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सिद्धार्थनगर महोत्सव के बाद मासूम से दरिंदगी, आरोपी किशोर 24 घंटे में पुलिस हिरासत में
सिद्धार्थनगर।
जनपद में आयोजित सिद्धार्थनगर महोत्सव के समापन के बाद एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। मामला सदर कोतवाली क्षेत्र, जेल चौकी इलाके का है, जहाँ तीन वर्षीय मासूम बच्ची के साथ एक किशोर द्वारा जघन्य अपराध किए जाने का आरोप है।
महोत्सव समाप्त होने के बाद भी कुछ दुकानदार अपनी अस्थायी दुकानें लगाए हुए थे। इसी दौरान नगर निवासी एक परिवार अपनी फल की दुकान पर पत्नी और बच्चों के साथ मौजूद था। परिवार ने अपने ही क्षेत्र के एक किशोर को काम पर रखा हुआ था।
आरोप है कि इसी किशोर ने भरोसे का गलत फायदा उठाते हुए मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया, जिससे बच्ची की हालत गंभीर हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद लोग मौके पर एकत्र हो गए और पुलिस को तत्काल सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किशोर को हिरासत में लिया। पीड़ित बच्ची को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा गया, जहाँ उसका इलाज अभी भी जारी है।
पुलिस कार्रवाई
पीड़ित परिवार की तहरीर पर थाना सिद्धार्थनगर में
मु0अ0सं0–22/2026,
धारा 65(2) BNS एवं 5M/6 POCSO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस ने आरोपी बाल अपचारी को 24 घंटे के भीतर पुलिस अभिरक्षा में लेकर आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए न्यायालय भेजा।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद और क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान के निर्देश और पर्यवेक्षण में की गई।
समाज के लिए संदेश
यह घटना बच्चों की सुरक्षा और सतर्कता पर जोर देती है।
अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों के आसपास काम करने वाले हर व्यक्ति पर नज़र और सतर्कता बरतें।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई दिखाती है कि कानून समय पर लागू होने पर अपराधियों को रोका जा सकता है।
बच्ची का इलाज अभी भी जारी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि परिवार और समाज का सहयोग बच्चों के भविष्य की सुरक्षा में कितना महत्वपूर्ण है।
सिद्धार्थनगर में यूजीसी को लेकर सवर्ण समाज व क्षत्रिय महासभा का व्यापक प्रदर्शन
सिद्धार्थनगर। जनपद में यूजीसी (UGC) से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण समाज, क्षत्रिय महासभा, विश्व हिंदू महासंघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा व न्याय एक संकल्प संस्थान के बैनर तले व्यापक प्रदर्शन देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोगों ने एकजुट होकर बीएसए ग्राउंड से रैली निकालते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से मार्च किया और कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
यूजीसी एक्ट वापस लो के लगे नारे
इस दौरान “यूजीसी एक्ट वापस लो”, “समान शिक्षा-सामान अधिकार” और सवर्ण समाज का उत्पीड़न बंद करो” जैसे नारे लगते रहे। भारी भीड़ जुटी रही और अपनी आवाज बुलंद करती रही।
रास्ते भर प्रदर्शनकारी संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य हाथों में तख्तियां व बैनर लिए नजर आए। रैली के दौरान शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। जिलाधिकारी की ओर से उपजिलाधिकारी शशांक शेखर राय ने ज्ञापन प्राप्त किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहां की, “यूजीसी (UGC) एक्ट-2026 में प्रतावित नियम से सवर्ण समाज का उत्पीड़न होगा और सवर्ण समाज के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि, यह एक्ट संविधान में निहित समानता के अधिकार का हनन करता है। इस एक्ट द्वारा समाज में वैमनस्यता बढ़ेगा।”
सवर्ण समाज को शिक्षा से वंचित रखने की साजिश
