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दूधवानिया खुर्द में जाम नालियां, गलियों में गंदगी; ग्रामीणों ने उठाए सफाई व्यवस्था पर सवाल
बारिश ने बढ़ाई परेशानी, नालियों में जमा गंदा पानी और कूड़ा; ग्रामीणों का दावा—कई महीनों से नियमित सफाई नहीं, जिम्मेदारों से कार्रवाई की मांग
बढ़नी/सिद्धार्थनगर। स्वच्छता और गांवों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं के सरकारी प्रयासों के बीच विकास खंड बढ़नी की ग्राम पंचायत दूधवानिया खुर्द से सामने आई तस्वीरों ने स्थानीय सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के कुछ हिस्सों में नालियों में गंदा पानी ठहरा दिखाई दे रहा है। कहीं प्लास्टिक और कूड़ा जमा है तो कहीं नालियों के किनारे उगी घास जल निकासी की समस्या को और गंभीर बनाती नजर आ रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण बरसात में परेशानी बढ़ गई है। जल निकासी बाधित होने से कई स्थानों पर गंदा पानी जमा रहता है और दुर्गंध तथा मच्छरों से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तस्वीरों में दिखी जमीनी स्थिति
स्थानीय स्तर से उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में गांव के अलग-अलग स्थानों पर नालियों में गंदा पानी, प्लास्टिक और अन्य कचरा जमा दिखाई दे रहा है। कुछ जगह नालियां घास और झाड़ियों से घिरी हुई हैं।
हालांकि इन तस्वीरों के आधार पर यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि गांव की पूरी सफाई व्यवस्था कितने समय से ऐसी है या इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है। इन पहलुओं की पुष्टि संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत के अभिलेखों तथा स्थलीय जांच से होनी चाहिए।
ग्रामीण बोले—कई महीनों से बनी है समस्या
ग्रामीणों का दावा है कि नालियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि नियमित सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है।
ग्रामीण बबलू गुप्ता, अनिल सैनी, पूजी यादव, जटा शंकर वर्मा, विनय सैनी, सुकदेव गौतम और लालू साहनी ने प्रशासन से समस्या का संज्ञान लेकर सफाई कराने की मांग की है।
गंदा पानी और मच्छर बने चिंता का कारण
स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों में गंदा पानी जमा रहने से दुर्गंध और मच्छरों की समस्या बढ़ रही है। ग्रामीणों ने इससे बीमारी फैलने की आशंका भी जताई है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि डेंगू, मलेरिया या किसी अन्य बीमारी के वास्तविक प्रसार की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से ही हो सकती है। ग्रामीणों द्वारा फिलहाल बीमारी फैलने की आशंका व्यक्त की गई है।
सवाल सिर्फ गंदगी का नहीं, जवाबदेही का भी
दूधवानिया खुर्द की तस्वीरों से सामने आ रही समस्या केवल गंदगी तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि गांव में नालियों की नियमित सफाई का निर्धारित रोस्टर क्या है? सफाई कर्मचारी कितनी नियमितता से गांव पहुंच रहे हैं? अंतिम बार नालियों की व्यापक सफाई कब कराई गई? और जल निकासी की स्थायी समस्या दूर करने के लिए ग्राम पंचायत के स्तर पर क्या कदम उठाए गए?
इन सवालों का जवाब ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सरकारी धन पर आरोप, जांच के बिना निष्कर्ष नहीं
कुछ ग्रामीणों ने गांव के विकास और सफाई के लिए मिलने वाले सरकारी धन के समुचित उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि सिर्फ नालियों की मौजूदा स्थिति के आधार पर सरकारी धन के दुरुपयोग या वित्तीय अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए स्वीकृत बजट, भुगतान, कार्यों के अभिलेख और स्थलीय सत्यापन की आवश्यकता होगी।
यदि ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर प्रशासन जांच कराता है तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
विशेष सफाई अभियान चलाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में विशेष सफाई अभियान चलाने, जाम नालियों की सफाई कराने और जहां आवश्यक हो वहां क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि यदि सफाई व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सारांश
स्थान: ग्राम पंचायत दूधवानिया खुर्द, विकास खंड बढ़नी
समस्या: नालियों में गंदा पानी एवं कूड़ा जमा होने की शिकायत
ग्रामीणों का दावा: लंबे समय से नियमित सफाई नहीं
तस्वीरों में: नालियों में पानी, कचरा और कई स्थानों पर घास-झाड़ियां
ग्रामीणों की चिंता: दुर्गंध, मच्छर और संक्रमण का संभावित खतरा
मांग: विशेष सफाई अभियान एवं जल निकासी की व्यवस्था
अन्य आरोप: विकास/सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
स्थिति: संबंधित ग्राम पंचायत/अधिकारियों का पक्ष लिया जाना शेष
तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं, जवाब जिम्मेदारों को देना होगा
स्वच्छता किसी गांव की केवल सुंदरता का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और नागरिक सुविधा से जुड़ा बुनियादी मुद्दा है। दूधवानिया खुर्द से सामने आई तस्वीरों में यदि नालियों में जमा पानी और कचरे की स्थिति नियमित रूप से बनी हुई है, तो संबंधित जिम्मेदारों को इसका समाधान प्राथमिकता से करना चाहिए।
साथ ही आरोपों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। बिना अभिलेखीय जांच किसी पर सरकारी धन के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार का आरोप स्थापित नहीं किया जा सकता। प्रशासन को ग्रामीणों की शिकायत का सत्यापन कराकर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए और यदि कहीं वास्तविक लापरवाही मिले तो नियमानुसार जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
नोट: खबर स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी एवं उपलब्ध तस्वीरों पर आधारित है। संबंधित ग्राम पंचायत/अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया की बड़ी खेप पकड़ी, 40 बोरी खाद और ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद
अलीगढ़वा बॉर्डर पर SSB-पुलिस की संयुक्त कार्रवाई; नेपाल की ओर जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोका, एक व्यक्ति पकड़ा गया, दूसरा मौके से भागा—SSB
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया खाद की कथित अवैध आवाजाही के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई की है। 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) की सीमा चौकी अलीगढ़वा और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त विशेष गश्ती के दौरान 40 बोरी यूरिया खाद और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। एसएसबी के मुताबिक मौके से एक व्यक्ति को पकड़ा गया, जबकि दूसरा व्यक्ति ड्यूटी पार्टी को देखकर भाग गया।
एसएसबी द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह कार्रवाई 2 अगस्त 2026 को प्राप्त आसूचना के आधार पर की गई। एसएसबी और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम सीमा स्तंभ संख्या 549 के समीप बड़ा ठाकुरपुर इलाके में विशेष गश्ती ड्यूटी पर तैनात थी।
इसी दौरान सामान लदी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली नेपाल की तरफ जाती दिखाई दी। एसएसबी का दावा है कि ट्रैक्टर पर दो व्यक्ति सवार थे। संयुक्त टीम को देखकर उनमें से एक व्यक्ति मौके से भाग गया, जबकि दूसरे को टीम ने पकड़ लिया।
| ट्रैक्टर-ट्रॉली में मिलीं 40 बोरी यूरिया
एसएसबी के मुताबिक ट्रैक्टर-ट्रॉली के पास पहुंचकर जांच की गई तो उसमें 40 बोरी यूरिया खाद लदी मिली। पकड़े गए व्यक्ति से खाद के संबंध में पूछताछ की गई। एसएसबी का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर यूरिया खाद और ट्रैक्टर-ट्रॉली को बरामद कर लिया गया।
क्या-क्या हुआ बरामद?
कार्रवाई: SSB और यूपी पुलिस की संयुक्त विशेष गश्त
स्थान: सीमा स्तंभ संख्या 549 के समीप बड़ा ठाकुरपुर
बरामदगी: 40 बोरी यूरिया खाद
वाहन: एक ट्रैक्टर-ट्रॉली
पकड़ा गया: एक व्यक्ति
अन्य व्यक्ति: SSB के अनुसार मौके से भागा
अगली कार्रवाई: बरामद सामान, वाहन और पकड़ा गया व्यक्ति कपिलवस्तु पुलिस को सुपुर्द
नेपाल की तरफ जाने की कोशिश का दावा
एसएसबी की ओर से जारी विवरण में दावा किया गया है कि यूरिया खाद से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली नेपाल की तरफ जाने की कोशिश कर रही थी। हालांकि खाद कहां से लाई गई, उसका वास्तविक गंतव्य क्या था और उसके परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज मौजूद थे या नहीं—इन तथ्यों की अंतिम स्थिति संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान बताई
एसएसबी द्वारा जारी प्रेस सूचना के मुताबिक पकड़े गए व्यक्ति ने पूछताछ में अपना नाम तबारक अली पुत्र स्व. मुमताज अली, उम्र करीब 37 वर्ष, निवासी ग्राम महादेव कुर्मी, बर्डपुर, थाना कपिलवस्तु, जनपद सिद्धार्थनगर बताया।
यह उल्लेख जरूरी है कि पकड़े जाने या किसी वस्तु की बरामदगी मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाता। मामले में उसकी भूमिका और कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण जांच एवं सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
बॉर्डर पर यूरिया की आवाजाही ने खड़े किए सवाल
भारत-नेपाल की खुली सीमा से सटे इलाकों में खाद की आवाजाही पर सुरक्षा एजेंसियों की यह कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है। आखिर 40 बोरी यूरिया कहां से लाई गई थी? इसे कहां पहुंचाया जाना था? क्या इसके परिवहन से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध थे? और एसएसबी के मुताबिक मौके से भागने वाला दूसरा व्यक्ति कौन था?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
एसएसबी के अनुसार बरामद 40 बोरी यूरिया खाद, ट्रैक्टर-ट्रॉली और पकड़े गए व्यक्ति को थाना कपिलवस्तु पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। आगे की आवश्यक विधिक कार्रवाई संबंधित पुलिस द्वारा की जानी है।
SSB का दावा | सीमा पर लगातार निगरानी
43वीं वाहिनी एसएसबी का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। बल के मुताबिक तस्करी के सामान, मानव तस्करी, नशीले पदार्थ/दवाओं की अवैध आवाजाही, अवैध मुद्रा और वन्यजीव से जुड़े मामलों सहित अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है।
जांच बताएगी 40 बोरी यूरिया की पूरी कहानी
सीमावर्ती क्षेत्र में किसानों के लिए महत्वपूर्ण यूरिया खाद की इतनी मात्रा नेपाल सीमा की ओर ले जाए जाने संबंधी एसएसबी की सूचना निश्चित रूप से जांच का विषय है। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि खाद का स्रोत क्या था, इसे कहां ले जाया जा रहा था और परिवहन के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
मौके से एक व्यक्ति के भागने संबंधी एसएसबी के दावे की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। निष्पक्ष जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों से ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
सारांश
घटना: यूरिया खाद के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़े जाने का दावा
दिनांक: 02 अगस्त 2026
स्थान: बड़ा ठाकुरपुर, सीमा स्तंभ संख्या 549 के समीप
एजेंसी: 43वीं वाहिनी SSB एवं उत्तर प्रदेश पुलिस
बरामदगी: 40 बोरी यूरिया खाद और ट्रैक्टर-ट्रॉली
कार्रवाई: एक व्यक्ति पकड़ा गया
SSB का दावा: दूसरा व्यक्ति मौके से भागा
स्थिति: मामला कपिलवस्तु पुलिस को सुपुर्द, आगे की विधिक कार्रवाई अपेक्षित
चिल्हिया में रेलवे ट्रैक पर मिला अज्ञात युवक का शव, इलाके में सनसनी; शिनाख्त में जुटी पुलिस
स्टेशन मास्टर के मेमो पर पहुंची चिल्हिया पुलिस, करीब 30 वर्षीय युवक की अभी नहीं हो सकी पहचान; मौत की परिस्थितियां जांच का विषय
सिद्धार्थनगर/चिल्हिया। चिल्हिया थाना क्षेत्र में मंगलवार तड़के रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई। ग्राम गौहनिया के पास रेलवे ट्रैक पर मिले शव की उम्र करीब 30 वर्ष बताई जा रही है। सूचना मिलने के बाद चिल्हिया पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त कराने के प्रयास के साथ आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 04 अगस्त 2026 को रात करीब 2 बजे चिल्हिया रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर ने मेमो के माध्यम से स्थानीय थाना पुलिस को ग्राम गौहनिया के पास रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात युवक का शव मिलने की सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान तत्काल नहीं हो सकी। शव को पुलिस अभिरक्षा में लेकर उसकी शिनाख्त कराने तथा मामले में अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।
शरीर पर अंडरवियर के अलावा नहीं मिले अन्य कपड़े
पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतक की उम्र करीब 30 वर्ष आंकी जा रही है। शव मिलने के समय युवक के शरीर पर अंडरवियर के अलावा अन्य कपड़े नहीं पाए गए। यह परिस्थिति जांच का विषय है। इसके आधार पर मौत के कारण या घटनाक्रम को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना फिलहाल उचित नहीं होगा।
रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंचा युवक?
इस घटना में सबसे बड़ा सवाल है कि अज्ञात युवक रेलवे ट्रैक तक कब और किन परिस्थितियों में पहुंचा। उसकी मौत किसी रेल दुर्घटना के कारण हुई अथवा इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति रही—इस संबंध में उपलब्ध प्रारंभिक सूचना में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
ऐसे में मौत को दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या या किसी अन्य कारण से जोड़ना जांच पूरी होने से पहले महज अटकल होगी। पुलिस की जांच और संबंधित विधिक प्रक्रिया के बाद ही मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
पहचान बनी पुलिस के सामने पहली चुनौती
मृतक की शिनाख्त इस मामले की अहम कड़ी है। पहचान होने के बाद उसके परिजनों से संपर्क, युवक की पृष्ठभूमि और घटना से पहले उसकी गतिविधियों के संबंध में जानकारी मिलने की संभावना है। पुलिस फिलहाल मृतक की पहचान कराने का प्रयास कर रही है।
| प्रत्यक्षदर्शियों के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं
घटनास्थल से जुड़े कुछ प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा मृतक के धर्म/समुदाय को लेकर दावा किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन उपलब्ध सूचना के आधार पर उसकी पहचान अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुई है। इसलिए FT News Digital मृतक की धार्मिक अथवा सामुदायिक पहचान को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहा है।
अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
अज्ञात युवक कौन था और कहां का रहने वाला था?
वह गौहनिया के पास रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंचा?
शरीर पर अन्य कपड़े क्यों नहीं थे?
उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई?
क्या घटना से पहले किसी ने युवक को आसपास देखा था?
शिनाख्त के बाद क्या सामने आएगा पूरा घटनाक्रम?
इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच, मृतक की शिनाख्त और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
सारांश
स्थान: ग्राम गौहनिया के पास रेलवे ट्रैक, थाना चिल्हिया क्षेत्र
तारीख: 04 अगस्त 2026
समय: लगभग 02:00 बजे रात्रि
मृतक: करीब 30 वर्षीय अज्ञात युवक
सूचना: चिल्हिया रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर द्वारा मेमो के माध्यम से पुलिस को
स्थिति: मृतक की शिनाख्त का प्रयास जारी
पुलिस कार्रवाई: शव को कब्जे में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई
मौत का कारण: अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं
थाईलैंड में सिद्धार्थनगर के खिलाड़ियों का परचम, एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीत बढ़ाया भारत का मान

