बनगवां में यूपी एग्रीज योजना की बैठक, रबी की खेती को लेकर किसानों को मिला मार्गदर्शन
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बनगवां में यूपी एग्रीज योजना की बैठक, रबी की खेती को लेकर किसानों को मिला मार्गदर्शन
बनगवां में यूपी एग्रीज योजना की कृषक बैठक, रबी सीजन में उन्नत खेती और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

मिठवल, सिद्धार्थनगर। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, खेती की लागत कम करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में यूपी एग्रीज योजना के तहत गांवों में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड मिठवल के ग्राम बनगवां में रविवार को विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित यूपी एग्रीज योजना के अंतर्गत कृषक बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों को रबी सीजन की तैयारियों, उन्नत बीजों, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
खेती को आधुनिक बनाने की पहल, किसानों को दी गई उपयोगी जानकारी
कृषि क्षेत्र में बेहतर उत्पादन और किसानों को आधुनिक खेती के तौर-तरीकों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में यूपी एग्रीज टीम ने किसानों के साथ संवाद किया। अधिकारियों ने योजना के उद्देश्यों और संभावित लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खेती की लागत कम करने और उत्पादन में सुधार की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। बैठक में लगभग 30 से 40 किसानों ने प्रतिभाग किया।
इनबॉक्स लीड: रबी सीजन से पहले किसानों को खेती की बेहतर तैयारी का संदेश
बैठक के दौरान मिठवल विकासखंड के टेक्निकल एसोसिएट अविनाश मिश्रा ने यूपी एग्रीज योजना की रूपरेखा और इसके प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को उत्पादकता बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के महत्व से अवगत कराया।
वहीं, टेक्निकल असिस्टेंट सुधा मिश्रा ने रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए उन्नत बीजों के चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मिट्टी की सेहत बनाए रखने और सरकारी अनुदान के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। किसानों को खेती में वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
फॉलोअप: क्लस्टर आधारित खेती और बाजार से जुड़ाव पर भी चर्चा
कृषक बैठक में क्लस्टर आधारित खेती और बाजार से जुड़ाव के फायदों को भी समझाया गया। किसानों को बताया गया कि योजनाबद्ध तरीके से खेती करने, फसल की जरूरत के अनुसार कृषि प्रबंधन अपनाने और बाजार की मांग को ध्यान में रखने से बेहतर परिणाम हासिल करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
बैठक के दौरान किसानों ने योजना से संबंधित विभिन्न सवाल उठाए। यूपी एग्रीज टीम ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उपलब्ध जानकारी साझा की। इससे किसानों को योजना की कार्यप्रणाली और खेती में इसके उपयोग को समझने का अवसर मिला।
सार: जागरूकता से आधुनिक खेती की ओर बढ़ेंगे किसान
ग्राम बनगवां में आयोजित यह कृषक बैठक रबी सीजन से पहले किसानों को कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण पहल रही। बैठक में किसानों ने योजना से जुड़कर इसका लाभ लेने में रुचि दिखाई और आगे भी आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कृषि योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाना, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देना और उन्हें उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराना ग्रामीण कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अब किसानों को इस जानकारी का खेतों में कितना व्यावहारिक लाभ मिलता है, यह आने वाले रबी सीजन में अपनाई जाने वाली कृषि पद्धतियों और उनके परिणामों से स्पष्ट होगा।
डिजिटल टिप्पणी
खेती में बेहतर उत्पादन की शुरुआत सही जानकारी और समय पर तैयारी से होती है। उन्नत बीज, मिट्टी के स्वास्थ्य पर ध्यान, संतुलित उर्वरक का उपयोग और बाजार की जरूरतों की समझ किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यूपी एग्रीज जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाना सकारात्मक पहल है। जरूरत इस बात की है कि किसानों को मार्गदर्शन के साथ योजना के पात्र लाभों, उपलब्ध सुविधाओं और उनके वास्तविक क्रियान्वयन की जानकारी भी समय पर मिलती रहे।
EVM, VVPAT सहित निर्वाचन संबंधी उपकरणों का DM ने किया निरीक्षण
सिद्धार्थनगर 12 अक्टूबर 2026/आगामी निर्वाचन की तैयारियों के क्रम में आज से इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों(EVM), जिसमें कण्ट्रोल यूनिट(CU),बैलट यूनिट(BU)और VVPAT शामिल हैं,की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) का जिला निर्वाचन अधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट श्री शिवशरणप्पा जीएन द्वारा जिला निर्वाचन कार्यालय का निरीक्षण किया गया।