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि, “सर्वण समाज ने आजादी से लेकर राष्ट्र निर्माण तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन अब इसी समाज को शिक्षा से वंचित करने की साजिश की जा रही है। सवर्ण समाज यह कत्तई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने सरकार से आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग की।”
एक्ट वापस नहीं तो होगा उग्र आंदोलन
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि, “यदि सरकार इस दमनकारी एक्ट को वापस नहीं लेती है तो सवर्ण समाज इससे भी बड़ा आंदोलन पूरे देश में करेगा।”
इस दौरान बार एसोसिएशन अध्यक्ष व क्षत्रिय महासभा व विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह, कृष्णपाल सिंह, हरेंद्र सिंह, भूप नारायण सिंह, सुधीर पांडेय उर्फ फरसा बाबा, रामकृष्ण पांडेय व बड़ी संख्या में सवर्ण समाज से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
सिद्धार्थनगर में ठेले वाले का पुलिस पर आरोप, SHO ने बताया निराधार — जांच की मांग

डीएम से शिकायत, पुलिस ने दी सफाई — दोनों पक्ष आमने-सामने
सिद्धार्थनगर।
जनपद के शोहरतगढ़ तहसील अंतर्गत थाना चिल्हिया क्षेत्र से एक मामला सामने आया है, जिसमें एक ठेले पर नाश्ता बेचकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले व्यक्ति ने थाना प्रभारी पर अभद्रता और धमकी देने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस प्रशासन ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
पीड़ित राम कुमार पुत्र स्वर्गीय तिलकराम, निवासी ग्राम पिपरहवा थाना जोगिया, ने जिला अधिकारी कार्यालय में शिकायती पत्र देकर बताया कि वह करौंदा नानकार स्थित देशी शराब की सरकारी दुकान के पास पिछले 4–5 वर्षों से पकौड़ी, समोसा, नमकीन आदि का ठेला लगाकर जीवन यापन करता है।
पीड़ित के अनुसार, दिनांक 29 दिसंबर 2025 की शाम लगभग 6 बजे थाना चिल्हिया के थाना प्रभारी व अन्य पुलिसकर्मी उसकी दुकान पर पहुंचे और कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए फर्जी मुकदमे में फंसाने तथा दुकान हटवाने की धमकी दी। इस घटना से पीड़ित और उसका परिवार भयभीत है।
पीड़ित ने प्रशासन से पुलिस की कथित दखलअंदाजी रोकने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस का पक्ष
वहीं इस पूरे मामले में थाना प्रभारी चिल्हिया ने आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया है।
थाना प्रभारी के अनुसार, दिनांक 2 फरवरी 2026 को करौंदा नानकार में बाजार का दिन होने के कारण पुलिस टीम द्वारा पैदल गश्त की जा रही थी। गश्त के दौरान यह पाया गया कि देशी शराब की दुकान के आसपास कुछ दुकानदार ग्राहकों को दुकान पर बैठाकर शराब पिला रहे थे।
पुलिस के अनुसार, पुलिस को देखकर मौके से लोग भाग गए, जिसके बाद दुकानदारों को सख्त हिदायत दी गई कि वे केवल सामान बेचें, लेकिन दुकान पर बैठाकर शराब न पिलाएं।

थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि पैसे मांगने या गाली देने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं, और मौके की स्थिति का वीडियो भी पुलिस द्वारा रिकॉर्ड किया गया है।
निष्कर्ष
फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है।
एक ओर जहां पीड़ित ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है, वहीं पुलिस ने अपने कर्तव्य पालन की बात कही है। अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
“अब सवाल यह है कि क्या ठेले वाले के आरोप सही हैं या पुलिस की कार्रवाई नियमों के तहत थी — सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।”
बाल विवाह मुक्ति रथ को विधायक श्यामनी राही ने दिखाई हरी झंडी