बुद्ध की धरती के तीन होनहारों ने अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में दिखाया दम; समर वर्मा बने स्वर्ण विजेता, सात वर्षीय देवम पासवान और दिलीप कुमार पासवान ने जीते रजत पदक

सिद्धार्थनगर। जिस सिद्धार्थनगर की पहचान पूरी दुनिया में भगवान बुद्ध की धरती के रूप में होती है, उसी धरती के खिलाड़ियों ने अब विदेशी खेल मैदान पर अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी है। थाईलैंड के पटाया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में सिद्धार्थनगर के तीन खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल कर जिले के साथ उत्तर प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है।

हाथों में तिरंगा, गले में पदक और चेहरे पर जीत की मुस्कान लिए इन खिलाड़ियों की तस्वीरें सिद्धार्थनगर के लिए गौरव का क्षण बन गई हैं। खास बात यह है कि पदक जीतने वालों में महज सात वर्षीय देवम पासवान भी शामिल हैं, जिन्होंने इतनी कम उम्र में विदेशी धरती पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रजत पदक हासिल किया।
एक नजर में उपलब्धि
प्रतियोगिता: 9वीं हीरोज ताइक्वांडो अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026
स्थान: पटाया, थाईलैंड
आयोजन: 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026
समर वर्मा: 🥇 स्वर्ण पदक
देवम पासवान (7 वर्ष): 🥈 रजत पदक
दिलीप कुमार पासवान: 🥈 रजत पदक
🥇 समर वर्मा का स्वर्णिम प्रदर्शन, तिरंगे के साथ मनाया जीत का जश्न
प्रतियोगिता में समर वर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली यह कामयाबी न सिर्फ उनके खेल जीवन की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि सिद्धार्थनगर के लिए भी गर्व का विषय है।

गले में स्वर्ण पदक और पीछे फैला भारतीय तिरंगा—समर की यह तस्वीर उस मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी कह रही है, जिसने सिद्धार्थनगर के खिलाड़ी को थाईलैंड में विजेता बनाया।
सात साल के देवम का बड़ा कमाल
इस सफलता की सबसे प्रेरक कहानियों में सात वर्षीय देवम पासवान का नाम भी शामिल है।
जिस उम्र में अधिकांश बच्चे खेल-कूद की शुरुआती बारीकियां सीखते हैं, उस उम्र में देवम अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार देवम ने मेजबान थाईलैंड के खिलाड़ी को कड़ी चुनौती दी और रजत पदक अपने नाम किया।
छोटी सी उम्र… अंतरराष्ट्रीय मंच… सामने विदेशी प्रतिद्वंद्वी और कंधों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी—इन सबके बीच देवम का पदक तक पहुंचना उनकी प्रतिभा और हौसले को दर्शाता है।
नन्हे चैंपियन की बड़ी उड़ान
सिर्फ सात साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व और रजत पदक—देवम पासवान की उपलब्धि जिले के दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

दिलीप कुमार पासवान ने भी प्रतियोगिता में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिलीप कुमार पासवान ने पाकिस्तान के खिलाड़ी के खिलाफ मुकाबले में नॉकआउट जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद फाइनल मुकाबले में उनका सामना श्रीलंका के खिलाड़ी से हुआ।
कड़े संघर्ष के बाद दिलीप कुमार पासवान ने रजत पदक हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका यह प्रदर्शन सिद्धार्थनगर के खेल इतिहास में यादगार उपलब्धियों में शामिल होने वाला है।

37 देशों के खिलाड़ियों के बीच दिखाया दम
उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के पटाया में आयोजित प्रतियोगिता में 37 देशों के खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया।
ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर सिद्धार्थनगर के तीन खिलाड़ियों का पदक जीतना इस उपलब्धि को और खास बना देता है।
तीनों खिलाड़ियों ने मिलकर भारत के खाते में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जोड़े और विदेशी धरती पर सिद्धार्थनगर की खेल प्रतिभा की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
सिद्धार्थनगर का गौरव
एक स्वर्ण + दो रजत पदक
छोटे जिले के खिलाड़ियों की बड़ी अंतरराष्ट्रीय उड़ान।
थाईलैंड में तिरंगे के साथ चमका सिद्धार्थनगर का नाम।
तस्वीरें खुद बयां कर रहीं सफलता की कहानी
प्रतियोगिता से सामने आई तस्वीरों में भारतीय खिलाड़ी तिरंगे के साथ अपनी जीत का जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। कहीं खिलाड़ी पदक और प्रमाणपत्र के साथ खड़े हैं तो कहीं पूरी भारतीय टीम तिरंगा लेकर इस उपलब्धि को साझा कर रही है।
इन तस्वीरों में सिर्फ पदक नहीं हैं—इनमें वर्षों की तैयारी, अभ्यास, अनुशासन और देश के लिए खेलने का गर्व भी दिखाई देता है।

छोटे शहरों की प्रतिभा को मिले मंच तो दुनिया जीतने का है दम
सिद्धार्थनगर के इन खिलाड़ियों की उपलब्धि एक बड़ा संदेश भी देती है। प्रतिभा केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे जिलों और कस्बों में भी ऐसी प्रतिभाएं मौजूद हैं जिन्हें बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिलें तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
आज समर वर्मा, देवम पासवान और दिलीप कुमार पासवान की सफलता सिद्धार्थनगर के उन तमाम बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो खेल के मैदान से अपने भविष्य की नई कहानी लिखना चाहते हैं।
सारांश
थाईलैंड की धरती पर मिली यह सफलता केवल तीन पदकों की कहानी नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे सपनों की कहानी है।
समर का स्वर्ण, देवम और दिलीप के रजत पदक तथा खिलाड़ियों के हाथों में लहराता तिरंगा—यह दृश्य सिद्धार्थनगर के लिए लंबे समय तक गर्व का क्षण बना रहेगा।
बुद्ध की धरती के इन होनहारों ने संदेश दे दिया है—हौसला बड़ा हो, मेहनत लगातार हो और लक्ष्य देश का मान बढ़ाना हो, तो सिद्धार्थनगर से निकली प्रतिभा भी दुनिया के मंच पर अपनी चमक बिखेर सकती है।
प्रधानमंत्री को लेकर कथित आपत्तिजनक वीडियो पर सिद्धार्थनगर में बवाल, पुलिस तक पहुंची शिकायत; जांच के बाद खुलेगा वायरल सामग्री का सच
प्रधानमंत्री को लेकर कथित आपत्तिजनक वीडियो पर सिद्धार्थनगर में बवाल, पुलिस तक पहुंची शिकायत; जांच के बाद खुलेगा वायरल सामग्री का सच

त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के बिस्कोहर पुलिस चौकी इलाके से जुड़ा मामला, शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद ने पुलिस को दिया शिकायती पत्र; निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

सिद्धार्थनगर।
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक और हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित किए गए वीडियो का मामला सिद्धार्थनगर में पुलिस तक पहुंच गया है।
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र की बिस्कोहर पुलिस चौकी अंतर्गत क्षेत्र से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट पर कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में मोहम्मद सईद नामक व्यक्ति ने पुलिस को लिखित शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित तौर पर हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित करने वाला वीडियो प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत में अन्य कथित सोशल मीडिया सामग्री का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। FT News Digital कथित वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, उसके मूल स्रोत, उसे बनाने वाले व्यक्ति अथवा उसे पहली बार अपलोड करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
वीडियो वास्तव में AI तकनीक से बनाया गया है, डिजिटल रूप से एडिट किया गया है या किसी अन्य तरीके से तैयार किया गया है, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल, अब डिजिटल जांच से सामने आएगा सच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया वीडियो का मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।
वीडियो आखिर किसने बनाया?
इसे सबसे पहले किस सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया?
क्या वीडियो AI तकनीक से बनाया गया है या किसी वास्तविक वीडियो में डिजिटल छेड़छाड़ की गई है?
जिस व्यक्ति पर वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया जा रहा है, क्या संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट वास्तव में उसी व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है?
इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और आवश्यक डिजिटल परीक्षण के बाद ही सामने आ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता मोहम्मद सईद की ओर से पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो को लेकर आपत्ति जताई गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक एवं हिंसात्मक दृश्य वाला वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है।
शिकायत में इस तरह की सामग्री से अशांति पैदा होने की आशंका जताते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
फिलहाल यह शिकायतकर्ता का आरोप है। आरोपों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर होना बाकी है।
इनबॉक्स
वीडियो असली या AI, जांच का बड़ा सवाल
आज के दौर में AI और डिजिटल एडिटिंग तकनीक के जरिए वास्तविक दिखने वाले वीडियो तैयार करना संभव है।
यही कारण है कि केवल किसी वीडियो के वायरल होने को उसकी सत्यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
इस मामले में भी यह पता लगाना जरूरी होगा कि वायरल सामग्री का मूल स्रोत क्या है, वीडियो कब और कहां तैयार हुआ, क्या उसमें डिजिटल छेड़छाड़ की गई और उसे सोशल मीडिया पर सबसे पहले किसने प्रसारित किया।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ही इन सवालों का विश्वसनीय जवाब सामने आ सकेगा।
पुलिस ने जांच कर कार्रवाई की कही बात
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक त्रिलोकपुर थाना प्रभारी की ओर से मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि शिकायती पत्र में लगाए गए आरोप सिद्ध हो गए हैं।
पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही यह निर्धारित होगा कि किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं और आगे किस प्रकार की विधिक कार्रवाई आवश्यक है।
FT News Digital नहीं कर रहा कथित आपत्तिजनक वीडियो का पुनः प्रसारण
FT News Digital इस मामले में कथित आपत्तिजनक वीडियो को खबर के नाम पर दोबारा प्रसारित करने से बच रहा है।
खबर का आधार शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को दिया गया शिकायती पत्र, शिकायतकर्ता का उपलब्ध पक्ष और पुलिस की ओर से जांच कर कार्रवाई किए जाने की जानकारी है।
चैनल कथित वायरल वीडियो की सत्यता अथवा उसे बनाने और प्रसारित करने वाले व्यक्ति के संबंध में कोई स्वतंत्र दावा नहीं कर रहा है।
वायरल होना सबूत नहीं, जांच बताएगी कौन है जिम्मेदार
सोशल मीडिया की दुनिया में कोई सामग्री कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकती है, लेकिन वायरल होना किसी वीडियो के वास्तविक होने या किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
यदि जांच में आपत्तिजनक अथवा कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री जानबूझकर तैयार या प्रसारित किए जाने के साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई पुलिस और संबंधित एजेंसियों का विषय होगा।
दूसरी ओर यदि वीडियो के स्रोत या सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर किए गए दावे गलत पाए जाते हैं तो वह तथ्य भी जांच से ही स्पष्ट होगा।
इसीलिए इस मामले में अनुमान के बजाय डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण है।
टिप्पणी
सोशल मीडिया की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और सामग्री साझा करने की ताकत दी है, लेकिन इसके साथ कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी है।
किसी भी व्यक्ति, विशेषकर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को लेकर कथित हिंसात्मक या आपत्तिजनक सामग्री सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उतना ही जरूरी यह भी है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया ट्रायल के जरिए अपराधी घोषित न किया जाए।
सिद्धार्थनगर के इस मामले में पुलिस के सामने अब कथित वीडियो के मूल स्रोत, डिजिटल एडिटिंग या AI के संभावित इस्तेमाल और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की वास्तविकता की पड़ताल का सवाल है।
जांच पूरी होने के बाद ही वायरल वीडियो की असली कहानी सामने आ सकेगी।
सारांश
सिद्धार्थनगर के त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र की बिस्कोहर पुलिस चौकी इलाके से जुड़े सोशल मीडिया मामले को लेकर मोहम्मद सईद ने पुलिस को लिखित शिकायती पत्र दिया है।
शिकायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित कथित आपत्तिजनक और हिंसात्मक तरीके से प्रदर्शित वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस ने जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।
फिलहाल वीडियो की प्रामाणिकता, उसके निर्माता, मूल अपलोडर, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट के वास्तविक संचालक अथवा AI तकनीक के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसलिए जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अब पुलिस और आवश्यक डिजिटल जांच से सामने आने वाले तथ्यों पर निगाह रहेगी।
सिद्धार्थनगर में स्कूल चोरी का पुलिस ने किया खुलासा, तीन गिरफ्तार; लैपटॉप-टैबलेट से लेकर माइक्रोस्कोप तक बरामद
कपिलवस्तु पुलिस का दावा- कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत से चोरी हुआ था सामान, ऑटो से नेपाल ले जाकर बेचने की थी कथित तैयारी; एक अन्य आरोपी की तलाश जारी

