार हेडिंग
रामकटोरी बनेगी सिद्धार्थनगर की नई पहचान!
खौलती दाल बनी हादसे की वजह, मिड-डे मील के दौरान 6 छात्र झुलसे LEAD सिद्धार्थनगर जनपद के बर्डपुर नंबर-14 क्षेत्र स्थित कंपोजिट विद्यालय लमतिहवा
सिद्धार्थनगर जनपद के बर्डपुर नंबर-14 क्षेत्र स्थित कंपोजिट विद्यालय लमतिहवा में गुरुवार को मिड-डे मील वितरण के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। रसोइया के हाथ से खौलती दाल का भगौना फिसलकर गिर गया, जिससे छह छात्र झुलस गए। पांच बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि एक बच्चे का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। घटना के बाद शिक्षा विभाग ने मामले का संज्ञान लिया है।
खौलती दाल का भगौना गिरा, छह मासूम झुलसे
मिड-डे मील वितरण के दौरान हुआ हादसा, एक बच्चे का उपचार जारी
सिद्धार्थनगर। बर्डपुर नंबर-14 क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय लमतिहवा में गुरुवार को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) वितरण के दौरान एक दर्दनाक दुर्घटना हो गई। विद्यालय में बच्चों को भोजन परोसने के लिए रसोइया खौलती हुई दाल का भगौना लेकर जा रही थी। इसी दौरान उसका हाथ फिसल गया और भगौना नीचे गिर पड़ा। खौलती दाल की चपेट में आने से छह छात्र झुलस गए।
घटना के बाद विद्यालय में अफरा-तफरी मच गई। विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने तत्काल घायल बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया।
चिकित्सकों के अनुसार पांच बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि एक गंभीर रूप से झुलसे बच्चे का उपचार जिला अस्पताल में जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र कुमार जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायल बच्चों का हालचाल जाना, चिकित्सकों से उपचार की जानकारी ली तथा आवश्यक विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा दाल का भगौना हाथ से फिसल जाने के कारण हुआ। मामले में संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक जांच एवं औपचारिक कार्रवाई की जा रही है।
घटना: मिड-डे मील वितरण के दौरान हादसा
स्थान: कंपोजिट विद्यालय लमतिहवा, बर्डपुर नं.-14, सिद्धार्थनगर
घायल छात्र: 6
प्राथमिक उपचार के बाद घर भेजे गए: 5
गंभीर घायल: 1
अस्पताल: जिला अस्पताल, सिद्धार्थनगर
प्रशासनिक कार्रवाई: बीएसए ने अस्पताल पहुंचकर लिया जायजा
कंपोजिट विद्यालय लमतिहवा में मिड-डे मील परोसते समय खौलती दाल का भगौना गिरने से छह बच्चे झुलस गए। पांच बच्चों को उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि एक बच्चे का इलाज जारी है। शिक्षा विभाग ने घटना का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
टिप्पणी
विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि भोजन वितरण के दौरान सुरक्षा मानकों और व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा आवश्यक है। घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक होगा।
दूधवानिया खुर्द में जाम नालियां, गलियों में गंदगी; ग्रामीणों ने उठाए सफाई व्यवस्था पर सवाल
बारिश ने बढ़ाई परेशानी, नालियों में जमा गंदा पानी और कूड़ा; ग्रामीणों का दावा—कई महीनों से नियमित सफाई नहीं, जिम्मेदारों से कार्रवाई की मांग
बढ़नी/सिद्धार्थनगर। स्वच्छता और गांवों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं के सरकारी प्रयासों के बीच विकास खंड बढ़नी की ग्राम पंचायत दूधवानिया खुर्द से सामने आई तस्वीरों ने स्थानीय सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के कुछ हिस्सों में नालियों में गंदा पानी ठहरा दिखाई दे रहा है। कहीं प्लास्टिक और कूड़ा जमा है तो कहीं नालियों के किनारे उगी घास जल निकासी की समस्या को और गंभीर बनाती नजर आ रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण बरसात में परेशानी बढ़ गई है। जल निकासी बाधित होने से कई स्थानों पर गंदा पानी जमा रहता है और दुर्गंध तथा मच्छरों से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तस्वीरों में दिखी जमीनी स्थिति
स्थानीय स्तर से उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में गांव के अलग-अलग स्थानों पर नालियों में गंदा पानी, प्लास्टिक और अन्य कचरा जमा दिखाई दे रहा है। कुछ जगह नालियां घास और झाड़ियों से घिरी हुई हैं।
हालांकि इन तस्वीरों के आधार पर यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि गांव की पूरी सफाई व्यवस्था कितने समय से ऐसी है या इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है। इन पहलुओं की पुष्टि संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत के अभिलेखों तथा स्थलीय जांच से होनी चाहिए।
ग्रामीण बोले—कई महीनों से बनी है समस्या
ग्रामीणों का दावा है कि नालियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि नियमित सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है।
ग्रामीण बबलू गुप्ता, अनिल सैनी, पूजी यादव, जटा शंकर वर्मा, विनय सैनी, सुकदेव गौतम और लालू साहनी ने प्रशासन से समस्या का संज्ञान लेकर सफाई कराने की मांग की है।
गंदा पानी और मच्छर बने चिंता का कारण
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों में गंदा पानी जमा रहने से दुर्गंध और मच्छरों की समस्या बढ़ रही है। ग्रामीणों ने इससे बीमारी फैलने की आशंका भी जताई है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि डेंगू, मलेरिया या किसी अन्य बीमारी के वास्तविक प्रसार की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से ही हो सकती है। ग्रामीणों द्वारा फिलहाल बीमारी फैलने की आशंका व्यक्त की गई है।
सवाल सिर्फ गंदगी का नहीं, जवाबदेही का भी
दूधवानिया खुर्द की तस्वीरों से सामने आ रही समस्या केवल गंदगी तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि गांव में नालियों की नियमित सफाई का निर्धारित रोस्टर क्या है? सफाई कर्मचारी कितनी नियमितता से गांव पहुंच रहे हैं? अंतिम बार नालियों की व्यापक सफाई कब कराई गई? और जल निकासी की स्थायी समस्या दूर करने के लिए ग्राम पंचायत के स्तर पर क्या कदम उठाए गए?
