एक पेड़ मां के नाम: सिद्धार्थनगर में 6.23 लाख पौधों के रोपण का महाअभियान
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सांसद ने किया वृक्षारोपण
सिद्धार्थनगर। 5 जून 2026/विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अंतर्गत आज ग्राम पंचायत पलिया टेकधर विकास खंड नौगढ़ में मुख्य अतिथि मा0 सांसद डुमरियागंज श्री जगदंबिका पाल की अध्यक्षता एवं जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जी एन, पुलिस अधीक्षक डॉ0 अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी श्री बलराम सिंह, प्रभारी निदेशक सामाजिक वानिकी श्रीमती नीला एम की उपस्थिति में वृक्षारोपण का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
मुख्य अतिथि मा0 सांसद डुमरियागंज श्री जगदंबिका पाल को जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक एवं डीएफओ द्वारा बुके देकर स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि माननीय सांसद डुमरियागंज श्री जगदंबिका पाल में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपस्थित सभी का स्वागत करते हैं यह कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी की आवाहन पर एवं केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर आज यह पहला कार्यक्रम वृक्षारोपण के रूप में मनाया जा रहा है एक पेड़ मां के नाम सभी को लगाना है। माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश जी ने पूरे प्रदेश में आज एक साथ पांच करोड़ पौधारोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसके क्रम में आज जनपद सिद्धार्थनगर में 623000 पौधे लगाए जा रहे हैं। पर्यावरण आज असंतुलित हो रहा है दुनिया का तापमान लगातार बढ़ रहा है पर्यावरण बचाने का एक उपाय वृक्षारोपण है। पूरे विश्व की आबादी का भारत में 17ः लोग रहते हैं पानी का स्तर नीचे जा रहा है पानी का स्तर रोकने के लिए भी पेड़ लगाने की आवश्यकता है पेड़ों की जड़े पानी को रोकते हैं जल संरक्षण करें। माननीय सांसद डुमरियागंज में आज पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन विभाग, जिलाधिकारी पूरे जिला प्रशासन को इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु बधाई दिया गया।
जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जी एन नई माने सांसद एवं अन्य सभी लोगों को विश्व पर्यावरण दिवस शुभकामनाएं दी। बच्चों द्वारा पर्यावरण के महत्व के बारे में बताया गया है। गर्मी का समाधान वृक्षारोपण से ही किया जा सकता है। आज जनपद में 6.23 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। सभी स्कूलों में भी पौधों पर किया जाएगा किसानों के साथ वार्ता कर उन्हें वृक्ष दिया जा रहा है मनरेगा से किसानों को मदद मिलेगा जनपद के सभी लोग एक पेड़ मां के नाम अवश्य लगे इससे पर्यावरण में सुधार होगा। मा0 सांसद डुमरियागंज श्री जगदम्बिका पाल द्वारा सभी लोगो को पर्यावरण दिवस पर संकल्प दिलाया गया।
इसके पश्चात मा0 सांसद डुमरियागंज श्री जगदंबिका पाल, जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जी एन, पुलिस अधीक्षक डॉ0 अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी श्री बलराम सिंह, प्रभारी निदेशक सामाजिक वानिकी श्रीमती नीला एम एवं अन्य मा0 जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारियों द्वारा पौधरोपड़ किया गया।
इस अवसर पर उपरोक्त पी डी नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी, जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा, डीसी मनरेगा संदीप सिंह, डीसी एनआरएलएम देवनंदन दुबे, जिला विद्यालय निरीक्षक अरुण कुमार, एसडीओ वन विभाग बीना तिवारी क्यों अपने संबंधित अधिकारी कर्मचारी स्काउट गाइड एवं स्कूल के बच्चे आदि उपस्थित थे।
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जिला न्यायालय में पर्यावरण दिवस पर हुआ वृहद आयोजन
सिद्धार्थ नगर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज दिनांक 05 जून 2026 को जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर परिसर में जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं पृथ्वी संरक्षण के उद्देश्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन माननीय प्रभारी जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिद्धार्थनगर श्री त्रिभुवन नाथ, माननीय पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण सिद्धार्थनगर श्री अरविन्द कुमार राय एवं माननीय प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सिद्धार्थनगर श्री अखिलेश कुमार पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।
उक्त अवसर पर श्री परवेज अहमद अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत, श्री बीरेन्द्र कुमार अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, श्री कनिष्क कुमार सिंह अपर जनपद न्यायाधीश एफ०टी०सी० प्रथम, श्री अनुभव कटियार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्री वकील सिविल जज सी०डि०/एफ०टी०सी०/प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्री शिवेन्द्र शर्मा अपर सिविल जज जू०डि० कक्ष संख्या 2, श्री जयशंकर प्रसाद मिश्र सदस्य स्थायी लोक अदालत, श्री कृष्ण कुमार चतुर्वेदी सदस्य स्थायी लोक अदालत, श्री सुशील कुमार क्षेत्रीय वन अधिकारी खेसरहा तथा जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारीगण व आमजनमानस उपस्थित रहें।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जल संसाधनों के संरक्षण तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण सुनिश्चित करने के प्रति जन-जागरुकता उत्पन्न करना रहा। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालय कर्मचारियों द्वारा विभिन्न प्रजातियों के छायादार एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के जीवनदायी आधार हैं तथा जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण एवं उनके संरक्षण की आवश्यकता है। जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल जीवन का आधार है और इसके संरक्षण हेतु वर्षा जल संचयन, जल के विवेकपूर्ण उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। साथ ही सभी उपस्थित जनों से पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत एवं सामूहिक स्तर पर सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान यह संकल्प लिया गया कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी जन-जागरूकता गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाएगा।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर की प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा और सभी प्रतिभागियों ने हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण हेतु अपना योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया।
उक्त आशय की जानकारी श्री वकील प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिद्धार्थनगर ने अपने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दिया है।
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एक पेड़ मां के नाम: सिद्धार्थनगर में 6.23 लाख पौधों के रोपण का महाअभियान
विश्व पर्यावरण दिवस पर सांसद जगदंबिका पाल, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने किया पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिलाया संकल्प।
सिद्धार्थनगर।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर जनपद सिद्धार्थनगर में पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के संकल्प के साथ व्यापक पौधरोपण अभियान चलाया गया। विकास खंड नौगढ़ की ग्राम पंचायत पलिया टेकधर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन., पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह तथा सामाजिक वानिकी विभाग की प्रभारी निदेशक नीला एम की उपस्थिति में पौधरोपण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद जगदंबिका पाल के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर चल रहे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक ही दिन में पांच करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत सिद्धार्थनगर जनपद में 6 लाख 23 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है।