सिद्धार्थनगर, 3 अगस्त 2026।
सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु थाना क्षेत्र में सरकारी विद्यालय से हुई चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। बच्चों की पढ़ाई और प्रयोगशाला से जुड़े लैपटॉप, टैबलेट, माइक्रोस्कोप, साइंस किट, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों की चोरी के मामले में कपिलवस्तु पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक चोरी का सामान जिस ऑटो रिक्शा से ले जाया जा रहा था, उसे भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी सामान को खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल ले जाकर बेचने की कथित तैयारी में थे। इसी दौरान पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ लिया, जबकि उनका एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, दो टैबलेट, इनवर्टर-बैटरी, दो माइक्रोस्कोप, प्रिंटर, डेस्कटॉप कंप्यूटर, साइंस किट और साउंड सिस्टम समेत बड़ी संख्या में सामान बरामद करने का दावा किया है।
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31 जुलाई की रात स्कूल का ताला टूटा, 3 अगस्त को पुलिस ने खोली कथित चोरी की परतें
पुलिस के अनुसार पूरी कहानी 31 जुलाई 2026 की रात से शुरू होती है। कपिलवस्तु थाना क्षेत्र के कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत के कमरे का ताला तोड़कर वहां रखे इलेक्ट्रॉनिक और शैक्षणिक उपकरण चोरी किए जाने की घटना सामने आई थी।
स्कूल से सामान गायब होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और थाना कपिलवस्तु में मुकदमा अपराध संख्या 62/2026 के तहत बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं और तीन दिन बाद 3 अगस्त को तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ चोरी के सामान की बरामदगी का दावा किया।
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स्कूल में आखिर क्या-क्या हुआ था चोरी?
पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत से सामान्य सामान नहीं बल्कि बच्चों की पढ़ाई, डिजिटल शिक्षा और विज्ञान प्रयोग से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण चोरी हुए थे।
पुलिस द्वारा घोषित बरामदगी में एक लैपटॉप, दो टैबलेट, एक ट्यूबलर बैटरी, एक इनवर्टर, दो माइक्रोस्कोप, 11 माइक्रो हेडफोन, एक प्रिंटर, दो वायरलेस की-बोर्ड, एक ऑप्टिक फाइबर सेट, एक डेस्कटॉप कंप्यूटर मॉनिटर, सीपीयू एवं बैटरी सहित, चार साउंड सिस्टम और दो साइंस किट शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए जाने का दावा करते हुए UP53FT7469 नंबर का एक ऑटो रिक्शा भी बरामद किया है।
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मदरहना उर्फ रामनगर क्षेत्र से तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार कपिलवस्तु पुलिस ने 3 अगस्त को ग्राम मदरहना उर्फ रामनगर, टोला मटियरिया राजे डिहवा बाग के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रेमशंकर उर्फ प्रिन्स कन्नौजिया पुत्र चन्द्र प्रकाश कन्नौजिया, निवासी ग्राम बढ़या, थाना व जनपद सिद्धार्थनगर; रोहित चौधरी पुत्र शम्भू चौधरी, निवासी चकईजोत, थाना कपिलवस्तु; तथा रोहित चौधरी उर्फ टकलू पुत्र कोठारी, निवासी चकईजोत, थाना कपिलवस्तु, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में पुलिस ने बताई है।
पुलिस के मुताबिक आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय भेज दिया गया।
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पुलिस का दावा- ऑटो में सामान लेकर नेपाल की ओर जा रहे थे आरोपी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण दावा पुलिस की पूछताछ के विवरण में सामने आया है।
प्रेस नोट के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे चार मित्र हैं और 31 जुलाई की रात कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत के कमरे का ताला तोड़कर सामान चोरी किया था।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यह भी कथित रूप से बताया कि चोरी का सामान इसी ऑटो रिक्शा से विद्यालय से ले जाया गया था और 3 अगस्त को उसे ऑटो में रखकर खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।
इसी दौरान पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि पुलिस के अनुसार एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
यह पूरा विवरण पुलिस प्रेस नोट और पुलिस द्वारा बताई गई पूछताछ पर आधारित है। आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा।
SSP के निर्देश पर चला अभियान, कपिलवस्तु पुलिस को मिली सफलता
पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के आदेश पर अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष कपिलवस्तु विनय प्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
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इन पुलिसकर्मियों की रही कार्रवाई में भूमिका
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार गिरफ्तारी एवं बरामदगी करने वाली टीम में चौकी प्रभारी बजहा उपनिरीक्षक अनिरुद्ध सिंह, उपनिरीक्षक सदरूल आलमीन, कांस्टेबल प्रदुमन यादव, कांस्टेबल राजकमल यादव और कांस्टेबल राहुल कुमार शर्मा शामिल रहे।
बच्चों की पढ़ाई का सामान भी नहीं छोड़ा!
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि चोरी किसी निजी दुकान या गोदाम से नहीं, बल्कि एक विद्यालय से हुई बताई गई है।
लैपटॉप और टैबलेट डिजिटल पढ़ाई के साधन हैं तो माइक्रोस्कोप और साइंस किट बच्चों को विज्ञान समझाने के उपकरण। कंप्यूटर, प्रिंटर, हेडफोन और अन्य उपकरण भी विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था का हिस्सा होते हैं।
ऐसे में स्कूल से इन उपकरणों की चोरी केवल संपत्ति की चोरी का मामला नहीं रह जाती, बल्कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालय की सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं।
पुलिस के दावे के मुताबिक सामान बरामद हो जाना राहत की बात है, लेकिन फरार बताए जा रहे अन्य आरोपी की गिरफ्तारी और पूरे घटनाक्रम की शेष कड़ियों की जांच अभी महत्वपूर्ण है।
टिप्पणी
स्कूल सुरक्षित होंगे तभी बच्चों के संसाधन सुरक्षित रहेंगे
सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा और विज्ञान की पढ़ाई बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक धन से उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे उपकरणों की चोरी सीधे तौर पर विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है।
कपिलवस्तु पुलिस ने तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में सामान की बरामदगी का दावा किया है। अब आवश्यक है कि मामले की विवेचना साक्ष्यों के आधार पर पूरी हो और फरार बताए जा रहे व्यक्ति के संबंध में भी विधिसम्मत कार्रवाई हो।
साथ ही यह घटना विद्यालयों में रखे महंगे इलेक्ट्रॉनिक और शैक्षणिक उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत भी सामने लाती है।
सारांश
कपिलवस्तु पुलिस ने कम्पोजिट विद्यालय चकईजोत में 31 जुलाई की रात हुई चोरी के मामले का खुलासा करने का दावा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार लोगों में प्रेमशंकर उर्फ प्रिन्स कन्नौजिया, रोहित चौधरी और रोहित चौधरी उर्फ टकलू शामिल हैं।
एक लैपटॉप, दो टैबलेट, दो माइक्रोस्कोप, इनवर्टर-बैटरी, प्रिंटर, डेस्कटॉप कंप्यूटर, 11 माइक्रो हेडफोन, चार साउंड सिस्टम, दो साइंस किट समेत अन्य सामान तथा घटना में कथित रूप से प्रयुक्त ऑटो रिक्शा बरामद किया गया है।
पुलिस का दावा है कि चोरी का सामान खुनवा बॉर्डर के रास्ते नेपाल ले जाकर बेचने की तैयारी थी। एक अन्य साथी के फरार होने की बात भी पुलिस ने कही है।
तीनों गिरफ्तार आरोपियों को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय भेज दिया गया है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
सिद्धार्थनगर को “बुद्ध रसोई” की सौगात दिलाने की पहल तेज, मरीजों-तीमारदारों के सस्ते भोजन के लिए रेलमंत्री तक पहुंची मांग
राज्यसभा सांसद बृज लाल ने रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से की मुलाकात, माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में CSR सहयोग से “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने का अनुरोध; नो प्रॉफिट-नो लॉस मॉडल पर संचालन की परिकल्पना

सिद्धार्थनगर/नई दिल्ली, 3 अगस्त 2026।
सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।

राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृज लाल ने 3 अगस्त को केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से उनके संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर मेडिकल कॉलेज परिसर में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए रेलवे से जुड़े उपक्रम की CSR निधि से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
बृज लाल की ओर से रेलमंत्री को सौंपे गए पत्र में प्रस्तावित “बुद्ध रसोई” के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार करने, संचालन, रखरखाव और इसे दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाने की दिशा में CSR सहयोग का आग्रह किया गया है।
इस पूरी पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित “बुद्ध रसोई” को व्यावसायिक लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि “नो प्रॉफिट, नो लॉस” मॉडल पर संचालित करने की परिकल्पना की गई है।
यदि प्रस्ताव को आवश्यक स्वीकृति और वित्तीय सहयोग मिलता है तो मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके साथ रहने वाले तीमारदारों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण सुविधा बन सकती है।
इलाज की चिंता के बीच भोजन का खर्च भी मरीज के परिवार पर अतिरिक्त बोझ बनता है। इसी परेशानी को कम करने की सोच अब सिद्धार्थनगर से दिल्ली तक पहुंची है। राज्यसभा सांसद बृज लाल ने केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए CSR सहयोग मांगा है। योजना है कि रसोई “नो प्रॉफिट, नो लॉस” पर चले और मरीजों तथा तीमारदारों को सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन मिल सके। अब इस जनहित प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई और संभावित CSR स्वीकृति पर निगाहें रहेंगी।
मरीजों की थाली तक पहुंचने की कोशिश
मेडिकल कॉलेज में आने वाला मरीज अक्सर अकेला नहीं होता। उसके साथ परिवार के एक या अधिक सदस्य भी कई दिनों तक अस्पताल में रहते हैं। इलाज और दवाओं के साथ भोजन की व्यवस्था भी उनके लिए बड़ी आवश्यकता बन जाती है।
इसी जरूरत को ध्यान में रखकर “बुद्ध रसोई” का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना बताया गया है जहां मरीजों और तीमारदारों को कम कीमत में अच्छा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके। प्रस्ताव की मूल भावना जनसेवा को केंद्र में रखकर रसोई संचालित करने की है।
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा पत्र
3 अगस्त को हुई मुलाकात के दौरान सांसद बृज लाल ने केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को इस संबंध में बाकायदा पत्र सौंपा।
उपलब्ध पत्र के मुताबिक “बुद्ध रसोई” की स्थापना के लिए संबंधित रेलवे उपक्रम के समक्ष प्रस्ताव दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
रेलमंत्री से आग्रह किया गया है कि CSR निधि से बुद्ध रसोई केंद्र की स्थापना में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध पत्र और जानकारी इस समय CSR निधि की अंतिम स्वीकृति की घोषणा नहीं करते। फिलहाल रेलमंत्री से सहयोग और धन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। अंतिम स्वीकृति संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।
क्यों रखा गया नाम “बुद्ध रसोई”?
सिद्धार्थनगर की पहचान भगवान बुद्ध से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से है। उपलब्ध पत्र में भी सिद्धार्थनगर और भगवान बुद्ध के संबंध का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित जनसेवा केंद्र को “बुद्ध रसोई” नाम देने की भावना सामने आती है।
इस तरह प्रस्तावित रसोई को केवल भोजन उपलब्ध कराने वाली सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की पहचान से जुड़े जनसेवा प्रयास के रूप में विकसित करने की परिकल्पना दिखाई देती है।
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नो प्रॉफिट, नो लॉस का मॉडल
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष इसका प्रस्तावित संचालन मॉडल है।
बृज लाल द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक “बुद्ध रसोई” को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” के आधार पर संचालित करने की योजना है।
अर्थात इसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को संचालित रखते हुए मरीजों और तीमारदारों को सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना होगा।
हालांकि भोजन की कीमत, संचालन व्यवस्था और अन्य व्यावहारिक विवरण परियोजना को स्वीकृति मिलने तथा संचालन की रूपरेखा तय होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
अस्पताल में दवा के साथ सस्ती थाली भी बने सहारा
बीमारी किसी परिवार पर केवल शारीरिक संकट नहीं लाती, बल्कि आर्थिक दबाव भी बढ़ाती है। दूरदराज के गांव से मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले परिवार को जांच, दवा, यात्रा और ठहरने के साथ प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था भी करनी पड़ती है।
ऐसे में यदि अस्पताल परिसर में व्यवस्थित तरीके से कम कीमत पर पौष्टिक भोजन मिलने लगे तो मरीज के साथ रहने वाले परिवार को राहत मिल सकती है।
यही वह सामाजिक आवश्यकता है जिसे “बुद्ध रसोई” के प्रस्ताव से संबोधित करने की कोशिश की जा रही है।
पहले किए गए विकास कार्यों का भी पत्र में जिक्र
रेलमंत्री को दिए गए पत्र में बृज लाल ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना की निधि के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में कराए गए कार्यों का उल्लेख भी किया है।
पत्र में पुस्तकालय और पुस्तकों की व्यवस्था, अमृत सरोवर, स्कूल संबंधी आधारभूत सुविधाएं, ग्रामीण सीसी रोड, छात्रावास, स्ट्रीट लाइट तथा अस्पतालों में उपकरण जैसी सुविधाओं के लिए निधि इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।
अब इसी क्रम में सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में “बुद्ध रसोई” के लिए CSR सहयोग जुटाने की पहल की गई है।
टिप्पणी
प्रस्ताव अच्छा, अब धरातल पर उतरने का इंतजार
किसी भी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था केवल डॉक्टर, दवा और बेड तक सीमित नहीं होती। मरीज और उसके तीमारदार की बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखना भी अस्पताल से जुड़ी समग्र व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस नजरिए से “बुद्ध रसोई” की परिकल्पना जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।
लेकिन प्रस्ताव और क्रियान्वयन के बीच की दूरी को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अभी CSR सहयोग का अनुरोध किया गया है। इसलिए इसे स्वीकृत अथवा शुरू हो चुकी परियोजना बताना जल्दबाजी होगी।
यदि आवश्यक स्वीकृति और धन मिलने के बाद इसे पारदर्शी व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और वास्तविक “नो प्रॉफिट, नो लॉस” मॉडल के साथ धरातल पर उतारा जाता है तो यह मेडिकल कॉलेज आने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।
सारांश
राज्यसभा सांसद बृज लाल ने 3 अगस्त 2026 को केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में “बुद्ध रसोई” स्थापित कराने के लिए CSR निधि से सहयोग का अनुरोध किया है।
प्रस्तावित रसोई को “नो प्रॉफिट, नो लॉस” आधार पर चलाने की योजना है, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को सस्ती दर पर स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
फिलहाल यह प्रस्ताव और CSR सहयोग के अनुरोध के चरण में है। धनराशि की अंतिम स्वीकृति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। अब प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई पर निगाह रहेगी।
सिद्धार्थनगर में फिर गूंजा सामाजिक एकजुटता का संदेश: गांव-गांव पहुंच रही लोधी समाज की मुहिम