इन सवालों का जवाब ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सरकारी धन पर आरोप, जांच के बिना निष्कर्ष नहीं
कुछ ग्रामीणों ने गांव के विकास और सफाई के लिए मिलने वाले सरकारी धन के समुचित उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि सिर्फ नालियों की मौजूदा स्थिति के आधार पर सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए स्वीकृत बजट, भुगतान, कार्यों के अभिलेख और स्थलीय सत्यापन की आवश्यकता होगी।
यदि ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर प्रशासन जांच कराता है तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
विशेष सफाई अभियान चलाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में विशेष सफाई अभियान चलाने, जाम नालियों की सफाई कराने और जहां आवश्यक हो वहां क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि यदि सफाई व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सारांश
स्थान: ग्राम पंचायत दूधवानिया खुर्द, विकास खंड बढ़नी
समस्या: नालियों में गंदा पानी एवं कूड़ा जमा होने की शिकायत
ग्रामीणों का दावा: लंबे समय से नियमित सफाई नहीं
तस्वीरों में: नालियों में पानी, कचरा और कई स्थानों पर घास-झाड़ियां
ग्रामीणों की चिंता: दुर्गंध, मच्छर और संक्रमण का संभावित खतरा
मांग: विशेष सफाई अभियान एवं जल निकासी की व्यवस्था
अन्य आरोप: विकास/सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
स्थिति: संबंधित ग्राम पंचायत/अधिकारियों का पक्ष लिया जाना शेष
तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं, जवाब जिम्मेदारों को देना होगा
स्वच्छता किसी गांव की केवल सुंदरता का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और नागरिक सुविधा से जुड़ा बुनियादी मुद्दा है। दूधवानिया खुर्द से सामने आई तस्वीरों में यदि नालियों में जमा पानी और कचरे की स्थिति नियमित रूप से बनी हुई है, तो संबंधित जिम्मेदारों को इसका समाधान प्राथमिकता से करना चाहिए।
साथ ही आरोपों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। बिना अभिलेखीय जांच किसी पर सरकारी धन के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार का आरोप स्थापित नहीं किया जा सकता। प्रशासन को ग्रामीणों की शिकायत का सत्यापन कराकर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए और यदि कहीं वास्तविक लापरवाही मिले तो नियमानुसार जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
नोट: खबर स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी एवं उपलब्ध तस्वीरों पर आधारित है। संबंधित ग्राम पंचायत/अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया की बड़ी खेप पकड़ी, 40 बोरी खाद और ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद
अलीगढ़वा बॉर्डर पर SSB-पुलिस की संयुक्त कार्रवाई; नेपाल की ओर जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोका, एक व्यक्ति पकड़ा गया, दूसरा मौके से भागा—SSB
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया खाद की कथित अवैध आवाजाही के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई की है। 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) की सीमा चौकी अलीगढ़वा और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त विशेष गश्ती के दौरान 40 बोरी यूरिया खाद और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। एसएसबी के मुताबिक मौके से एक व्यक्ति को पकड़ा गया, जबकि दूसरा व्यक्ति ड्यूटी पार्टी को देखकर भाग गया।
एसएसबी द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह कार्रवाई 2 अगस्त 2026 को प्राप्त आसूचना के आधार पर की गई। एसएसबी और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम सीमा स्तंभ संख्या 549 के समीप बड़ा ठाकुरपुर इलाके में विशेष गश्ती ड्यूटी पर तैनात थी।
इसी दौरान सामान लदी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली नेपाल की तरफ जाती दिखाई दी। एसएसबी का दावा है कि ट्रैक्टर पर दो व्यक्ति सवार थे। संयुक्त टीम को देखकर उनमें से एक व्यक्ति मौके से भाग गया, जबकि दूसरे को टीम ने पकड़ लिया।
| ट्रैक्टर-ट्रॉली में मिलीं 40 बोरी यूरिया
एसएसबी के मुताबिक ट्रैक्टर-ट्रॉली के पास पहुंचकर जांच की गई तो उसमें 40 बोरी यूरिया खाद लदी मिली। पकड़े गए व्यक्ति से खाद के संबंध में पूछताछ की गई। एसएसबी का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर यूरिया खाद और ट्रैक्टर-ट्रॉली को बरामद कर लिया गया।
क्या-क्या हुआ बरामद?
कार्रवाई: SSB और यूपी पुलिस की संयुक्त विशेष गश्त
स्थान: सीमा स्तंभ संख्या 549 के समीप बड़ा ठाकुरपुर
बरामदगी: 40 बोरी यूरिया खाद
वाहन: एक ट्रैक्टर-ट्रॉली
पकड़ा गया: एक व्यक्ति
अन्य व्यक्ति: SSB के अनुसार मौके से भागा
अगली कार्रवाई: बरामद सामान, वाहन और पकड़ा गया व्यक्ति कपिलवस्तु पुलिस को सुपुर्द
नेपाल की तरफ जाने की कोशिश का दावा
एसएसबी की ओर से जारी विवरण में दावा किया गया है कि यूरिया खाद से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली नेपाल की तरफ जाने की कोशिश कर रही थी। हालांकि खाद कहां से लाई गई, उसका वास्तविक गंतव्य क्या था और उसके परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज मौजूद थे या नहीं—इन तथ्यों की अंतिम स्थिति संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान बताई
एसएसबी द्वारा जारी प्रेस सूचना के मुताबिक पकड़े गए व्यक्ति ने पूछताछ में अपना नाम तबारक अली पुत्र स्व. मुमताज अली, उम्र करीब 37 वर्ष, निवासी ग्राम महादेव कुर्मी, बर्डपुर, थाना कपिलवस्तु, जनपद सिद्धार्थनगर बताया।
यह उल्लेख जरूरी है कि पकड़े जाने या किसी वस्तु की बरामदगी मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाता। मामले में उसकी भूमिका और कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण जांच एवं सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
बॉर्डर पर यूरिया की आवाजाही ने खड़े किए सवाल
भारत-नेपाल की खुली सीमा से सटे इलाकों में खाद की आवाजाही पर सुरक्षा एजेंसियों की यह कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है। आखिर 40 बोरी यूरिया कहां से लाई गई थी? इसे कहां पहुंचाया जाना था? क्या इसके परिवहन से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध थे? और एसएसबी के मुताबिक मौके से भागने वाला दूसरा व्यक्ति कौन था?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
एसएसबी के अनुसार बरामद 40 बोरी यूरिया खाद, ट्रैक्टर-ट्रॉली और पकड़े गए व्यक्ति को थाना कपिलवस्तु पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। आगे की आवश्यक विधिक कार्रवाई संबंधित पुलिस द्वारा की जानी है।
SSB का दावा | सीमा पर लगातार निगरानी
43वीं वाहिनी एसएसबी का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। बल के मुताबिक तस्करी के सामान, मानव तस्करी, नशीले पदार्थ/दवाओं की अवैध आवाजाही, अवैध मुद्रा और वन्यजीव से जुड़े मामलों सहित अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है।
जांच बताएगी 40 बोरी यूरिया की पूरी कहानी
सीमावर्ती क्षेत्र में किसानों के लिए महत्वपूर्ण यूरिया खाद की इतनी मात्रा नेपाल सीमा की ओर ले जाए जाने संबंधी एसएसबी की सूचना निश्चित रूप से जांच का विषय है। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि खाद का स्रोत क्या था, इसे कहां ले जाया जा रहा था और परिवहन के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
मौके से एक व्यक्ति के भागने संबंधी एसएसबी के दावे की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। निष्पक्ष जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों से ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
सारांश
घटना: यूरिया खाद के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़े जाने का दावा
दिनांक: 02 अगस्त 2026
स्थान: बड़ा ठाकुरपुर, सीमा स्तंभ संख्या 549 के समीप
एजेंसी: 43वीं वाहिनी SSB एवं उत्तर प्रदेश पुलिस
बरामदगी: 40 बोरी यूरिया खाद और ट्रैक्टर-ट्रॉली
कार्रवाई: एक व्यक्ति पकड़ा गया
SSB का दावा: दूसरा व्यक्ति मौके से भागा
स्थिति: मामला कपिलवस्तु पुलिस को सुपुर्द, आगे की विधिक कार्रवाई अपेक्षित
चिल्हिया में रेलवे ट्रैक पर मिला अज्ञात युवक का शव, इलाके में सनसनी; शिनाख्त में जुटी पुलिस
स्टेशन मास्टर के मेमो पर पहुंची चिल्हिया पुलिस, करीब 30 वर्षीय युवक की अभी नहीं हो सकी पहचान; मौत की परिस्थितियां जांच का विषय
सिद्धार्थनगर/चिल्हिया। चिल्हिया थाना क्षेत्र में मंगलवार तड़के रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई। ग्राम गौहनिया के पास रेलवे ट्रैक पर मिले शव की उम्र करीब 30 वर्ष बताई जा रही है। सूचना मिलने के बाद चिल्हिया पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त कराने के प्रयास के साथ आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 04 अगस्त 2026 को रात करीब 2 बजे चिल्हिया रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर ने मेमो के माध्यम से स्थानीय थाना पुलिस को ग्राम गौहनिया के पास रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात युवक का शव मिलने की सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान तत्काल नहीं हो सकी। शव को पुलिस अभिरक्षा में लेकर उसकी शिनाख्त कराने तथा मामले में अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
शरीर पर अंडरवियर के अलावा नहीं मिले अन्य कपड़े
पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतक की उम्र करीब 30 वर्ष आंकी जा रही है। शव मिलने के समय युवक के शरीर पर अंडरवियर के अलावा अन्य कपड़े नहीं पाए गए। यह परिस्थिति जांच का विषय है। इसके आधार पर मौत के कारण या घटनाक्रम को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना फिलहाल उचित नहीं होगा।
रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंचा युवक?
