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गोरखपुर: नई बाजार में तीन घंटे बंद रहीं दुकानें, विधायक के आश्वासन पर शुरू हुआ कारोबार
दुर्गा पूजा पंडाल के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों की सुरक्षा का मुद्दा उठा; केबलिंग कराने की मांग को लेकर व्यापारियों ने जताई चिंता

चौरीचौरा, गोरखपुर। झंगहा थाना क्षेत्र के नई बाजार में बिजली के तारों की सुरक्षा को लेकर व्यापारियों ने गुरुवार को अपनी दुकानें करीब तीन घंटे तक बंद रखीं। दुर्गा पूजा पंडाल के ऊपर से गुजर रहे बिजली के नंगे तारों को सुरक्षित कराने की मांग को लेकर व्यापारियों ने अपनी समस्या सामने रखी। दुकानें बंद होने की सूचना मिलने पर स्थानीय विधायक इंजीनियर सरवन निषाद मौके पर पहुंचे और व्यापारियों से बातचीत कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोल दीं।
पंडाल के ऊपर से गुजर रहे तारों को लेकर चिंता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नई बाजार में दुर्गा पूजा पंडाल के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों को लेकर व्यापारियों ने सुरक्षा संबंधी चिंता जताई थी। व्यापारियों की मांग थी कि तारों पर सुरक्षित केबलिंग कराई जाए, जिससे किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सके।
इसी मांग को लेकर व्यापारियों ने दुकानों को बंद रखा। मामले की सूचना मिलने पर विधायक इंजीनियर सरवन निषाद मौके पर पहुंचे और व्यापारियों की बात सुनी।
विधायक ने बिजली विभाग के अधिकारियों से की बातचीत
व्यापारियों की मांग पर विधायक ने बिजली विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने पंडाल के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों की सुरक्षा के लिए केबलिंग कराने तथा आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
विधायक की ओर से आश्वासन मिलने के बाद व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें खोल दीं। हालांकि, केबलिंग का कार्य वास्तव में कब शुरू होगा और कब तक पूरा किया जाएगा, इसकी पुष्टि अभी उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
मौके पर मौजूद रहे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी
इस दौरान चौरीचौरा के तहसीलदार संजय सिंह, बिजली विभाग के एसडीओ पंकज गुप्ता, पूर्व जेई परमेश्वर लाल, झंगहा थाना प्रभारी अश्वनी चौबे, अवधेश तिवारी, नई बाजार चौकी प्रभारी अशोक कुमार सिंह तथा बोहाबार चौकी प्रभारी अशोक सरोज सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वहीं, विधायक प्रतिनिधि अमित जायसवाल, रामसेवक निषाद, वीरेंद्र निषाद, रमेश निषाद और सुमित निषाद समेत नई बाजार के व्यापारी गोविंद वर्मा, संतोष उर्फ पकौड़ी गुप्ता, मंटू यादव, संजय, गोलू, सुरेंद्र, जयप्रकाश गुप्ता, राकेश वर्मा, राजेश वर्मा और दुर्गेश गुप्ता सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है मामला
बिजली के तारों की सुरक्षा सार्वजनिक स्थलों पर विशेष महत्व रखती है। दुर्गा पूजा पंडाल के ऊपर से बिजली के तार गुजरने की स्थिति में संबंधित विभाग द्वारा स्थल का निरीक्षण और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किया जाना महत्वपूर्ण है।
नई बाजार में व्यापारियों की मांग के बाद अब निगाहें बिजली विभाग की अगली कार्रवाई पर रहेंगी। तारों की सुरक्षित केबलिंग कब तक होगी, यह संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।
चौरीचौरा, गोरखपुर से विनोद पासवान की खास रिपोर्ट।
FT News Digital | सच और …कुछ नहीं।
बलरामपुर में रेलवे ट्रैक पर रुकी ट्रेन का वीडियो सामने आया, गाय फंसने की सूचना
बढ़नी की ओर जाने वाली ट्रेन से जुड़ा बताया जा रहा मामला, घटना के कारण और वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
बलरामपुर। जिले में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के रुकने से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। प्राप्त जानकारी में दावा किया जा रहा है कि ट्रैक पर गाय फंसने के कारण बढ़नी की ओर जाने वाली डेमू ट्रेन रुकी थी। हालांकि, घटना के सटीक स्थान, ट्रेन के ठहराव की वजह और गाय की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
वीडियो को लेकर सामने आई जानकारी
उपलब्ध वीडियो में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन रुकी हुई दिखाई देती है। इस दृश्य को लेकर जानकारी दी जा रही है कि घटना के दौरान ट्रैक पर एक गाय फंस गई थी। लेकिन केवल वीडियो के आधार पर घटना की पूरी परिस्थितियों, उसके कारणों या रेलवे परिचालन पर पड़े असर की पुष्टि नहीं की जा सकती।
रेलवे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण
घटना के संबंध में ट्रेन का सही विवरण, ठहराव की अवधि और परिचालन सामान्य होने की स्थिति जानने के लिए रेलवे के अधिकृत अधिकारियों की पुष्टि जरूरी है। गाय को सुरक्षित निकाला गया या नहीं, इसकी जानकारी भी आधिकारिक पुष्टि के बाद ही दी जा सकती है।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि
रेलवे ट्रैक पर किसी पशु के फंसने की स्थिति में यात्रियों और रेल परिचालन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। आम लोगों को ट्रैक पर उतरने या ट्रेन के नीचे जाकर पशु को निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में रेलवे कर्मचारियों और अधिकृत अधिकारियों को ही आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
निष्कर्ष: फिलहाल बलरामपुर में ट्रेन के रुकने और गाय फंसने से संबंधित जानकारी की पुष्टि की आवश्यकता है। रेलवे से आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद घटना की स्थिति और परिचालन पर पड़े असर का स्पष्ट विवरण सामने आ सकेगा।
FT News Digital — सत्यापित तथ्यों के साथ जिम्मेदार पत्रकारिता।
बढ़नी और शोहरतगढ़ में बनेंगे बस स्टेशन, कैबिनेट की मंजूरी से जगी उम्मीद
Friend Times | FT News Digital

सिद्धार्थनगर। जिले के बढ़नी और शोहरतगढ़ क्षेत्र में रोडवेज बस स्टेशन निर्माण की उम्मीदों को नई ताकत मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट से भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब लोगों की निगाहें परियोजना के धरातल पर उतरने पर टिकी हैं। यह पहल आगे बढ़ती है तो स्थानीय यात्रियों, व्यापारियों और सीमावर्ती क्षेत्र में आवागमन करने वाले लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलने की संभावना है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब निर्माण की बारी
बढ़नी और शोहरतगढ़ में बस स्टेशन निर्माण को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने जिले की परिवहन व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सितंबर 2026 में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में सिद्धार्थनगर के बढ़नी और शोहरतगढ़ तथा हरदोई जिले के सवायजपुर में बस स्टेशन निर्माण के लिए राजस्व विभाग की भूमि परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
इस निर्णय से परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। हालांकि, भूमि हस्तांतरण की मंजूरी मिलने के बाद भी निर्माण के लिए जरूरी औपचारिकताएं, वित्तीय स्वीकृति और कार्य शुरू होने की स्थिति अलग-अलग चरण हैं। इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि दोनों स्थानों पर निर्माण कार्य कब शुरू होगा।
दस्तावेज में दर्ज है 3.75 करोड़ रुपये का कुल आंकड़ा
उपलब्ध दस्तावेज के अंश में बढ़नी बस स्टेशन के नवनिर्माण के सामने 250 लाख रुपये तथा शोहरतगढ़ बस स्टेशन के सामने 125 लाख रुपये की राशि दर्ज दिखाई देती है।
इन दोनों राशियों को जोड़ने पर कुल आंकड़ा 375 लाख रुपये यानी 3.75 करोड़ रुपये होता है।
हालांकि, दस्तावेज के उपलब्ध हिस्से से यह स्पष्ट नहीं होता कि ये राशियां अंतिम स्वीकृत परियोजना लागत हैं, बजट प्रावधान हैं या किसी अन्य वित्तीय मद से संबंधित हैं। ऐसे में इन्हें अंतिम निर्माण लागत बताने से पहले संबंधित शासनादेश और वित्तीय स्वीकृति की पुष्टि आवश्यक है।
बढ़नी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बस स्टेशन?
नेपाल सीमा से सटे बढ़नी में स्थानीय आवागमन और सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों के कारण सार्वजनिक परिवहन का विशेष महत्व है। व्यवस्थित बस स्टेशन बनने से यात्रियों को बसों के इंतजार के लिए बेहतर स्थान और परिवहन संचालन को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, बस स्टेशन की बेहतर व्यवस्था से स्थानीय बाजारों और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक स्वरूप निर्माण की स्वीकृत योजना और संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
शोहरतगढ़ में भी यात्रियों को राहत की उम्मीद
शोहरतगढ़ क्षेत्र के लोगों के लिए भी बस स्टेशन निर्माण की योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। व्यवस्थित बस स्टेशन बनने से यात्रियों को सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराने और बसों के संचालन को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में सहायता मिल सकती है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर परियोजना को आगे बढ़ाएं। निर्माण की समयसीमा और प्रस्तावित सुविधाओं को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
अब आगे क्या?
इस परियोजना में तीन प्रमुख बिंदु महत्वपूर्ण हैं—भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की स्थिति, निर्माण के लिए अंतिम वित्तीय स्वीकृति और काम शुरू होने की संभावित तारीख।
यदि इन प्रक्रियाओं को पूरा कर निर्माण शुरू किया जाता है, तो यह जिले की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
निष्कर्ष: बढ़नी और शोहरतगढ़ में बस स्टेशन निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण संबंधी प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलना महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब परियोजना की वास्तविक प्रगति और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं का आकलन निर्माण संबंधी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।
सिद्धार्थनगर में दो संदिग्ध मौतें, दोनों मामलों में जवाब का इंतजार! आखिर जांच कहां तक पहुंची?