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव को याद कर रहा समाज; अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-नगर तक संगठन विस्तार का अभियान
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव की स्मृतियों को सहेजते हुए अब जिले में लोधी समाज सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक एकजुटता की नई मुहिम आगे बढ़ा रहा है। अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, जनपद सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-गांव और नगर क्षेत्रों में संगठन के जागरूकता बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य केवल जगह-जगह बोर्ड लगाना नहीं, बल्कि समाज को अपने इतिहास और महापुरुषों की विरासत से परिचित कराना, नई पीढ़ी में सामाजिक चेतना जगाना और बिखरे लोगों को एक संगठनात्मक मंच पर जोड़ना है। अभियान के तहत अब तक जिले के दर्जनों गांवों में बोर्ड लगाए जाने की बात कही जा रही है।
इसी कड़ी में विकास खंड उसका बाजार की ग्राम पंचायत सोहांस जनूबी में संगठन का बड़ा जागरूकता एवं स्वागत बोर्ड लगाया गया। बोर्ड पर संगठन के नाम और पदाधिकारियों के साथ समाज से जुड़े ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं।
| सिद्धार्थनगर और कल्याण सिंह के रिश्ते की यादें आज भी जीवंत
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के जुड़ाव को लेकर स्थानीय समाज की स्मृतियां भी हैं।
स्थानीय संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि कल्याण सिंह का सिद्धार्थनगर से विशेष लगाव रहा और वह अपने राजनीतिक जीवन में सत्ता में रहते हुए भी तथा पद पर नहीं रहने के दौरान भी सिद्धार्थनगर आते रहे। यही वजह रही कि जिले के लोधी समाज में उनके प्रति विशेष सम्मान और आत्मीयता विकसित हुई।
समाज के लोगों का कहना है कि कल्याण सिंह के विचार, सामाजिक एकजुटता और सार्वजनिक जीवन से मिली प्रेरणा आज भी उनके लिए महत्वपूर्ण है। संगठन उसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज को शिक्षा, जागरूकता, एकता तथा आपसी सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ाने की बात कर रहा है।
कल्याण सिंह की स्मृतियों से नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश
सिद्धार्थनगर में चल रहे अभियान को संगठन अतीत और वर्तमान के बीच एक सामाजिक सेतु के रूप में भी देख रहा है। एक तरफ बोर्ड पर महापुरुषों और प्रेरक व्यक्तित्वों को स्थान देकर इतिहास की याद दिलाई जा रही है, दूसरी तरफ गांव स्तर के लोगों के नाम जोड़कर संगठन को जमीनी स्वरूप देने की कोशिश हो रही है।
संदेश साफ है—अपनी विरासत को जानिए, समाज को जागरूक कीजिए और एक-दूसरे के सहयोग के लिए संगठित रहिए।
| अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई, लक्ष्य पूरा सिद्धार्थनगर
जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में चल रहे अभियान को संगठन पूरे जनपद तक पहुंचाने की तैयारी में है। गांव, कस्बा और नगर—हर स्तर पर बोर्ड के जरिए संगठन की पहचान और सामाजिक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सोहांस जनूबी में लगे बोर्ड पर डॉ. चन्द्रिका प्रसाद लोधी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष) तथा अर्जुन सिंह लोधी (जिलाध्यक्ष) का उल्लेख प्रमुखता से है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर संगठन से जुड़े अनेक लोगों के नाम भी बोर्ड पर अंकित हैं।
| चेहरे स्थानीय, संदेश पूरे समाज के लिए
सोहांस जनूबी में लगाए गए बोर्ड पर सदस्यगण के रूप में रामसमुझ लोधी, अनिल लोधी, पंकज लोधी, राजेश लोधी, राधेश्याम प्रताप लोधी, सुरेश लोधी, हरिशंकर लोधी, वीरयादव लोधी, रामसुभग लोधी, रामवृक्ष लोधी, भूपनरायन, सीताराम लोधी, रामयश लोधी, राजमन लोधी, सुन्दरी लोधी, बिजलेश विश्वकर्मा और पराग लोधी सहित अन्य नाम अंकित दिखाई देते हैं।
स्थानीय लोगों को बोर्ड पर स्थान देने के पीछे संगठन की सोच गांव स्तर तक भागीदारी बढ़ाने की बताई जा रही है। यानी अभियान ऊपर से नीचे तक संगठन खड़ा करने के बजाय गांव के लोगों को साथ लेकर सामाजिक नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
| एक बोर्ड नहीं, गांव-गांव सामाजिक पहचान खड़ी करने की कोशिश
सिद्धार्थनगर में शुरू हुई यह पहल अब केवल किसी एक गांव में बोर्ड लगाने तक सीमित नहीं दिखाई देती। दर्जनों गांवों तक पहुंचने का दावा कर रही अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा इसे जिलेव्यापी सामाजिक जागरूकता अभियान का स्वरूप दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से सिद्धार्थनगर के पुराने जुड़ाव की स्मृतियां इस अभियान को भावनात्मक आधार देती हैं, जबकि जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में गांव-गांव संगठन विस्तार इसकी वर्तमान दिशा को रेखांकित करता है।
संपादकीय टिप्पणी
समाज का संगठन तभी सार्थक होता है जब उसका उद्देश्य केवल नाम या पहचान तक सीमित न रहकर शिक्षा, सामाजिक चेतना, आपसी सहयोग और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने तक पहुंचे। सिद्धार्थनगर में बोर्ड के माध्यम से शुरू हुई यह पहल यदि इन उद्देश्यों को गांव-गांव वास्तविक गतिविधियों में बदलती है, तो इसका प्रभाव बोर्ड से कहीं आगे दिखाई दे सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रति जिले के लोगों की पुरानी आत्मीयता और सम्मान की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ यदि संगठन शिक्षा, प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और सामाजिक सहयोग को प्राथमिकता देता है, तो यह मुहिम अधिक व्यापक सामाजिक महत्व हासिल कर सकती है।
सारांश
अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा, सिद्धार्थनगर जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी की अगुवाई में जिले के गांव एवं नगर क्षेत्रों में जागरूकता बोर्ड लगाने का अभियान चला रही है। सोहांस जनूबी में भी इसी क्रम में बोर्ड लगाया गया है। संगठन से जुड़े लोगों के मुताबिक अब तक दर्जनों गांवों में अभियान पहुंच चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सिद्धार्थनगर से पुराने जुड़ाव और उनके प्रति स्थानीय लोधी समाज के सम्मान को भी संगठन अपनी सामाजिक विरासत के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखता है।
दवा कराने निकली मां-बेटी नहीं लौटीं घर, सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय—दो घंटे में सकुशल बरामद

सिद्धार्थनगर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से परिवार को मिली राहत; सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से शुरू हुई तलाश, सकुशल मिलने के बाद परिजनों को किया गया सुपुर्द
सिद्धार्थनगर। दवा और इलाज के लिए घर से निकली मां-बेटी के वापस न लौटने से परेशान एक परिवार को पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ी राहत मिली। परिजन ने सिद्धार्थनगर थाने पहुंचकर मामले की सूचना दी तो पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू की। पुलिस के मुताबिक सूचना मिलने के करीब दो घंटे के भीतर मां और बेटी को सकुशल बरामद कर परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इंदिरानगर निवासी ओमप्रकाश सोनकर ने 2 अगस्त को सिद्धार्थनगर थाने में सूचना दी थी कि उनकी 55 वर्षीय पत्नी और 22 वर्षीय पुत्री एक दिन पहले यानी 1 अगस्त की दोपहर दवा-इलाज कराने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं।
लीड | एक रात चिंता में गुजरी, पुलिस तक पहुंचा परिवार
समय गुजरता गया और मां-बेटी घर नहीं पहुंचीं तो परिवार की चिंता बढ़ती चली गई। अपने स्तर से जानकारी करने के बाद परिजन पुलिस के पास पहुंचे।
मामले की सूचना मिलने पर सिद्धार्थनगर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर दोनों की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया और अन्य उपलब्ध माध्यमों से जानकारी जुटाई गई।
इसके बाद तलाश का नतीजा जल्द सामने आया और सूचना मिलने के लगभग दो घंटे के भीतर दोनों को सकुशल खोज लिया गया।
सकुशल बरामदगी के बाद पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए मां-बेटी को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
| एक नजर में मामला
स्थान: थाना सिद्धार्थनगर, जनपद सिद्धार्थनगर
घर से निकलीं: 1 अगस्त 2026 की दोपहर
उद्देश्य: दवा/इलाज कराने के लिए
पुलिस को सूचना: 2 अगस्त 2026
पुलिस कार्रवाई: गुमशुदगी दर्ज कर तत्काल तलाश
तलाश के माध्यम: सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यम
नतीजा: पुलिस के मुताबिक करीब दो घंटे में सकुशल बरामदगी
आगे की कार्रवाई: मां-बेटी को परिजनों के सुपुर्द किया गया
पुलिस ने तेजी से बढ़ाई तलाश
मामला सामने आने के बाद पुलिस टीम ने उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर मां-बेटी की तलाश शुरू की।
पुलिस का दावा है कि सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों का सहारा लेते हुए जानकारी जुटाई गई और महज दो घंटे के भीतर दोनों तक पहुंचने में सफलता मिली।
पुलिस ने हालांकि अपने प्रेस नोट में यह स्पष्ट नहीं किया है कि मां-बेटी कहां मिलीं और किन परिस्थितियों में घर नहीं लौट पाई थीं। इसलिए इन बिंदुओं को लेकर किसी तरह की अटकल लगाना उचित नहीं होगा।
बरामदगी के बाद परिवार को मिली राहत
मां-बेटी के सकुशल मिलने की सूचना परिवार के लिए राहत लेकर आई। पुलिस के अनुसार दोनों को परिजनों के सुपुर्द किए जाने के बाद परिवार ने पुलिस टीम की कार्रवाई की सराहना की।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद तलाश तेजी से आगे बढ़ाई गई और मामला किसी अप्रिय घटना में बदलने से पहले दोनों सकुशल मिल गईं।
| इन्हें मिली बरामदगी की जिम्मेदारी
पुलिस की ओर से जारी विवरण के मुताबिक कार्रवाई करने वाली टीम में—
वरिष्ठ उपनिरीक्षक अरविंद कुमार राय
आरक्षी साहिल यादव
आरक्षी अंकित कुमार
महिला आरक्षी कीर्ति उपाध्याय
शामिल रहे।
| शिकायत से सकुशल वापसी तक
1 अगस्त को मां-बेटी दवा और इलाज के लिए घर से निकलीं और वापस नहीं पहुंचीं। परिवार ने तलाश की और अगले दिन पुलिस को इसकी सूचना दी।
पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की, उपलब्ध माध्यमों से तलाश शुरू की और अपने आधिकारिक विवरण के मुताबिक सूचना मिलने के करीब दो घंटे के अंदर दोनों को सकुशल बरामद कर लिया।
इसके बाद मां-बेटी को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया और चिंता में डूबे परिवार को राहत मिली।
| गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती घंटे महत्वपूर्ण
किसी व्यक्ति के अचानक लापता होने की स्थिति में समय पर सूचना और तेजी से तलाश बेहद महत्वपूर्ण होती है। सिद्धार्थनगर के इस मामले में अच्छी बात यह रही कि पुलिस को जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ी और मां-बेटी सुरक्षित मिल गईं।
यह मामला आम लोगों के लिए भी संदेश देता है कि परिवार का कोई सदस्य असामान्य परिस्थितियों में लापता हो और संपर्क न हो पा रहा हो तो अपने स्तर पर लंबे समय तक इंतजार करने के बजाय पुलिस को समय से जानकारी देना उपयोगी हो सकता है।
सिद्धार्थनगर को ₹261.49 करोड़ की बड़ी सौगात, बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग बनेगा फोरलेन!