सिद्धार्थनगर। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा पूरे देश में 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाना है। उक्त के क्रम में बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए सदर विधायक श्याम धनी राही ने कहा कि यह अभियान केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी बेटियों के भविष्य, शिक्षा और सम्मान की रक्षा का एक सशक्त संकल्प है। इसी राष्ट्रीय अभियान को मानव सेवा संस्थान सेवा द्वारा जिले में “बाल विवाह मुक्ति रथ” का संचालन किया जा रहा है, जो लगभग 30 दिनों तक ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भ्रमण कर जन-जन को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराएगा। उन्होंने कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि जब हम एक बच्चे का बचपन बचाते हैं, तब हम एक पूरी पीढ़ी को शिक्षित, स्वस्थ और सशक्त बनाते हैं। बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवाधिकारों पर गहरा प्रहार है। उन्होंने कहा यह पुनीत अभियान समाज के लिए एक अत्यंत सकारात्मक, प्रेरणादायी और प्रभावशाली संदेश देगा।
मानव सेवा संस्थान के कार्यकारी निदेशक पुरु मयंक त्रिपाठी ने इस अभियान को हरी झंडी दिखाने के लिए सदर विधायक के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्थान के सन्दीप कुमार मद्धेशिया, अरूण कुमार मद्धेशिया, ग्राम प्रधान झंगटी अरविंद तिवारी, प्रधान विशुनपुर राजेश यादव, हेमंत सिंह, प्रधान अनिल कुमार गुप्ता, प्रधान प्रतिनिधि अशोक कुमार, जेई सुधांशु पाठक, सर्वजीत, मंटू विश्वकर्मा, सहित भारी संख्या में स्टेकहोल्डर्स एवं ग्राम प्रधान उपस्थित रहे।
डॉ मानसी द्विवेदी को मिला PHD की डिग्री
गोरखपुर: गोरखपुर विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान विषय में डॉक्टर मानसी द्विवेदी को पीएचडी (Doctor of Philosophy) की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने अपना शोध कार्य “Study of Fungal Pathogens causing Strawberry fruit rots and their Management by Natural agents” विषय पर पूरा किया। यह शोध वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रो. पूजा सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
पूरे क्षेत्र को है garv
डॉ. मानसी की इस उपलब्धि से उनके पिता कैलाश नाथ द्विवेदी तथा पूरे जनपद का गौरव बढ़ा है।
पीएचडी शिक्षा की सर्वोच्च डिग्री मानी जाती है, जो मौलिक शोध (Original Research) और थीसिस के सफल डिफेंस के बाद प्रदान की जाती है। यह डिग्री किसी विषय में गहन विशेषज्ञता का प्रमाण होती है।
डॉ. मानसी ने अपने शोध में स्ट्रॉबेरी फलों में लगने वाले कवक रोग (Fungal Pathogens) और उनके प्राकृतिक प्रबंधन पर विस्तृत अध्ययन किया। उनके शोध पर आधारित 5 अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र स्कोपस इंडेक्स (Q1, Q2, Q3, Q4) जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं।
स्ट्रॉबेरी की शेल्फ लाइफ बढ़ाने वाला बड़ा नवाचार
डॉ. मानसी द्विवेदी ने अपने शोध के दौरान डॉ. रितेश कुमार राय और प्रो. पूजा सिंह के साथ मिलकर ‘ऑर्गेनिक बेरी सेफ गार्ड’ नामक एक प्राकृतिक यौगिक विकसित किया है।
शोध में पाया गया कि:
सामान्यतः 2–4 दिन में खराब होने वाली स्ट्रॉबेरी
सामान्य तापमान पर 10–12 दिन
कोल्ड स्टोरेज में 20–25 दिन तक सुरक्षित रह सकती है
यह उत्पाद स्वाद, पोषण और गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता।
पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित
यह नवाचार:
✔ पूरी तरह इको-फ्रेंडली
✔ मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित
✔ पर्यावरण को नुकसान रहित
✔ कम लागत में तैयार होने वाला
यह किसानों और व्यापारियों के लिए फलों को सड़ने से बचाने का किफायती समाधान साबित हो सकता है।
पेटेंट और औद्योगिकरण की ओर कदम
डॉ. मानसी के शोध के दौरान विकसित यह उत्पाद पेटेंट प्रकाशित हो चुका है और अब औद्योगिक उत्पादन की दिशा में अग्रसर है। इससे कृषि आधारित उद्योगों को भी नया अवसर मिलेगा।
विश्वविद्यालय का सहयोग और मार्गदर्शन