सोनवल में पोखरी के पास मिला एमआर राहुल कुमार का शव, गोनहा में हाईटेंशन टावर पर मिला राजन का शव; मौतों की वजह और घटनाक्रम पर उठ रहे सवाल

सिद्धार्थनगर/जोगिया। जिले के जोगिया क्षेत्र में सामने आए दो अलग-अलग मौत के मामलों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक मामले में सोनवल गांव के पास गड्ढे में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) राहुल कुमार का शव मिला था, जबकि दूसरे मामले में गोनहा गांव के बाहर बिजली के हाईटेंशन टावर पर 18 वर्षीय राजन का शव लटका मिला। दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों मामलों में मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम को लेकर स्पष्ट, सार्वजनिक रूप से पुष्ट निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

राहुल कुमार के मामले में प्रकाशित समाचारों के अनुसार, पोस्टमार्टम से मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ था और बिसरा सुरक्षित रखा गया था। वहीं, राजन के मामले में 14 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रही थी। ऐसे में सवाल यह है कि दोनों मामलों में जांच की वर्तमान स्थिति क्या है, किन साक्ष्यों की पड़ताल की गई है और परिजनों की आशंकाओं के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
पहला मामला: सोनवल में मिला एमआर राहुल कुमार का शव, मौत की वजह पर स्पष्टता नहीं
जोगिया कोतवाली क्षेत्र के सोनवल गांव के पास बाग में स्थित गड्ढे में 11 सितंबर 2026 को राहुल कुमार (38) का शव मिलने की खबर सामने आई थी। राहुल के लापता होने के बाद परिवार उनकी तलाश कर रहा था। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, घटनास्थल के आसपास उनकी बाइक मिलने की जानकारी भी सामने आई थी।

12 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका और चिकित्सकों ने बिसरा सुरक्षित किया। इसके बाद 27 सितंबर की रिपोर्ट में भी मौत की वजह स्पष्ट न होने की बात प्रकाशित हुई। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस हत्या और हादसे समेत विभिन्न संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही थी।
यहां सबसे अहम सवाल है कि बिसरा जांच की रिपोर्ट प्राप्त हुई या नहीं? राहुल के लापता होने, उनकी बाइक और शव मिलने की परिस्थितियों के बीच क्या संबंध सामने आया? क्या घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण पूरा हुआ?
इन सवालों के जवाब संबंधित जांच अभिलेखों और पुलिस के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकते हैं। उपलब्ध प्रकाशित जानकारी के आधार पर किसी अपराध या दुर्घटना को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।
दूसरा मामला: दुर्गा पूजा पंडाल जाने की बात कहकर निकला राजन, सुबह टावर पर मिला शव
दूसरी घटना जोगिया कोतवाली क्षेत्र के गोनहा गांव की है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 18 वर्षीय राजन सोमवार शाम घर से निकला था। परिजनों के मुताबिक, उसने गांव में दुर्गा पूजा पंडाल जाने की बात कही थी, लेकिन रात में वापस नहीं लौटा। मंगलवार सुबह गांव के बाहर बिजली के हाईटेंशन टावर पर उसका शव दुपट्टे के सहारे लटका मिला।
पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी, हालांकि प्रकाशित रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उस समय तक पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई थी।
इस मामले में भी कुछ प्रश्नों का उत्तर मिलना जरूरी है। राजन घर से निकलने के बाद कहां गया? रात के दौरान उसकी गतिविधियों के बारे में क्या जानकारी मिली? घटनास्थल से कौन-कौन से साक्ष्य जुटाए गए? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए?
इनका उत्तर जांच के वास्तविक निष्कर्षों से ही मिल सकता है। केवल शव मिलने की परिस्थितियों के आधार पर हत्या या आत्महत्या का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
दोनों मामलों में पुलिस से पूछे जाने चाहिए ये सीधे सवाल
दोनों घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों से निम्न बिंदुओं पर तथ्यात्मक जानकारी मांगी जानी चाहिए:
1. जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
राहुल कुमार और राजन के मामलों में अब तक कौन-कौन से जांच कदम पूरे किए गए हैं और कौन-से महत्वपूर्ण बिंदु अभी लंबित हैं?
2. चिकित्सकीय और फॉरेंसिक रिपोर्ट का क्या हुआ?
राहुल के मामले में सुरक्षित किए गए बिसरा की रिपोर्ट प्राप्त हुई या नहीं? राजन के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई या नहीं? यदि रिपोर्ट लंबित है, तो वर्तमान स्थिति क्या है?
3. घटनास्थल और अंतिम गतिविधियों की पड़ताल कितनी आगे बढ़ी?
दोनों मामलों में उपलब्ध भौतिक साक्ष्य, संबंधित व्यक्तियों के बयान, घटनास्थल की परिस्थितियों और अन्य प्रासंगिक तथ्यों का परीक्षण किस स्तर तक पहुंचा है?
4. परिजनों को जांच की जानकारी कैसे दी जा रही है?
क्या परिजनों की आशंकाओं और उनके पास उपलब्ध जानकारी को जांच में शामिल किया गया है? क्या उन्हें मामले की प्रगति के बारे में उचित जानकारी मिल रही है?
5. आगे की कार्रवाई की समय-सीमा क्या है?
क्या जांच में किसी विशेषज्ञ या फॉरेंसिक सहायता की जरूरत है? लंबित रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
इन सवालों का उद्देश्य किसी अधिकारी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि मामलों की स्थिति स्पष्ट करना और जनहित में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
प्रशासनिक जवाबदेही: सिर्फ जांच जारी होने की सूचना नहीं, प्रगति भी महत्वपूर्ण
किसी संदिग्ध मौत की जांच में समय लग सकता है। चिकित्सकीय रिपोर्ट, बिसरा परीक्षण, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान जैसे पहलू जांच की दिशा तय कर सकते हैं। इसलिए केवल देरी के आधार पर पुलिस की निष्क्रियता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
लेकिन जनहित में यह जानना भी जरूरी है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है, कौन-से तथ्य स्थापित हो चुके हैं और कौन-से प्रश्न अभी अनुत्तरित हैं। जहां रिपोर्ट लंबित हो, वहां उसकी स्थिति स्पष्ट की जा सकती है; जहां साक्ष्य मिलें, वहां कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
राहुल कुमार के मामले में बिसरा रिपोर्ट की स्थिति और राजन के मामले में पोस्टमार्टम निष्कर्ष की पुष्टि इसीलिए महत्वपूर्ण है। दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है, ऐसा मानने का फिलहाल कोई पुष्ट आधार उपलब्ध नहीं है। इनकी जांच अलग-अलग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।
संपादकीय टिप्पणी: हर संदिग्ध मौत में सच सामने आना जरूरी
दो परिवारों का दुख और उनकी चिंताएं किसी भी समाज के लिए गंभीर विषय हैं। पत्रकारिता का दायित्व केवल घटनाओं की सूचना देना नहीं, बल्कि उन सवालों को भी सामने लाना है जिनका उत्तर जनता जानना चाहती है।
सोनवल में राहुल कुमार की मौत और गोनहा में राजन की मौत के मामलों में प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच हो, चिकित्सकीय निष्कर्षों की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
सवाल किसी को पहले से दोषी ठहराने का नहीं, सवाल है—दोनों मामलों में जांच की वास्तविक स्थिति क्या है और मौतों की वजह स्पष्ट करने के लिए अब तक क्या-क्या किया गया है?
जनपद पुलिस और संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे तथ्यों के आधार पर दोनों मामलों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करें, ताकि परिजनों की चिंताओं का समाधान हो और जनता तक सत्यापित जानकारी पहुंचे।
फ्रेंड टाइम्स | FT News Digital — सवाल तथ्यों पर, खबर जनहित में।
सिद्धार्थनगर: मेले से लौट रहे युवक पर चाकू से हमला, हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज
खुनुवां बाईपास के निजी मैरिज हॉल में झूला-सर्कस देखने के दौरान कहासुनी की बात आई सामने; नौडिहवा पुल के पास घायल मिला युवक, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार की जानकारी
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र में एक युवक पर चाकू से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। बताया गया है कि खुनुवां बाईपास स्थित एक निजी मैरिज हॉल में झूला-सर्कस देखने के दौरान दो युवकों के बीच कहासुनी हुई थी। इसके बाद नौडिहवा पुल के पास एक युवक की पीठ में चाकू लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन की तहरीर के आधार पर पुलिस ने नामजद युवक के विरुद्ध हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है।
घटना कैसे हुई?
प्राप्त समाचार विवरण के अनुसार, शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के सिसवा बुजुर्ग निवासी आशीष निषाद अपने मामा के यहां बसहिया गांव में रह रहे थे। मंगलवार रात वह अपने ममेरे भाई राजन के साथ बाइक से खुनुवां बाईपास स्थित एक निजी मैरिज हॉल में झूला-सर्कस देखने गए थे।
वहां किसी बात को लेकर आशीष और बसहिया गांव के नौडिहवा टोला निवासी अखिलेश यादव के बीच कहासुनी होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि विवाद बढ़ने पर दोनों के बीच हाथापाई की स्थिति बन गई। मैरिज हॉल में मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया।
इसके बाद नौडिहवा पुल के पास आशीष की पीठ में चाकू लगने से वह घायल हो गए। घटना के पीछे की वास्तविक वजह और दोनों घटनाक्रमों के बीच संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
घायल युवक को गोरखपुर किया गया रेफर
घटना के बाद घायल युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शोहरतगढ़ ले जाया गया। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, चिकित्सकों ने उसकी पीठ में फंसे चाकू को निकालकर प्राथमिक उपचार किया। हालत गंभीर देखते हुए उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर रेफर किया गया।
उपलब्ध समाचार विवरण में गोरखपुर में उसके उपचार की जानकारी दी गई है। हालांकि, उसकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के बारे में कोई नया आधिकारिक मेडिकल अपडेट उपलब्ध नहीं मिला है।
पिता की तहरीर पर मुकदमा, पुलिस जांच जारी
थाना प्रभारी शेषमणि पांडेय के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, घायल युवक के पिता पवन की तहरीर पर अखिलेश यादव के खिलाफ हत्या के प्रयास की प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी की तलाश किए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।
15 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में गिरफ्तारी की कोई पुष्ट सूचना नहीं मिली है। इसलिए आरोपी की वर्तमान स्थिति और पुलिस की आगे की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना उचित होगा।
मामले में आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?
इस घटना में विवाद की मूल वजह, पुल के पास हुए घटनाक्रम की परिस्थितियां, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और चिकित्सकीय रिपोर्ट जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हो सकते हैं। पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही घटना की पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
FT News Digital का पक्ष: किसी भी आपराधिक मामले में प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
दुर्गा पूजा के उत्सव के बीच पसरा मातम, सड़क हादसे में एक ही गांव के तीन दोस्तों की मौत
बयारा चौराहे के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से दर्दनाक हादसा, चौरा बनगवा गांव में शोक की लहर