भारत-नेपाल सीमा से कपिलवस्तु तक बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद, सांसद जगदंबिका पाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखी परियोजना की तस्वीर; भूमि अधिग्रहण के लिए ₹87 करोड़ जमा होने की जानकारी
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली एक बड़ी परियोजना आगे बढ़ रही है। बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग के करीब 9.400 किलोमीटर हिस्से को चार लेन में चौड़ा और सुदृढ़ किए जाने की तैयारी है। उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक परियोजना की स्वीकृत लागत करीब ₹261.49 करोड़ है।
परियोजना को लेकर सिद्धार्थनगर के PWD रेस्ट हाउस में डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी प्रमुख जानकारियां साझा कीं। इस दौरान भाजपा के नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कमल किशोर सहित भाजपा के कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सीमा, पर्यटन और विकास—तीनों के लिए अहम सड़क
बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग महज एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि नेपाल सीमा से लेकर बौद्ध पर्यटन क्षेत्र तक बेहतर संपर्क स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि मार्ग के फोरलेन होने से विश्व प्रसिद्ध कपिलवस्तु स्तूप और कपिलवस्तु विश्वविद्यालय तक आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित होगा। इससे देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
एक नजर में परियोजना
परियोजना: बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण
लंबाई: करीब 9.400 किलोमीटर
प्रस्तावित स्वरूप: चार लेन
स्वीकृत लागत: करीब ₹261.49 करोड़
भूमि अधिग्रहण: ₹87 करोड़ जमा किए जाने की जानकारी
प्रमुख लाभ: भारत-नेपाल सीमा संपर्क, कपिलवस्तु कनेक्टिविटी, पर्यटन और परिवहन को बढ़ावा
जमीन पर तैयारी शुरू, भूमि अधिग्रहण पर बढ़े कदम
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग की टीम संयुक्त रूप से भूमि की पैमाइश, अभिलेखों का सत्यापन तथा प्रभावित भवनों के मूल्यांकन का कार्य कर रही है।
सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि प्रेस नोट में भूमि अधिग्रहण के लिए ₹87 करोड़ की धनराशि विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, सिद्धार्थनगर के खाते में जमा किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में परियोजना अब केवल घोषणा तक सीमित न रहकर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।
कपिलवस्तु तक पहुंच होगी आसान
सिद्धार्थनगर की पहचान भगवान बुद्ध और कपिलवस्तु की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है। बड़ी संख्या में देश-विदेश से बौद्ध श्रद्धालु और पर्यटक इस क्षेत्र में पहुंचते हैं। बेहतर सड़क संपर्क मिलने पर पर्यटन गतिविधियों के साथ होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और अन्य सेवा क्षेत्रों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
प्रेस विज्ञप्ति में भी परियोजना को व्यापार, पर्यटन, परिवहन और रोजगार के नए अवसरों से जोड़कर देखा गया है।
शनिवार की सौगातों के बाद विकास पर फिर चर्चा
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब बीते शनिवार केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के सिद्धार्थनगर दौरे के दौरान भी जिले के विकास से जुड़ी सौगातों और योजनाओं की चर्चा सामने आई थी। इसके बाद अब सांसद जगदंबिका पाल ने सड़क परियोजना को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिले में प्रस्तावित विकास कार्यों की तस्वीर सामने रखी है।
सारांश
₹261.49 करोड़ की लागत और 9.4 किलोमीटर लंबाई वाली बर्डपुर–पिपरहवा फोरलेन परियोजना सिद्धार्थनगर के लिए महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। खासकर नेपाल सीमा, कपिलवस्तु और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी के लिहाज से इसके दूरगामी प्रभाव की उम्मीद की जा रही है। भूमि अधिग्रहण के लिए ₹87 करोड़ जमा किए जाने की जानकारी इस परियोजना की प्रगति का महत्वपूर्ण पहलू है।
| अब निगाह समयबद्ध क्रियान्वयन पर
किसी भी बड़ी विकास परियोजना की असली सफलता उसकी घोषणा से नहीं, बल्कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन से तय होती है। बर्डपुर–पिपरहवा मार्ग का फोरलेन निर्माण यदि निर्धारित प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा होता है, तो इसका लाभ केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन, सीमा क्षेत्र की आवाजाही, स्थानीय कारोबार और कपिलवस्तु की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी इससे मजबूती मिल सकती है।
साथ ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रभावित लोगों के अधिकार, नियमानुसार मुआवजा, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। सिद्धार्थनगर की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कागज पर दिखाई दे रही यह बड़ी परियोजना जमीन पर कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ आकार लेती है।
नोट: परियोजना की लागत, लंबाई और भूमि अधिग्रहण संबंधी आंकड़े उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के शनिवार के दौरे की विशिष्ट घोषणाओं का विवरण इस खबर में बिना दस्तावेजी पुष्टि के नहीं जोड़ा गया है।
जिले की मेधा ने वैश्विक सिनेमा में बनाई पहचान, सिद्धार्थनगर के युवा फिल्मकार विनीत शुक्ला की डॉक्यूमेंट्री को अंतरराष्ट्रीय मंच
बड़े शहर से नहीं, छोटे जिले की मिट्टी से निकला सपना; बेघर लोगों से लेकर प्रवासी मजदूरों के संघर्ष तक को कैमरे में उतारकर बनाई अलग पहचान
सिद्धार्थनगर। प्रतिभा की उड़ान किसी महानगर की मोहताज नहीं होती। मजबूत इरादा, लगातार मेहनत और समाज की अनकही कहानियों को दुनिया के सामने रखने का जुनून हो, तो छोटे शहर से निकला युवा भी अंतरराष्ट्रीय सिनेमा की दुनिया में अपनी जगह बना सकता है। सिद्धार्थनगर से जुड़े युवा फिल्मकार विनीत शुक्ला की यात्रा इसी सोच को सामने रखती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विनीत ने अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के जरिए समाज के उन हिस्सों को कैमरे के सामने लाने की कोशिश की है, जिनकी आवाज अक्सर मुख्यधारा की चमक-दमक में दब जाती है। बेघर लोगों का जीवन हो या बेहतर भविष्य की तलाश में संघर्ष करते प्रवासी श्रमिक—उनकी फिल्मों में मनोरंजन से अधिक मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकार दिखाई देते हैं।
छोटे शहर से बड़े पर्दे तक
सिद्धार्थनगर में शुरुआती शिक्षा प्राप्त करने वाले विनीत का रुझान आगे चलकर सिनेमा की ओर बढ़ा। उपलब्ध विवरण के मुताबिक उन्होंने दिल्ली में सिनेमा का अध्ययन किया और वर्ष 2022 में उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। यहीं से उनकी फिल्म निर्माण की यात्रा को अंतरराष्ट्रीय विस्तार मिला।
उनकी कोशिश ऐसी कहानियों को पर्दे पर लाने की रही, जिनके पात्र आम जिंदगी में हमारे आसपास मौजूद तो होते हैं, लेकिन उनकी परेशानियाँ शायद ही कभी बड़े पर्दे की कहानी बन पाती हैं।
बेघर लोगों की जिंदगी पर केंद्रित ‘नो प्लेस लाइक होम’
विनीत की पहली बताई गई डॉक्यूमेंट्री ‘नो प्लेस लाइक होम : इन सर्च ऑफ ए सेफ हेवन’ इंग्लैंड के शेफील्ड शहर में बेघर लोगों के जीवन, कठिनाइयों और पुनर्वास के प्रयासों के इर्द-गिर्द तैयार की गई है।
प्राप्त विवरण के अनुसार फिल्म को जर्मनी में आयोजित एक मानवाधिकार फिल्म समारोह में सम्मान मिला और इसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एवं शैक्षणिक मंचों पर भी प्रदर्शित किया गया। जागरण फिल्म फेस्टिवल-2026 में इसके चयन की जानकारी भी प्रकाशित सामग्री में दी गई है।
इस फिल्म की खासियत केवल बेघर लोगों की समस्या दिखाना नहीं, बल्कि उनके जीवन के पीछे मौजूद परिस्थितियों और दोबारा सामान्य जिंदगी की ओर लौटने की जद्दोजहद को सामने लाना बताया गया है।
दूसरी डॉक्यूमेंट्री में प्रवासी मजदूरों का दर्द
उनकी दूसरी डॉक्यूमेंट्री ‘ए माइल ऑफ साइलेंस : द फाइव पाउंड सीक्रेट’ प्रवासी श्रमिकों के कथित शोषण, संघर्ष और उनके जीवन की कठिन परिस्थितियों पर केंद्रित बताई गई है।
प्रकाशित विवरण के मुताबिक यह फिल्म भी शोध और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित है तथा इसे जागरण फिल्म फेस्टिवल-2026 में स्थान मिलने की जानकारी दी गई है।
इन दोनों फिल्मों का साझा पहलू यह है कि इनमें ग्लैमर से अधिक इंसान और उसके संघर्ष को केंद्र में रखने की कोशिश दिखाई देती है।
विनीत शुक्ला की यात्रा एक नजर में
जुड़ाव: सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
क्षेत्र: फिल्म निर्माण एवं डॉक्यूमेंट्री
प्रमुख विषय: बेघर लोगों का जीवन, प्रवासी श्रमिक और सामाजिक सरोकार
उच्च शिक्षा: उपलब्ध विवरण के अनुसार इंग्लैंड में अध्ययन
प्रमुख फिल्में: ‘नो प्लेस लाइक होम : इन सर्च ऑफ ए सेफ हेवन’ और ‘ए माइल ऑफ साइलेंस : द फाइव पाउंड सीक्रेट’
विशेषता: सामाजिक मुद्दों और हाशिये के लोगों की कहानियों को सिनेमा के माध्यम से सामने लाने का प्रयास
अभिनेता राज बब्बर के साथ तस्वीर भी आई सामने
प्रकाशित सामग्री के साथ विनीत शुक्ला की अभिनेता राज बब्बर के साथ एक तस्वीर भी प्रकाशित की गई है। तस्वीर को दिल्ली का बताया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति के साथ तस्वीर अपने आप में किसी फिल्मी परियोजना या व्यावसायिक साझेदारी की पुष्टि नहीं करती, इसलिए इसे उसी संदर्भ तक सीमित रखना उचित है।
सिद्धार्थनगर के युवाओं के लिए संदेश
विनीत की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शायद उनकी उपलब्धियों की सूची से भी आगे है। यह उस धारणा को चुनौती देती है कि फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए शुरुआत किसी बड़े शहर से ही होनी चाहिए।
सिद्धार्थनगर जैसे जिले से शिक्षा की शुरुआत कर सिनेमा की पढ़ाई और फिर विदेश तक पहुँचना यह दिखाता है कि सही प्रशिक्षण, मेहनत और विषय की समझ के सहारे क्षेत्रीय प्रतिभाएँ भी बड़े मंच तक पहुँच सकती हैं।
सिद्धार्थनगर की मिट्टी से निकले युवा फिल्मकार विनीत शुक्ला ने सामाजिक सरोकारों को अपनी फिल्मों की ताकत बनाया है। बेघर लोगों और प्रवासी श्रमिकों के संघर्ष पर केंद्रित उनकी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को विभिन्न फिल्म मंचों पर पहचान मिलने की जानकारी सामने आई है। उनकी यात्रा जिले के उन युवाओं के लिए प्रेरक है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद सिनेमा और रचनात्मक क्षेत्रों में भविष्य तलाश रहे हैं।
छोटे शहर से निकले विनीत शुक्ला की फिल्मी यात्रा सामाजिक मुद्दों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ी है। उनकी डॉक्यूमेंट्री में समाज के हाशिये पर मौजूद लोगों के संघर्ष को प्रमुखता दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी फिल्मों को देश-विदेश के विभिन्न फिल्म मंचों पर प्रदर्शन और पहचान मिली है।
परदेस में थम गई सांसें, घर की चौखट पर 45 दिनों से बेटे का इंतजार

सिद्धार्थनगर के रिजवान की सऊदी अरब में मौत के बाद परिवार बेहाल; पार्थिव शरीर वतन लाने की गुहार, मां की आंखें अंतिम दीदार के लिए तरसीं
सिद्धार्थनगर। घर की चौखट वही है, परिवार वही है और अपनों की आंखों में इंतजार भी वही है… लेकिन जिस रिजवान के लौटने की कभी खुशी से राह देखी जाती थी, आज उसी के पार्थिव शरीर के घर पहुंचने का इंतजार परिवार के लिए हर गुजरते दिन के साथ और भारी होता जा रहा है।
सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील क्षेत्र के डोकम अमया गांव निवासी 42 वर्षीय रिजवान अहमद रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। परिवार के अनुसार वहां 22 जून 2026 को उनकी मृत्यु हो गई। मौत की सूचना गांव पहुंची तो घर में मातम छा गया।
परिजनों को उम्मीद थी कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिजवान का पार्थिव शरीर जल्द वतन आएगा और वे अपने बेटे, अपने परिजन को आखिरी बार देख सकेंगे।
लेकिन परिवार के मुताबिक देखते-देखते करीब 45 दिन गुजर गए और उनका इंतजार खत्म नहीं हुआ।
मां की आंखों में बस एक आस—एक बार बेटे को देख लूं
रिजवान के परिवार के लिए यह इंतजार शब्दों में बयान करना आसान नहीं है। बेटे की मौत का दुख एक तरफ है और अंतिम दर्शन न कर पाने की पीड़ा दूसरी तरफ।
घर में बैठे परिजन हर नई सूचना के साथ उम्मीद बांधते हैं कि शायद अब रिजवान का पार्थिव शरीर भारत आने का रास्ता साफ हो जाए।
परिवार की मांग बेहद सीधी है—रिजवान का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने में सहायता की जाए, ताकि परिवार अंतिम दर्शन कर सके और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम विदाई दे सके।
| 22 जून से शुरू हुआ इंतजार
परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रिजवान की मृत्यु 22 जून को सऊदी अरब में हुई। उसके बाद से परिवार पार्थिव शरीर स्वदेश आने की प्रतीक्षा कर रहा है।
करीब डेढ़ महीने तक इंतजार लंबा होने के बाद परिवार ने अपनी परेशानी सार्वजनिक रूप से सामने रखी और संबंधित अधिकारियों से मदद की मांग की।
एक परिवार और कई सवाल
रिजवान का पार्थिव शरीर भारत कब पहुंचेगा?
यदि कोई दस्तावेजी प्रक्रिया बाकी है तो वह किस स्तर पर लंबित है? परिवार को उसकी स्पष्ट जानकारी कब मिलेगी? आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराने के लिए संबंधित भारतीय अधिकारी किस स्तर पर सहायता कर सकते हैं?
इन सवालों का अंतिम और प्रमाणिक जवाब संबंधित सरकारी/दूतावास अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी से ही मिल सकेगा।
विदेश गया था कमाने, अब परिवार मांग रहा अंतिम दर्शन
रोजगार के लिए विदेश जाने वाले व्यक्ति के पीछे उसका पूरा परिवार उम्मीदों के साथ जुड़ा रहता है। घर से हजारों किलोमीटर दूर किसी अपने की मृत्यु हो जाना ही परिवार के लिए बहुत बड़ा आघात है। ऐसे में यदि अंतिम दर्शन के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़े तो परिवार की पीड़ा और बढ़ जाती है।
रिजवान के घर की कहानी भी इसी इंतजार के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
अब परिवार की नजर इस बात पर है कि आवश्यक प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कब उनका अपना व्यक्ति आखिरी सफर तय करके अपने गांव की मिट्टी तक पहुंचता है।
सबसे जरूरी तथ्य
नाम: रिजवान अहमद
उम्र: 42 वर्ष
निवास: डोकम अमया, तहसील इटवा, सिद्धार्थनगर
स्थान जहां मृत्यु बताई गई: सऊदी अरब
मृत्यु की तारीख: परिवार के अनुसार 22 जून 2026
परिवार का दावा: करीब 45 दिनों से पार्थिव शरीर आने का इंतजार
मांग: पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने में सरकारी सहायता
मौत के बाद अपनों को इंतजार क्यों?
विदेश में किसी भारतीय की मृत्यु होने पर कई तरह की स्थानीय कानूनी, चिकित्सकीय और दस्तावेजी औपचारिकताएं हो सकती हैं। इसलिए बिना आधिकारिक रिकॉर्ड देखे यह कहना उचित नहीं होगा कि रिजवान का पार्थिव शरीर आने में देरी किसकी वजह से हुई।
लेकिन एक मानवीय सवाल जरूर खड़ा होता है—शोक में डूबे परिवार को प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी और यथासंभव शीघ्र सहायता मिलनी चाहिए।
यदि कोई दस्तावेज लंबित है तो परिवार को बताया जाए, यदि किसी औपचारिकता की जरूरत है तो उसे पूरा कराने में मार्गदर्शन मिले और यदि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो पार्थिव शरीर स्वदेश भेजने की कार्रवाई यथाशीघ्र आगे बढ़े।
क्योंकि इस घर की मांग किसी विवाद की नहीं है। यहां एक परिवार सिर्फ अपने रिजवान को आखिरी बार देखना और सम्मान के साथ अंतिम विदाई देना चाहता है।
सारांश
सिद्धार्थनगर के डोकम अमया गांव निवासी 42 वर्षीय रिजवान अहमद की सऊदी अरब में 22 जून को मृत्यु होने की जानकारी परिवार ने दी है। परिजनों का कहना है कि करीब 45 दिन गुजरने के बाद भी पार्थिव शरीर भारत नहीं पहुंचा। परिवार संबंधित सरकारी अधिकारियों से सहायता की मांग कर रहा है। देरी का वास्तविक कारण आधिकारिक दस्तावेज सामने आए बिना निर्धारित नहीं किया जा सकता।
NCC भर्ती में युवाओं का जोश, श्री सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज में 73 कैडेट चयनित