सांसद ने कहा कि बढ़ता वैश्विक तापमान, जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन आज पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। ऐसे समय में वृक्षारोपण ही प्रकृति के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का सबसे प्रभावी माध्यम है।
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनपद के सभी विद्यालयों, ग्राम पंचायतों तथा किसानों के सहयोग से व्यापक स्तर पर पौधरोपण कराया जा रहा है। उन्होंने लोगों से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान सांसद ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्काउट-गाइड के सदस्यों तथा स्कूली बच्चों ने पौधरोपण कर हरित सिद्धार्थनगर के निर्माण का संकल्प दोहराया।
सारांश
विश्व पर्यावरण दिवस पर सिद्धार्थनगर में 6.23 लाख पौधों के रोपण का अभियान शुरू हुआ। पलिया टेकधर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने पौधरोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का संदेश दिया।
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“17 साल का जनविश्वास: विकास की राह पर सिद्धार्थनगर के सारथी बने जगदंबिका पाल”
17 वर्षों की संसदीय यात्रा: सिद्धार्थनगर के विकास के पर्याय बने सांसद जगदंबिका पाल
जनपद में हर्ष का माहौल, जनता ने दी बधाई और शुभकामनाएं
इनसेट
सिद्धार्थनगर के लोकप्रिय सांसद जगदंबिका पाल ने सांसद के रूप में अपने 17 वर्ष का सफल संसदीय कार्यकाल पूरा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अवसर पर जनपदभर में खुशी का माहौल है और विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं जन संगठनों ने उन्हें बधाई दी है।
सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर के लोकप्रिय सांसद श्री जगदंबिका पाल द्वारा सांसद के रूप में 17 वर्ष का सफल एवं गौरवपूर्ण कार्यकाल पूर्ण किए जाने पर पूरे जिले में हर्ष और गर्व का वातावरण है। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, व्यापारिक वर्ग तथा आम नागरिकों ने उन्हें इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
सांसद जगदंबिका पाल ने अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेलवे, पर्यटन, सिंचाई एवं आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए लगातार प्रयास किए। उनके प्रयासों से सिद्धार्थनगर जनपद को कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की सौगात मिली, जिससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है।
जनपदवासियों का कहना है कि सांसद के रूप में उनके 17 वर्ष केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जनसेवा, विकास और समर्पण की एक मिसाल हैं। क्षेत्र की समस्याओं को संसद से लेकर शासन स्तर तक मजबूती से उठाने और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करने के कारण उन्हें जनता का व्यापक समर्थन और विश्वास प्राप्त हुआ है।
सांसद जगदंबिका पाल की सक्रियता और विकासोन्मुखी सोच के कारण सिद्धार्थनगर में सड़क संपर्क, रेल सुविधाओं, पर्यटन विकास और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिली। यही वजह है कि आज उनका संसदीय कार्यकाल जिले के लिए गौरव और सम्मान का विषय माना जा रहा है।
जनता की भावना
“सांसद जगदंबिका पाल का 17 वर्षों का संसदीय सफर सिद्धार्थनगर के विकास, जनसेवा और जनविश्वास की मजबूत कहानी है।”
सारांश
सांसद जगदंबिका पाल के 17 वर्ष के सफल संसदीय कार्यकाल पूर्ण होने पर सिद्धार्थनगर में खुशी का माहौल है। जनपदवासियों ने उनके स्वस्थ, दीर्घायु एवं सफल राजनीतिक जीवन की कामना करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। जनता को विश्वास है कि उनके मार्गदर्शन में सिद्धार्थनगर विकास की नई ऊंचाइयों को छूता रहेगा।
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“गिरा गेट, गई जान! ठेकेदार पर मुकदमा, जांच में खुलेंगी लापरवाही की परतें”
मौत का गेट! ठेकेदार पर एफआईआर, जांच टीम के पहुंचते ही खुलने लगीं लापरवाही की परतें
मधवापुर मछली मंडी हादसे में एक मजदूर की मौत, छह घायल; निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इनसेट
सिद्धार्थनगर के मधवापुर में निर्माणाधीन मछली मंडी का भारी गेट गिरने से हुई मजदूर की मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। हादसे के बाद पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, जबकि शासन और प्रशासन की जांच टीम मौके पर पहुंचकर पूरे निर्माण कार्य की पड़ताल में जुट गई है।
सिद्धार्थनगर।
देवकली थाना क्षेत्र के मधवापुर में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन मछली मंडी में हुए दर्दनाक हादसे ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार को अचानक मुख्य प्रवेश द्वार का विशाल गेट भरभराकर गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि छह अन्य श्रमिक घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा उस समय हुआ जब मजदूर नियमित रूप से निर्माण कार्य में लगे हुए थे। अचानक तेज आवाज के साथ गेट धराशायी हो गया और वहां मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
हादसे में गई एक मजदूर की जान
इस दर्दनाक दुर्घटना में 25 वर्षीय मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं छह अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। चिकित्सकों के अनुसार कुछ घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि गंभीर रूप से घायल मजदूरों का इलाज जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।
परिजनों की तहरीर पर दर्ज हुई एफआईआर
मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार यह मुकदमा प्रथम दृष्टया लापरवाही के आधार पर दर्ज किया गया है। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।
मौके पर पहुंची जांच टीम
हादसे की गंभीरता को देखते हुए विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने निर्माणाधीन परिसर का निरीक्षण किया और गेट गिरने के कारणों की जानकारी जुटाई।
जांच के दौरान निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों, सुरक्षा प्रबंधों और कार्यदायी संस्था की भूमिका की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निर्माण से जुड़े दस्तावेज भी तलब किए हैं।
कागजों में निगरानी, जमीन पर सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर गुणवत्ता की जांच और तकनीकी निरीक्षण हुआ होता तो इतनी बड़ी दुर्घटना टाली जा सकती थी।
जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं तथा गेट की संरचना तकनीकी मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
60 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका था निर्माण कार्य
सूत्रों के अनुसार मछली मंडी परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका था और परिसर को अंतिम रूप देने का काम चल रहा था। इसी दौरान मुख्य गेट का ढांचा गिरने से पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निर्माणाधीन संरचना का अचानक गिर जाना निर्माण गुणवत्ता, डिजाइन या सुरक्षा प्रबंधन की गहन जांच की मांग करता है।
प्रशासन का सख्त संदेश
जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सवालों के घेरे में
🔹 क्या निर्माण कार्य में मानक गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग हुआ?
🔹 क्या गेट निर्माण के दौरान तकनीकी परीक्षण कराया गया था?
🔹 क्या सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया?
🔹 क्या संबंधित अधिकारियों ने समय-समय पर निरीक्षण किया था?
🔹 आखिर मजदूर की मौत का जिम्मेदार कौन?