सिद्धार्थनगर। जिस गांव में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर उत्सव की तैयारियां की गई थीं, जहां पट खुलने के बाद प्रसाद वितरण हुआ और लोगों के बीच खुशी का माहौल था, उसी गांव में कुछ ही देर बाद मातम पसर गया। खुशियों और आस्था के इस माहौल को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने गहरे शोक में बदल दिया। एक ही गांव के तीन मित्रों की सड़क दुर्घटना में मौत की खबर से परिवारों में चीख-पुकार मच गई, जबकि पूरे गांव में सन्नाटा छा गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भवानीगंज थाना क्षेत्र के चौरा बनगवा गांव निवासी तीन युवक बाइक से बयारा चौराहे की ओर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि गांव में स्थापित दुर्गा प्रतिमा का पट खुलने के बाद प्रसाद वितरण हुआ था। इसके बाद तीनों मित्र बाइक से निकले और बयारा चौराहे के पास पहुंचे ही थे कि भड़रिया की तरफ से आ रहे एक अज्ञात वाहन की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी गंभीर थी कि तीनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।
तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे में जान गंवाने वाले युवकों की पहचान विशाल पुत्र रामचंद्र प्रजापति, उम्र लगभग 16 वर्ष; इंद्रजीत गौतम पुत्र बसंत गौतम, उम्र लगभग 20 वर्ष; और मुकेश अग्रहरि पुत्र रामतीरथ अग्रहरि, उम्र लगभग 16 वर्ष के रूप में बताई गई है।

तीनों एक ही गांव के रहने वाले और मित्र बताए जा रहे हैं। एक साथ तीन युवकों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। अपनों को खोने के दुख में परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस उम्र में युवकों के सामने जीवन के अनेक सपने और संभावनाएं थीं, उसी उम्र में उनकी असमय मौत ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।
उत्सव के बाद गांव में छाया सन्नाटा
गांव में दुर्गा प्रतिमा स्थापना और पूजा-पाठ के बीच जहां धार्मिक उत्साह का माहौल था, वहीं तीन युवकों की मौत की खबर ने पूरे वातावरण को गमगीन कर दिया। जिन घरों में कुछ समय पहले तक सामान्य चहल-पहल थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों के बीच इस घटना को लेकर शोक और दुख का माहौल है।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे
घटना की सूचना मिलने पर भवानीगंज थाना अध्यक्ष विजय शंकर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक पंचनामा की कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के बाद अज्ञात वाहन चालक मौके से चला गया।
इस संबंध में थाना अध्यक्ष विजय शंकर सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
बड़ा सवाल: सड़क पर सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो?
एक ही गांव के तीन युवकों की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और अज्ञात वाहन से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल हादसे से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर होनी है। अज्ञात वाहन की पहचान और दुर्घटना के कारणों को स्पष्ट करने के लिए जांच महत्वपूर्ण होगी।
यह केवल एक सड़क दुर्घटना की खबर नहीं, बल्कि तीन परिवारों के उजड़ते सपनों और एक गांव की सामूहिक पीड़ा की कहानी है। उत्सव के बाद जिस गांव में खुशियां होनी थीं, वहां अब अपनों को खोने का गम है।
बृजभूषण तिवारी की जयंती पर 500 सहयोगियों का सम्मान, PDA स्वाभिमान एप सदस्यता अभियान शुरू
मणेन्द्र मिश्रा बोले—भेदभाव के खिलाफ आजीवन संघर्ष करते रहे बृजभूषण तिवारी, समारोह में 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प

गौहनिया चौराहा, शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। समाजवादी चिंतक, विचारक एवं पूर्व सांसद स्वर्गीय बृजभूषण तिवारी की जयंती के अवसर पर शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के गौहनिया चौराहे पर विशाल सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में उनके साथियों, सहयोगियों, सेवानिवृत्त शिक्षकों और लोकतंत्र रक्षक सेनानियों सहित 500 लोगों को अंगवस्त्र एवं समाजवादी साहित्य भेंटकर सम्मानित किया गया। इस दौरान PDA स्वाभिमान एप सदस्यता अभियान का भी शुभारंभ हुआ।

वैचारिक विरासत और सामाजिक समानता पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री मुलायम सिंह यादव और स्वर्गीय बृजभूषण तिवारी के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। वक्ताओं ने बृजभूषण तिवारी से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उनके राजनीतिक जीवन, समाजवादी विचारधारा और सामाजिक विषमता को दूर करने के प्रयासों को याद किया।

आयोजक एवं संयोजक मणेन्द्र मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि बृजभूषण तिवारी राष्ट्रीय स्तर के नेता और सच्चे समाजवादी थे। उनका व्यक्तित्व भेदभाव विरोधी था और वे आजीवन सामाजिक विषमता दूर करने के लिए समर्पित रहे। उन्होंने समाजवादी पार्टी की वैचारिक मजबूती पर हमेशा जोर दिया।
मिश्रा ने बताया कि समाजवादी परंपरा और विचारों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से समाजवादी अध्ययन केंद्र की स्थापना की गई है। इसके सभागार का नाम भी बृजभूषण तिवारी के नाम पर रखा गया है।
2027 को लेकर राजनीतिक संकल्प
समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में समाजवादी विचारधारा को मजबूत करने और PDA स्वाभिमान एप के माध्यम से सदस्यता अभियान को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
रवि रांझा की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम में समाजवादी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव, भोजपुरी अभिनेता एवं गायक रवि रांझा ने गीतों की प्रस्तुति दी। आयोजन समिति की ओर से उन्हें मां सरस्वती की कांस्य प्रतिमा, बाबा साहब के प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र और शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया।
कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष हरिनारायण यादव ने की, जबकि हरिहर मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष लालजी यादव, डुमरियागंज विधायक सैय्यदा खातून, मुरलीधर मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी, पूर्व विधायक अमर चौधरी, प्रदेश सचिव राम मिलन भारती, लोकतंत्र रक्षक सेनानी बेचई यादव, जुबैदा चौधरी, जिला महासचिव कमरुज्जमा, हरिराम यादव, रामू यादव, शकील शाह, अखिलेश मौर्या, घनश्याम जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य अनीता द्विवेदी, जावेद खान और गोपाल फौजी सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इसके अलावा बहराइची प्रेमी, जय करन गौतम, नौशाद आलम, अजय चौरसिया, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. सरफराज अंसारी, उदयभान तिवारी, उमाशंकर उपाध्याय, राकेश दुबे, फूलचंद्र शर्मा, लाल बिहारी यादव, शादाब, इरशाद, सर्वेश मिश्रा, अनूप त्रिपाठी, संजय यादव, एजाज अंसारी, प्रभात तिवारी, नीशू तिवारी और कुलदेवी नाथ तिवारी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
डिजिटल डेस्क | FT News Digital

फोटो कैप्शन: शोहरतगढ़ के गौहनिया चौराहे पर स्वर्गीय बृजभूषण तिवारी की जयंती पर आयोजित सम्मान समारोह में मौजूद समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और सम्मानित सहयोगी।
सिद्धार्थनगर: बांसी पुलिस का बड़ा एक्शन, चोरी का ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद; आठ लाख की बरामदगी का दावा
एंटी थेफ्ट टीम और सर्विलांस सेल के साथ संयुक्त कार्रवाई, एक आरोपी गिरफ्तार; तमंचा और कारतूस मिलने की भी पुलिस ने दी जानकारी

डिजिटल डेस्क | FT News Digital
सिद्धार्थनगर में वाहन चोरी के मामले में बांसी पुलिस को सफलता मिलने की खबर सामने आई है। भरथना गांव के पास तेलौरा स्थित गिट्टी प्लांट से चोरी हुए ट्रैक्टर और ट्रॉली को बरामद करने का पुलिस ने दावा किया है। संयुक्त कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, बरामद वाहन की अनुमानित कीमत करीब आठ लाख रुपये है। गिरफ्तार व्यक्ति के कब्जे से देशी तमंचा, जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन भी बरामद होने की बात कही गई है। पुलिस की इस कार्रवाई में एंटी थेफ्ट टीम, सर्विलांस सेल और थाना बांसी की संयुक्त भूमिका सामने आई है।
चोरी के मामले में पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
सिद्धार्थनगर। जनपद के थाना बांसी क्षेत्र में ट्रैक्टर-ट्रॉली चोरी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर वाहन बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 18 अगस्त 2026 की रात ग्राम भरथना, पोस्ट तेलौरा स्थित गिट्टी प्लांट से ट्रैक्टर और ट्रॉली चोरी होने की सूचना मिली थी। इस मामले में 26 अगस्त को थाना बांसी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामले के अनावरण के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देश पर एंटी थेफ्ट टीम, सर्विलांस सेल और थाना बांसी पुलिस की संयुक्त टीम लगाई गई। पुलिस के मुताबिक, सूचना और चेकिंग अभियान के आधार पर कार्रवाई करते हुए चोरी के मामले से संबंधित ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद किया गया।
नहर पटरी पर घेराबंदी, चालक को पकड़ा
पुलिस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 12 और 13 अक्टूबर की मध्यरात्रि में पुलिस टीम रात्रि गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मिली सूचना के आधार पर काजी रुधौली से देवरिया की ओर जाने वाली नहर पटरी पर घेराबंदी की गई।

पुलिस का कहना है कि इसी दौरान एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने का प्रयास किया गया। चालक ने वाहन लेकर निकलने की कोशिश की, लेकिन रास्ता संकरा होने के कारण उसे पकड़ लिया गया। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान सोनू लोध, निवासी थाना खेसरहा क्षेत्र, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में बताई गई है।

पुलिस के अनुसार, उसके कब्जे से ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ 315 बोर का देशी तमंचा, एक जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किया गया।
: आठ लाख रुपये के वाहन बरामद करने का दावा
– ट्रैक्टर: अनुमानित कीमत छह लाख रुपये।
– ट्रॉली: अनुमानित कीमत दो लाख रुपये।
– कुल कीमत: करीब आठ लाख रुपये।
– अन्य बरामदगी: एक देशी तमंचा, एक जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन।
– पुलिस कार्रवाई: एक आरोपी गिरफ्तार।
बरामदगी और कीमत से संबंधित विवरण पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार हैं।
: मुकदमे में बढ़ाई गईं धाराएं
पुलिस के अनुसार, चोरी के दर्ज मुकदमे में बीएनएस की धारा 317(2) और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 की बढ़ोतरी की गई है। पुलिस ने आरोपी को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद 13 अक्टूबर 2026 को न्यायालय भेजे जाने की जानकारी दी है।
टिप्पणी: चोरी पर अंकुश के लिए सतर्कता जरूरी
्ट्रै्क्टर और ट्रॉली किसानों तथा निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन हैं। ऐसे वाहनों की चोरी से आर्थिक नुकसान के साथ रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ता है। इस मामले में वाहन बरामद किए जाने का पुलिस का दावा संबंधित वाहन मालिक के लिए राहत की खबर है। साथ ही, ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश के लिए नियमित गश्त, संदिग्ध वाहनों की जांच और त्वरित कार्रवाई की अहम भूमिका रहती है।
सारांश
सिद्धार्थनगर के बांसी थाना क्षेत्र में गिट्टी प्लांट से ट्रैक्टर-ट्रॉली चोरी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी की गिरफ्तारी और करीब आठ लाख रुपये के वाहन बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के कब्जे से तमंचा, जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन भी मिला है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया न्यायालय और जांच के निष्कर्षों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
कानूनी पक्ष: यह समाचार पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। गिरफ्तारी को दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
FT News Digital | सच और… कुछ नहीं
आशा बहुओं की मांगों पर अब आर-पार की तैयारी! अनिल सिंह बोले—मांगें पूरी नहीं हुईं तो लखनऊ में होगा आंदोलन