इस घटना में सबसे बड़ा सवाल है कि अज्ञात युवक रेलवे ट्रैक तक कब और किन परिस्थितियों में पहुंचा। उसकी मौत किसी रेल दुर्घटना के कारण हुई अथवा इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति रही—इस संबंध में उपलब्ध प्रारंभिक सूचना में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
ऐसे में मौत को दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या या किसी अन्य कारण से जोड़ना जांच पूरी होने से पहले महज अटकल होगी। पुलिस की जांच और संबंधित विधिक प्रक्रिया के बाद ही मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
पहचान बनी पुलिस के सामने पहली चुनौती
मृतक की शिनाख्त इस मामले की अहम कड़ी है। पहचान होने के बाद उसके परिजनों से संपर्क, युवक की पृष्ठभूमि और घटना से पहले उसकी गतिविधियों के संबंध में जानकारी मिलने की संभावना है। पुलिस फिलहाल मृतक की पहचान कराने का प्रयास कर रही है।
| प्रत्यक्षदर्शियों के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं
घटनास्थल से जुड़े कुछ प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा मृतक के धर्म/समुदाय को लेकर दावा किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन उपलब्ध सूचना के आधार पर उसकी पहचान अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुई है। इसलिए FT News Digital मृतक की धार्मिक अथवा सामुदायिक पहचान को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहा है।
अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
अज्ञात युवक कौन था और कहां का रहने वाला था?
वह गौहनिया के पास रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंचा?
शरीर पर अन्य कपड़े क्यों नहीं थे?
उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई?
क्या घटना से पहले किसी ने युवक को आसपास देखा था?
शिनाख्त के बाद क्या सामने आएगा पूरा घटनाक्रम?
इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच, मृतक की शिनाख्त और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
सारांश
स्थान: ग्राम गौहनिया के पास रेलवे ट्रैक, थाना चिल्हिया क्षेत्र
तारीख: 04 अगस्त 2026
समय: लगभग 02:00 बजे रात्रि
मृतक: करीब 30 वर्षीय अज्ञात युवक
सूचना: चिल्हिया रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर द्वारा मेमो के माध्यम से पुलिस को
स्थिति: मृतक की शिनाख्त का प्रयास जारी
पुलिस कार्रवाई: शव को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई
मौत का कारण: अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं
थाईलैंड में सिद्धार्थनगर के खिलाड़ियों का परचम, एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीत बढ़ाया भारत का मान

बुद्ध की धरती के तीन होनहारों ने अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में दिखाया दम; समर वर्मा बने स्वर्ण विजेता, सात वर्षीय देवम पासवान और दिलीप कुमार पासवान ने जीते रजत पदक

सिद्धार्थनगर। जिस सिद्धार्थनगर की पहचान पूरी दुनिया में भगवान बुद्ध की धरती के रूप में होती है, उसी धरती के खिलाड़ियों ने अब विदेशी खेल मैदान पर अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी है। थाईलैंड के पटाया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में सिद्धार्थनगर के तीन खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल कर जिले के साथ उत्तर प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है।

हाथों में तिरंगा, गले में पदक और चेहरे पर जीत की मुस्कान लिए इन खिलाड़ियों की तस्वीरें सिद्धार्थनगर के लिए गौरव का क्षण बन गई हैं। खास बात यह है कि पदक जीतने वालों में महज सात वर्षीय देवम पासवान भी शामिल हैं, जिन्होंने इतनी कम उम्र में विदेशी धरती पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रजत पदक हासिल किया।
एक नजर में उपलब्धि
प्रतियोगिता: 9वीं हीरोज ताइक्वांडो अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026
स्थान: पटाया, थाईलैंड
आयोजन: 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026
समर वर्मा: 🥇 स्वर्ण पदक
देवम पासवान (7 वर्ष): 🥈 रजत पदक
दिलीप कुमार पासवान: 🥈 रजत पदक
🥇 समर वर्मा का स्वर्णिम प्रदर्शन, तिरंगे के साथ मनाया जीत का जश्न
प्रतियोगिता में समर वर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली यह कामयाबी न सिर्फ उनके खेल जीवन की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि सिद्धार्थनगर के लिए भी गर्व का विषय है।

गले में स्वर्ण पदक और पीछे फैला भारतीय तिरंगा—समर की यह तस्वीर उस मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी कह रही है, जिसने सिद्धार्थनगर के खिलाड़ी को थाईलैंड में विजेता बनाया।
सात साल के देवम का बड़ा कमाल
इस सफलता की सबसे प्रेरक कहानियों में सात वर्षीय देवम पासवान का नाम भी शामिल है।
जिस उम्र में अधिकांश बच्चे खेल-कूद की शुरुआती बारीकियां सीखते हैं, उस उम्र में देवम अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार देवम ने मेजबान थाईलैंड के खिलाड़ी को कड़ी चुनौती दी और रजत पदक अपने नाम किया।
छोटी सी उम्र… अंतरराष्ट्रीय मंच… सामने विदेशी प्रतिद्वंद्वी और कंधों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी—इन सबके बीच देवम का पदक तक पहुंचना उनकी प्रतिभा और हौसले को दर्शाता है।
नन्हे चैंपियन की बड़ी उड़ान
सिर्फ सात साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व और रजत पदक—देवम पासवान की उपलब्धि जिले के दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

दिलीप कुमार पासवान ने भी प्रतियोगिता में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिलीप कुमार पासवान ने पाकिस्तान के खिलाड़ी के खिलाफ मुकाबले में नॉकआउट जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद फाइनल मुकाबले में उनका सामना श्रीलंका के खिलाड़ी से हुआ।
कड़े संघर्ष के बाद दिलीप कुमार पासवान ने रजत पदक हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका यह प्रदर्शन सिद्धार्थनगर के खेल इतिहास में यादगार उपलब्धियों में शामिल होने वाला है।

37 देशों के खिलाड़ियों के बीच दिखाया दम
उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के पटाया में आयोजित प्रतियोगिता में 37 देशों के खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया।
ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर सिद्धार्थनगर के तीन खिलाड़ियों का पदक जीतना इस उपलब्धि को और खास बना देता है।
तीनों खिलाड़ियों ने मिलकर भारत के खाते में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जोड़े और विदेशी धरती पर सिद्धार्थनगर की खेल प्रतिभा की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
सिद्धार्थनगर का गौरव
एक स्वर्ण + दो रजत पदक
छोटे जिले के खिलाड़ियों की बड़ी अंतरराष्ट्रीय उड़ान।
थाईलैंड में तिरंगे के साथ चमका सिद्धार्थनगर का नाम।
तस्वीरें खुद बयां कर रहीं सफलता की कहानी
प्रतियोगिता से सामने आई तस्वीरों में भारतीय खिलाड़ी तिरंगे के साथ अपनी जीत का जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। कहीं खिलाड़ी पदक और प्रमाणपत्र के साथ खड़े हैं तो कहीं पूरी भारतीय टीम तिरंगा लेकर इस उपलब्धि को साझा कर रही है।