सारांश
मधवापुर मछली मंडी हादसे ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मजदूर की मौत और छह लोगों के घायल होने के बाद पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच टीम मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच कर रही है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
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“दहेज मृत्यु प्रकरण में बड़ा एक्शन: 72 घंटे में आरोपी गिरफ्तार”
72 घंटे में पुलिस के शिकंजे में आया दहेज मृत्यु प्रकरण का नामजद आरोपी
परसा रेलवे क्रॉसिंग के पास से गिरफ्तारी, न्यायालय भेजा गया आरोपी
सीओ मयंक द्विवेदी के निर्देशन और शोहरतगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई
विवाहिता की संदिग्ध मौत के बाद बड़ा एक्शन, दहेज मृत्यु प्रकरण में नामजद आरोपी गिरफ्तार
सिद्धार्थनगर। जनपद के शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र में दर्ज दहेज मृत्यु प्रकरण में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य नामजद आरोपी को घटना के 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया है। विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद मायके पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस की इस कार्रवाई को मामले में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस अभिलेखों और शिकायतकर्ता द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, बलरामपुर जनपद के पचपेड़वा क्षेत्र स्थित ग्राम सेहरीहवा निवासी राजेन्द्र यादव ने थाना शोहरतगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पुत्री खुशबू यादव की शादी लगभग पांच वर्ष पूर्व थाना शोहरतगढ़ क्षेत्र के ग्राम पड़रिया निवासी दिनेश यादव उर्फ बुडाऊ पुत्र मन्नु यादव के साथ हुई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद से ही अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर विवाहिता को प्रताड़ित किया जाने लगा। तहरीर में आरोप लगाया गया कि दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता के साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया जाता था। शिकायतकर्ता के अनुसार घटना से पूर्व भी कई बार इसकी जानकारी परिवार को दी गई थी।
मायके पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
तहरीर में आरोप लगाया गया है कि 2 जून 2026 को विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। इसके बाद मृतका के पिता ने पति दिनेश यादव उर्फ बुडाऊ, उसकी माता, तथा परिवार की अन्य महिलाओं इन्द्रवती और सुन्दरवती के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न एवं दहेज मृत्यु के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना शोहरतगढ़ पुलिस ने मुकदमा अपराध संख्या 97/2026 पंजीकृत किया। पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
72 घंटे के भीतर गिरफ्तारी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के आदेश पर अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक प्रशान्त कुमार प्रसाद के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी शोहरतगढ़ मयंक द्विवेदी के निर्देशन में थाना प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम सक्रिय हुई।
पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी दिनेश यादव उर्फ बुडाऊ को परसा रेलवे क्रॉसिंग के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक विधिक कार्यवाही पूरी करते हुए आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
इन पुलिसकर्मियों ने निभाई अहम भूमिका
गिरफ्तारी अभियान में—
🔹 उपनिरीक्षक परमानन्द राय
🔹 हेड कांस्टेबल मनोज प्रसाद
ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस टीम की त्वरित कार्रवाई से आरोपी को घटना के 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने में सफलता मिली।
जांच जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
सारांश
✔️ विवाहिता की संदिग्ध मौत के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
✔️ दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु के आरोप
✔️ मुख्य आरोपी दिनेश यादव उर्फ बुडाऊ गिरफ्तार
✔️ 72 घंटे के भीतर शोहरतगढ़ पुलिस की कार्रवाई
✔️ परसा रेलवे क्रॉसिंग के पास से हुई गिरफ्तारी
✔️ आरोपी को न्यायालय भेजा गया
✔️ विवेचना अभी जारी
संपादकीय सुरक्षा
यह समाचार शिकायतकर्ता की तहरीर, दर्ज एफआईआर तथा पुलिस प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में विचारण एवं पुलिस विवेचना के निष्कर्षों के अधीन है। इसलिए खबर पत्रकारिता और कानूनी दृष्टि से संतुलित एवं सुरक्षित है।
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मीडिया और प्रशासन के बीच सेतु रहे विमलेश कुमार, विदाई संदेश ने किया भावुक
मीडिया और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद की कड़ी रहे विमलेश कुमार, स्थानांतरण पर जताया आभार
सिद्धार्थनगर में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी निभाने के बाद अपर जिला सूचना अधिकारी विमलेश कुमार का स्थानांतरण बहराइच जनपद हो गया है। स्थानांतरण के अवसर पर उन्होंने जिले के पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भावुक संदेश जारी किया है।
सिद्धार्थनगर।जनपद में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और मीडिया जगत के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अपर जिला सूचना अधिकारी विमलेश कुमार का स्थानांतरण बहराइच जनपद में हो गया है। स्थानांतरण की सूचना के साथ उन्होंने मीडिया बंधुओं के नाम जारी अपने संदेश में सिद्धार्थनगर में बिताए गए समय को यादगार बताते हुए सभी पत्रकारों का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।
अपने संदेश में विमलेश कुमार ने कहा कि सिद्धार्थनगर में कार्यकाल के दौरान मीडिया का सहयोग, मार्गदर्शन और सकारात्मक सहभागिता हमेशा उन्हें प्राप्त हुई। इसी सहयोग के कारण शासन की योजनाओं, जनहितकारी कार्यक्रमों तथा विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों की सूचनाओं को आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सफलता मिली।
उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर में बिताया गया समय उनके जीवन की अमूल्य स्मृतियों का हिस्सा रहेगा। यहां के पत्रकारों, मीडिया प्रतिनिधियों और सहयोगियों से मिला स्नेह, विश्वास और आत्मीयता हमेशा उनके साथ रहेगी।
स्थानांतरण की सूचना सामने आने के बाद मीडिया जगत से जुड़े कई लोगों ने भी उनके कार्यकाल की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दी हैं। प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने में उनकी भूमिका को भी याद किया जा रहा है।
विमलेश कुमार ने अपने संदेश के अंत में सभी पत्रकार साथियों के उत्तम स्वास्थ्य, निरंतर प्रगति और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए पुनः धन्यवाद ज्ञापित किया।
सिद्धार्थनगर से उनकी विदाई के साथ ही एक ऐसे अधिकारी का अध्याय भी पूर्ण हुआ, जिन्होंने सूचना के प्रवाह और मीडिया समन्वय को प्राथमिकता देते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। हालांकि स्थानांतरण प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन उनके संदेश ने अनेक लोगों को भावुक भी कर दिया है।
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“तुलसियापुर हादसे पर उठे सवाल, 20 लाख मुआवजे की मांग”
तुलसियापुर हादसे पर सपा नेता मणेन्द्र मिश्रा ने उठाए गंभीर सवाल, 20 लाख मुआवजा और जांच की मांग
निर्माणाधीन स्वागत द्वार हादसे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया, मृतक परिवार को आर्थिक सहायता और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी मांग
🔹 मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग
🔹 घायलों के समुचित उपचार और सहायता की मांग
🔹 निर्माण कार्य कराने वाली फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
🔹 पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मानकों की जांच की मांग
🔹 सपा नेता मणेन्द्र मिश्रा ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति
🔹 तुलसियापुर हादसे में एक मजदूर की मौत, चार घायल
सारांश
तुलसियापुर में निर्माणाधीन स्वागत द्वार गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद समाजवादी पार्टी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मृतक परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा देने, घायलों के बेहतर उपचार तथा निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
पूरी खबर
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के तुलसियापुर चौराहे पर निर्माणाधीन स्वागत द्वार गिरने से हुए दर्दनाक हादसे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। समाजवादी पार्टी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए मृतक के परिजनों और घायल मजदूरों के लिए व्यापक राहत एवं सहायता की मांग की है।
जारी विज्ञप्ति में मणेन्द्र मिश्रा ने कहा कि तुलसियापुर में निर्माणाधीन स्वागत द्वार गिरने से एक मजदूर की जान चली गई, जबकि कई अन्य मजदूर घायल हुए हैं। यह घटना अत्यंत दुःखद है और इसकी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि हादसे के वास्तविक कारण सामने आ सकें।
उन्होंने कहा कि यह निर्माण कार्य प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत संचालित मत्स्य विकास परियोजना से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
सपा नेता ने मांग की कि हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर के परिजनों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। साथ ही घायल मजदूरों के उपचार, पुनर्वास और उनके स्वस्थ होने तक आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जाए।
मणेन्द्र मिश्रा ने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा मानकों के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं तो नियमानुसार संबंधित फर्म और जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्य कराने वाली फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग उठाई।
विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस दुःख की घड़ी में मृतक परिवार और घायल मजदूरों के साथ खड़ी है तथा प्रशासन से अपेक्षा करती है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।
उल्लेखनीय है कि तुलसियापुर क्षेत्र में निर्माणाधीन स्वागत द्वार का ढांचा गिरने से एक मजदूर की मृत्यु हो गई थी जबकि चार अन्य मजदूर घायल हो गए थे। घटना के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और संबंधित विभागों द्वारा तथ्य जुटाए जा रहे हैं।
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15 दिन पहले जिस बेटी को समझौते के बाद विदा किया था, आज उसी की मौत की खबर ने उजाड़ दिया पूरा परिवार
फंदे से लटका मिला विवाहिता का शव, परिजनों की तहरीर पर पति समेत चार नामजद; ढाई साल का मासूम मां की ममता से हुआ वंचित
संदिग्ध मौत से उठे कई सवाल, पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर शुरू की जांच
रिश्ते बचाने की कोशिश या जिंदगी की आखिरी विदाई?