मानदेय में वृद्धि, लंबित भुगतान और रात्रि में ठहरने की व्यवस्था की मांग; विकास भवन से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च कर सौंपा ज्ञापन, शासन-प्रशासन के अगले कदम पर टिकी निगाहें

सिद्धार्थनगर। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में भूमिका निभाने वाली आशा बहुओं और आशा संगिनियों ने अपनी मांगों को लेकर सिद्धार्थनगर में आवाज बुलंद की। ऑल आशा, आशा संगिनी कार्यकत्री सेवा समिति के बैनर तले प्रदेश संरक्षक अनिल सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता विकास भवन परिसर में एकत्रित हुईं। यहां से बैनर के साथ पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचीं और नारेबाजी के बीच धरना-प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन की प्रमुख मांगों में आशा संगिनियों का मानदेय 18 हजार रुपये और आशा बहुओं का मानदेय 16 हजार रुपये किए जाने, विभिन्न मदों में लंबित भुगतान का निस्तारण कराने तथा रात में प्रसव संबंधी जरूरतों के दौरान कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए कमरे की व्यवस्था शामिल है। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रेस द्वारा सवाल किए जाने पर प्रदेश संरक्षक अनिल सिंह ने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो संगठन लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करेगा। उन्होंने ऐसी स्थिति के लिए शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही।

: मानदेय से लेकर सुविधाओं तक, तीन प्रमुख मांगों पर जोर
आशा बहुओं और आशा संगिनियों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में निश्चित मानदेय की व्यवस्था करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। संगठन ने आशा संगिनियों के लिए 18 हजार रुपये और आशा बहुओं के लिए 16 हजार रुपये मानदेय निर्धारित करने का अनुरोध किया है। यह संगठन की मांग है; इसे किसी स्वीकृत सरकारी निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ज्ञापन में विभिन्न मदों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन ने जननी सुरक्षा योजना समेत ज्ञापन में उल्लिखित अन्य मदों से संबंधित वर्ष 2024 के लंबित भुगतान के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की है।

इसके अतिरिक्त, रात के समय प्रसव संबंधी जरूरतों के दौरान अस्पताल जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के लिए रात्रि में ठहरने हेतु एक कमरे की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है। संगठन के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं को अपने छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर जाना पड़ सकता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए ठहरने की सुविधा की मांग उठाई गई है।

ज्ञापन के बाद आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को नारेबाजी के माध्यम से सामने रखा। पैदल मार्च के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया, ताकि उनकी समस्याएं शासन और प्रशासन तक पहुंच सकें।
ज्ञापन सौंपने के बाद प्रेस के सवाल पर अनिल सिंह ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में संगठन लखनऊ में धरना-प्रदर्शन करेगा। उन्होंने प्रस्तावित आंदोलन की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन पर होने की बात कही।
इस बयान के बाद अब संगठन की आगे की रणनीति और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार लखनऊ में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की तारीख और स्थान की औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें
1. निश्चित मानदेय: आशा संगिनियों का मानदेय 18 हजार रुपये और आशा बहुओं का मानदेय 16 हजार रुपये किए जाने की मांग।
2. लंबित भुगतान: विभिन्न मदों में बकाया भुगतान की समीक्षा और पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार भुगतान कराने का अनुरोध।
3. रात्रि में ठहरने की सुविधा: रात में प्रसव संबंधी जरूरतों के दौरान कार्यकर्ताओं के लिए एक कमरे की व्यवस्था किए जाने की मांग।
अनिल सिंह की भूमिका और संगठन की अगली रणनीति
इस कार्यक्रम में प्रदेश संरक्षक अनिल सिंह ने संगठन के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं को एकजुट करते हुए मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने की पहल की। विकास भवन परिसर से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च और ज्ञापन सौंपने की कार्रवाई के बाद उन्होंने प्रेस के सामने मांगें पूरी नहीं होने पर लखनऊ में आंदोलन करने की बात रखी।
संगठन की ओर से उठाए गए मुद्दों पर अब संबंधित विभागों की ओर से स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। मानदेय निर्धारण, भुगतान की स्थिति और रात्रि में ठहरने की व्यवस्था के संबंध में आधिकारिक निर्णय सामने आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि मांगों पर क्या प्रगति हुई है।
टिप्पणी: मांगों पर संवाद और समाधान जरूरी
आशा बहुओं और आशा संगिनियों की ओर से उठाए गए मुद्दे मानदेय, भुगतान और कार्य के दौरान आवश्यक सुविधाओं से जुड़े हैं। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों द्वारा ज्ञापन में दर्ज मांगों की समीक्षा, लंबित भुगतान की स्थिति की जांच और उपलब्ध नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करना उपयोगी होगा।
संगठन ने अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचा दी हैं और समाधान नहीं निकलने पर आगे आंदोलन की चेतावनी दी है। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी मांगों पर स्थिति स्पष्ट करें, संगठन के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करें और प्रत्येक मुद्दे पर नियमानुसार उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दें।
सवाल यही है: आशा बहुओं और आशा संगिनियों की इन मांगों पर शासन और संबंधित विभाग क्या निर्णय लेते हैं? इसका जवाब आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई से ही सामने आएगा।
FT News Digital | सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
मिशन शक्ति फेज-6.0 से महिला सुरक्षा का संदेश, सिद्धार्थनगर में पुलिस-प्रशासन ने निकाला जागरूकता मार्च

सदर विधायक श्यामधनी राही, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, एसएसपी डॉ. अभिषेक महाजन और भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य की मौजूदगी में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन पर दिया गया जोर
सिद्धार्थनगर। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर सिद्धार्थनगर में मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत शक्ति जागरूकता पैदल मार्च निकाला गया। 12 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं, पुलिस प्रशासन, तहसील प्रशासन और नगर पालिका की सहभागिता रही। अभियान के माध्यम से महिला सुरक्षा, अधिकारों के प्रति जागरूकता और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, सदर विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य तथा अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद की मौजूदगी रही। पुलिस विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ प्रशासनिक अमले की सहभागिता ने अभियान के उद्देश्य को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।

महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर जागरूकता अभियान
मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत आयोजित पैदल मार्च का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, सुरक्षा के प्रति विश्वास मजबूत करना और महिला अपराधों की रोकथाम में जनसहभागिता बढ़ाना है। नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि महिलाओं का सम्मान, उनकी सुरक्षा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास समाज की प्राथमिकताओं में शामिल होने चाहिए।
पुलिस, तहसील प्रशासन और नगर पालिका की सहभागिता
कार्यक्रम में पुलिस प्रशासन के साथ तहसील प्रशासन, नगर पालिका और भाजपा कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। अभियान से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा जरूरतमंदों को उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी देने के उद्देश्य को आगे बढ़ाया।

इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद, क्षेत्राधिकारी विश्वजीत शौर्यान और थाना प्रभारी सिद्धार्थनगर नवीन कुमार सिंह सहित पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। महिला थाना, मिशन शक्ति टीम, एंटी रोमियो टीम और यातायात पुलिस की सहभागिता भी अभियान के संदर्भ में महत्वपूर्ण रही।
हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देकर किया जागरूक
महिलाओं एवं बालिकाओं को किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, उत्पीड़न, घरेलू हिंसा या अन्य अपराध की स्थिति में बिना भय के सहायता लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी जा रही है।
– 1090: वीमेन पावर लाइन
– 112: पुलिस आपातकालीन सेवा
– 1076: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन
– 1098: चाइल्ड हेल्पलाइन
– 181: महिला हेल्पलाइन
– 1930: साइबर अपराध हेल्पलाइन
पुलिस की मिशन शक्ति टीमें थानों पर महिलाओं और बालिकाओं से संवाद स्थापित कर उन्हें विधिक अधिकारों, महिला हेल्प डेस्क और सहायता सेवाओं के बारे में जागरूक कर रही हैं।
जनसहभागिता से मजबूत होगा सुरक्षा का संदेश
मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता मार्च निकालना ही नहीं, बल्कि महिलाओं एवं बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना और जरूरत के समय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। पुलिस प्रशासन, तहसील प्रशासन, नगर पालिका, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सहभागिता से महिला सुरक्षा के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
FT News Digital | सिद्धार्थनगर
बनगवां में यूपी एग्रीज योजना की बैठक, रबी की खेती को लेकर किसानों को मिला मार्गदर्शन
बनगवां में यूपी एग्रीज योजना की कृषक बैठक, रबी सीजन में उन्नत खेती और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