तेतरी बाजार में 46 यूपी बटालियन NCC गोरखपुर के अंतर्गत हुई भर्ती; दौड़, शारीरिक दक्षता, ऊंचाई मापन और लिखित परीक्षा से गुजरे अभ्यर्थी

सिद्धार्थनगर। अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना से जुड़ने के लिए युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। तेतरी बाजार स्थित श्री सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज में 46 यूपी बटालियन NCC गोरखपुर के अंतर्गत आयोजित एनसीसी भर्ती प्रक्रिया में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। निर्धारित चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल 73 कैडेटों के चयन की जानकारी विद्यालय प्रशासन की ओर से दी गई है।

25 JD और 48 SD कैडेटों का चयन
विद्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक भर्ती में जूनियर डिवीजन (JD) के 25 और सीनियर डिवीजन (SD) के 48 कैडेट चयनित किए गए। इस तरह कुल चयनित कैडेटों की संख्या 73 रही।

मैदान से लिखित परीक्षा तक परखी गई क्षमता
भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता, दौड़, ऊंचाई मापन, लिखित परीक्षा एवं अन्य निर्धारित परीक्षणों से गुजरना पड़ा। उपलब्ध तस्वीरों में छात्र-छात्राएं दौड़ और लिखित परीक्षा में हिस्सा लेते तथा अभ्यर्थियों की ऊंचाई मापी जाती दिखाई दे रही है।
सूबेदार अनिल भंडारी ने किया ऊंचाई मापन
विद्यालय की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार भर्ती प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए 46 यूपी बटालियन NCC गोरखपुर से सूबेदार अनिल भंडारी और हवलदार आशीष कुमार पहुंचे थे। ऊंचाई मापन की तस्वीर में दिखाई दे रहे अधिकारी की पहचान विद्यालय की ओर से सूबेदार अनिल भंडारी के रूप में बताई गई है।
विद्यालय के एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट मुकुल कुमार एवं सेकंड ऑफिसर महेंद्र ने चयनित कैडेटों को बधाई देते हुए एनसीसी के जरिए अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रसेवा और व्यक्तित्व विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रधानाचार्य विनायक अनमोल ने चयनित कैडेटों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ एनसीसी की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार आयोजन में रणजीत चौधरी, हृदय नारायण मिश्र, मान सिंह, गिरिजेश कुमार सिंह, अंकित और मधुद्रेंद्र सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्यों ने भी सहयोग किया।
NCC की वर्दी पहन देशसेवा और अनुशासन की राह पर आगे बढ़ने का सपना लेकर मैदान में उतरे छात्र-छात्राओं ने दौड़ से लेकर लिखित परीक्षा तक अपनी क्षमता दिखाई। तेतरी बाजार में हुई इस भर्ती में 73 कैडेटों का चयन युवाओं के उत्साह का केंद्र बना।
स्थान: श्री सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज, तेतरी बाजार, सिद्धार्थनगर
इकाई: 46 यूपी बटालियन NCC गोरखपुर
JD चयन: 25 कैडेट
SD चयन: 48 कैडेट
कुल चयन: 73 कैडेट
भर्ती प्रक्रिया: शारीरिक दक्षता, दौड़, ऊंचाई मापन, लिखित एवं अन्य निर्धारित परीक्षण
संपादकीय सुरक्षा नोट: चयन संख्या, अधिकारियों के नाम और भर्ती संबंधी विवरण विद्यालय की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना पर आधारित हैं।
सिद्धार्थनगर: भारत-नेपाल सीमा पर 135 किलो यूरिया बरामद, साइकिल सवार पकड़ा

धनगढ़वा सीमा चौकी के पास SSB और यूपी पुलिस की संयुक्त गश्ती के दौरान कार्रवाई; तीन बोरी यूरिया और एक साइकिल बरामद, सीमा शुल्क विभाग को सौंपने की प्रक्रिया
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने तीन बोरी यूरिया खाद के साथ एक व्यक्ति को पकड़ा है। एसएसबी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार बरामद यूरिया का कुल वजन करीब 135 किलोग्राम है।
सीमा स्तंभ संख्या 547 के पास कार्रवाई
एसएसबी के मुताबिक, 1 अगस्त 2026 को 43वीं वाहिनी एसएसबी सिद्धार्थनगर की सीमा चौकी धनगढ़वा और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त विशेष गश्ती टीम सीमा क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान सीमा स्तंभ संख्या 547 के समीप एक व्यक्ति साइकिल पर यूरिया खाद लेकर भारत से नेपाल की ओर जाता दिखाई दिया।
टीम ने व्यक्ति को रोककर जांच की तो साइकिल पर यूरिया की तीन बोरियां मिलीं। एसएसबी के अनुसार प्रत्येक बोरी का वजन 45 किलोग्राम था, यानी कुल 135 किलोग्राम यूरिया बरामद हुआ।
पूछताछ में क्या बताया?
एसएसबी द्वारा जारी विवरण के अनुसार, पूछताछ में पकड़े गए व्यक्ति ने दावा किया कि उसे यह सामान मोहना बाजार में एक अज्ञात व्यक्ति से मिला था और इसे नेपाल के गिराऊजोत गांव में किसी अज्ञात व्यक्ति तक पहुंचाना था। इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और आगे की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जाएगी।
एसएसबी के मुताबिक, बरामद तीन बोरी यूरिया और एक साइकिल को जब्ती ज्ञापन एवं आवश्यक दस्तावेजों के साथ अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क विभाग, ककरहवा को सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया है।
सीमा पर लगातार निगरानी
43वीं वाहिनी एसएसबी का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर अवैध तस्करी, नशीले पदार्थों, अवैध मुद्रा, मानव तस्करी और वन्यजीवों से जुड़े अपराधों की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी एवं कार्रवाई की जा रही है।
नोट: खबर एसएसबी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना पर आधारित है। पकड़े गए व्यक्ति के संबंध में अंतिम कानूनी निष्कर्ष सक्षम जांच/न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगा।
संविधान-आरक्षण के मुद्दे पर सपा का सियासी दांव, बहुजन समाज से एकजुट होने की अपील

PDA जन पंचायत में मिठाई लाल भारती का भाजपा पर तीखा हमला; बोले—संविधान और आरक्षण की रक्षा के लिए सपा के साथ आए बहुजन समाज
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले PDA की सियासत को धार देने की कवायद सिद्धार्थनगर में भी तेज होती दिखाई दे रही है। शनिवार को शहर में समाजवादी पार्टी के तत्वावधान में आयोजित सामाजिक एकता/PDA जन पंचायत सम्मेलन में बाबा साहब आंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती ने संविधान, आरक्षण और निजीकरण को लेकर भाजपा पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने बहुजन समाज से अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के साथ एकजुट होने की अपील की।
| संविधान और आरक्षण को बनाया बड़ा मुद्दा
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मिठाई लाल भारती ने कहा कि बहुजन समाज के सामने संविधान और आरक्षण की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि बहुजन समाज अपने अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखना चाहता है तो उसे राजनीतिक रूप से एकजुट होना होगा।
भारती ने निजीकरण की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए आरक्षण के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने भाजपा की दलित और पिछड़ा वर्ग की राजनीति पर भी तीखा हमला किया।
यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि भाजपा को लेकर कही गई बातें मिठाई लाल भारती के राजनीतिक आरोप और दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

| “2024 में दलित समाज ने दिया बड़ा संदेश”
मिठाई लाल भारती ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं के एक हिस्से ने समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान कर भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने दावा किया कि संविधान से जुड़े मुद्दों ने लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अब यही मुद्दे 2027 के विधानसभा चुनाव में भी प्रमुखता से उठेंगे।
| बसपा को लेकर भी साधा निशाना
भारती ने अपने संबोधन में बसपा नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दलित वोटों के बंटवारे से भाजपा को फायदा पहुंच सकता है।
हालांकि यह भी वक्ता का राजनीतिक दावा है। संबंधित दलों की ओर से इस सम्मेलन में लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।
2027 को लेकर सैयदा खातून का बड़ा सियासी संदेश
विधायक सैयदा खातून ने कहा कि उनके अनुसार 2027 का विधानसभा चुनाव केवल सरकार बनाने का चुनाव नहीं होगा, बल्कि संविधान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी चुनाव होगा।
उन्होंने दलित और पिछड़े समाज से राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने की अपील की।
PDA के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
सम्मेलन में संविधान, आरक्षण, दलित-पिछड़ा प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। वक्ताओं के संबोधन से साफ संकेत मिला कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में PDA—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—समीकरण को प्रमुख राजनीतिक आधार बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक विजय पासवान, चौधरी अमर सिंह, बेचई यादव, राममिलन भारती, घिसियावन यादव, चंद्रमणि यादव, सुरेश यादव, कमरुज्जमा खान, मोहम्मद इदरीश पटवारी, प्रदीप पथरकट, रामसेवक लोधी, चंद्रभान पहलवान, रिंधू पासवान, चंद्रभूषण आर्य, रामबहार कनौजिया, पुनीत गौतम, वीरेंद्र तिवारी, जुबेदा चौधरी, रामधीरज साहनी, कलाम सिद्दीकी, सोनू यादव, पारसनाथ विश्वकर्मा और जेपी यादव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
| 2027 से पहले तेज हुई सियासी गोलबंदी
सिद्धार्थनगर की PDA जन पंचायत ने साफ कर दिया कि 2027 से पहले संविधान, आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर राजनीतिक मुकाबला और तेज हो सकता है। सपा के मंच से बहुजन समाज को अपने साथ जोड़ने की खुली अपील हुई है। दूसरी ओर भाजपा और बसपा पर लगाए गए आरोप फिलहाल वक्ताओं के राजनीतिक दावे हैं।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या संविधान और आरक्षण का मुद्दा 2027 में PDA को एकजुट कर पाएगा, या भाजपा और अन्य दल इस सियासी रणनीति की नई काट निकालेंगे?
कपिलवस्तु की विरासत को मिली नई रोशनी: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लाइट एंड साउंड शो व विपश्यना पार्क का किया उद्घाटन

बुद्ध की धरती पर पर्यटन को नई रफ्तार देने की पहल; सांसद जगदम्बिका पाल की परियोजनाओं की मांग पर केंद्रीय मंत्री ने शीघ्र कार्य का दिया भरोसा

सिद्धार्थनगर, 01 अगस्त। भगवान बुद्ध की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े कपिलवस्तु को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान देने की दिशा में शनिवार को एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कपिलवस्तु स्तूप पर अत्याधुनिक लाइट एंड साउंड शो तथा विपश्यना पार्क का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में डुमरियागंज सांसद जगदम्बिका पाल, कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह और मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

| इतिहास अब रोशनी और आवाज के जरिए होगा जीवंत
कपिलवस्तु की प्राचीन बौद्ध विरासत को पर्यटकों तक आधुनिक और आकर्षक अंदाज में पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया लाइट एंड साउंड शो पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं विपश्यना पार्क की शुरुआत से कपिलवस्तु आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक और सुविधा जुड़ गई है।

गार्ड ऑफ ऑनर के बाद स्तूप पहुंचे केंद्रीय मंत्री
कपिलवस्तु पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी ली। इसके बाद उन्होंने कपिलवस्तु स्तूप परिसर पहुंचकर विधिवत पूजन किया और शिलापट का अनावरण कर लाइट एंड साउंड शो का उद्घाटन किया।
पुरी ने वहां मौजूद बौद्ध भिक्षुओं से संवाद किया और कपिलवस्तु स्तूप की परिक्रमा भी की।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, कुलपति प्रो. कविता शाह और सीडीओ बलराम सिंह की मौजूदगी में विपश्यना पार्क का उद्घाटन किया।

| कपिलवस्तु पर्यटन के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
गौतम बुद्ध की विरासत से जुड़ा कपिलवस्तु अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से आने वाले पर्यटकों को कपिलवस्तु की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से आधुनिक तकनीक के जरिए परिचित कराने का प्रयास किया गया है। विपश्यना पार्क भी पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों के लिए नया आकर्षण बनेगा।