जिला निर्वाचन अधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट श्री शिवशरणप्पा जीएन द्वारा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षक/सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान श्री नरेंद्र कुमार मीणा के साथ ई0वी0एम0 वेयर को राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के समक्ष खोला गया। भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा EVM के निर्माता कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड(BEL) के अभियंता नामित किए गयेे हैं। जिले के 2239 मतदेय स्थलों के सापेक्ष 135 प्रतिशत मशीनों की जांच कराई जाएगी। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हो रही है। जांच के दौरान मशीनों को आगामी विधानसभा निर्वाचन हेतु तैयार किया जायेगा और उसमें डमी निर्वाचन चिह्न दर्ज अपलोड कर उनकी क्रियाशीलता भी चेक की चेक की जाएगी। इसके बाद मशीनों को भारत निर्वाचन आयोग के ईएमएस पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। जांच में खराब पाई जाने वाली मशीनों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोग द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत निर्माता कंपनी को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान मशीनों की कार्यक्षमता परखने के लिए नमूना मतदान भी कराया जाएगा। बैलट यूनिट में उपलब्ध 16 बटनों की जांच के लिए छह-छह मत दर्ज कराकर उनकी कार्यप्रणाली देखी जाएगी। इसके अतिरिक्त एक प्रतिशत मशीनों पर 1200 मत, दो प्रतिशत पर 1000 मत और दो प्रतिशत मशीनों पर 500-500 मत दर्ज कराकर परीक्षण किया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी निगरानी की जानकारी और आई पी एड्रेस मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) गौरव श्रीवास्तव, ए0आई0जी0 स्टाम्प ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई निर्माण खण्ड सतीश कुमार व अन्य संबधित अधिकारीगण उपस्थित थे।
एशियन स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता प्रदीप चौरसिया को कन्हैया पासवान ने किया सम्मानित
सिद्धार्थनगर। विधानसभा क्षेत्र कपिलवस्तु अंतर्गत ग्राम सैनुआ निवासी युवा कबड्डी खिलाड़ी प्रदीप चौरसिया ने एशियन स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक प्राप्त कर क्षेत्र एवं जनपद सिद्धार्थनगर का नाम गौरवान्वित किया है।
प्रदीप चौरसिया की इस उपलब्धि पर भाजपा गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री कन्हैया पासवान ने सैनुआ स्थित उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया तथा इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर कन्हैया पासवान ने कहा कि प्रदीप चौरसिया ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और लगन के बल पर एशियन स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर सिद्धार्थनगर सहित पूरे कपिलवस्तु क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि ऐसी प्रतिभाओं को उचित अवसर, प्रोत्साहन और मंच उपलब्ध कराया जाए। प्रदीप चौरसिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास के बल पर ग्रामीण क्षेत्र का युवा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
कन्हैया पासवान ने प्रदीप चौरसिया के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वह आने वाले समय में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश,प्रदेश और जनपद का नाम रोशन करें।
इस दौरान पूर्व मंडल अध्यक्ष दृग नारायण सिंह,पूर्व जिला मीडिया प्रभारी निशांत पांडेय,भाजपा नेता मयंक श्रीवास्तव,संतोष शुक्ला,सूरज त्रिपाठी, अनुराग कसौधन,अजय सिंह एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मनरेगा के काम में पारदर्शिता की परीक्षा, ऑनलाइन हाजिरी और जमीनी हकीकत का हो सत्यापन
सिद्धार्थनगर: सरकारी पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी दर्ज, कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति पर उठे सवाल; बढ़नी की सिसवा बुजुर्ग पंचायत में जांच की जरूरत
सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गांवों में विकास को गति देना, जरूरतमंद ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना और सार्वजनिक धन का सदुपयोग सुनिश्चित करना है। लेकिन जब किसी विकास कार्य की ऑनलाइन हाजिरी और मौके पर काम करने वाले मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति को लेकर सवाल सामने आएं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी हो जाता है।
सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी विकासखंड की सिसवा बुजुर्ग ग्राम पंचायत से जुड़े सरकारी पोर्टल के कुछ स्क्रीनशॉट सामने आए हैं। इनमें एक कार्य का नाम “सिसवा बुजुर्ग में समय माता के स्थान से ज्ञानदास के खेत तक बांध निर्माण कार्य” दर्ज दिखाई देता है। पोर्टल पर कार्य कोड 3151004034/FP/VB/YD/958486255823632836 और मस्टर रोल संख्या 2736 तथा 2740 भी प्रदर्शित हैं।
स्क्रीनशॉट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 और 10 अक्टूबर 2026 की तारीखों के लिए मजदूरों की उपस्थिति का रिकॉर्ड दिखाई देता है। वहीं, इस कार्यस्थल पर मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी और काम की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि मौके पर मजदूर मौजूद नहीं थे, जबकि संबंधित तारीख की हाजिरी दर्ज है, तो यह जांच का विषय है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में कोई अंतर था या नहीं।
ऑनलाइन हाजिरी से आगे, मौके पर सत्यापन क्यों जरूरी?