मिठवल, सिद्धार्थनगर। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, खेती की लागत कम करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में यूपी एग्रीज योजना के तहत गांवों में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड मिठवल के ग्राम बनगवां में रविवार को विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित यूपी एग्रीज योजना के अंतर्गत कृषक बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों को रबी सीजन की तैयारियों, उन्नत बीजों, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
खेती को आधुनिक बनाने की पहल, किसानों को दी गई उपयोगी जानकारी
कृषि क्षेत्र में बेहतर उत्पादन और किसानों को आधुनिक खेती के तौर-तरीकों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में यूपी एग्रीज टीम ने किसानों के साथ संवाद किया। अधिकारियों ने योजना के उद्देश्यों और संभावित लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती की लागत कम करने और उत्पादन में सुधार की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। बैठक में लगभग 30 से 40 किसानों ने प्रतिभाग किया।
इनबॉक्स लीड: रबी सीजन से पहले किसानों को खेती की बेहतर तैयारी का संदेश
बैठक के दौरान मिठवल विकासखंड के टेक्निकल एसोसिएट अविनाश मिश्रा ने यूपी एग्रीज योजना की रूपरेखा और इसके प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को उत्पादकता बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के महत्व से अवगत कराया।
वहीं, टेक्निकल असिस्टेंट सुधा मिश्रा ने रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए उन्नत बीजों के चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मिट्टी की सेहत बनाए रखने और सरकारी अनुदान के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। किसानों को खेती में वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
फॉलोअप: क्लस्टर आधारित खेती और बाजार से जुड़ाव पर भी चर्चा
कृषक बैठक में क्लस्टर आधारित खेती और बाजार से जुड़ाव के फायदों को भी समझाया गया। किसानों को बताया गया कि योजनाबद्ध तरीके से खेती करने, फसल की जरूरत के अनुसार कृषि प्रबंधन अपनाने और बाजार की मांग को ध्यान में रखने से बेहतर परिणाम हासिल करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
बैठक के दौरान किसानों ने योजना से संबंधित विभिन्न सवाल उठाए। यूपी एग्रीज टीम ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उपलब्ध जानकारी साझा की। इससे किसानों को योजना की कार्यप्रणाली और खेती में इसके उपयोग को समझने का अवसर मिला।
सार: जागरूकता से आधुनिक खेती की ओर बढ़ेंगे किसान
ग्राम बनगवां में आयोजित यह कृषक बैठक रबी सीजन से पहले किसानों को कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण पहल रही। बैठक में किसानों ने योजना से जुड़कर इसका लाभ लेने में रुचि दिखाई और आगे भी आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कृषि योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाना, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देना और उन्हें उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराना ग्रामीण कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अब किसानों को इस जानकारी का खेतों में कितना व्यावहारिक लाभ मिलता है, यह आने वाले रबी सीजन में अपनाई जाने वाली कृषि पद्धतियों और उनके परिणामों से स्पष्ट होगा।
डिजिटल टिप्पणी
खेती में बेहतर उत्पादन की शुरुआत सही जानकारी और समय पर तैयारी से होती है। उन्नत बीज, मिट्टी के स्वास्थ्य पर ध्यान, संतुलित उर्वरक का उपयोग और बाजार की जरूरतों की समझ किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यूपी एग्रीज जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाना सकारात्मक पहल है। जरूरत इस बात की है कि किसानों को मार्गदर्शन के साथ योजना के पात्र लाभों, उपलब्ध सुविधाओं और उनके वास्तविक क्रियान्वयन की जानकारी भी समय पर मिलती रहे।
EVM, VVPAT सहित निर्वाचन संबंधी उपकरणों का DM ने किया निरीक्षण
सिद्धार्थनगर 12 अक्टूबर 2026/आगामी निर्वाचन की तैयारियों के क्रम में आज से इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों(EVM), जिसमें कण्ट्रोल यूनिट(CU),बैलट यूनिट(BU)और VVPAT शामिल हैं,की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) का जिला निर्वाचन अधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट श्री शिवशरणप्पा जीएन द्वारा जिला निर्वाचन कार्यालय का निरीक्षण किया गया।
जिला निर्वाचन अधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट श्री शिवशरणप्पा जीएन द्वारा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षक/सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान श्री नरेंद्र कुमार मीणा के साथ ई0वी0एम0 वेयर को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के समक्ष खोला गया। भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा EVM के निर्माता कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड(BEL) के अभियंता नामित किए गयेे हैं। जिले के 2239 मतदेय स्थलों के सापेक्ष 135 प्रतिशत मशीनों की जांच कराई जाएगी। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हो रही है। जांच के दौरान मशीनों को आगामी विधानसभा निर्वाचन हेतु तैयार किया जायेगा और उसमें डमी निर्वाचन चिह्न दर्ज अपलोड कर उनकी क्रियाशीलता भी चेक की चेक की जाएगी। इसके बाद मशीनों को भारत निर्वाचन आयोग के ईएमएस पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। जांच में खराब पाई जाने वाली मशीनों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोग द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत निर्माता कंपनी को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान मशीनों की कार्यक्षमता परखने के लिए नमूना मतदान भी कराया जाएगा। बैलट यूनिट में उपलब्ध 16 बटनों की जांच के लिए छह-छह मत दर्ज कराकर उनकी कार्यप्रणाली देखी जाएगी। इसके अतिरिक्त एक प्रतिशत मशीनों पर 1200 मत, दो प्रतिशत पर 1000 मत और दो प्रतिशत मशीनों पर 500-500 मत दर्ज कराकर परीक्षण किया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी निगरानी की जानकारी और आई पी एड्रेस मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) गौरव श्रीवास्तव, ए0आई0जी0 स्टाम्प ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई निर्माण खण्ड सतीश कुमार व अन्य संबधित अधिकारीगण उपस्थित थे।
एशियन स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता प्रदीप चौरसिया को कन्हैया पासवान ने किया सम्मानित
सिद्धार्थनगर। विधानसभा क्षेत्र कपिलवस्तु अंतर्गत ग्राम सैनुआ निवासी युवा कबड्डी खिलाड़ी प्रदीप चौरसिया ने एशियन स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक प्राप्त कर क्षेत्र एवं जनपद सिद्धार्थनगर का नाम गौरवान्वित किया है।
प्रदीप चौरसिया की इस उपलब्धि पर भाजपा गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री कन्हैया पासवान ने सैनुआ स्थित उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया तथा इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर कन्हैया पासवान ने कहा कि प्रदीप चौरसिया ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और लगन के बल पर एशियन स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर सिद्धार्थनगर सहित पूरे कपिलवस्तु क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि ऐसी प्रतिभाओं को उचित अवसर, प्रोत्साहन और मंच उपलब्ध कराया जाए। प्रदीप चौरसिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास के बल पर ग्रामीण क्षेत्र का युवा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
कन्हैया पासवान ने प्रदीप चौरसिया के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वह आने वाले समय में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश,प्रदेश और जनपद का नाम रोशन करें।
इस दौरान पूर्व मंडल अध्यक्ष दृग नारायण सिंह,पूर्व जिला मीडिया प्रभारी निशांत पांडेय,भाजपा नेता मयंक श्रीवास्तव,संतोष शुक्ला,सूरज त्रिपाठी, अनुराग कसौधन,अजय सिंह एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मनरेगा के काम में पारदर्शिता की परीक्षा, ऑनलाइन हाजिरी और जमीनी हकीकत का हो सत्यापन
सिद्धार्थनगर: सरकारी पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी दर्ज, कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति पर उठे सवाल; बढ़नी की सिसवा बुजुर्ग पंचायत में जांच की जरूरत
सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गांवों में विकास को गति देना, जरूरतमंद ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना और सार्वजनिक धन का सदुपयोग सुनिश्चित करना है। लेकिन जब किसी विकास कार्य की ऑनलाइन हाजिरी और मौके पर काम करने वाले मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति को लेकर सवाल सामने आएं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी हो जाता है।
सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी विकासखंड की सिसवा बुजुर्ग ग्राम पंचायत से जुड़े सरकारी पोर्टल के कुछ स्क्रीनशॉट सामने आए हैं। इनमें एक कार्य का नाम “सिसवा बुजुर्ग में समय माता के स्थान से ज्ञानदास के खेत तक बांध निर्माण कार्य” दर्ज दिखाई देता है। पोर्टल पर कार्य कोड 3151004034/FP/VB/YD/958486255823632836 और मस्टर रोल संख्या 2736 तथा 2740 भी प्रदर्शित हैं।
स्क्रीनशॉट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 और 10 अक्टूबर 2026 की तारीखों के लिए मजदूरों की उपस्थिति का रिकॉर्ड दिखाई देता है। वहीं, इस कार्यस्थल पर मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी और काम की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि मौके पर मजदूर मौजूद नहीं थे, जबकि संबंधित तारीख की हाजिरी दर्ज है, तो यह जांच का विषय है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में कोई अंतर था या नहीं।
ऑनलाइन हाजिरी से आगे, मौके पर सत्यापन क्यों जरूरी?
सरकारी पोर्टल पर हाजिरी दर्ज होना अपने आप में इस बात का अंतिम प्रमाण नहीं है कि संबंधित समय पर सभी मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद थे और निर्धारित काम हुआ। इसी तरह, किसी एक समय पर मजदूरों का दिखाई न देना भी अपने आप में फर्जी हाजिरी या भ्रष्टाचार का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

ऐसे में संबंधित अधिकारियों को कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। निर्धारित कार्य की प्रगति, माप पुस्तिका, मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान विवरण और उपलब्ध डिजिटल फोटो का मिलान किया जाना चाहिए।
जनता के पैसे का हिसाब जनता को मिलना चाहिए
ग्रामीण विकास कार्यों में खर्च होने वाला सरकारी धन जनता के हित से जुड़ा है। इसलिए यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जिस काम के लिए धन स्वीकृत हुआ, वह वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा हो और मजदूरों को उनके काम के अनुरूप मजदूरी मिले।

यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि रिकॉर्ड और कार्यस्थल की स्थिति में कोई गड़बड़ी नहीं मिलती है, तो तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
जांच के दायरे में ये सवाल
1. क्या सिसवा बुजुर्ग पंचायत में दर्ज बांध निर्माण कार्य मौके पर निर्धारित योजना के अनुसार कराया जा रहा है?
2. 7 और 10 अक्टूबर 2026 की ऑनलाइन हाजिरी के समय कार्यस्थल पर कितने मजदूर वास्तव में मौजूद थे?
3. क्या संबंधित तारीखों की डिजिटल फोटो, उपस्थिति रजिस्टर और मस्टर रोल का मिलान किया गया है?
4. कार्य की स्वीकृत लागत, अब तक का व्यय, माप पुस्तिका और भुगतान की स्थिति क्या है?
5. क्या संबंधित कार्य का स्थल निरीक्षण कर उसकी वास्तविक प्रगति की रिपोर्ट तैयार की गई है?
इन सवालों का जवाब अभिलेखों और निष्पक्ष जांच के आधार पर सामने आना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति पर आरोप न लगे और यदि कोई अनियमितता हुई है तो वह भी सामने आ सके।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
संबंधित ग्राम पंचायत, विकासखंड और जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि मामले का संज्ञान लेकर कार्यस्थल का सत्यापन कराएं तथा ऑनलाइन दर्ज हाजिरी और वास्तविक कार्य की स्थिति का मिलान करें। जांच में कोई कमी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
FT News Digital का पक्ष: यह रिपोर्ट उपलब्ध पोर्टल स्क्रीनशॉट और उनसे जुड़े जनहित के सवालों पर आधारित है। इन स्क्रीनशॉट से अपने आप किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता, फर्जी हाजिरी अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं होती। संबंधित पक्षों का जवाब और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने पर उन्हें भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
सिद्धार्थनगर में पानी की बोतलों पर बड़ा विवाद! ऊंजी के आरओ प्लांट पर पुलिस की छापेमारी, अब दस्तावेज खोलेंगे राज
CLEAR और CLEAR ADVANCE के नाम को लेकर आमने-सामने दावे, बोतलें व स्टीकर मिलने के बाद जांच तेज; पुलिस के फैसले पर टिकी नजरें
सिद्धार्थनगर | 12 अक्टूबर 2026 | FT News Digital
सिद्धार्थनगर में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के ब्रांड नाम को लेकर उठा विवाद अब जांच के दौर में पहुंच गया है। मोहाना थाना क्षेत्र के ऊंजी गांव स्थित एक आरओ प्लांट पर पुलिस ने छापेमारी की। यहां पानी की बोतलें और स्टीकर मिलने की जानकारी सामने आई है। विवाद का केंद्र है ‘CLEAR’ और ‘CLEAR ADVANCE’ नाम, जिनके इस्तेमाल को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
एक ओर CLEAR कंपनी के प्रतिनिधियों ने अपने ब्रांड से मिलते-जुलते नाम के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन की शिकायत की है। दूसरी ओर प्लांट संचालक का दावा है कि उसके पास CLEAR ADVANCE नाम से बोतलबंद पानी तैयार करने का लाइसेंस है। अब सवाल यह है कि संबंधित दस्तावेज क्या कहते हैं और जांच में किस पक्ष का दावा प्रमाणित होता है।
बोतलों पर नाम का विवाद, जांच के घेरे में कारोबार
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की पहचान उसके नाम, लेबल और पैकेजिंग से होती है। यदि किसी उत्पाद के नाम या पैकेजिंग को लेकर भ्रम की स्थिति बनती है, तो उपभोक्ता के हित प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इस मामले में उपभोक्ताओं के साथ वास्तविक धोखाधड़ी या पानी की गुणवत्ता से जुड़ी गड़बड़ी की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के अधिवक्ताओं ने बोतलों पर इस्तेमाल किए गए नाम और स्टीकर को लेकर आपत्ति जताई। वहीं, हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि दोनों पक्षों को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
इनसेट: कंपनी के अधिवक्ताओं ने दर्ज कराई आपत्ति
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, CLEAR कंपनी के अधिकृत अधिवक्ता मनीष दूबे और राजन द्विवेदी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कंपनी के पक्ष ने आरोप लगाया कि बोतलों पर इस्तेमाल किया जा रहा नाम और लेबल उसके ब्रांड से मिलता-जुलता है। प्रतिनिधियों ने पुलिस को शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की।
कंपनी की आपत्ति का मुख्य आधार कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन है। लेकिन किसी नाम का मिलता-जुलता होना अपने आप में उल्लंघन का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसके लिए पंजीकृत ट्रेडमार्क, संबंधित उत्पादों की श्रेणी, लेबल, पैकेजिंग और अन्य कानूनी तथ्यों की जांच जरूरी है।
संचालक का दावा—लाइसेंस के दस्तावेज उपलब्ध हैं
इस मामले का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, प्लांट संचालक ने CLEAR ADVANCE नाम से बोतलबंद पानी तैयार करने के लिए लाइसेंस होने का दावा किया है। संचालक के अनुसार, संबंधित कागजात उसके अधिवक्ता के पास हैं।
अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दस्तावेज किस प्राधिकरण ने जारी किए, वे किस उत्पाद और ब्रांड नाम पर लागू होते हैं तथा पैकेजिंग के इस्तेमाल को लेकर उनकी वैधानिक स्थिति क्या है। केवल लाइसेंस होने का दावा और किसी विशेष ट्रेडमार्क के इस्तेमाल का अधिकार—दोनों अलग-अलग कानूनी प्रश्न हो सकते हैं।
पुलिस की जांच क्यों है अहम?
मोहाना थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया है कि दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल किसी पक्ष को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
जांच में प्रमुख रूप से इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है:
– संबंधित ट्रेडमार्क का पंजीकरण और उसके अधिकार किसके पास हैं?
– प्लांट संचालक के पास किस प्रकार का लाइसेंस या पंजीकरण है?
– बोतलों पर इस्तेमाल किए गए नाम, स्टीकर और पैकेजिंग की वैधानिक स्थिति क्या है?
– क्या संबंधित उत्पाद के लिए लागू खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी शर्तों का पालन किया जा रहा है?
इन सवालों के जवाब आधिकारिक दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों की जांच से ही सामने आ सकते हैं।
जनहित का सवाल: ब्रांड विवाद में उपभोक्ता का भरोसा कैसे बचे?
पानी रोजमर्रा की जरूरत है और बोतलबंद पानी खरीदते समय उपभोक्ता उत्पाद की पहचान और गुणवत्ता पर भरोसा करता है। इसलिए ऐसे विवादों में केवल ब्रांड के नाम पर बहस पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग उत्पाद के लाइसेंस, गुणवत्ता मानकों और लेबल संबंधी नियमों की भी लागू प्रक्रिया के अनुसार जांच करें।
यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि संबंधित कारोबारी के दस्तावेज वैध पाए जाते हैं, तो उसके पक्ष को भी निष्पक्ष सुनवाई मिलनी चाहिए। यही पारदर्शी जांच और जिम्मेदार प्रशासन की कसौटी है।
सारांश
ऊंजी के आरओ प्लांट पर छापेमारी के बाद CLEAR और CLEAR ADVANCE नाम को लेकर विवाद सामने आया है। कंपनी ने कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन की शिकायत की है, जबकि संचालक ने लाइसेंस होने का दावा किया है। पुलिस द्वारा दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।
संपादकीय टिप्पणी
नाम से नहीं, प्रमाण से तय हो सच्चाई। किसी कंपनी की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन शिकायत मात्र को दोष सिद्ध होने का प्रमाण भी नहीं माना जा सकता। जरूरी है कि पुलिस और संबंधित विभाग निष्पक्ष जांच करें, उपभोक्ता हितों की रक्षा हो और कानून के तहत प्रत्येक पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।
FT News Digital इस मामले में आधिकारिक जांच और आगे की कार्रवाई से जुड़ी पुष्ट जानकारी सामने आने पर खबर को अपडेट करेगा।
रिपोर्टर: अहज़म कमाल
स्थान: सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
FT News Digital — सच और… कुछ नहीं।
शोहरतगढ़ में राशन वितरण की जांच में बड़ी कमी उजागर, 71.85 क्विंटल अनाज और 72 किलो चीनी कम मिलने का मामला
कोटेदार के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज, पुलिस कर रही जांच; पात्र राशन कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न मिलने पर उठे सवाल
सिद्धार्थनगर | FT News Digital
गरीबों के निवाले से जुड़ा गंभीर सवाल
सरकारी राशन व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है, लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ क्षेत्र में राशन वितरण से जुड़ी जांच ने व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, गढ़ाकुल गांव की एक उचित दर दुकान के स्टॉक सत्यापन में 71.85 क्विंटल खाद्यान्न और 72 किलोग्राम चीनी की कमी सामने आई। मामले में संबंधित कोटेदार के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब अहम सवाल यह है कि राशन वितरण में सामने आई कमी की पूरी स्थिति क्या है और पात्र लाभार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आगे क्या कार्रवाई होती है।
शिकायतों के बाद जांच, स्टॉक सत्यापन में सामने आई कमी
शोहरतगढ़। सिद्धार्थनगर जिले के नगर पंचायत शोहरतगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत गढ़ाकुल गांव की उचित दर दुकान पर राशन वितरण में अनियमितता की शिकायतों के बाद जांच और कार्रवाई का मामला सामने आया है। समाचार पत्र में प्रकाशित विवरण के मुताबिक, दुकान से संबंधित शिकायतों में निर्धारित मात्रा से कम राशन दिए जाने, ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद भी खाद्यान्न नहीं मिलने तथा उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार किए जाने जैसे आरोप शामिल थे।
प्रकाशित जानकारी के अनुसार, तीन अक्टूबर को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में 62 राशन कार्डधारकों ने वितरण संबंधी शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की गई। जांच प्रक्रिया में दुकान के स्टॉक का सत्यापन भी किया गया, जिसमें खाद्यान्न और चीनी की कमी दर्ज होने की बात सामने आई।
स्टॉक सत्यापन में क्या सामने आया?
प्रकाशित समाचार विवरण के अनुसार, दुकान के अभिलेखों के मुताबिक 29.702 क्विंटल गेहूं और 44.148 क्विंटल चावल उपलब्ध होना चाहिए था। सत्यापन के दौरान दोनों खाद्यान्नों की मात्रा लगभग एक-एक क्विंटल बताई गई। इस अंतर के आधार पर कुल 71.85 क्विंटल खाद्यान्न की कमी दर्ज होने की जानकारी प्रकाशित हुई है। इसके अतिरिक्त 0.72 क्विंटल यानी 72 किलोग्राम चीनी की कमी भी बताई गई है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि स्टॉक में कमी सामने आना जांच का महत्वपूर्ण तथ्य है, लेकिन कमी के कारणों, वितरण अभिलेखों और संबंधित पक्ष के स्पष्टीकरण की पूरी स्थिति जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज
समाचार पत्र में प्रकाशित विवरण के अनुसार, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी की शिकायत पर शोहरतगढ़ थाना पुलिस ने संबंधित कोटेदार के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मुकदमा दर्ज होना कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत है, दोष सिद्ध होने का अंतिम प्रमाण नहीं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
इस मामले में आगे की पड़ताल के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी है।
– स्टॉक में कमी का आधार: दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड का मिलान क्या बताता है?
– लाभार्थियों के बयान: शिकायत करने वाले राशन कार्डधारकों को किस अवधि में कितनी मात्रा में राशन मिला या नहीं मिला?
– अनाज की कमी का कारण: सत्यापन के समय दर्ज कमी के पीछे वितरण, रिकॉर्ड में अंतर या कोई अन्य कारण था?
– विभागीय कार्रवाई: खाद्य एवं रसद विभाग की जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं?
– लाभार्थियों को राहत: यदि किसी पात्र परिवार को निर्धारित मात्रा से कम राशन मिलने की पुष्टि होती है, तो उसकी शिकायत का निस्तारण किस प्रकार किया जाएगा?
इन प्रश्नों के जवाब संबंधित विभाग की विस्तृत रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
आंकड़ों में पूरा मामला
जांच से संबंधित बिंदु| प्रकाशित विवरण
शिकायत करने वाले राशन कार्डधारक| 62
गेहूं की दर्ज कमी| लगभग 28.702 क्विंटल
चावल की दर्ज कमी| लगभग 43.148 क्विंटल
कुल खाद्यान्न की कमी| 71.85 क्विंटल
चीनी की दर्ज कमी| 72 किलोग्राम
कानूनी कार्रवाई| आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज
नोट: गेहूं और चावल की अलग-अलग कमी प्रकाशित विवरण में दर्ज अपेक्षित स्टॉक और लगभग एक-एक क्विंटल उपलब्ध मात्रा के अंतर से निकाली गई है। आधिकारिक सत्यापन रिपोर्ट से आंकड़ों की पुष्टि की जानी चाहिए।
राशन कार्डधारकों के अधिकार क्यों महत्वपूर्ण?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को लागू नियमों के अनुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। राशन वितरण में गड़बड़ी की आशंका होने पर उपभोक्ता संबंधित पूर्ति निरीक्षक, जिला पूर्ति अधिकारी या खाद्य एवं रसद विभाग के सक्षम अधिकारियों के समक्ष शिकायत कर सकते हैं।
शिकायत के साथ राशन कार्ड का विवरण, वितरण की तारीख, उपलब्ध पर्ची, ई-पॉस रसीद और अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। शिकायत पर प्राप्त कार्रवाई की जानकारी भी लाभार्थी को अपने पास रखनी चाहिए।
निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी जरूरी
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सफलता केवल राशन दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचने से नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को निर्धारित मात्रा में उसका लाभ मिलने से तय होती है। इसलिए स्टॉक में बड़ी कमी का मामला सामने आने पर संबंधित दुकान की जांच के साथ वितरण रिकॉर्ड, लाभार्थियों के बयान और विभागीय निगरानी की प्रक्रिया की भी पड़ताल जरूरी है।
संपादकीय टिप्पणी | राशन गरीब का अधिकार है, एहसान नहीं
सरकारी राशन जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में राशन वितरण में अनियमितता की शिकायतों को सामान्य प्रशासनिक मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जहां शिकायतें मिलें, वहां निष्पक्ष जांच हो, रिकॉर्ड का मिलान किया जाए और दोष प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
साथ ही, किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना भी उचित नहीं है। पारदर्शी जांच, जवाबदेही और पात्र लाभार्थियों को उनका पूरा अधिकार दिलाना ही ऐसी व्यवस्था में जनता का भरोसा मजबूत कर सकता है।
FT News Digital की नजर: इस मामले में विभागीय जांच के निष्कर्ष, पुलिस की आगे की कार्रवाई और राशन कार्डधारकों की शिकायतों के निस्तारण से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।
शिक्षक एमएलसी चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा, विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियां तय करने पर मंथन