इन तस्वीरों में सिर्फ पदक नहीं हैं—इनमें वर्षों की तैयारी, अभ्यास, अनुशासन और देश के लिए खेलने का गर्व भी दिखाई देता है।

छोटे शहरों की प्रतिभा को मिले मंच तो दुनिया जीतने का है दम
सिद्धार्थनगर के इन खिलाड़ियों की उपलब्धि एक बड़ा संदेश भी देती है। प्रतिभा केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे जिलों और कस्बों में भी ऐसी प्रतिभाएं मौजूद हैं जिन्हें बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिलें तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
आज समर वर्मा, देवम पासवान और दिलीप कुमार पासवान की सफलता सिद्धार्थनगर के उन तमाम बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो खेल के मैदान से अपने भविष्य की नई कहानी लिखना चाहते हैं।
सारांश
थाईलैंड की धरती पर मिली यह सफलता केवल तीन पदकों की कहानी नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे सपनों की कहानी है।
समर का स्वर्ण, देवम और दिलीप के रजत पदक तथा खिलाड़ियों के हाथों में लहराता तिरंगा—यह दृश्य सिद्धार्थनगर के लिए लंबे समय तक गर्व का क्षण बना रहेगा।
बुद्ध की धरती के इन होनहारों ने संदेश दे दिया है—हौसला बड़ा हो, मेहनत लगातार हो और लक्ष्य देश का मान बढ़ाना हो, तो सिद्धार्थनगर से निकली प्रतिभा भी दुनिया के मंच पर अपनी चमक बिखेर सकती है।
प्रधानमंत्री को लेकर कथित आपत्तिजनक वीडियो पर सिद्धार्थनगर में बवाल, पुलिस तक पहुंची शिकायत; जांच के बाद खुलेगा वायरल सामग्री का सच
प्रधानमंत्री को लेकर कथित आपत्तिजनक वीडियो पर सिद्धार्थनगर में बवाल, पुलिस तक पहुंची शिकायत; जांच के बाद खुलेगा वायरल सामग्री का सच

त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के बिस्कोहर पुलिस चौकी इलाके से जुड़ा मामला, शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद ने पुलिस को दिया शिकायती पत्र; निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

सिद्धार्थनगर।
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक और हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित किए गए वीडियो का मामला सिद्धार्थनगर में पुलिस तक पहुंच गया है।
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र की बिस्कोहर पुलिस चौकी अंतर्गत क्षेत्र से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट पर कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में मोहम्मद सईद नामक व्यक्ति ने पुलिस को लिखित शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित तौर पर हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित करने वाला वीडियो प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत में अन्य कथित सोशल मीडिया सामग्री का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। FT News Digital कथित वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, उसके मूल स्रोत, उसे बनाने वाले व्यक्ति अथवा उसे पहली बार अपलोड करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
वीडियो वास्तव में AI तकनीक से बनाया गया है, डिजिटल रूप से एडिट किया गया है या किसी अन्य तरीके से तैयार किया गया है, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल, अब डिजिटल जांच से सामने आएगा सच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया वीडियो का मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।
वीडियो आखिर किसने बनाया?
इसे सबसे पहले किस सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया?
क्या वीडियो AI तकनीक से बनाया गया है या किसी वास्तविक वीडियो में डिजिटल छेड़छाड़ की गई है?
जिस व्यक्ति पर वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया जा रहा है, क्या संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट वास्तव में उसी व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है?
इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और आवश्यक डिजिटल परीक्षण के बाद ही सामने आ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद की ओर से पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो को लेकर आपत्ति जताई गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक एवं हिंसात्मक दृश्य वाला वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है।
शिकायत में इस तरह की सामग्री से अशांति पैदा होने की आशंका जताते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
फिलहाल यह शिकायतकर्ता का आरोप है। आरोपों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर होना बाकी है।
इनबॉक्स
वीडियो असली या AI, जांच का बड़ा सवाल
आज के दौर में AI और डिजिटल एडिटिंग तकनीक के जरिए वास्तविक दिखने वाले वीडियो तैयार करना संभव है।
यही कारण है कि केवल किसी वीडियो के वायरल होने को उसकी सत्यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
इस मामले में भी यह पता लगाना जरूरी होगा कि वायरल सामग्री का मूल स्रोत क्या है, वीडियो कब और कहां तैयार हुआ, क्या उसमें डिजिटल छेड़छाड़ की गई और उसे सोशल मीडिया पर सबसे पहले किसने प्रसारित किया।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ही इन सवालों का विश्वसनीय जवाब सामने आ सकेगा।
पुलिस ने जांच कर कार्रवाई की कही बात
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक त्रिलोकपुर थाना प्रभारी की ओर से मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि शिकायती पत्र में लगाए गए आरोप सिद्ध हो गए हैं।
पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही यह निर्धारित होगा कि किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं और आगे किस प्रकार की विधिक कार्रवाई आवश्यक है।
FT News Digital नहीं कर रहा कथित आपत्तिजनक वीडियो का पुनः प्रसारण
FT News Digital इस मामले में कथित आपत्तिजनक वीडियो को खबर के नाम पर दोबारा प्रसारित करने से बच रहा है।
खबर का आधार शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को दिया गया शिकायती पत्र, शिकायतकर्ता का उपलब्ध पक्ष और पुलिस की ओर से जांच कर कार्रवाई किए जाने की जानकारी है।
चैनल कथित वायरल वीडियो की सत्यता अथवा उसे बनाने और प्रसारित करने वाले व्यक्ति के संबंध में कोई स्वतंत्र दावा नहीं कर रहा है।
वायरल होना सबूत नहीं, जांच बताएगी कौन है जिम्मेदार
सोशल मीडिया की दुनिया में कोई सामग्री कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकती है, लेकिन वायरल होना किसी वीडियो के वास्तविक होने या किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
यदि जांच में आपत्तिजनक अथवा कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री जानबूझकर तैयार या प्रसारित किए जाने के साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई पुलिस और संबंधित एजेंसियों का विषय होगा।
दूसरी ओर यदि वीडियो के स्रोत या सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर किए गए दावे गलत पाए जाते हैं तो वह तथ्य भी जांच से ही स्पष्ट होगा।
इसीलिए इस मामले में अनुमान के बजाय डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण है।
टिप्पणी