सरकारी पोर्टल पर हाजिरी दर्ज होना अपने आप में इस बात का अंतिम प्रमाण नहीं है कि संबंधित समय पर सभी मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद थे और निर्धारित काम हुआ। इसी तरह, किसी एक समय पर मजदूरों का दिखाई न देना भी अपने आप में फर्जी हाजिरी या भ्रष्टाचार का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

ऐसे में संबंधित अधिकारियों को कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। निर्धारित कार्य की प्रगति, माप पुस्तिका, मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान विवरण और उपलब्ध डिजिटल फोटो का मिलान किया जाना चाहिए।
जनता के पैसे का हिसाब जनता को मिलना चाहिए
ग्रामीण विकास कार्यों में खर्च होने वाला सरकारी धन जनता के हित से जुड़ा है। इसलिए यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जिस काम के लिए धन स्वीकृत हुआ, वह वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा हो और मजदूरों को उनके काम के अनुरूप मजदूरी मिले।

यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि रिकॉर्ड और कार्यस्थल की स्थिति में कोई गड़बड़ी नहीं मिलती है, तो तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
जांच के दायरे में ये सवाल
1. क्या सिसवा बुजुर्ग पंचायत में दर्ज बांध निर्माण कार्य मौके पर निर्धारित योजना के अनुसार कराया जा रहा है?
2. 7 और 10 अक्टूबर 2026 की ऑनलाइन हाजिरी के समय कार्यस्थल पर कितने मजदूर वास्तव में मौजूद थे?
3. क्या संबंधित तारीखों की डिजिटल फोटो, उपस्थिति रजिस्टर और मस्टर रोल का मिलान किया गया है?
4. कार्य की स्वीकृत लागत, अब तक का व्यय, माप पुस्तिका और भुगतान की स्थिति क्या है?
5. क्या संबंधित कार्य का स्थल निरीक्षण कर उसकी वास्तविक प्रगति की रिपोर्ट तैयार की गई है?
इन सवालों का जवाब अभिलेखों और निष्पक्ष जांच के आधार पर सामने आना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति पर आरोप न लगे और यदि कोई अनियमितता हुई है तो वह भी सामने आ सके।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
संबंधित ग्राम पंचायत, विकासखंड और जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि मामले का संज्ञान लेकर कार्यस्थल का सत्यापन कराएं तथा ऑनलाइन दर्ज हाजिरी और वास्तविक कार्य की स्थिति का मिलान करें। जांच में कोई कमी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
FT News Digital का पक्ष: यह रिपोर्ट उपलब्ध पोर्टल स्क्रीनशॉट और उनसे जुड़े जनहित के सवालों पर आधारित है। इन स्क्रीनशॉट से अपने आप किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता, फर्जी हाजिरी अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं होती। संबंधित पक्षों का जवाब और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने पर उन्हें भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
सिद्धार्थनगर में पानी की बोतलों पर बड़ा विवाद! ऊंजी के आरओ प्लांट पर पुलिस की छापेमारी, अब दस्तावेज खोलेंगे राज
CLEAR और CLEAR ADVANCE के नाम को लेकर आमने-सामने दावे, बोतलें व स्टीकर मिलने के बाद जांच तेज; पुलिस के फैसले पर टिकी नजरें
सिद्धार्थनगर | 12 अक्टूबर 2026 | FT News Digital
सिद्धार्थनगर में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के ब्रांड नाम को लेकर उठा विवाद अब जांच के दौर में पहुंच गया है। मोहाना थाना क्षेत्र के ऊंजी गांव स्थित एक आरओ प्लांट पर पुलिस ने छापेमारी की। यहां पानी की बोतलें और स्टीकर मिलने की जानकारी सामने आई है। विवाद का केंद्र है ‘CLEAR’ और ‘CLEAR ADVANCE’ नाम, जिनके इस्तेमाल को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