डॉ. मानसी ने अपनी सफलता का श्रेय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को देते हुए कहा कि कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में शोध व नवाचार को उत्कृष्ट वातावरण मिला।
उन्होंने प्रो. दिनेश यादव, डॉ. मनिन्द्र कुमार, प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी सहित सभी शिक्षकों का आभार जताया।
परिवार और जनपद में खुशी
डॉ. मानसी द्विवेदी, सिद्धार्थनगर के वरिष्ठ पत्रकार कैलाश नाथ द्विवेदी एवं श्रीमती अर्चना द्विवेदी की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, शिक्षकगण और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
स्वामी विवेकानंद की स्मृति में चित्रकला प्रतियोगिता हुई संपन्न
नई दिल्ली। बैटर टूमोरो फाउंडेशन द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की स्मृति में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता का निर्णयन (जजमेंट) आज मॉडर्न इंटरनेशनल स्कूल, द्वारका, दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संस्था की संस्थापक अध्यक्षा डॉ.ममता सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता में देश भर के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थियों, युवाओं एवं कला प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. भरत झा ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम, संस्कार, रचनात्मकता तथा स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करना रहा। प्रतिभागियों ने अपनी चित्रकला के माध्यम से स्वामी विवेकानंद जी के जीवन, उनके संदेशों एवं भारतीय संस्कृति को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के सह संयोजक जतिन राणा ने बताया कि निर्णायक मंडल में प्रतिष्ठित कलाकारों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिन्होंने चित्रों का मूल्यांकन रचनात्मकता, विषयवस्तु, प्रस्तुति एवं संदेश के आधार पर किया। इसमें मुख्य रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन की नित्या पाठक,पूर्व चीफ दिल्ली फायर सर्विस डॉ. धर्मपाल भारद्वाज,समाजसेविका मंजू छिब्बर, कमल शर्मा, डॉ.प्रिया माथुर, डॉ.रवि कुमार, डॉ. इंदिरा मिश्रा,श्रवण कुमार तथा कई कला शिक्षकों ने भी बड़े ही पारदर्शी तरीके से विजेताओं के नाम घोषित किए ।
आयोजन समिति के सदस्य कमल शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी तथा आगामी समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। सभी प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की गई।
इस अवसर पर आयोजक मंडल ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ युवाओं में सकारात्मक सोच, सृजनात्मक अभिव्यक्ति एवं राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा देती हैं।
लव ट्रायंगल बना मौत की वजह: मुंबई की प्रिया शेट्टी की गोरखपुर में बेरहमी से हत्या
GorakhpurNews: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक खौफनाक और सनसनीखेज लव ट्रायंगल मर्डर केस सामने आया है, जिसने रिश्तों की सच्चाई और विश्वास पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
यह मामला न सिर्फ क्राइम की दुनिया को झकझोर देने वाला है, बल्कि यह दिखाता है कि जब लालच, डर और झूठ मिल जाते हैं, तो इंसान किस हद तक गिर सकता है।
30 जनवरी की सुबह गोरखपुर के पीपीगंज थाना क्षेत्र में एक अज्ञात महिला का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया था।
महिला की हालत इतनी भयावह थी कि पहचान करना लगभग नामुमकिन हो गया था।
पुलिस के लिए यह मामला पूरी तरह से ब्लाइंड केस बन चुका था।
शिनाख्त बनी सबसे बड़ी चुनौती
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और साथ ही महिला की पहचान के लिए जांच शुरू की।
घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
लगातार तकनीकी और मैनुअल जांच के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि हत्या सुनियोजित तरीके से की गई है।