सोशल मीडिया की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और सामग्री साझा करने की ताकत दी है, लेकिन इसके साथ कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी है।
किसी भी व्यक्ति, विशेषकर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को लेकर कथित हिंसात्मक या आपत्तिजनक सामग्री सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उतना ही जरूरी यह भी है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया ट्रायल के जरिए अपराधी घोषित न किया जाए।
सिद्धार्थनगर के इस मामले में पुलिस के सामने अब कथित वीडियो के मूल स्रोत, डिजिटल एडिटिंग या AI के संभावित इस्तेमाल और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की वास्तविकता की पड़ताल का सवाल है।
जांच पूरी होने के बाद ही वायरल वीडियो की असली कहानी सामने आ सकेगी।
सारांश
सिद्धार्थनगर के त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र की बिस्कोहर पुलिस चौकी इलाके से जुड़े सोशल मीडिया मामले को लेकर मोहम्मद सईद ने पुलिस को लिखित शिकायती पत्र दिया है।
शिकायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित कथित आपत्तिजनक और हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस ने जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।
फिलहाल वीडियो की प्रामाणिकता, उसके निर्माता, मूल अपलोडर, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट के वास्तविक संचालक अथवा AI तकनीक के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसलिए जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अब पुलिस और आवश्यक डिजिटल जांच से सामने आने वाले तथ्यों पर निगाह रहेगी।
सिद्धार्थनगर में स्कूल चोरी का पुलिस ने किया खुलासा, तीन गिरफ्तार; लैपटॉप-टैबलेट से लेकर माइक्रोस्कोप तक बरामद
कपिलवस्तु पुलिस का दावा- कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत से चोरी हुआ था सामान, ऑटो से नेपाल ले जाकर बेचने की थी कथित तैयारी; एक अन्य आरोपी की तलाश जारी

सिद्धार्थनगर, 3 अगस्त 2026।
सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु थाना क्षेत्र में सरकारी विद्यालय से हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। बच्चों की पढ़ाई और प्रयोगशाला से जुड़े लैपटॉप, टैबलेट, माइक्रोस्कोप, साइंस किट, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों की चोरी के मामले में कपिलवस्तु पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक चोरी का सामान जिस ऑटो रिक्शा से ले जाया जा रहा था, उसे भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी सामान को खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल ले जाकर बेचने की कथित तैयारी में थे। इसी दौरान पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ लिया, जबकि उनका एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, दो टैबलेट, इनवर्टर-बैटरी, दो माइक्रोस्कोप, प्रिंटर, डेस्कटॉप कंप्यूटर, साइंस किट और साउंड सिस्टम समेत बड़ी संख्या में सामान बरामद करने का दावा किया है।
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31 जुलाई की रात स्कूल का ताला टूटा, 3 अगस्त को पुलिस ने खोली कथित चोरी की परतें
पुलिस के अनुसार पूरी कहानी 31 जुलाई 2026 की रात से शुरू होती है। कपिलवस्तु थाना क्षेत्र के कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत के कमरे का ताला तोड़कर वहां रखे इलेक्ट्रॉनिक और शैक्षणिक उपकरण चोरी किए जाने की घटना सामने आई थी।
स्कूल से सामान गायब होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और थाना कपिलवस्तु में मुकदमा अपराध संख्या 62/2026 के तहत बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं और तीन दिन बाद 3 अगस्त को तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ चोरी के सामान की बरामदगी का दावा किया।
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स्कूल में आखिर क्या-क्या हुआ था चोरी?
पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत से सामान्य सामान नहीं बल्कि बच्चों की पढ़ाई, डिजिटल शिक्षा और विज्ञान प्रयोग से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण चोरी हुए थे।
पुलिस द्वारा घोषित बरामदगी में एक लैपटॉप, दो टैबलेट, एक ट्यूबलर बैटरी, एक इनवर्टर, दो माइक्रोस्कोप, 11 माइक्रो हेडफोन, एक प्रिंटर, दो वायरलेस की-बोर्ड, एक ऑप्टिक फाइबर सेट, एक डेस्कटॉप कंप्यूटर मॉनिटर, सीपीयू एवं बैटरी सहित, चार साउंड सिस्टम और दो साइंस किट शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए जाने का दावा करते हुए UP53FT7469 नंबर का एक ऑटो रिक्शा भी बरामद किया है।
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मदरहना उर्फ रामनगर क्षेत्र से तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार कपिलवस्तु पुलिस ने 3 अगस्त को ग्राम मदरहना उर्फ रामनगर, टोला मटियरिया राजे डिहवा बाग के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रेमशंकर उर्फ प्रिन्स कन्नौजिया पुत्र चन्द्र प्रकाश कन्नौजिया, निवासी ग्राम बढ़या, थाना व जनपद सिद्धार्थनगर; रोहित चौधरी पुत्र शम्भू चौधरी, निवासी चकईजोत, थाना कपिलवस्तु; तथा रोहित चौधरी उर्फ टकलू पुत्र कोठारी, निवासी चकईजोत, थाना कपिलवस्तु, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में पुलिस ने बताई है।
पुलिस के मुताबिक आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय भेज दिया गया।
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पुलिस का दावा- ऑटो में सामान लेकर नेपाल की ओर जा रहे थे आरोपी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण दावा पुलिस की पूछताछ के विवरण में सामने आया है।
प्रेस नोट के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे चार मित्र हैं और 31 जुलाई की रात कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत के कमरे का ताला तोड़कर सामान चोरी किया था।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यह भी कथित रूप से बताया कि चोरी का सामान इसी ऑटो रिक्शा से विद्यालय से ले जाया गया था और 3 अगस्त को उसे ऑटो में रखकर खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।
इसी दौरान पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि पुलिस के अनुसार एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
यह पूरा विवरण पुलिस प्रेस नोट और पुलिस द्वारा बताई गई पूछताछ पर आधारित है। आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा।
SSP के निर्देश पर चला अभियान, कपिलवस्तु पुलिस को मिली सफलता
पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के आदेश पर अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष कपिलवस्तु विनय प्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
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इन पुलिसकर्मियों की रही कार्रवाई में भूमिका
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार गिरफ्तारी एवं बरामदगी करने वाली टीम में चौकी प्रभारी बजहा उपनिरीक्षक अनिरुद्ध सिंह, उपनिरीक्षक सदरूल आलमीन, कांस्टेबल प्रदुमन यादव, कांस्टेबल राजकमल यादव और कांस्टेबल राहुल कुमार शर्मा शामिल रहे।
बच्चों की पढ़ाई का सामान भी नहीं छोड़ा!