एक ओर CLEAR कंपनी के प्रतिनिधियों ने अपने ब्रांड से मिलते-जुलते नाम के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन की शिकायत की है। दूसरी ओर प्लांट संचालक का दावा है कि उसके पास CLEAR ADVANCE नाम से बोतलबंद पानी तैयार करने का लाइसेंस है। अब सवाल यह है कि संबंधित दस्तावेज क्या कहते हैं और जांच में किस पक्ष का दावा प्रमाणित होता है।
बोतलों पर नाम का विवाद, जांच के घेरे में कारोबार
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार में बिकने वाले पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की पहचान उसके नाम, लेबल और पैकेजिंग से होती है। यदि किसी उत्पाद के नाम या पैकेजिंग को लेकर भ्रम की स्थिति बनती है, तो उपभोक्ता के हित प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इस मामले में उपभोक्ताओं के साथ वास्तविक धोखाधड़ी या पानी की गुणवत्ता से जुड़ी गड़बड़ी की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के अधिवक्ताओं ने बोतलों पर इस्तेमाल किए गए नाम और स्टीकर को लेकर आपत्ति जताई। वहीं, हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि दोनों पक्षों को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
इनसेट: कंपनी के अधिवक्ताओं ने दर्ज कराई आपत्ति
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, CLEAR कंपनी के अधिकृत अधिवक्ता मनीष दूबे और राजन द्विवेदी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कंपनी के पक्ष ने आरोप लगाया कि बोतलों पर इस्तेमाल किया जा रहा नाम और लेबल उसके ब्रांड से मिलता-जुलता है। प्रतिनिधियों ने पुलिस को शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की।
कंपनी की आपत्ति का मुख्य आधार कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन है। लेकिन किसी नाम का मिलता-जुलता होना अपने आप में उल्लंघन का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसके लिए पंजीकृत ट्रेडमार्क, संबंधित उत्पादों की श्रेणी, लेबल, पैकेजिंग और अन्य कानूनी तथ्यों की जांच जरूरी है।
संचालक का दावा—लाइसेंस के दस्तावेज उपलब्ध हैं
इस मामले का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, प्लांट संचालक ने CLEAR ADVANCE नाम से बोतलबंद पानी तैयार करने के लिए लाइसेंस होने का दावा किया है। संचालक के अनुसार, संबंधित कागजात उसके अधिवक्ता के पास हैं।
अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दस्तावेज किस प्राधिकरण ने जारी किए, वे किस उत्पाद और ब्रांड नाम पर लागू होते हैं तथा पैकेजिंग के इस्तेमाल को लेकर उनकी वैधानिक स्थिति क्या है। केवल लाइसेंस होने का दावा और किसी विशेष ट्रेडमार्क के इस्तेमाल का अधिकार—दोनों अलग-अलग कानूनी प्रश्न हो सकते हैं।
पुलिस की जांच क्यों है अहम?
मोहाना थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया है कि दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल किसी पक्ष को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
जांच में प्रमुख रूप से इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है:
– संबंधित ट्रेडमार्क का पंजीकरण और उसके अधिकार किसके पास हैं?
– प्लांट संचालक के पास किस प्रकार का लाइसेंस या पंजीकरण है?
– बोतलों पर इस्तेमाल किए गए नाम, स्टीकर और पैकेजिंग की वैधानिक स्थिति क्या है?
– क्या संबंधित उत्पाद के लिए लागू खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता संबंधी शर्तों का पालन किया जा रहा है?
इन सवालों के जवाब आधिकारिक दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों की जांच से ही सामने आ सकते हैं।
जनहित का सवाल: ब्रांड विवाद में उपभोक्ता का भरोसा कैसे बचे?