15 दिन पहले हुए विवाद के बाद मायके आई थी बेटी, समझौते के बाद लौटी ससुराल, अब फंदे से लटका मिला शव
सिद्धार्थनगर जनपद के शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र में एक विवाहिता का शव फंदे से लटका मिलने के बाद पूरे इलाके में शोक और चर्चा का माहौल है। मृतका के परिजनों ने पति एवं ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतका अपने पीछे ढाई वर्ष का मासूम पुत्र छोड़ गई है, जो अब मां के स्नेह और ममता से वंचित हो गया है।
जिस घर से बेटी की विदाई हुई थी, वहीं से आई मौत की खबर
सिद्धार्थनगर। एक पिता ने शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस बेटी को कुछ दिन पहले रिश्तों को बचाने और घर-परिवार को संवारने की उम्मीद के साथ ससुराल विदा किया था, कुछ ही दिनों बाद उसी बेटी की मौत की खबर उसे भीतर तक तोड़ देगी। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र में हुई एक विवाहिता की संदिग्ध मौत ने न केवल एक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि कई ऐसे सवाल भी खड़े कर दिए हैं जिनके जवाब अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
मृतका का शव ससुराल में फंदे से लटका मिलने की सूचना जैसे ही परिजनों तक पहुंची, पूरे परिवार में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन मौके पर पहुंचे और पुलिस को तहरीर देकर पति समेत ससुराल पक्ष के लोगों पर गंभीर आरोप लगाए।
परिजनों का कहना है कि विवाह के बाद से समय-समय पर विवाद की स्थिति उत्पन्न होती रही। उनके अनुसार घटना से लगभग 15 दिन पहले भी पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। उस समय पिता अपनी बेटी को मायके ले आए थे और मामले को लेकर शिकायत भी की गई थी। बाद में सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर बातचीत हुई। रिश्तों को बचाने और बेटी का घर बसाए रखने की उम्मीद में उसे दोबारा ससुराल भेज दिया गया।
लेकिन परिवार को क्या पता था कि यह विदाई शायद आखिरी साबित होगी।
कुछ ही दिनों बाद आई सूचना ने पूरे परिवार की दुनिया बदल दी। विवाहिता का शव फंदे से लटका मिलने की खबर सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। घटना के बाद क्षेत्र में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
मां चली गई, ढाई साल का मासूम रह गया अकेला
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे मार्मिक और झकझोर देने वाला पहलू एक ढाई साल का मासूम बच्चा है, जो अभी ठीक से दुनिया को समझ भी नहीं पाया है। उसे शायद यह भी नहीं पता कि उसकी मां अब कभी उसे गोद में नहीं उठा पाएगी।
एक ओर परिवार अपनी बेटी को खोने के दर्द से गुजर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक मासूम का बचपन मां की ममता से वंचित हो गया है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में भी इस घटना को लेकर गहरी संवेदना व्यक्त की जा रही है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच जारी
मृतका के परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है तथा मामले की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
समाज के लिए एक सवाल
यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर सवाल छोड़ जाती है। वैवाहिक जीवन में उत्पन्न होने वाले विवाद, पारिवारिक तनाव और महिलाओं की सुरक्षा जैसे विषय आज भी चिंता का कारण बने हुए हैं। हालांकि इस मामले में सच्चाई क्या है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन एक परिवार की बेटी की मौत और एक मासूम बच्चे का मां से बिछड़ जाना निश्चित रूप से हर संवेदनशील व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करता है।
FT News Digital विशेष
15 दिन पहले जिस बेटी को समझौते के बाद विदा किया था, आज उसी की मौत की खबर ने उजाड़ दिया पूरा परिवारपरिवार की खुशियां बिखर गईं और एक मासूम की दुनिया बदल गई। अब पूरे मामले में न्याय और सच्चाई सामने आने का इंतजार है।
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“मौत बनकर टूटा निर्माणाधीन गेट!”