जांच में खुलासा हुआ कि मृतका की पहचान मुंबई निवासी 35 वर्षीय प्रिया शेट्टी के रूप में हुई।
लिव-इन रिलेशन से शुरू हुई कहानी, हत्या पर खत्म
पुलिस जांच के अनुसार, प्रिया शेट्टी की मुलाकात मुंबई में एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले विजय कुमार साहनी से हुई थी।
दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे।
इसी दौरान दोनों का एक बेटा भी हुआ, जिसकी उम्र लगभग 13–14 साल बताई जा रही है।
हालांकि समय के साथ विजय और प्रिया के रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा।
इसी बीच विजय ने गोरखपुर में परिवार की मर्जी से दूसरी शादी कर ली।
शादी का दबाव और साज़िश की शुरुआत
पुलिस के मुताबिक, प्रिया शेट्टी विजय पर शादी का दबाव बना रही थी।
यह दबाव धीरे-धीरे विजय के लिए परेशानी का सबब बन गया।
इसी से छुटकारा पाने के लिए आरोपी ने अपनी पत्नी संध्या और ससुर रामविलास साहनी के साथ मिलकर एक खतरनाक साज़िश रची।
26 जनवरी को आरोपी विजय, उसकी पत्नी और प्रिया शेट्टी गोरखपुर पहुंचे।
इसके बाद 29 जनवरी की रात यह साज़िश अपने खौफनाक अंजाम तक पहुंच गई।
हत्या के बाद पहचान छिपाने की कोशिश
जांच में सामने आया कि हत्या के बाद
शव की पहचान छिपाने के लिए
जानबूझकर चेहरा क्षत-विक्षत किया गया और
शरीर से कपड़े हटाकर शव को सुनसान जगह पर फेंक दिया गया।
लेकिन अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी कर लें,
कानून की नजर से बच नहीं सकते।
तीन दिन में खुलासा, तीनों आरोपी गिरफ्तार
गोरखपुर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और ऑटो चालक की अहम जानकारी के आधार पर
पूरे मामले का खुलासा किया।
मुख्य आरोपी
✔️ विजय कुमार साहनी
✔️ उसकी पत्नी संध्या साहनी
✔️ ससुर रामविलास साहनी
तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस का बयान
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मामला शुरू में पूरी तरह से ब्लाइंड था,
लेकिन टीमवर्क, तकनीकी जांच और स्थानीय इनपुट की मदद से
सच्चाई सामने लाई गई।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि
गलत रिश्ते, झूठे वादे और स्वार्थ
किसी की जिंदगी को कितनी बेरहमी से खत्म कर सकते हैं।
56 लाख फॉलोअर्स वाला मशहूर यूट्यूबर गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार
सोशल मीडिया की चमक-दमक के पीछे छिपे एक खौफनाक सच का पर्दाफाश छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में हुआ है। पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे चर्चित यूट्यूबर को गिरफ्तार किया है, जिसके यूट्यूब चैनल पर करीब 56 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।
ओडिसा से लेकर महाराष्ट्र तक था नेटवर्क
बताया जा रहा है कि आरोपी यूट्यूबर सांपों के रेस्क्यू से जुड़े वीडियो बनाकर खुद को समाजसेवी के रूप में पेश करता था और इसी लोकप्रियता की आड़ में ओडिशा से महाराष्ट्र तक गांजा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, हाल ही में महासमुंद में एक एंबुलेंस से भारी मात्रा में गांजा बरामद किया गया था। जांच आगे बढ़ी तो इस पूरे नेटवर्क की कड़ियाँ उक्त यूट्यूबर तक जा पहुँचीं। पूछताछ में सामने आया कि तस्करी के लिए अलग-अलग तरीकों और वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा था, ताकि किसी को शक न हो।
पुलिस का दावा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी सोशल मीडिया पर भरोसेमंद छवि बनाकर लोगों की नजरों से बचता रहा, लेकिन पर्दे के पीछे अवैध धंधे को पूरी योजना के साथ अंजाम दे रहा था। गांजे की खेप, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग और वित्तीय लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है।
बड़ा सवाल
यह मामला एक बार फिर सोचने पर मजबूर करता है कि
क्या सोशल मीडिया की लोकप्रियता किसी की सच्चाई की गारंटी होती है?