सिद्धार्थनगर में जिला कार्यालय पर संगठनात्मक बैठक, गोरखपुर में मुख्यमंत्री की प्रस्तावित जनसभा की तैयारियों पर भी चर्चा

सिद्धार्थनगर। चुनावी तैयारियों को मजबूत करने और संगठनात्मक गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय सिद्धार्थनगर में शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026 को लेकर संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियों के निर्धारण, संचालन समितियों के गठन और मतदान के दिन संगठन की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हुई। इसके साथ ही 12 अक्टूबर को गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में प्रस्तावित मुख्यमंत्री की जनसभा की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने की, जबकि संचालन चुनाव संयोजक अजय उपाध्याय ने किया। क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र पांडेय और क्षेत्रीय मंत्री कन्हैया पासवान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
चुनावी प्रबंधन को लेकर संगठन ने बनाई रणनीति
बैठक में शिक्षक एमएलसी चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए विधानसभा स्तर पर संगठनात्मक दायित्वों के निर्वहन पर जोर दिया गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विधानसभा प्रभारियों और संयोजकों के नाम तय किए गए। विधानसभा संचालन समितियों के गठन की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।
इसके अतिरिक्त मतदान के दिन मतदान स्थलों पर एजेंट और सह-प्रभारियों के रूप में जिम्मेदारी निभाने वाले कार्यकर्ताओं के नाम निर्धारित किए गए। पार्टी की ओर से इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य चुनाव के दौरान संगठनात्मक समन्वय को प्रभावी बनाना और निर्धारित जिम्मेदारियों का व्यवस्थित ढंग से निर्वहन करना बताया गया।
शिक्षक एमएलसी चुनाव में संगठनात्मक तैयारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण, कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल और चुनाव संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा है।
गोरखपुर की जनसभा को लेकर भी तैयारी
बैठक में 12 अक्टूबर को गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित होने वाली मुख्यमंत्री की विशाल जनसभा की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर विचार-विमर्श हुआ।
जिला स्तर पर आयोजित इस बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ जनसभा की व्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता दी गई। इससे स्पष्ट है कि पार्टी आगामी चुनावी गतिविधियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए संगठनात्मक स्तर पर समन्वय बनाने में जुटी है।
बैठक में इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
– शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026 की तैयारियों की समीक्षा।
– विधानसभा प्रभारियों एवं संयोजकों के नाम निर्धारित करना।
– विधानसभा संचालन समितियों के गठन की प्रक्रिया।
– मतदान स्थलों पर एजेंट और सह-प्रभारियों की जिम्मेदारियां तय करना।
– 12 अक्टूबर को गोरखपुर में प्रस्तावित मुख्यमंत्री की जनसभा की तैयारियां।
संगठनात्मक बैठकों का क्या है महत्व?
राजनीतिक दलों के लिए संगठनात्मक बैठकें चुनावी तैयारियों की समीक्षा और कार्यकर्ताओं के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट करने का माध्यम होती हैं। विधानसभा स्तर पर प्रभारियों, संयोजकों और समितियों की भूमिका तय होने से कार्यक्रमों के संचालन में समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसी भी चुनाव में संगठनात्मक तैयारी के साथ मतदाताओं की भागीदारी, चुनावी नियमों का पालन और निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
सारांश | चुनावी तैयारी और जनसभा, दोनों पर फोकस
सिद्धार्थनगर में भाजपा की बैठक में शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026 की संगठनात्मक तैयारियों और गोरखपुर में प्रस्तावित मुख्यमंत्री की जनसभा को लेकर चर्चा हुई। विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियों के निर्धारण तथा समितियों के गठन की प्रक्रिया पर जोर दिया गया। बैठक में जिला और क्षेत्रीय स्तर के पदाधिकारियों के साथ मंडल अध्यक्ष एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
टिप्पणी | जिम्मेदारियों का निर्धारण ही नहीं, प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी
चुनावी तैयारियों में संगठनात्मक बैठकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन किसी भी रणनीति की वास्तविक उपयोगिता उसके प्रभावी क्रियान्वयन, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय और नियमों के पालन से सामने आती है। शिक्षक एमएलसी चुनाव के संदर्भ में भी आवश्यक है कि सभी गतिविधियां निर्धारित चुनावी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित हों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मर्यादा बनी रहे।
राजनीतिक गतिविधियों की सफलता का आकलन अंततः उनके घोषित उद्देश्यों और धरातल पर किए गए कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक के सह-संयोजक मनोज कुमार मौर्य एवं दीपेंद्र चंद चौधरी उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त साधना चौधरी, जिला महामंत्री पवन कुमार मिश्रा, फतेह बहादुर सिंह, फूलचंद जायसवाल, दिलीप चतुर्वेदी, विजयकांत चतुर्वेदी, दशरथ चौधरी, केशवान राय, बजरंगी वर्मा, सच्चिदानंद चौबे, सुरेंद्र पांडेय, सिद्धार्थ पाठक, रामनारायण, सिद्धार्थ चौधरी और मधुसूदन अग्रहरि सहित मंडल अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
डिजिटल डेस्क | सिद्धार्थनगर
सेवा संकल्प की दो तस्वीरें: आंगनवाड़ी बहनों का सम्मान, दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भरता की राह
सिद्धार्थनगर में सेवा, सम्मान और सशक्तीकरण की पहल

सिद्धार्थनगर। किसी समाज की तरक्की का आकलन केवल विकास के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होता है कि वहां महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कितने सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। सिद्धार्थनगर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित दो कार्यक्रमों ने इसी सामाजिक जिम्मेदारी को केंद्र में रखा। पहले कपियां मिश्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान को सम्मान दिया गया, फिर विकास खंड नौगढ़ में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित करने के साथ रोजगार के अवसरों से जोड़ने की पहल की गई।

सांसद जगदंबिका पाल और सदर विधायक श्यामधनी राही की मौजूदगी में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य जनकल्याणकारी प्रयासों को समाज के जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचाने का संदेश देना रहा। हालांकि, इन पहलों की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब सम्मान के साथ सुविधाएं, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी निरंतर उपलब्ध हों।
87 दिव्यांगजनों में से 14 का प्रारंभिक चयन, सहायक उपकरणों का वितरण
सेवा संकल्प अभियान के तहत 10 अक्टूबर 2026 को विकास खंड नौगढ़ में दिव्यांग रोजगार मेला एवं सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, जिला सेवायोजन विभाग और रेडी फाउंडेशन के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम की जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रोजगार मेले में शामिल 87 दिव्यांगजनों में से 14 का प्रारंभिक रूप से चयन किया गया और उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में दिव्यांगजनों को 10 मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 24 ट्राइसाइकिल, 3 व्हीलचेयर, 10 बैसाखी, 5 कान की मशीनें, 3 स्मार्ट केन और 2 बेल किट वितरित किए गए। इन उपकरणों से लाभार्थियों के आवागमन और दैनिक जीवन में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। वहीं, रोजगार मेले के माध्यम से दिव्यांगजनों को आजीविका के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया गया।