प्रदर्शनी देखी, गोदभराई और अन्नप्राशन में हुए शामिल
केंद्रीय मंत्री ने पर्यटन सुविधा केंद्र में विभिन्न विभागों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया गया।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बर्डपुर की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि शिवपति इंटर कॉलेज की छात्राओं ने कपिलवस्तु गीत की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर की विशिष्ट पहचान काला नमक चावल तथा गौतम बुद्ध पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।
पुरी बोकेंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें सिद्धार्थनगर आने का अवसर मिलने पर अत्यंत प्रसन्नता है।
पुरी ने स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना सहित विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर भी सरकार का पक्ष रखा।
पुरी बोले—सिद्धार्थनगर आकर अत्यंत प्रसन्नता हुई
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें सिद्धार्थनगर आने का अवसर मिलने पर अत्यंत प्रसन्नता है।
उन्होंने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी CSR के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी अपनी बात रखी।
पुरी ने स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना सहित विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर भी सरकार का पक्ष रखा।
| सांसद की मांग पर केंद्रीय मंत्री का बड़ा भरोसा
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सांसद जगदम्बिका पाल ने जिन परियोजनाओं की मांग की है, उन पर शीघ्र कार्य किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री के इस आश्वासन को सिद्धार्थनगर में भविष्य की विकास परियोजनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जगदम्बिका पाल बोले—बुद्ध ने दुनिया को दिया शांति और करुणा का संदेश
डुमरियागंज सांसद जगदम्बिका पाल ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि गौतम बुद्ध ने पूरी दुनिया को शांति, अहिंसा और करुणा का संदेश दिया।
उन्होंने केंद्र सरकार के ऊर्जा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया और हरदीप सिंह पुरी के सिद्धार्थनगर आगमन के लिए आभार जताया।
सांसद ने कपिलवस्तु और सिद्धार्थनगर के विकास को लेकर विभिन्न परियोजनाओं की आवश्यकता भी केंद्रीय मंत्री के सामने रखी।

श्यामधनी राही बोले—जिले के विकास को मिलेगी नई दिशा
कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि सिद्धार्थनगर आकांक्षी जनपद है और कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो तथा विपश्यना पार्क की शुरुआत से जिले के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने गौतम बुद्ध और कपिलवस्तु के ऐतिहासिक संबंध का उल्लेख करते हुए इसे विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण स्थल बताया।
भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने भी दोनों परियोजनाओं को जिले के पर्यटन और विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

| कपिलवस्तु को क्या मिला?
◆ कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत
◆ विपश्यना पार्क का उद्घाटन
◆ बौद्ध विरासत को आधुनिक तकनीक से प्रस्तुत करने की पहल
◆ पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में नया कदम
◆ सांसद की ओर से रखी गई परियोजनाओं पर केंद्रीय मंत्री का सकारात्मक आश्वासन
◆ काला नमक चावल और गौतम बुद्ध पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन

कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष गोविंद माधव, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विक्रम सिंह, सांसद प्रतिनिधि एसपी अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष साधना चौधरी, पीडी अनिल कुमार, डीसी मनरेगा संदीप सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.के. सिंह ने केंद्रीय मंत्री सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य अतिथियों का आभार जताया।
| बुद्ध की धरती पर पर्यटन का नया अध्याय
कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो और विपश्यना पार्क की शुरुआत केवल दो सुविधाओं का उद्घाटन भर नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की बौद्ध विरासत को आधुनिक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी और सांसद जगदम्बिका पाल द्वारा रखी गई परियोजनाओं पर शीघ्र कार्य के आश्वासन से जिले में आगे भी विकास परियोजनाओं को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।
| सुविधाओं के साथ प्रचार और रखरखाव भी जरूरी
कपिलवस्तु के पास वह ऐतिहासिक विरासत है जो देश-दुनिया के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती है। लाइट एंड साउंड शो और विपश्यना पार्क इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
लेकिन इन परियोजनाओं की वास्तविक सफलता नियमित संचालन, बेहतर रखरखाव, पर्यटकों के लिए सुविधाओं, परिवहन कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपिलवस्तु के प्रभावी प्रचार पर निर्भर करेगी।
यदि इन पहलुओं पर लगातार काम हुआ तो कपिलवस्तु केवल इतिहास का स्थल नहीं, बल्कि पूर्वांचल के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्रों में अपनी मजबूत जगह बना सकता है।
मौत से पहले तहरीर, फिर खेत में संदिग्ध मौत; पोस्टमार्टम के बाद सड़क पर शव रख परिजनों का प्रदर्शन, दो नामजद पर मुकदमा

गणेश लोधी की मौत ने खड़े किए कई सवाल; परिजनों ने पुरानी शिकायत पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल, पत्नी और परिवार के बयानों में विरोधाभास—अब पुलिस विवेचना और पोस्टमार्टम के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें
सिद्धार्थनगर। सदर कोतवाली क्षेत्र के करीब 40 वर्षीय गणेश लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला शुक्रवार शाम उस समय और गरमा गया, जब पोस्टमार्टम के बाद शव बाहर आने पर आक्रोशित परिजनों ने उसे सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजन मृतक द्वारा पूर्व में पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर का हवाला देते हुए कार्रवाई पर सवाल उठा रहे थे। करीब एक घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान आवागमन प्रभावित होने की बात सामने आई। बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने-बुझाने पर परिजन शांत हुए और शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए। मामले में दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि मुकदमा दर्ज होना आरोप सिद्ध होना नहीं है और मौत का वास्तविक कारण तथा किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका पुलिस विवेचना, चिकित्सकीय निष्कर्ष और अन्य साक्ष्यों से ही निर्धारित होगी।

| मौत से पहले की शिकायत अब जांच के केंद्र में
मृतक की पहचान गणेश लोधी पुत्र स्वर्गीय दशरथ लोधी, उम्र करीब 40 वर्ष, निवासी सरोजनीनगर उर्फ मोडिला, वार्ड नंबर-8, थाना सदर, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में बताई गई है। परिजनों के मुताबिक 30 जुलाई को गणेश अपनी पत्नी के साथ सदर थाना क्षेत्र के ग्राम रेहरा स्थित खेत में काम करने गया था। वहीं उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अब गणेश द्वारा मौत से पहले पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर ने पूरे प्रकरण को और संवेदनशील बना दिया है।

खेत में पत्नी के साथ गया था गणेश, फिर आई मौत की खबर
परिजनों के अनुसार गणेश अपनी पत्नी कमलावती के साथ ग्राम रेहरा स्थित खेत में फसल काटने गया था। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ने और बाद में मौत होने की बात सामने आई।
परिजनों का दावा है कि मौत के बाद गणेश की नाक से खून दिखाई दिया था तथा कुछ अन्य शारीरिक परिस्थितियां भी नजर आई थीं। हालांकि इन लक्षणों से अपने आप मौत का कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता।

गणेश की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी आकस्मिक अथवा चिकित्सकीय वजह से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक घटना है—इसका निष्कर्ष पोस्टमार्टम के चिकित्सकीय निष्कर्ष और पुलिस जांच के आधार पर ही निकलेगा।

| मौत से पहले पुलिस को दी थी तहरीर
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज गणेश द्वारा पूर्व में पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर है।
उपलब्ध कराई गई तहरीर की प्रति के अनुसार गणेश ने अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में उसने अपने साथ किसी अप्रिय घटना की आशंका भी जताई थी और पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी।
तहरीर में लिखी बातें शिकायतकर्ता गणेश के आरोप थे, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुरानी शिकायत पर पुलिस ने वास्तव में क्या-क्या कार्रवाई की थी, यह संबंधित पुलिस अभिलेखों और आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट होगा।

परिजनों का सवाल—पहले प्रभावी कार्रवाई होती तो क्या बच सकती थी जान?
गणेश की मौत के बाद यही पुरानी तहरीर परिवार के आक्रोश का बड़ा कारण बन गई है।
परिजनों का आरोप है कि यदि गणेश द्वारा पूर्व में व्यक्त की गई आशंका को गंभीरता से लेकर प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो संभवतः आज उसकी जान बच सकती थी।
यह परिजनों का आरोप है। पूर्व शिकायत के निस्तारण में पुलिस स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं, इसकी अभी स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसीलिए इस पहलू पर निष्कर्ष निकालने से पहले पुरानी तहरीर, उस पर की गई पुलिस कार्रवाई और संबंधित अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
| पत्नी बोली—पी रखी थी शराब; परिवार ने किया इनकार
गणेश की पत्नी का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। घटना के बाद पत्नी ने दावा किया कि उसका पति उस पर शक करता था और घटना वाले दिन खेत में काम करने के दौरान उसने शराब पी रखी थी।
इसके ठीक विपरीत मृतक के परिवार का दावा है कि गणेश शराब का सेवन नहीं करता था।
पत्नी और परिजनों के इन परस्पर विरोधी बयानों ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है।
घटना के दिन मृतक ने शराब का सेवन किया था अथवा नहीं, इसे किसी एक पक्ष के बयान के आधार पर तथ्य नहीं माना जा सकता। इस संबंध में उपलब्ध चिकित्सकीय/फॉरेंसिक निष्कर्ष ही महत्वपूर्ण होंगे।
भाई ने पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर लगाए गंभीर आरोप
गणेश की मौत के बाद उसके भाई ने पुलिस को तहरीर देकर पत्नी और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवार का आरोप है कि पत्नी की एक व्यक्ति से कथित नजदीकी को लेकर गणेश परेशान था और इसका विरोध करता था।
मृतक की सास ने भी अपनी बेटी के व्यवहार को लेकर सवाल उठाते हुए दामाद की मौत के मामले में जांच की मांग की है।
इन सभी कथनों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इनकी सत्यता पुलिस विवेचना में साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित होगी।
पोस्टमार्टम के बाद सड़क पर शव, करीब घंटे भर चला प्रदर्शन
शुक्रवार शाम करीब चार बजे पोस्टमार्टम हाउस से गणेश का शव बाहर आने के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया।
बताया जा रहा है कि आक्रोशित परिजनों ने शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके चलते आवागमन प्रभावित हुआ और मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
परिजन गणेश की पुरानी तहरीर का हवाला देकर कार्रवाई की मांग करने लगे। उनका सवाल था कि जब मृतक ने पहले ही अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जताई थी तो उस शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई?
करीब एक घंटे तक परिजन अपनी मांग को लेकर डटे रहे।
पुलिस अधिकारियों ने संभाली स्थिति
तनावपूर्ण स्थिति के बीच क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान और कोतवाली प्रभारी मिथिलेश राय ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें समझाने-बुझाने का प्रयास किया।
पुलिस के आश्वासन और समझाने के बाद परिजन शांत हुए। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया और आवागमन सामान्य होने का रास्ता साफ हुआ।
| दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा
गणेश लोधी की मौत के मामले में अब पुलिस कार्रवाई भी आगे बढ़ी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई/विवेचना कर रही है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR में किसी व्यक्ति का नाम होना अथवा उसके खिलाफ आरोप लगाया जाना स्वयं में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आरोपों की सत्यता पुलिस विवेचना, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे पीड़ादायक पहलू गणेश का परिवार है। बताया जा रहा है कि गणेश अपने पीछे करीब 14 वर्षीय बेटे दुर्गेश और लगभग आठ वर्षीय बेटी दुर्गावती को छोड़ गया है।
एक तरफ पिता की अचानक मौत और दूसरी तरफ गंभीर आरोपों के बीच चल रही पुलिस कार्रवाई ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
| पुलिस जांच के सामने 6 बड़े सवाल
1. गणेश लोधी की मौत का वास्तविक कारण क्या है?
2. मौत से पहले दी गई तहरीर पर पुलिस ने उस समय क्या कार्रवाई की थी?
3. पत्नी के शराब संबंधी दावे और परिवार के इनकार की वास्तविकता क्या है?
4. पुरानी तहरीर में जिस दूसरे व्यक्ति का उल्लेख बताया जा रहा है, जांच में उसकी क्या भूमिका सामने आती है?
5. मृतक की नाक से खून आने के परिजनों के दावे का चिकित्सकीय कारण क्या था?
6. जिन दो लोगों को मुकदमे में नामजद किया गया है, उनके खिलाफ जांच में क्या साक्ष्य सामने आते हैं?
इन सवालों के जवाब आरोपों या चर्चाओं से नहीं बल्कि पोस्टमार्टम के निष्कर्ष, पुलिस विवेचना, संबंधित लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से सामने आएंगे।
सारांश | अब तक क्या-क्या हुआ?
गणेश लोधी की खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत → मौत से पहले पुलिस को तहरीर देने की बात सामने आई → पत्नी और परिवार के बयान में शराब को लेकर विरोधाभास → भाई ने पत्नी व एक अन्य व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए → पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया → पुलिस अधिकारियों ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया → दो नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी → अब विवेचना और चिकित्सकीय निष्कर्ष का इंतजार।
टिप्पणी | पुरानी तहरीर की भी हो निष्पक्ष पड़ताल, लेकिन आरोपों से तय न हो दोष
गणेश लोधी की मौत निश्चित रूप से गंभीर और संवेदनशील मामला है। मौत से पहले पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर के कारण परिवार के सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सामने आना जरूरी है कि शिकायत कब मिली, उसमें क्या आरोप थे और पुलिस ने नियमानुसार क्या कार्रवाई की।
लेकिन इसी के साथ यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जनाक्रोश अथवा गंभीर आरोप किसी व्यक्ति को स्वतः दोषी नहीं बना देते।
दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस विवेचना का दायित्व और महत्वपूर्ण हो गया है। जांच बिना किसी पूर्वाग्रह के साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए। यदि किसी की आपराधिक भूमिका के प्रमाण मिलते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो वह तथ्य भी उतनी ही स्पष्टता से सामने आए।
गणेश के परिवार को न्याय मिलना चाहिए—लेकिन न्याय का रास्ता निष्पक्ष जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य और कानून से होकर ही गुजरता है।
मौत से पहले पुलिस को दी थी तहरीर, अब खेत में गणेश लोधी की संदिग्ध मौत; पत्नी और परिजनों के बयानों में विरोधाभास
पत्नी बोली—पति ने पी रखी थी शराब और करता था शक; परिवार का दावा—गणेश शराब नहीं पीता था, भाई ने पत्नी व एक अन्य व्यक्ति पर लगाए गंभीर आरोप
सिद्धार्थनगर। सदर थाना क्षेत्र में करीब 40 वर्षीय गणेश लोधी की खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि परिजनों के अनुसार गणेश ने अपनी मौत से पहले पुलिस को एक तहरीर देकर पत्नी और एक अन्य व्यक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे तथा अपने साथ किसी अप्रिय घटना की आशंका जताई थी। अब गणेश की मौत के बाद उसके भाई ने पत्नी और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका पर संदेह जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं मृतक की सास ने भी अपनी बेटी के व्यवहार को लेकर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर पत्नी का कहना है कि उसका पति उस पर शक करता था और घटना वाले दिन उसने शराब पी रखी थी। परिवार का दावा इसके ठीक उलट है कि गणेश शराब नहीं पीता था। फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं है और आरोपों की सत्यता पुलिस जांच व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगी।
| कई सवाल छोड़ गई खेत में हुई मौत
मृतक की पहचान गणेश लोधी पुत्र स्वर्गीय दशरथ लोधी, निवासी सरोजनीनगर उर्फ मोडिला, वार्ड नंबर-8, थाना सदर, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में बताई गई है। परिजनों के अनुसार 30 जुलाई को गणेश अपनी पत्नी के साथ सदर थाना क्षेत्र के ग्राम रेहरा स्थित खेत में फसल काटने गया था। इसी दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई।
खेत में पत्नी के साथ गया था गणेश
परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक गणेश अपनी पत्नी कमलावती के साथ खेत में काम करने गया था। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ने और मौत होने की बात सामने आई। परिजनों का दावा है कि मौत के बाद गणेश की नाक से खून दिखाई दिया था और कुछ अन्य शारीरिक परिस्थितियां भी नजर आईं।
हालांकि केवल इन परिस्थितियों के आधार पर मौत का कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता। यह मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी चिकित्सकीय समस्या के कारण हुई अथवा इसके पीछे कोई अन्य वजह है, इसका निष्कर्ष पोस्टमार्टम और जांच के आधार पर ही निकलेगा।