कानून ने साफ संदेश दे दिया है कि पहचान चाहे जितनी बड़ी हो, अपराध करने वाला कानून से ऊपर नहीं।
फिलहाल पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
जहाँ ज़िंदा होना भी अपराध बन जाए: काग़ज़ों में मृत घोषित की गई वृद्धा
सिद्धार्थनगर।
सिस्टम की एक चौंकाने वाली लापरवाही ने इंसान और सरकारी काग़ज़ों के बीच की सच्चाई पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
ज़िले के शोहरतगढ़ ब्लॉक अंतर्गत सुजकुंडिया गांव के टोला मोहम्मदपुर में एक वृद्ध महिला ज़िंदा है, चलती-फिरती है, बोलती है — लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
यह मामला आज का नहीं, बल्कि दो से तीन वर्ष पुराना बताया जा रहा है।
जब वृद्ध महिला वृद्धा पेंशन के लिए आवेदन कराने पहुँची, तो सिस्टम में उसका नाम देखकर कहा गया कि आप तो पहले ही मृत घोषित की जा चुकी हैं।
महिला के लिए यह जवाब किसी सदमे से कम नहीं था।
जिसके पास खुद का अस्तित्व है, वही जब काग़ज़ों में खत्म कर दिया जाए — तो सवाल सिर्फ़ पेंशन का नहीं, इंसाफ़ और भरोसे का बन जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार महिला के पति और संतान पहले ही गुजर चुके हैं।
वृद्धा पेंशन ही उसके जीवन का एकमात्र सहारा है।
हैरानी की बात यह है कि महिला के बैंक खाते में हाल के वर्षों तक लेन-देन दर्ज है, जो उसके जीवित होने की पुष्टि करता है, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड कुछ और कहानी कहता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन और मौके की जांच के ही महिला को मृत दर्शा दिया गया।
अब सवाल यह उठता है कि अगर एक ज़िंदा इंसान काग़ज़ों में मारा जा सकता है, तो आम आदमी की सुरक्षा सिस्टम में कितनी मज़बूत है?
मामले पर मुख्य विकास अधिकारी, सिद्धार्थनगर बलराम सिंह का कहना है कि शिकायत संज्ञान में आई है और जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला न सिर्फ़ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी बताता है कि सरकारी रिकॉर्ड की एक गलती किसी ज़िंदा इंसान को कैसे “काग़ज़ी मौत” दे सकती है।
जहाँ ज़िंदा होना भी अपराध बन जाए: काग़ज़ों में मृत घोषित की गई वृद्धा
सिद्धार्थनगर।
सिस्टम की एक चौंकाने वाली लापरवाही ने इंसान और सरकारी काग़ज़ों के बीच की सच्चाई पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
ज़िले के शोहरतगढ़ ब्लॉक अंतर्गत सुजकुंडिया गांव के टोला मोहम्मदपुर में एक वृद्ध महिला ज़िंदा है, चलती-फिरती है, बोलती है — लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
यह मामला आज का नहीं, बल्कि दो से तीन वर्ष पुराना बताया जा रहा है।
जब वृद्ध महिला वृद्धा पेंशन के लिए आवेदन कराने पहुँची, तो सिस्टम में उसका नाम देखकर कहा गया कि आप तो पहले ही मृत घोषित की जा चुकी हैं।
महिला के लिए यह जवाब किसी सदमे से कम नहीं था।
जिसके पास खुद का अस्तित्व है, वही जब काग़ज़ों में खत्म कर दिया जाए — तो सवाल सिर्फ़ पेंशन का नहीं, इंसाफ़ और भरोसे का बन जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार महिला के पति और संतान पहले ही गुजर चुके हैं।
वृद्धा पेंशन ही उसके जीवन का एकमात्र सहारा है।
हैरानी की बात यह है कि महिला के बैंक खाते में हाल के वर्षों तक लेन-देन दर्ज है, जो उसके जीवित होने की पुष्टि करता है, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड कुछ और कहानी कहता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन और मौके की जांच के ही महिला को मृत दर्शा दिया गया।
अब सवाल यह उठता है कि अगर एक ज़िंदा इंसान काग़ज़ों में मारा जा सकता है, तो आम आदमी की सुरक्षा सिस्टम में कितनी मज़बूत है?
मामले पर मुख्य विकास अधिकारी, सिद्धार्थनगर बलराम सिंह का कहना है कि शिकायत संज्ञान में आई है और जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला न सिर्फ़ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी बताता है कि सरकारी रिकॉर्ड की एक गलती किसी ज़िंदा इंसान को कैसे “काग़ज़ी मौत” दे सकती है।