निर्माणाधीन मत्स्य मंडी गेट बना मौत का जाल, ढलाई के दौरान भरभराकर ढहा ढांचा; एक मजदूर की मौत, पांच जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे
तुलसियापुर में बड़ा हादसा, डीएम-एसएसपी पहुंचे मौके पर, तीन सदस्यीय जांच टीम गठित
निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल, प्रशासन ने शुरू कराई जांच
सारांश
सिद्धार्थनगर जनपद के ढेबरुआ थाना क्षेत्र स्थित तुलसियापुर कस्बे में निर्माणाधीन मत्स्य मंडी गेट की शटरिंग और ढलाई संरचना अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। मलबे में दबकर एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया तथा तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

निर्माणाधीन सरकारी परियोजना में बड़ा हादसा, मजदूरों पर टूटा मौत बनकर मलबा
सिद्धार्थनगर। जनपद के ढेबरुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत तुलसियापुर कस्बे में बुधवार दोपहर उस समय चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई, जब निर्माणाधीन मत्स्य मंडी गेट का ढांचा अचानक भरभराकर ढह गया। देखते ही देखते भारी मात्रा में सीमेंट, गिट्टी, बालू और लोहे का मलबा वहां कार्य कर रहे मजदूरों के ऊपर आ गिरा। हादसे में एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर लगभग 12 बजे निर्माणाधीन गेट पर छत ढलाई का कार्य चल रहा था। आधा दर्जन से अधिक मजदूर निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। इसी दौरान अचानक शटरिंग और ढलाई का पूरा ढांचा संतुलन खो बैठा और भारी निर्माण सामग्री के साथ धराशायी हो गया। घटना इतनी अचानक हुई कि मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
मलबे में दबकर चली गई एक मजदूर की जान
हादसे में मड़नी गांव निवासी मुस्ताक (25 वर्ष) पुत्र किताबुल मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने जेसीबी की मदद से उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
पांच मजदूर गंभीर रूप से घायल
हादसे में धरूआर निवासी बुधीराम (45 वर्ष), राजेंद्र (20 वर्ष), मड़नी निवासी आलम (30 वर्ष), मानपुर निवासी रूपेश (32 वर्ष) तथा नेपाल के अमहवा निवासी रामदयाल (30 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

मौके पर मची अफरातफरी, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने जेसीबी की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया और मलबे में दबे मजदूरों को निकालने का प्रयास किया। कुछ देर तक घटनास्थल पर हालात बेहद भयावह बने रहे।

डीएम और एसएसपी ने किया निरीक्षण
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने निर्माण कार्य की स्थिति, दुर्घटना के कारणों और राहत कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद दोनों अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और भर्ती घायलों का हालचाल जाना।
तीन सदस्यीय जांच टीम गठित
जिलाधिकारी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। जांच टीम हादसे के कारणों, निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों के पालन तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा था। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों को सहायता का भरोसा
जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने घायलों तथा मृतक के परिजनों को हरसंभव प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा एवं पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है।
FT News Digital विशेष
रोटी की तलाश में निर्माण स्थल पहुंचे मजदूरों पर अचानक मौत बनकर टूटा मलबा। एक परिवार का सहारा हमेशा के लिए छिन गया, जबकि पांच अन्य अस्पताल में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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“घर लौट रहे दो भाइयों को मौत ने घेरा, सड़क हादसे में एक की जिंदगी थमी”
सड़क हादसे ने बुझा दिया घर का चिराग, भाई की आंखों के सामने चली गई जिंदगी
चिल्हिया थाना क्षेत्र के कड़वा बाजार के पास हुए सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। घर लौट रहे दो भाइयों की बाइक को पीछे से आए एक वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि उसका छोटा भाई गंभीर रूप से घायल होकर उपचाराधीन है।
सारांश
रिश्तेदारी से वापस लौट रहे दो भाइयों की बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने एक युवक को मृत घोषित कर दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
कंदवा बजार के पास दर्दनाक हादसा, एक युवक की मौत, भाई गंभीर
सिद्धार्थनगर/चिल्हिया। जिले के चिल्हिया थाना क्षेत्र में सोमवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। कंदवा बाजार के पास हुए इस हादसे में एक युवक की जान चली गई, जबकि उसका छोटा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के कठेला समय माता अंतर्गत कठेला बाजार निवासी शैलेष कसौधन (28) पुत्र मंगल कुमार कसौधन अपने छोटे भाई नीलेश (19) के साथ किसी रिश्तेदारी से वापस घर लौट रहे थे। बताया जाता है कि जैसे ही दोनों भाई बरगदवा से आगे कड़वा बाजार के समीप पहुंचे, तभी पीछे से आए एक वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों भाई सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को तत्काल उपचार के लिए जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज पहुंचाने में मदद की।
चिकित्सकों ने जांच के बाद शैलेष कसौधन को मृत घोषित कर दिया, जबकि घायल नीलेश का उपचार जारी है। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार और शुभचिंतकों का रो-रोकर बुरा हाल है।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस घटना के कारणों और वाहन की पहचान को लेकर जांच कर रही है।
थाना प्रभारी चिल्हिया राजेश गुप्ता ने बताया कि घटना की जानकारी प्राप्त हुई है। तहरीर मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
समापन
एक पल का यह हादसा एक परिवार के लिए जीवनभर का दर्द बन गया। जिस घर में शाम को दो भाई साथ लौटने वाले थे, वहां अब एक भाई की यादें और दूसरे के स्वस्थ होने की दुआएं बची हैं।
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मंगलवार पर उमड़ा आस्था का महासागर, सेवा में दिखी बजरंगबली की भक्ति
बड़े मंगलवार का महापर्व: बजरंगबली की कृपा से सेवा बनी भक्ति, उमड़ा आस्था का सागर
ज्येष्ठ अधिकमास के पांचवें बड़े मंगलवार पर सिद्धार्थनगर में आस्था, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड द्वारा आयोजित विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर संकटमोचन हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। भक्ति और मानव सेवा का यह आयोजन पूरे जिले में चर्चा का विषय बना रहा।
भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की आराधना के साथ आयोजित विशाल भंडारे में अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों और श्रद्धालुओं ने सेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने समाज को एकता, सद्भाव और मानवता का संदेश दिया।
भक्ति के रंग में रंगा सिद्धार्थनगर, बड़े मंगलवार पर उमड़ा आस्था का महासागर
सिद्धार्थनगर। जब भक्ति में सेवा का भाव जुड़ जाता है तो वह केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला प्रेरणास्रोत बन जाता है। ज्येष्ठ अधिकमास के पांचवें बड़े मंगलवार पर लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड, सिद्धार्थनगर के कार्यालय परिसर में आयोजित विशाल भंडारे ने इसी भावना को साकार किया।
बजरंगबली की पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और जय श्रीराम-जय बजरंगबली के गगनभेदी उद्घोष के बीच शुरू हुए इस आयोजन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरा परिसर भक्तिरस में डूबा दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था, हाथों में प्रसाद और हृदय में सेवा का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
सेवा भाव ने जीता सभी का दिल
इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि विभागीय अधिकारी और कर्मचारी स्वयं श्रद्धालुओं के बीच पहुंचकर प्रसाद वितरण करते नजर आए। किसी ने भोजन परोसा तो किसी ने पानी पिलाकर सेवा का धर्म निभाया। यह दृश्य बता रहा था कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें मानव सेवा का भाव समाहित हो।
भंडारे में महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, भाईचारा और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।
इनकी रही विशेष सहभागिता
इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड कमल किशोर तथा अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग आर.के. वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इसके अतिरिक्त अश्विनी गुप्ता, सुधीर कुमार, अनुराग यादव, सोहन गुप्ता, मनोज पासवान, विश्वास यादव, ज्ञानेश्वर पांडेय, कुशल पाठक, हनुमान प्रसाद, आनंद सिंह, अंशेश मिश्रा, आदित्य, सौरभ श्रीवास्तव, आनंद कनौजिया, मुनीश मीना तथा आनंद मिश्रा सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरे मनोयोग से आयोजन को सफल बनाया।
वहीं सम्मानित ठेकेदार बंधुओं में सिद्धार्थ सिंह, बृजेश दुबे, विकास सिंह, कुलदीप द्विवेदी, अजीत सिंह, संजय यादव, घनश्याम यादव और विनोद सिंह सहित समस्त ठेकेदार बंधुओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
समाज को मिला सेवा और संस्कार का संदेश
बड़े मंगलवार का यह आयोजन केवल भंडारा नहीं बल्कि सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता का महापर्व बन गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज के लोग अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर मानवता और सेवा के लिए कार्य करते हैं, तब धर्म अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई देता है।
समापन
“जहां सेवा में समर्पण हो, वहां ईश्वर की कृपा स्वयं उतर आती है। बड़े मंगलवार पर आयोजित यह भव्य भंडारा श्रद्धा, संस्कार और मानवता का ऐसा संगम बना, जिसकी मधुर स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के हृदय में जीवंत रहेंगी।”
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एसपी के आदेश पर सवाल? विशेष ड्यूटी के लिए नामित पुलिसकर्मी अब तक थानों से नहीं हुए रवानगी!