| मौत से पहले दी गई तहरीर ने बढ़ाई मामले की गंभीरता
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू गणेश द्वारा पूर्व में पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर है। उपलब्ध कराई गई तहरीर की प्रति में गणेश ने अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के संबंधों को लेकर आरोप लगाए थे। तहरीर में उसने यह भी आशंका जताई थी कि उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
तहरीर में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में दोनों पक्षों के बीच विवाद सामने आया था। शिकायत में लगाए गए सभी आरोप गणेश के कथन हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि उस समय मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया गया था। उस शिकायत पर पुलिस स्तर से वास्तव में क्या कार्रवाई हुई थी, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
पत्नी का पक्ष—“पति मुझ पर शक करता था”
गणेश की मौत के बाद उसकी पत्नी कमलावती से घटना के संबंध में पूछे जाने पर उसने कहा कि उसका पति उस पर शक करता था। पत्नी के मुताबिक घटना वाले दिन गणेश उसके साथ खेत में काम कर रहा था और उसने शराब पी रखी थी।
पत्नी के इस बयान के बाद मामले में एक और सवाल जुड़ गया है।
| परिवार बोला—गणेश शराब नहीं पीता था
मृतक के परिवार ने पत्नी के शराब संबंधी दावे से असहमति जताई है। परिजनों का कहना है कि गणेश शराब का सेवन नहीं करता था।
इस तरह पत्नी और मृतक के परिजनों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है।
गणेश ने घटना वाले दिन शराब का सेवन किया था अथवा नहीं, इसे फिलहाल प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। पोस्टमार्टम के दौरान किए गए आवश्यक चिकित्सकीय/फॉरेंसिक परीक्षण और जांच से इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
भाई ने पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर लगाया हत्या का आरोप
घटना के बाद मृतक के भाई की ओर से पुलिस को तहरीर देकर गणेश की पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि पत्नी की एक व्यक्ति से नजदीकी को लेकर गणेश परेशान रहता था और इसका विरोध करता था।
यहां स्पष्ट करना आवश्यक है कि हत्या का आरोप अभी परिजनों का आरोप है। किसी व्यक्ति की संलिप्तता अथवा अपराध सिद्ध होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मृतक की सास ने भी बेटी पर लगाए आरोप
मामले में एक असामान्य पहलू तब सामने आया जब मृतक की सास ने भी अपनी बेटी के आचरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
उनका दावा है कि उनकी बेटी का गांव में किराये पर रहने वाले एक व्यक्ति के साथ मेल-जोल था, जिसका उनका दामाद गणेश विरोध करता था। उन्होंने भी दामाद की मौत को लेकर संदेह जताया और जांच की मांग की।
हालांकि सास द्वारा लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच से पहले तथ्य नहीं माना जा सकता।
एक वर्ष से संबंध होने की चर्चा, पुष्टि नहीं
स्थानीय स्तर पर पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के बीच करीब एक वर्ष से कथित नजदीकी होने की चर्चाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसी कथित संबंध को गणेश की मौत से जोड़कर देख रहे हैं।
FT News Digital ऐसी चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। किसी कथित प्रेम संबंध को हत्या का कारण बताना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही इस पहलू की सत्यता निर्धारित करनी होगी।
दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
बताया जा रहा है कि गणेश की उम्र करीब 40 वर्ष थी, जबकि पत्नी कमलावती की उम्र लगभग 35 वर्ष बताई गई है। परिवार में करीब 14 वर्षीय बेटा दुर्गेश और लगभग आठ वर्षीय बेटी दुर्गावती हैं।
गणेश की अचानक मौत के बाद परिवार में मातम है। वहीं आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों बच्चों की स्थिति भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
जिला अस्पताल में जुटी भीड़, पुलिस ने पत्नी-बच्चों को सुरक्षा में बैठाया
गणेश की मौत की जानकारी मिलने के बाद जिला अस्पताल में परिजनों और परिचितों की भीड़ जमा हो गई। मौजूद लोगों में आक्रोश को देखते हुए अस्पताल परिसर स्थित पुलिस चौकी के पुलिसकर्मियों ने स्थिति संभाली।
बताया गया कि किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए मृतक की पत्नी और बच्चों को पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से अपने पास बैठा लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की जानकारी है।
जांच के सामने ये अहम सवाल
◆ गणेश लोधी की मौत का वास्तविक कारण क्या है?
◆ मौत से पहले दी गई कथित तहरीर पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी?
◆ पत्नी के शराब संबंधी बयान और परिवार के दावे में कौन-सा तथ्य सही है?
◆ परिजनों द्वारा जिस दूसरे व्यक्ति का जिक्र किया जा रहा है, उसकी भूमिका क्या थी?
◆ नाक से खून आने के दावे का चिकित्सकीय कारण क्या था?
◆ क्या मौत में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका है या मामला किसी अन्य कारण से जुड़ा है?
इन सवालों के जवाब अनुमान या आरोपों से नहीं, बल्कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्य और पुलिस जांच से ही मिल सकते हैं।
| आरोप गंभीर, लेकिन फैसला जांच से पहले नहीं
गणेश लोधी की मौत से पहले दी गई बताई जा रही तहरीर और मौत के बाद परिवार की ओर से लगाए जा रहे आरोप निश्चित रूप से जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। पत्नी और परिवार के परस्पर विरोधी बयान भी जांच एजेंसी के सामने अहम पहलू हो सकते हैं।
लेकिन कानून की दृष्टि से आरोप और अपराध सिद्ध होना दो अलग बातें हैं। किसी महिला या अन्य व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले हत्यारा घोषित करना न केवल अनुचित होगा बल्कि कानूनी रूप से भी जोखिमपूर्ण हो सकता है।

पुलिस के सामने अब पूर्व शिकायत, घटनास्थल की परिस्थितियां, संबंधित लोगों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को जोड़कर निष्पक्ष जांच करने की चुनौती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गणेश लोधी की मौत कैसे हुई और क्या इसमें किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका थी।
दो स्कूलों में लगातार चोरी से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, तीन दिन में दूसरी वारदात से शिक्षक और ग्रामीण चिंतित
स्कूलों के रसोईघर बने निशाना, गैस सिलेंडर चोरी होने से पुलिस के सामने खुलासे की चुनौती
स्थान : बर्डपुर/सिद्धार्थनगर
मुख्य बिंदु
तीन दिन के भीतर दो सरकारी विद्यालयों में चोरी।
दोनों मामलों में रसोईघर का ताला तोड़कर गैस सिलेंडर चोरी।
शिक्षकों और ग्रामीणों में बढ़ी चिंता।
पुलिस से शीघ्र खुलासे और सुरक्षा बढ़ाने की मांग।
सिद्धार्थनगर।
सिद्धार्थनगर जिले के सरकारी प्राथमिक विद्यालय लगातार चोरों के निशाने पर दिखाई दे रहे हैं। तीन दिनों के भीतर दो अलग-अलग विद्यालयों में रसोईघर का ताला तोड़कर गैस सिलेंडर चोरी होने की घटनाओं ने विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हुई इन वारदातों के बाद शिक्षक और ग्रामीणों में चिंता का माहौल है, जबकि पुलिस से शीघ्र खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।
ताजा मामला कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मिश्रौलिया का है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार गुरुवार सुबह स्कूल पहुंचने पर रसोईघर का ताला टूटा मिला। जांच करने पर गैस सिलेंडर गायब पाया गया। इसके बाद विद्यालय की ओर से पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की गई।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्याम नारायण ने बताया कि घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई है और चोरी का खुलासा करने तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इससे पहले 27 जुलाई की रात चिल्हिया थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रमवापुर में भी इसी तरह रसोईघर का ताला तोड़कर दो गैस सिलेंडर चोरी किए गए थे। दोनों विद्यालयों के बीच लगभग दो किलोमीटर की दूरी बताई जा रही है। लगातार सामने आई इन घटनाओं से विद्यालयों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों और शिक्षकों ने विद्यालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, रात्रि गश्त बढ़ाने तथा घटनाओं का शीघ्र खुलासा करने की मांग की है।
पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है। चोरी की घटनाओं के संबंध में आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
संपादकीय टिप्पणी
विद्यालय शिक्षा के मंदिर माने जाते हैं। यदि लगातार सरकारी स्कूल ही चोरों के निशाने पर आने लगें, तो यह केवल संपत्ति की चोरी का मामला नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता का संकेत भी है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच, नियमित रात्रि गश्त और विद्यालय परिसरों की सुरक्षा मजबूत करना आवश्यक है।
नशा मुक्त भारत की मुहिम को मिलेगा युवाओं का दम, सिद्धार्थनगर में 8 विधाओं की जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं
05 अगस्त को होगी प्रतियोगिता, 04 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन; विजेताओं को मिलेगा राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर
आयोजक: माय भारत (MY Bharat), युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार
अभियान: नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत
आवेदन की अंतिम तिथि: 04 अगस्त 2026
प्रतियोगिता: 05 अगस्त 2026, प्रातः 9:00 बजे
स्थान: बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज, सिद्धार्थनगर
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” अभियान के तहत सिद्धार्थनगर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर मिला है। 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवा आठ विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकेंगे।
मुख्य खबर
सिद्धार्थनगर। माय भारत (MY Bharat) के तत्वावधान में “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” अभियान के अंतर्गत जनपद के युवाओं के लिए जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
इस अभियान का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं, बल्कि युवाओं में नशा मुक्त जीवनशैली, सामाजिक जागरूकता, रचनात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की भावना विकसित करना है।
प्रतियोगिताओं का आयोजन 05 अगस्त 2026 को बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज, सिद्धार्थनगर में होगा। इच्छुक प्रतिभागी 04 अगस्त 2026 तक MY Bharat Portal पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
इन 8 विधाओं में दिखा सकेंगे प्रतिभा
वाद-विवाद प्रतियोगिता
स्लोगन (नारा) लेखन
चित्रकला
समूह नृत्य
रील एवं लघु फिल्म निर्माण
कविता लेखन / स्लैम पोएट्री
संगीत एवं रैप
नुक्कड़ नाटक
प्रत्येक प्रतिभागी केवल एक प्रतियोगिता में भाग ले सकेगा।
जिले से राष्ट्रीय मंच तक का अवसर
जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सिद्धार्थनगर का प्रतिनिधित्व करेंगे। राज्य स्तर के विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा प्रदर्शन और सम्मानित होने का अवसर मिलेगा।
निष्पक्ष होगा मूल्यांकन
हर प्रतियोगिता का मूल्यांकन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया जाएगा। प्रतिभागियों की रचनात्मकता, विषय की समझ, प्रस्तुति, मौलिकता और सामाजिक संदेश के आधार पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान का चयन किया जाएगा।
सारांश
15–29 वर्ष के युवाओं से आवेदन आमंत्रित।
8 विधाओं में होगी जिला स्तरीय प्रतियोगिता।
आवेदन की अंतिम तिथि 04 अगस्त।
05 अगस्त को बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज में आयोजन।
विजेताओं को राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका।
संपादकीय टिप्पणी
नशे के विरुद्ध जागरूकता केवल कानून से नहीं, बल्कि युवाओं की सकारात्मक भागीदारी से मजबूत होती है। यदि युवा अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से समाज को सही संदेश दें, तो यह अभियान जनजागरण का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