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि चोरी किसी निजी दुकान या गोदाम से नहीं, बल्कि एक विद्यालय से हुई बताई गई है।
लैपटॉप और टैबलेट डिजिटल पढ़ाई के साधन हैं तो माइक्रोस्कोप और साइंस किट बच्चों को विज्ञान समझाने के उपकरण। कंप्यूटर, प्रिंटर, हेडफोन और अन्य उपकरण भी विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था का हिस्सा होते हैं।
ऐसे में स्कूल से इन उपकरणों की चोरी केवल संपत्ति की चोरी का मामला नहीं रह जाती, बल्कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालय की सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं।
पुलिस के दावे के मुताबिक सामान बरामद हो जाना राहत की बात है, लेकिन फरार बताए जा रहे अन्य आरोपी की गिरफ्तारी और पूरे घटनाक्रम की शेष कड़ियों की जांच अभी महत्वपूर्ण है।
टिप्पणी
स्कूल सुरक्षित होंगे तभी बच्चों के संसाधन सुरक्षित रहेंगे
सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा और विज्ञान की पढ़ाई बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक धन से उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे उपकरणों की चोरी सीधे तौर पर विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है।
कपिलवस्तु पुलिस ने तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में सामान की बरामदगी का दावा किया है। अब आवश्यक है कि मामले की विवेचना साक्ष्यों के आधार पर पूरी हो और फरार बताए जा रहे व्यक्ति के संबंध में भी विधिसम्मत कार्रवाई हो।
साथ ही यह घटना विद्यालयों में रखे महंगे इलेक्ट्रॉनिक और शैक्षणिक उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत भी सामने लाती है।
सारांश
कपिलवस्तु पुलिस ने कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत में 31 जुलाई की रात हुई चोरी के मामले का खुलासा करने का दावा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार लोगों में प्रेमशंकर उर्फ प्रिन्स कन्नौजिया, रोहित चौधरी और रोहित चौधरी उर्फ टकलू शामिल हैं।
एक लैपटॉप, दो टैबलेट, दो माइक्रोस्कोप, इनवर्टर-बैटरी, प्रिंटर, डेस्कटॉप कंप्यूटर, 11 माइक्रो हेडफोन, चार साउंड सिस्टम, दो साइंस किट समेत अन्य सामान तथा घटना में कथित रूप से प्रयुक्त ऑटो रिक्शा बरामद किया गया है।
पुलिस का दावा है कि चोरी का सामान खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल ले जाकर बेचने की तैयारी थी। एक अन्य साथी के फरार होने की बात भी पुलिस ने कही है।
तीनों गिरफ्तार आरोपियों को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय भेज दिया गया है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
सिद्धार्थनगर को “बुद्ध रसोई” की सौगात दिलाने की पहल तेज, मरीजों-तीमारदारों के सस्ते भोजन के लिए रेलमंत्री तक पहुंची मांग
राज्यसभा सांसद बृज लाल ने रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से की मुलाकात, माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में CSR सहयोग से “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने का अनुरोध; नो प्रॉफिट-नो लॉस मॉडल पर संचालन की परिकल्पना

सिद्धार्थनगर/नई दिल्ली, 3 अगस्त 2026।
सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृज लाल ने 3 अगस्त को केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से उनके संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर मेडिकल कॉलेज परिसर में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए रेलवे से जुड़े उपक्रम की CSR निधि से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
बृज लाल की ओर से रेलमंत्री को सौंपे गए पत्र में प्रस्तावित “बुद्ध रसोई” के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार करने, संचालन, रखरखाव और इसे दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाने की दिशा में CSR सहयोग का आग्रह किया गया है।
इस पूरी पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित “बुद्ध रसोई” को व्यावसायिक लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि “नो प्रॉफिट, नो लॉस” मॉडल पर संचालित करने की परिकल्पना की गई है।
यदि प्रस्ताव को आवश्यक स्वीकृति और वित्तीय सहयोग मिलता है तो मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके साथ रहने वाले तीमारदारों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण सुविधा बन सकती है।
इलाज की चिंता के बीच भोजन का खर्च भी मरीज के परिवार पर अतिरिक्त बोझ बनता है। इसी परेशानी को कम करने की सोच अब सिद्धार्थनगर से दिल्ली तक पहुंची है। राज्यसभा सांसद बृज लाल ने केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए CSR सहयोग मांगा है। योजना है कि रसोई “नो प्रॉफिट, नो लॉस” पर चले और मरीजों तथा तीमारदारों को सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन मिल सके। अब इस जनहित प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई और संभावित CSR स्वीकृति पर निगाहें रहेंगी।
मरीजों की थाली तक पहुंचने की कोशिश
मेडिकल कॉलेज में आने वाला मरीज अक्सर अकेला नहीं होता। उसके साथ परिवार के एक या अधिक सदस्य भी कई दिनों तक अस्पताल में रहते हैं। इलाज और दवाओं के साथ भोजन की व्यवस्था भी उनके लिए बड़ी आवश्यकता बन जाती है।
इसी जरूरत को ध्यान में रखकर “बुद्ध रसोई” का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना बताया गया है जहां मरीजों और तीमारदारों को कम कीमत में अच्छा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके। प्रस्ताव की मूल भावना जनसेवा को केंद्र में रखकर रसोई संचालित करने की है।
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा पत्र
3 अगस्त को हुई मुलाकात के दौरान सांसद बृज लाल ने केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को इस संबंध में बाकायदा पत्र सौंपा।
उपलब्ध पत्र के मुताबिक “बुद्ध रसोई” की स्थापना के लिए संबंधित रेलवे उपक्रम के समक्ष प्रस्ताव दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
रेलमंत्री से आग्रह किया गया है कि CSR निधि से बुद्ध रसोई केंद्र की स्थापना में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध पत्र और जानकारी इस समय CSR निधि की अंतिम स्वीकृति की घोषणा नहीं करते। फिलहाल रेलमंत्री से सहयोग और धन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। अंतिम स्वीकृति संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।
क्यों रखा गया नाम “बुद्ध रसोई”?