सिद्धार्थनगर पुलिस महकमे में जारी एक आधिकारिक आदेश चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष ड्यूटी हेतु पुलिस लाइन में रवानगी के निर्देश दिए जाने के बावजूद कई आरक्षियों के अब तक कार्यमुक्त न होने की बात सामने आ रही है। सवाल उठ रहा है कि आखिर आदेश जारी होने के बाद भी रवानगी प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है? हालांकि इस मामले में विभागीय पक्ष और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है।
विशेष ड्यूटी का आदेश, लेकिन रवानगी पर ब्रेक! आखिर कहां अटक रही है कार्रवाई?
सिद्धार्थनगर। जनपद पुलिस विभाग में विशेष ड्यूटी को लेकर जारी आदेश इन दिनों चर्चाओं के केंद्र में है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी पत्र के माध्यम से विभिन्न थानों में तैनात आरक्षियों को तीन माह की विशेष ड्यूटी के लिए पुलिस लाइन में रवाना किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
बताया जा रहा है कि 6 मई 2026 को जारी आदेश के बाद भी कई नामित पुलिसकर्मियों की रवानगी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है। इसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से पुनः पत्र जारी कर संबंधित थाना प्रभारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
शिवनगर डिडई सहित कई थानों के नाम चर्चा में
प्राप्त पत्रावली में विभिन्न थानों के कर्मचारियों का उल्लेख किया गया है। इनमें शिवनगर डिडई थाना क्षेत्र में तैनात एक आरक्षी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि उक्त कर्मचारी लंबे समय से क्षेत्र में प्रभाव बनाए हुए हैं और उनकी कार्यशैली को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।
हालांकि इस संबंध में किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध कोई विभागीय दोष सिद्ध नहीं हुआ है और न ही किसी सक्षम अधिकारी द्वारा कोई सार्वजनिक टिप्पणी की गई है।
उठ रहे कई सवाल
क्या विशेष ड्यूटी के आदेश का पूरी तरह अनुपालन हुआ?
यदि नहीं, तो रवानगी में देरी की वजह क्या है?
क्या संबंधित थानों से कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने में प्रशासनिक बाधाएं हैं?
दोबारा पत्र जारी होने के बाद भी कार्रवाई लंबित क्यों बताई जा रही है?
इन सवालों के जवाब विभागीय जांच अथवा संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
विभागीय पक्ष आना बाकी
पत्रावली में दर्ज तथ्यों के आधार पर यह मामला चर्चा में है। हालांकि निष्पक्ष पत्रकारिता के तहत यह उल्लेख करना आवश्यक है कि संबंधित थाना प्रभारियों, पुलिसकर्मियों अथवा पुलिस विभाग का विस्तृत पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यदि विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया आती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
FT NEWS DIGITAL EXCLUSIVE
“आदेश जारी, फिर भी रवानगी नहीं?”
“विशेष ड्यूटी पर उठे सवाल”
“क्या एसपी के निर्देशों का हुआ पालन?”
विशेष ड्यूटी के लिए जारी आदेश बना चर्चा का विषय
कई पुलिसकर्मियों की रवानगी पर उठे सवाल
दोबारा पत्र जारी होने की चर्चा
विभागीय स्पष्टीकरण का इंतजार
पुलिस महकमे में आदेश अनुपालन पर बहस
दस्तावेज सामने आने के बाद चर्चाएं तेज
कानूनी सुरक्षा नोट: यह समाचार उपलब्ध पत्रावली और दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें किसी व्यक्ति या अधिकारी पर दोष सिद्ध होने का दावा नहीं किया गया है। मामले से संबंधित अंतिम स्थिति विभागीय अभिलेखों, जांच और सक्षम अधिकारियों के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगी।
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“रिश्वतखोरी पर एसीबी का वार, कथित घूस लेते पटवारी ट्रैप”
भूमि सीमांकन के नाम पर कथित रिश्वतखोरी का मामला उजागर, एसीबी की कार्रवाई से क्षेत्र में मचा हड़कंप। पटवारी के ट्रैप होने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने खुशी जताई। वर्षों से शिकायतों से परेशान लोगों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया। हालांकि मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे।
एसीबी के शिकंजे में पटवारी, कार्रवाई से गूंजा पूरा इलाका
पाली। सरकारी दफ्तरों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पाली जिले के लाटाडा क्षेत्र में तैनात एक पटवारी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा कथित रूप से रिश्वत लेते हुए ट्रैप किए जाने की खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
सूत्रों के अनुसार भूमि सीमांकन से जुड़े एक मामले में शिकायतकर्ता ने पटवारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने आवश्यक सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर कार्रवाई को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि टीम ने आरोपी कर्मचारी को कथित रिश्वत राशि के साथ पकड़ने का दावा किया है।
कार्रवाई की सूचना गांव पहुंचते ही माहौल अचानक बदल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण पटवार भवन के बाहर एकत्र हो गए। स्थानीय लोगों ने खुशी का इजहार करते हुए इसे आम जनता की आवाज की जीत बताया। कई लोगों का कहना था कि लंबे समय से विभिन्न कार्यों को लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई थी।
ग्रामीणों में दिखा उत्साह, चर्चा का बना विषय
घटना के बाद पूरे इलाके में यही चर्चा रही कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां लगातार सख्त कदम उठा रही हैं। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को राहत मिलेगी।
हालांकि इस मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी शेष है। जांच एजेंसियां दस्तावेजों, शिकायत और अन्य साक्ष्यों की गहन पड़ताल कर रही हैं।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
मामले में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ पूर्व में भी शिकायतें होने की चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। एसीबी की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि शिकायतों पर कार्रवाई होने से व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को बल मिलता है।
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पेट्रोल पंप पर भरोसा या धोखा? एक पत्रकार के अनुभव ने खड़े किए बड़े सवाल
“800 रुपये का पेट्रोल डलवाया, लेकिन मन में उठ गया संदेह” – सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट ने छेड़ी नई बहस
“अगर एक जागरूक पत्रकार खुद को ठगा हुआ महसूस कर सकता है, तो आम उपभोक्ता कितना सुरक्षित है?”