पानी रोजमर्रा की जरूरत है और बोतलबंद पानी खरीदते समय उपभोक्ता उत्पाद की पहचान और गुणवत्ता पर भरोसा करता है। इसलिए ऐसे विवादों में केवल ब्रांड के नाम पर बहस पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग उत्पाद के लाइसेंस, गुणवत्ता मानकों और लेबल संबंधी नियमों की भी लागू प्रक्रिया के अनुसार जांच करें।
यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि संबंधित कारोबारी के दस्तावेज वैध पाए जाते हैं, तो उसके पक्ष को भी निष्पक्ष सुनवाई मिलनी चाहिए। यही पारदर्शी जांच और जिम्मेदार प्रशासन की कसौटी है।
सारांश
ऊंजी के आरओ प्लांट पर छापेमारी के बाद CLEAR और CLEAR ADVANCE नाम को लेकर विवाद सामने आया है। कंपनी ने कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन की शिकायत की है, जबकि संचालक ने लाइसेंस होने का दावा किया है। पुलिस द्वारा दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।
संपादकीय टिप्पणी
नाम से नहीं, प्रमाण से तय हो सच्चाई। किसी कंपनी की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन शिकायत मात्र को दोष सिद्ध होने का प्रमाण भी नहीं माना जा सकता। जरूरी है कि पुलिस और संबंधित विभाग निष्पक्ष जांच करें, उपभोक्ता हितों की रक्षा हो और कानून के तहत प्रत्येक पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।
FT News Digital इस मामले में आधिकारिक जांच और आगे की कार्रवाई से जुड़ी पुष्ट जानकारी सामने आने पर खबर को अपडेट करेगा।
रिपोर्टर: अहज़म कमाल
स्थान: सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
FT News Digital — सच और… कुछ नहीं।
शोहरतगढ़ में राशन वितरण की जांच में बड़ी कमी उजागर, 71.85 क्विंटल अनाज और 72 किलो चीनी कम मिलने का मामला
कोटेदार के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज, पुलिस कर रही जांच; पात्र राशन कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न मिलने पर उठे सवाल
सिद्धार्थनगर | FT News Digital
गरीबों के निवाले से जुड़ा गंभीर सवाल
सरकारी राशन व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है, लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ क्षेत्र में राशन वितरण से जुड़ी जांच ने व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, गढ़ाकुल गांव की एक उचित दर दुकान के स्टॉक सत्यापन में 71.85 क्विंटल खाद्यान्न और 72 किलोग्राम चीनी की कमी सामने आई। मामले में संबंधित कोटेदार के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब अहम सवाल यह है कि राशन वितरण में सामने आई कमी की पूरी स्थिति क्या है और पात्र लाभार्थियों के हितों की रक्षा के लिए आगे क्या कार्रवाई होती है।
शिकायतों के बाद जांच, स्टॉक सत्यापन में सामने आई कमी
शोहरतगढ़। सिद्धार्थनगर जिले के नगर पंचायत शोहरतगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत गढ़ाकुल गांव की उचित दर दुकान पर राशन वितरण में अनियमितता की शिकायतों के बाद जांच और कार्रवाई का मामला सामने आया है। समाचार पत्र में प्रकाशित विवरण के मुताबिक, दुकान से संबंधित शिकायतों में निर्धारित मात्रा से कम राशन दिए जाने, ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद भी खाद्यान्न नहीं मिलने तथा उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार किए जाने जैसे आरोप शामिल थे।
प्रकाशित जानकारी के अनुसार, तीन अक्टूबर को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में 62 राशन कार्डधारकों ने वितरण संबंधी शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की गई। जांच प्रक्रिया में दुकान के स्टॉक का सत्यापन भी किया गया, जिसमें खाद्यान्न और चीनी की कमी दर्ज होने की बात सामने आई।
स्टॉक सत्यापन में क्या सामने आया?