सिद्धार्थनगर की पहचान भगवान बुद्ध से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से है। उपलब्ध पत्र में भी सिद्धार्थनगर और भगवान बुद्ध के संबंध का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित जनसेवा केंद्र को “बुद्ध रसोई” नाम देने की भावना सामने आती है।
इस तरह प्रस्तावित रसोई को केवल भोजन उपलब्ध कराने वाली सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की पहचान से जुड़े जनसेवा प्रयास के रूप में विकसित करने की परिकल्पना दिखाई देती है।
इनबॉक्स
नो प्रॉफिट, नो लॉस का मॉडल
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसका प्रस्तावित संचालन मॉडल है।
बृज लाल द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक “बुद्ध रसोई” को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” के आधार पर संचालित करने की योजना है।
अर्थात इसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को संचालित रखते हुए मरीजों और तीमारदारों को सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना होगा।
हालांकि भोजन की कीमत, संचालन व्यवस्था और अन्य व्यावहारिक विवरण परियोजना को स्वीकृति मिलने तथा संचालन की रूपरेखा तय होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
अस्पताल में दवा के साथ सस्ती थाली भी बने सहारा
बीमारी किसी परिवार पर केवल शारीरिक संकट नहीं लाती, बल्कि आर्थिक दबाव भी बढ़ाती है। दूरदराज के गांव से मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले परिवार को जांच, दवा, यात्रा और ठहरने के साथ प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था भी करनी पड़ती है।
ऐसे में यदि अस्पताल परिसर में व्यवस्थित तरीके से कम कीमत पर पौष्टिक भोजन मिलने लगे तो मरीज के साथ रहने वाले परिवार को राहत मिल सकती है।
यही वह सामाजिक आवश्यकता है जिसे “बुद्ध रसोई” के प्रस्ताव से संबोधित करने की कोशिश की जा रही है।
पहले किए गए विकास कार्यों का भी पत्र में जिक्र
रेलमंत्री को दिए गए पत्र में बृज लाल ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना की निधि के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में कराए गए कार्यों का उल्लेख भी किया है।
पत्र में पुस्तकालय और पुस्तकों की व्यवस्था, अमृत सरोवर, स्कूल संबंधी आधारभूत सुविधाएं, ग्रामीण सीसी रोड, छात्रावास, स्ट्रीट लाइट तथा अस्पतालों में उपकरण जैसी सुविधाओं के लिए निधि इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।
अब इसी क्रम में सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में “बुद्ध रसोई” के लिए CSR सहयोग जुटाने की पहल की गई है।
टिप्पणी
प्रस्ताव अच्छा, अब धरातल पर उतरने का इंतजार
किसी भी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था केवल डॉक्टर, दवा और बेड तक सीमित नहीं होती। मरीज और उसके तीमारदार की बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना भी अस्पताल से जुड़ी समग्र व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस नजरिए से “बुद्ध रसोई” की परिकल्पना जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।
लेकिन प्रस्ताव और क्रियान्वयन के बीच की दूरी को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अभी CSR सहयोग का अनुरोध किया गया है। इसलिए इसे स्वीकृत अथवा शुरू हो चुकी परियोजना बताना जल्दबाजी होगी।
यदि आवश्यक स्वीकृति और धन मिलने के बाद इसे पारदर्शी व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और वास्तविक “नो प्रॉफिट, नो लॉस” मॉडल के साथ धरातल पर उतारा जाता है तो यह मेडिकल कॉलेज आने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।
सारांश
राज्यसभा सांसद बृज लाल ने 3 अगस्त 2026 को केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए CSR निधि से सहयोग का अनुरोध किया है।
प्रस्तावित रसोई को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” आधार पर चलाने की योजना है, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
फिलहाल यह प्रस्ताव और CSR सहयोग के अनुरोध के चरण में है। धनराशि की अंतिम स्वीकृति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। अब प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई पर निगाह रहेगी।
सिद्धार्थनगर में फिर गूंजा सामाजिक एकजुटता का संदेश: गांव-गांव पहुंच रही लोधी समाज की मुहिम

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव को याद कर रहा समाज; अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-नगर तक संगठन विस्तार का अभियान
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव की स्मृतियों को सहेजते हुए अब जिले में लोधी समाज सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक एकजुटता की नई मुहिम आगे बढ़ा रहा है। अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, जनपद सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-गांव और नगर क्षेत्रों में संगठन के जागरूकता बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य केवल जगह-जगह बोर्ड लगाना नहीं, बल्कि समाज को अपने इतिहास और महापुरुषों की विरासत से परिचित कराना, नई पीढ़ी में सामाजिक चेतना जगाना और बिखरे लोगों को एक संगठनात्मक मंच पर जोड़ना है। अभियान के तहत अब तक जिले के दर्जनों गांवों में बोर्ड लगाए जाने की बात कही जा रही है।
इसी कड़ी में विकास खंड उसका बाजार की ग्राम पंचायत सोहांस जनूबी में संगठन का बड़ा जागरूकता एवं स्वागत बोर्ड लगाया गया। बोर्ड पर संगठन के नाम और पदाधिकारियों के साथ समाज से जुड़े ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं।
| सिद्धार्थनगर और कल्याण सिंह के रिश्ते की यादें आज भी जीवंत
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के जुड़ाव को लेकर स्थानीय समाज की स्मृतियां भी हैं।
स्थानीय संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि कल्याण सिंह का सिद्धार्थनगर से विशेष लगाव रहा और वह अपने राजनीतिक जीवन में सत्ता में रहते हुए भी तथा पद पर नहीं रहने के दौरान भी सिद्धार्थनगर आते रहे। यही वजह रही कि जिले के लोधी समाज में उनके प्रति विशेष सम्मान और आत्मीयता विकसित हुई।
समाज के लोगों का कहना है कि कल्याण सिंह के विचार, सामाजिक एकजुटता और सार्वजनिक जीवन से मिली प्रेरणा आज भी उनके लिए महत्वपूर्ण है। संगठन उसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज को शिक्षा, जागरूकता, एकता तथा आपसी सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ाने की बात कर रहा है।
कल्याण सिंह की स्मृतियों से नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश
सिद्धार्थनगर में चल रहे अभियान को संगठन अतीत और वर्तमान के बीच एक सामाजिक सेतु के रूप में भी देख रहा है। एक तरफ बोर्ड पर महापुरुषों और प्रेरक व्यक्तित्वों को स्थान देकर इतिहास की याद दिलाई जा रही है, दूसरी तरफ गांव स्तर के लोगों के नाम जोड़कर संगठन को जमीनी स्वरूप देने की कोशिश हो रही है।
संदेश साफ है—अपनी विरासत को जानिए, समाज को जागरूक कीजिए और एक-दूसरे के सहयोग के लिए संगठित रहिए।
| अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई, लक्ष्य पूरा सिद्धार्थनगर
जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में चल रहे अभियान को संगठन पूरे जनपद तक पहुंचाने की तैयारी में है। गांव, कस्बा और नगर—हर स्तर पर बोर्ड के जरिए संगठन की पहचान और सामाजिक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सोहांस जनूबी में लगे बोर्ड पर डॉ. चन्द्रिका प्रसाद लोधी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष) तथा अर्जुन सिंह लोधी (जिलाध्यक्ष) का उल्लेख प्रमुखता से है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर संगठन से जुड़े अनेक लोगों के नाम भी बोर्ड पर अंकित हैं।