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रारंभिक रूप से चयनित अभ्यर्थियों को आगे रोजगार के कितने अवसर मिलते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभागीय स्तर पर किस तरह का सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।
कपियां मिश्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान
दिव्यांगजन कार्यक्रम से पहले कपियां मिश्र में बाल विकास परियोजना, सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सांसद जगदंबिका पाल मुख्य अतिथि और सदर विधायक श्यामधनी राही विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया तथा उपहार स्वरूप साड़ियों का वितरण किया गया।
सांसद जगदंबिका पाल ने अपने संबोधन में कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, प्रारंभिक देखभाल और महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हित में किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए सेवा और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया।
सदर विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अहम कड़ी हैं।
दिव्यांगजनों को मिले ये उपकरण
नौगढ़ में आयोजित कार्यक्रम की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वितरित सहायक उपकरणों का विवरण इस प्रकार है:
– 10 मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल
– 24 ट्राइसाइकिल
– 3 व्हीलचेयर
– 10 बैसाखी
– 5 कान की मशीनें
– 3 स्मार्ट केन
– 2 बेल किट
रोजगार मेले का विवरण: 87 दिव्यांगजनों में से 14 का प्रारंभिक चयन। इसे अंतिम नियुक्ति या स्थायी रोजगार मिलने की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका क्यों अहम?
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गांव और बस्ती के स्तर पर बच्चों के पोषण, प्रारंभिक देखभाल तथा महिलाओं को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके योगदान का सम्मान तभी व्यापक अर्थ हासिल करता है, जब उन्हें आवश्यक संसाधन, कार्य करने के लिए उचित सुविधाएं और विभागीय सहयोग भी मिलता रहे।
महिला एवं बाल कल्याण की योजनाओं को प्रभावी बनाने में जमीनी स्तर पर काम करने वाली कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सामाजिक सरोकार | सहायता नहीं, समान अवसर भी जरूरी
दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन सशक्तीकरण का लक्ष्य इससे आगे जाता है। सुगम आवागमन, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों तक आसान पहुंच ऐसे विषय हैं, जिन पर निरंतर काम करने की जरूरत है।
दिव्यांगजन समाज पर बोझ नहीं, बल्कि समान अवसर मिलने पर अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान देने वाले नागरिक हैं। इसलिए कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता वितरित करना नहीं, बल्कि बाधाओं को कम करके उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए।
इसी तरह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान भी एक दिन के आयोजन तक सीमित न रहे। उनके कार्यों को मजबूत करने के लिए नियमित सहयोग और सुविधाओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
सारांश | दो कार्यक्रम, एक सामाजिक संदेश
सेवा संकल्प अभियान के तहत कपियां मिश्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सम्मान और नौगढ़ में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल ने महिला एवं बाल कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तीकरण के विषयों को सामने रखा। रोजगार मेले में 14 अभ्यर्थियों का प्रारंभिक चयन और उपकरण वितरण कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियां रहीं।
अब इन पहलों की निरंतरता, पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच और रोजगार के वास्तविक अवसरों की उपलब्धता पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि सरकारी प्रयासों का लाभ जरूरतमंद लोगों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव ला सके।
टिप्पणी | सम्मान तभी सार्थक, जब अवसर भी मिलें
लोककल्याण की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान और दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लेकिन किसी भी योजना की सफलता का पैमाना केवल आयोजन, वितरण या प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि उससे होने वाला वास्तविक लाभ होना चाहिए।
यदि दिव्यांगजनों को उपकरणों के साथ कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलें तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जरूरी संसाधन और निरंतर सहयोग उपलब्ध हो, तो सेवा संकल्प का संदेश धरातल पर अधिक प्रभावी रूप से दिखाई देगा। यही समावेशी विकास की दिशा है, जहां सम्मान के साथ अधिकार, सहायता के साथ अवसर और योजनाओं के साथ परिणाम भी सुनिश्चित हों।
कार्यक्रम में मौजूद रहे अधिकारी
कपियां मिश्र के कार्यक्रम में जिला परियोजना निदेशक, उपायुक्त मनरेगा संदीप पाठक, परियोजना अधिकारी अनिल कुमार, साधना चौधरी, रमेश मणि, गंगा मिश्र, उद्योग विभाग से तौसलेन्द्र मिश्रा, सबलू सहानी, संजय कुमार, प्रमोद यादव सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
नौगढ़ के कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, उपायुक्त मनरेगा, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी तथा खंड विकास अधिकारी, नौगढ़ सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
डिजिटल डेस्क | सिद्धार्थनगर
मुलायम सिंह यादव की चौथी पुण्यतिथि पर मरीजों को बांटे फल, पूर्व विधायक विजय पासवान के नेतृत्व में हुआ आयोजन

माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज में सेवा कार्यक्रम आयोजित, सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि

सिद्धार्थनगर। समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक विजय पासवान के नेतृत्व में माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज में फल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों के बीच फल वितरित कर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने सेवा और सहयोग की भावना के साथ मरीजों के बीच पहुंचकर सामाजिक सरोकारों का संदेश दिया। पुण्यतिथि पर आयोजित इस पहल के माध्यम से जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय सेवा के महत्व को रेखांकित किया गया।
जनसेवा के जरिए दी श्रद्धांजलि
स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। समाजवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने और प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच उनकी स्मृतियां आज भी जुड़ी हुई हैं। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित फल वितरण कार्यक्रम उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बना।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व ब्लॉक प्रमुख इंद्रासन त्रिपाठी, विधानसभा महासचिव अमूल मकरानी, मनोज मिश्रा, अशोक पांडेय, जुनेद आलम, अखिलेश पासवान, लवकुश, सनी, अर्जुन पासवान, सोनू पासवान, गंगाराम कनौजिया और रवि पासवान सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
सामाजिक संदेश
अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों के बीच फल वितरण जैसे आयोजन समाज में सहयोग, संवेदना और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक संगठनों को जनहित से जुड़े कार्यों में भागीदारी का अवसर मिलता है।
FT News Digital | सिद्धार्थनगर
सात चोरी के मामले उजागर, तीन बाल अपचारी पकड़े गए! सवाल—बच्चों को सही राह कौन दिखाएगा?
पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन बाइक और ₹36,100 बरामद; किशोरों की कथित संलिप्तता ने परिवार और समाज की जिम्मेदारी पर खड़े किए सवाल

सिद्धार्थनगर। चोरी की एक घटना किसी परिवार की मेहनत की कमाई छीन सकती है, लेकिन जब ऐसी घटनाओं में किशोरों की कथित संलिप्तता सामने आती है, तो चिंता केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती। सवाल बच्चों की परवरिश, उनकी संगत, सामाजिक जिम्मेदारी और समय रहते सही दिशा देने का भी उठता है। सिद्धार्थनगर में सात चोरी के मामलों के अनावरण को लेकर पुलिस की कार्रवाई ने इसी गंभीर सामाजिक पहलू की ओर ध्यान खींचा है।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, एंटी थेफ्ट टीम, थाना सिद्धार्थनगर पुलिस और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में एक वयस्क अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया तथा तीन बाल अपचारियों को पकड़ा गया। पुलिस ने तीन मोटरसाइकिलें और चोरी की घटनाओं से संबंधित कुल 36,100 रुपये नकद बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई जनपद के छह थाना क्षेत्रों में दर्ज सात मुकदमों से संबंधित मामलों के अनावरण में महत्वपूर्ण रही।
जमुआर नाला के पास घेराबंदी, तीन बाइक बरामद
पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 की रात जमुआर नाला के पास रात्रि गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान तीन मोटरसाइकिलों पर सवार चार लोगों को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस का कहना है कि उन्होंने भागने की कोशिश की, जिसके बाद टीम ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बरामद मोटरसाइकिलों में दो स्प्लेंडर और एक अपाचे शामिल हैं। इनके पंजीकरण नंबर UP58Z7152, UP55J5736 और UP47Z0815 बताए गए हैं। इसके अलावा अलग-अलग चोरी के मामलों से संबंधित कुल 36,100 रुपये नकद बरामद किए जाने की बात कही गई है।
छह थाना क्षेत्र, सात मुकदमे—पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस के मुताबिक, अनावरण किए गए मामलों में सिद्धार्थनगर थाने के दो मुकदमे तथा मोहाना, लोटन, चिल्हिया, गोल्हौरा और मिश्रौलिया थानों के एक-एक मुकदमे शामिल हैं। इनमें मोटरसाइकिल चोरी और अन्य चोरी की घटनाएं बताई गई हैं।
पुलिस ने बरामदगी के आधार पर संबंधित मामलों में आगे की विधिक कार्रवाई की जानकारी दी है। हालांकि, प्रत्येक मामले में आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण साक्ष्यों एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
तीन बाल अपचारी पकड़े गए: समाज के लिए चेतावनी, बच्चों पर ठप्पा नहीं
इस प्रकरण का सबसे संवेदनशील पहलू तीन बाल अपचारियों का पकड़ा जाना है। यह घटना बच्चों के व्यवहार, संगत और मार्गदर्शन को लेकर गंभीर सामाजिक चर्चा की जरूरत बताती है। लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि किसी मामले में किशोर का नाम आने मात्र से उसे जीवनभर के लिए अपराधी मान लेना न तो उचित है और न ही सुधार की भावना के अनुकूल।
बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, परिवार, विद्यालय और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार, उनकी संगत और अचानक आए बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों से संवाद, नैतिक शिक्षा, अनुशासन और सही-गलत के परिणामों की समझ विकसित करना जरूरी है। यदि कोई बच्चा गलत गतिविधियों की ओर बढ़ रहा हो, तो समय रहते उसे रोकना और उचित मार्गदर्शन देना उसके भविष्य को बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
साथ ही, समाज को भी बच्चों की पहचान उजागर करने, अफवाह फैलाने या उनके परिवार को अपमानित करने से बचना चाहिए। किशोरों से जुड़े मामलों में कानून की प्रक्रिया, गोपनीयता, संरक्षण और सुधार की संभावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है।
पुलिस की कार्रवाई और सामाजिक सुधार—दोनों जरूरी
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के आदेश पर, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशान्त कुमार प्रसाद के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान के नेतृत्व में की गई। अभियान में प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार सिंह, एंटी थेफ्ट टीम और सर्विलांस सेल के पुलिसकर्मी शामिल रहे।
चोरी की घटनाओं का खुलासा, बरामद संपत्ति की पहचान और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, समाज को यह भी समझना होगा कि अपराध की रोकथाम केवल गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि जागरूकता, जिम्मेदार परवरिश और समय पर सुधारात्मक कदमों से भी मजबूत होती है।
Zzसामाजिक टिप्पणी | बच्चों का भविष्य बचाना भी समाज की जिम्मेदारी
गलत रास्ते पर बढ़ते कदमों को समय रहते रोकना जरूरी है। बच्चों को ईमानदारी, मेहनत की कमाई का सम्मान और कानून के प्रति जिम्मेदारी सिखाना परिवार तथा समाज का दायित्व है। वहीं, कानून का पालन सुनिश्चित करते हुए किशोरों को सुधार का अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सिद्धार्थनगर की इस कार्रवाई से चोरी के मामलों की जांच को दिशा मिलने की बात सामने आई है। अब जरूरी है कि मामले में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़े और समाज इस घटना से सीख लेकर बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अपनी भूमिका निभाए।
यह समाचार पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। आरोप सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। बाल अपचारियों की पहचान गोपनीय रखी गई है।
FT News Digital | सच और… कुछ नहीं।