सोशल मीडिया पर एक वरिष्ठ पत्रकार द्वारा साझा किए गए अनुभव ने पेट्रोल पंपों पर ईंधन की पारदर्शिता को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस पोस्ट ने लाखों उपभोक्ताओं को एक बार फिर सतर्क रहने का संदेश जरूर दिया है।
आंखों के सामने मीटर चला… और मन में उठ गए सवाल!
सिद्धार्थनगर। पेट्रोल पंप पर पहुंचने वाला हर ग्राहक यह मानकर चलता है कि उसे उसके पैसे के बदले पूरा ईंधन मिलेगा। लेकिन जब एक अनुभवी पत्रकार ने खुद अपने साथ हुई एक घटना को सोशल मीडिया पर साझा किया, तो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई कि आखिर पेट्रोल पंप पर ग्राहक कितना सतर्क है और कितना भरोसे के सहारे चलता है।
पत्रकार ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्हें आंख दिखाने के लिए नेपाल के भैरहवा जाना था। रास्ते में एक पेट्रोल पंप पर उन्होंने अपनी बुलेट मोटरसाइकिल में पेट्रोल भरवाने का निर्णय लिया। उनका दावा है कि बाइक रिजर्व में भी नहीं पहुंची थी और सामान्यतः ऐसी स्थिति में 500 से 600 रुपये के पेट्रोल में टंकी लगभग भर जाती है।
लेकिन इस बार जब पेट्रोल भरना शुरू हुआ तो मीटर 800 रुपये तक पहुंच गया। इसके बाद उनके मन में सवाल उठा कि आखिर इतनी राशि कैसे पहुंच गई?
“गलती मेरी भी थी…”
पत्रकार ने अपनी पोस्ट में साफ लिखा कि उन्होंने खुद मीटर पर लगातार नजर नहीं रखी। उनका कहना है कि वर्षों के अनुभव और भरोसे के कारण उन्होंने कर्मचारी पर विश्वास कर लिया।
यही वह बिंदु है जिसने इस घटना को सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि एक बड़ी सीख में बदल दिया।
पत्रकार का कहना है कि चाहे पेट्रोल पंप कितना भी प्रतिष्ठित क्यों न हो, ग्राहक को हमेशा मीटर और मशीन पर नजर रखनी चाहिए।
सवाल सिर्फ 200-300 रुपये का नहीं, भरोसे का है
पत्रकार ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि नुकसान की रकम से ज्यादा चिंता इस बात की है कि यदि किसी ग्राहक को संदेह पैदा हो जाए तो यह पूरे सिस्टम में भरोसे को प्रभावित करता है।
यही वजह है कि उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई और लोगों ने अपने-अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।
देशभर में समय-समय पर उठते रहे हैं ऐसे सवाल
उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल भरवाते समय ग्राहकों को कुछ बुनियादी सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए।
✔ मीटर शून्य से शुरू होते हुए देखें।
✔ भुगतान से पहले मात्रा और राशि की पुष्टि करें।
✔ जल्दबाजी में पेट्रोल न भरवाएं।
✔ संदेह होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
✔ मशीन की रीडिंग पर नजर बनाए रखें।
जागरूक ग्राहक ही सुरक्षित ग्राहक
यह मामला भले ही एक व्यक्ति के अनुभव से जुड़ा हो, लेकिन इससे निकलने वाला संदेश हर उपभोक्ता के लिए महत्वपूर्ण है। डिजिटल युग में भी सतर्कता की कोई जगह नहीं ले सकती।
पेट्रोल पंप पर कुछ सेकंड की सावधानी आपको संभावित नुकसान से बचा सकती है।
FT NEWS DIGITAL SPECIAL
यह समाचार एक पत्रकार द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। FT News Digital इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। समाचार का उद्देश्य किसी पेट्रोल पंप, कर्मचारी या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक करना है। यदि संबंधित पक्ष अपना पक्ष रखना चाहता है तो उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
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तेज रफ्तार ट्रक का कहर: मां-बेटे की दर्दनाक मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इटवा क्षेत्र में दिल दहला देने वाला सड़क हादसा, चालक वाहन छोड़कर फरार
सिद्धार्थनगर/इटवा। जनपद सिद्धार्थनगर के इटवा थाना क्षेत्र में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से बाइक सवार महिला और उसके मासूम बेटे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक चला रहा युवक घायल हो गया। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मायके जा रही थी महिला, रास्ते में काल बनकर आया ट्रक
मिली जानकारी के अनुसार, डुमरियागंज थाना क्षेत्र के कठौतिया गांव निवासी लगभग 25 वर्षीय दुर्गावती अपने एक वर्षीय पुत्र के साथ रिश्तेदार के साथ बाइक से मायके जा रही थीं। जब बाइक इटवा थाना क्षेत्र के चौखड़ा स्थित राजकीय महाविद्यालय के पास पहुंची, तभी पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने ओवरटेक के दौरान बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई। महिला और उसका मासूम बेटा ट्रक की चपेट में आ गए, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बाइक चला रहा युवक घायल हो गया, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया।
⚫ हादसे के बाद मचा चीख-पुकार का माहौल
दुर्घटना होते ही आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। कुछ ही देर में मौके पर भारी भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर पुलिस टीम पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया है। �
⚫ परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
स्थानीय लोगों के अनुसार मृतका का परिवार इस हादसे से पूरी तरह टूट गया है। मां और मासूम बेटे की एक साथ मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है।
⚫ पुलिस कर रही कानूनी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रक को कब्जे में ले लिया गया है तथा फरार चालक की तलाश की जा रही है। परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
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सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहे सवाल, प्रशासन ने बनाई विशेष टास्क फोर्स
अवैध और अनियमित चिकित्सा केंद्रों की शिकायतों के बीच कार्रवाई की तैयारी
सिद्धार्थनगर।
जनपद सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से समय-समय पर अस्पतालों, पैथोलॉजी लैबों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर मानकों के अनुपालन और चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर जांच की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि क्या सभी चिकित्सा संस्थान निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संचालित कुछ चिकित्सा केंद्रों को लेकर भी लोगों द्वारा समय-समय पर शिकायतें की जाती रही हैं।
जानकारों का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा कोई भी संस्थान सीधे तौर पर लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा होता है। ऐसे में मानकों का पालन और नियमित निरीक्षण बेहद आवश्यक हो जाता है। यदि कहीं भी नियमों की अनदेखी होती है तो इसका प्रभाव सीधे मरीजों पर पड़ सकता है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर जब जिला प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि अवैध अथवा अनियमित रूप से संचालित चिकित्सा संस्थानों की निगरानी के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित की गई है। यह टीम लगातार निगरानी कर रही है और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में अभियान चलाकर ऐसे संस्थानों की जांच की जाएगी जो नियमों के अनुरूप संचालित नहीं पाए जाते हैं। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
अब जिले की जनता की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि जांच और निरीक्षण अभियान के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस रूप में सामने आता है।
प्रशासन का पक्ष
जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की गई है और आवश्यकतानुसार जांच एवं कार्रवाई की जाएगी।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह समाचार जनहित में उपलब्ध शिकायतों, स्थानीय चर्चाओं एवं प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर आधारित है। किसी भी संस्था या व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी शेष है। समाचार का उद्देश्य केवल जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल
अस्पतालों और लैबों के संचालन को लेकर शिकायतें
मानकों के पालन पर उठ रहे प्रश्न
प्रशासन ने बनाई विशेष टास्क फोर्स
जांच और कार्रवाई का दावा
जनता को अभियान के परिणाम का इंतजार
क्या बोले जिलाधिकारी? ✔ विशेष टास्क फोर्स का गठन
✔ लगातार निगरानी के निर्देश
✔ जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन
✔ अनियमितता मिलने पर सख्त कदम
सारांश
सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जिला प्रशासन ने विशेष टास्क फोर्स गठित कर जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच अभियान के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं।
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हाईकोर्ट के सख्त तेवर: अरेस्ट स्टे के बावजूद गिरफ्तारी पर सरकार को 5 लाख मुआवजा देने का आदेश
इटवा थाना प्रकरण में कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, थाना प्रभारी पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश
सिद्धार्थनगर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक (अरेस्ट स्टे) के बावजूद एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को एक माह के भीतर पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जब किसी व्यक्ति को न्यायालय से अंतरिम संरक्षण प्राप्त हो चुका हो, तब उसकी गिरफ्तारी करना न्यायालय के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मामला सिद्धार्थनगर जनपद के इटवा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। न्यायालय में दाखिल याचिका के अनुसार एक युवक के विरुद्ध दुष्कर्म एवं एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। युवक ने उक्त मुकदमे को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय की शरण ली थी, जहां से उसे गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्राप्त हुई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने के बावजूद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले को पुनः न्यायालय के समक्ष उठाए जाने पर खंडपीठ ने पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि जब न्यायालय का आदेश पारित हुआ था, तब सरकारी पक्ष के अधिवक्ता अदालत में मौजूद थे। ऐसे में आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक न पहुंचने का तर्क स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदेश में यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है कि या तो न्यायालय के आदेश समय से अधिकारियों तक नहीं पहुंचाए जाते, अथवा कुछ मामलों में आदेशों की अनदेखी की जाती है। न्यायालय ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय बताया।
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़ित पक्ष को एक माह के भीतर पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार उचित समझे तो उक्त धनराशि की वसूली संबंधित जिम्मेदार अधिकारी से की जा सकती है।
न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को 13 जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुपालन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
महत्वपूर्ण
यह समाचार न्यायालय के आदेश और उपलब्ध न्यायिक अभिलेखों पर आधारित है। मामले से संबंधित आरोपों एवं तथ्यों का अंतिम सत्यापन न्यायिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारियों के निर्णय के अधीन रहेगा।
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प्रधानों को मिला नया संबल, गांवों के विकास को मिलेगी दोगुनी रफ्तार
गांवों के विकास को मिली नई रफ्तार, प्रधानों को अतिरिक्त समय देने के निर्णय का स्वागत
केंद्र और प्रदेश सरकार की जनहितकारी सोच से ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगा बल
सिद्धार्थनगर। ग्रामीण विकास को गति देने और गांवों में चल रहे जनकल्याणकारी कार्यों की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया निर्णय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्राम पंचायत बरगदी, विकासखंड बर्डपुर के ग्राम प्रधान प्रभात चौधरी ने ग्राम प्रधानों को अतिरिक्त समय दिए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए केंद्र एवं प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।
ग्राम प्रधान प्रभात चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गांवों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सड़क, आवास, पेयजल, शौचालय, विद्युत आपूर्ति और अन्य आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में कई विकास योजनाएं वर्तमान में क्रियान्वयन की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में ग्राम प्रधानों को अतिरिक्त समय मिलने से अधूरे कार्यों को पूरा करने, नई योजनाओं को आगे बढ़ाने और जनता तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहायता मिलेगी।
प्रभात चौधरी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की मंशा गांव, गरीब, किसान और आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना है। सरकार द्वारा पंचायतों को मजबूत बनाने और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह निर्णय भी उसी सोच का हिस्सा है, जिससे विकास कार्यों की गति बनी रहे और जनहित प्रभावित न हो।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश शासन के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। इससे गांवों में चल रहे विकास कार्यों को मजबूती मिलेगी और जनता को योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त हो सकेगा।
ग्रामीणों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे विकास परियोजनाओं की निरंतरता बनी रहेगी और गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
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कटान रोधी कार्यों पर उठे सवाल, विधायक ने जिलाधिकारी से मांगा जमीनी सत्यापन
जनप्रतिनिधि ने कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर जताई चिंता, प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में संचालित कटान रोधी परियोजनाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय विधायक विनय वर्मा ने सार्वजनिक रूप से जारी अपने बयान में कटान रोधी कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति पर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी से जमीनी स्तर पर सत्यापन कराने की मांग की है।

विधायक का कहना है कि उन्हें क्षेत्रीय नागरिकों और स्थानीय लोगों द्वारा कुछ वीडियो एवं सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें कटान रोधी कार्यों की स्थिति अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि जमीनी स्तर पर मिल रही जानकारियां और विभागीय रिपोर्टों में अंतर नजर आ रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
विधायक विनय वर्मा ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पूर्व में भी प्रशासन से अनुरोध किया था कि करोड़ों रुपये की लागत से चल रही परियोजनाओं का सत्यापन जनप्रतिनिधियों, स्थानीय लोगों और मीडिया की उपस्थिति में कराया जाए, ताकि कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि कटान रोधी परियोजनाएं सीधे तौर पर क्षेत्र की सुरक्षा, किसानों की भूमि और ग्रामीण आबादी के हितों से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का समय रहते समाधान किया जाना आवश्यक है।

विधायक ने प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। उन्होंने मानसून से पूर्व निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यों को मानक के अनुरूप पूरा कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
हालांकि, विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों पर प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल कटान रोधी कार्यों को लेकर उठे सवालों ने जिले में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हुई हैं।
विधायक की प्रमुख मांगें 🔹 कटान रोधी कार्यों का जमीनी सत्यापन
🔹 गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच
🔹 मानसून से पहले कार्य पूर्ण कराने की व्यवस्था
🔹 पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग
🔹 जनता और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर संज्ञान
क्या है विवाद का केंद्र?
कटान रोधी कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल
जमीनी हकीकत और रिपोर्ट में अंतर का दावा
विधायक ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की
करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर उठी चर्चा
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा ने कटान रोधी कार्यों की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी से जमीनी सत्यापन और पारदर्शी जांच की मांग की है। प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
संपादकीय नोट: इस खबर में विधायक के सार्वजनिक बयान और दावों को आधार बनाया गया है। किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय जांच और प्रशासनिक तथ्यों के आधार पर ही निर्धारित होगा।