| चेहरे स्थानीय, संदेश पूरे समाज के लिए
सोहांस जनूबी में लगाए गए बोर्ड पर सदस्यगण के रूप में रामसमुझ लोधी, अनिल लोधी, पंकज लोधी, राजेश लोधी, राधेश्याम प्रताप लोधी, सुरेश लोधी, हरिशंकर लोधी, वीरयादव लोधी, रामसुभग लोधी, रामवृक्ष लोधी, भूपनरायन, सीताराम लोधी, रामयश लोधी, राजमन लोधी, सुन्दरी लोधी, बिजलेश विश्वकर्मा और पराग लोधी सहित अन्य नाम अंकित दिखाई देते हैं।
स्थानीय लोगों को बोर्ड पर स्थान देने के पीछे संगठन की सोच गांव स्तर तक भागीदारी बढ़ाने की बताई जा रही है। यानी अभियान ऊपर से नीचे तक संगठन खड़ा करने के बजाय गांव के लोगों को साथ लेकर सामाजिक नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
| एक बोर्ड नहीं, गांव-गांव सामाजिक पहचान खड़ी करने की कोशिश
सिद्धार्थनगर में शुरू हुई यह पहल अब केवल किसी एक गांव में बोर्ड लगाने तक सीमित नहीं दिखाई देती। दर्जनों गांवों तक पहुंचने का दावा कर रही अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा इसे जिलेव्यापी सामाजिक जागरूकता अभियान का स्वरूप दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव की स्मृतियां इस अभियान को भावनात्मक आधार देती हैं, जबकि जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-गांव संगठन विस्तार इसकी वर्तमान दिशा को रेखांकित करता है।
संपादकीय टिप्पणी
समाज का संगठन तभी सार्थक होता है जब उसका उद्देश्य केवल नाम या पहचान तक सीमित न रहकर शिक्षा, सामाजिक चेतना, आपसी सहयोग और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने तक पहुंचे। सिद्धार्थनगर में बोर्ड के माध्यम से शुरू हुई यह पहल यदि इन उद्देश्यों को गांव-गांव वास्तविक गतिविधियों में बदलती है, तो इसका प्रभाव बोर्ड से कहीं आगे दिखाई दे सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रति जिले के लोगों की पुरानी आत्मीयता और सम्मान की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ यदि संगठन शिक्षा, प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और सामाजिक सहयोग को प्राथमिकता देता है, तो यह मुहिम अधिक व्यापक सामाजिक महत्व हासिल कर सकती है।
सारांश
अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, सिद्धार्थनगर जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में जिले के गांव एवं नगर क्षेत्रों में जागरूकता बोर्ड लगाने का अभियान चला रही है। सोहांस जनूबी में भी इसी क्रम में बोर्ड लगाया गया है। संगठन से जुड़े लोगों के मुताबिक अब तक दर्जनों गांवों में अभियान पहुंच चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सिद्धार्थनगर से पुराने जुड़ाव और उनके प्रति स्थानीय लोधी समाज के सम्मान को भी संगठन अपनी सामाजिक विरासत के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखता है।
दवा कराने निकली मां-बेटी नहीं लौटीं घर, सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय—दो घंटे में सकुशल बरामद

सिद्धार्थनगर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से परिवार को मिली राहत; सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से शुरू हुई तलाश, सकुशल मिलने के बाद परिजनों को किया गया सुपुर्द
सिद्धार्थनगर। दवा और इलाज के लिए घर से निकली मां-बेटी के वापस न लौटने से परेशान एक परिवार को पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ी राहत मिली। परिजन ने सिद्धार्थनगर थाने पहुंचकर मामले की सूचना दी तो पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू की। पुलिस के मुताबिक सूचना मिलने के करीब दो घंटे के भीतर मां और बेटी को सकुशल बरामद कर परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इंदिरानगर निवासी ओमप्रकाश सोनकर ने 2 अगस्त को सिद्धार्थनगर थाने में सूचना दी थी कि उनकी 55 वर्षीय पत्नी और 22 वर्षीय पुत्री एक दिन पहले यानी 1 अगस्त की दोपहर दवा-इलाज कराने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं।
लीड | एक रात चिंता में गुजरी, पुलिस तक पहुंचा परिवार
समय गुजरता गया और मां-बेटी घर नहीं पहुंचीं तो परिवार की चिंता बढ़ती चली गई। अपने स्तर से जानकारी करने के बाद परिजन पुलिस के पास पहुंचे।
मामले की सूचना मिलने पर सिद्धार्थनगर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर दोनों की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया और अन्य उपलब्ध माध्यमों से जानकारी जुटाई गई।
इसके बाद तलाश का नतीजा जल्द सामने आया और सूचना मिलने के लगभग दो घंटे के भीतर दोनों को सकुशल खोज लिया गया।
सकुशल बरामदगी के बाद पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए मां-बेटी को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
| एक नजर में मामला
स्थान: थाना सिद्धार्थनगर, जनपद सिद्धार्थनगर
घर से निकलीं: 1 अगस्त 2026 की दोपहर
उद्देश्य: दवा/इलाज कराने के लिए
पुलिस को सूचना: 2 अगस्त 2026
पुलिस कार्रवाई: गुमशुदगी दर्ज कर तत्काल तलाश
तलाश के माध्यम: सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यम
नतीजा: पुलिस के मुताबिक करीब दो घंटे में सकुशल बरामदगी
आगे की कार्रवाई: मां-बेटी को परिजनों के सुपुर्द किया गया
पुलिस ने तेजी से बढ़ाई तलाश
मामला सामने आने के बाद पुलिस टीम ने उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर मां-बेटी की तलाश शुरू की।
पुलिस का दावा है कि सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों का सहारा लेते हुए जानकारी जुटाई गई और महज दो घंटे के भीतर दोनों तक पहुंचने में सफलता मिली।
पुलिस ने हालांकि अपने प्रेस नोट में यह स्पष्ट नहीं किया है कि मां-बेटी कहां मिलीं और किन परिस्थितियों में घर नहीं लौट पाई थीं। इसलिए इन बिंदुओं को लेकर किसी तरह की अटकल लगाना उचित नहीं होगा।
बरामदगी के बाद परिवार को मिली राहत
मां-बेटी के सकुशल मिलने की सूचना परिवार के लिए राहत लेकर आई। पुलिस के अनुसार दोनों को परिजनों के सुपुर्द किए जाने के बाद परिवार ने पुलिस टीम की कार्रवाई की सराहना की।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद तलाश तेजी से आगे बढ़ाई गई और मामला किसी अप्रिय घटना में बदलने से पहले दोनों सकुशल मिल गईं।
| इन्हें मिली बरामदगी की जिम्मेदारी
पुलिस की ओर से जारी विवरण के मुताबिक कार्रवाई करने वाली टीम में—
वरिष्ठ उपनिरीक्षक अरविंद कुमार राय
आरक्षी साहिल यादव
आरक्षी अंकित कुमार
महिला आरक्षी कीर्ति उपाध्याय
शामिल रहे।
| शिकायत से सकुशल वापसी तक
1 अगस्त को मां-बेटी दवा और इलाज के लिए घर से निकलीं और वापस नहीं पहुंचीं। परिवार ने तलाश की और अगले दिन पुलिस को इसकी सूचना दी।
पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की, उपलब्ध माध्यमों से तलाश शुरू की और अपने आधिकारिक विवरण के मुताबिक सूचना मिलने के करीब दो घंटे के अंदर दोनों को सकुशल बरामद कर लिया।
इसके बाद मां-बेटी को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया और चिंता में डूबे परिवार को राहत मिली।
| गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती घंटे महत्वपूर्ण
किसी व्यक्ति के अचानक लापता होने की स्थिति में समय पर सूचना और तेजी से तलाश बेहद महत्वपूर्ण होती है। सिद्धार्थनगर के इस मामले में अच्छी बात यह रही कि पुलिस को जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ी और मां-बेटी सुरक्षित मिल गईं।
यह मामला आम लोगों के लिए भी संदेश देता है कि परिवार का कोई सदस्य असामान्य परिस्थितियों में लापता हो और संपर्क न हो पा रहा हो तो अपने स्तर पर लंबे समय तक इंतजार करने के बजाय पुलिस को समय से जानकारी देना उपयोगी हो सकता है।