प्रकाशित समाचार विवरण के अनुसार, दुकान के अभिलेखों के मुताबिक 29.702 क्विंटल गेहूं और 44.148 क्विंटल चावल उपलब्ध होना चाहिए था। सत्यापन के दौरान दोनों खाद्यान्नों की मात्रा लगभग एक-एक क्विंटल बताई गई। इस अंतर के आधार पर कुल 71.85 क्विंटल खाद्यान्न की कमी दर्ज होने की जानकारी प्रकाशित हुई है। इसके अतिरिक्त 0.72 क्विंटल यानी 72 किलोग्राम चीनी की कमी भी बताई गई है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि स्टॉक में कमी सामने आना जांच का महत्वपूर्ण तथ्य है, लेकिन कमी के कारणों, वितरण अभिलेखों और संबंधित पक्ष के स्पष्टीकरण की पूरी स्थिति जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज
समाचार पत्र में प्रकाशित विवरण के अनुसार, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी की शिकायत पर शोहरतगढ़ थाना पुलिस ने संबंधित कोटेदार के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मुकदमा दर्ज होना कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत है, दोष सिद्ध होने का अंतिम प्रमाण नहीं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
इस मामले में आगे की पड़ताल के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी है।
– स्टॉक में कमी का आधार: दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड का मिलान क्या बताता है?
– लाभार्थियों के बयान: शिकायत करने वाले राशन कार्डधारकों को किस अवधि में कितनी मात्रा में राशन मिला या नहीं मिला?
– अनाज की कमी का कारण: सत्यापन के समय दर्ज कमी के पीछे वितरण, रिकॉर्ड में अंतर या कोई अन्य कारण था?
– विभागीय कार्रवाई: खाद्य एवं रसद विभाग की जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं?
– लाभार्थियों को राहत: यदि किसी पात्र परिवार को निर्धारित मात्रा से कम राशन मिलने की पुष्टि होती है, तो उसकी शिकायत का निस्तारण किस प्रकार किया जाएगा?
इन प्रश्नों के जवाब संबंधित विभाग की विस्तृत रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
आंकड़ों में पूरा मामला
जांच से संबंधित बिंदु| प्रकाशित विवरण
शिकायत करने वाले राशन कार्डधारक| 62
गेहूं की दर्ज कमी| लगभग 28.702 क्विंटल
चावल की दर्ज कमी| लगभग 43.148 क्विंटल
कुल खाद्यान्न की कमी| 71.85 क्विंटल
चीनी की दर्ज कमी| 72 किलोग्राम
कानूनी कार्रवाई| आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज
नोट: गेहूं और चावल की अलग-अलग कमी प्रकाशित विवरण में दर्ज अपेक्षित स्टॉक और लगभग एक-एक क्विंटल उपलब्ध मात्रा के अंतर से निकाली गई है। आधिकारिक सत्यापन रिपोर्ट से आंकड़ों की पुष्टि की जानी चाहिए।
राशन कार्डधारकों के अधिकार क्यों महत्वपूर्ण?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को लागू नियमों के अनुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। राशन वितरण में गड़बड़ी की आशंका होने पर उपभोक्ता संबंधित पूर्ति निरीक्षक, जिला पूर्ति अधिकारी या खाद्य एवं रसद विभाग के सक्षम अधिकारियों के समक्ष शिकायत कर सकते हैं।
शिकायत के साथ राशन कार्ड का विवरण, वितरण की तारीख, उपलब्ध पर्ची, ई-पॉस रसीद और अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। शिकायत पर प्राप्त कार्रवाई की जानकारी भी लाभार्थी को अपने पास रखनी चाहिए।
निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी जरूरी
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की सफलता केवल राशन दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचने से नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को निर्धारित मात्रा में उसका लाभ मिलने से तय होती है। इसलिए स्टॉक में बड़ी कमी का मामला सामने आने पर संबंधित दुकान की जांच के साथ वितरण रिकॉर्ड, लाभार्थियों के बयान और विभागीय निगरानी की प्रक्रिया की भी पड़ताल जरूरी है।
संपादकीय टिप्पणी | राशन गरीब का अधिकार है, एहसान नहीं
सरकारी राशन जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में राशन वितरण में अनियमितता की शिकायतों को सामान्य प्रशासनिक मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जहां शिकायतें मिलें, वहां निष्पक्ष जांच हो, रिकॉर्ड का मिलान किया जाए और दोष प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
साथ ही, किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना भी उचित नहीं है। पारदर्शी जांच, जवाबदेही और पात्र लाभार्थियों को उनका पूरा अधिकार दिलाना ही ऐसी व्यवस्था में जनता का भरोसा मजबूत कर सकता है।
FT News Digital की नजर: इस मामले में विभागीय जांच के निष्कर्ष, पुलिस की आगे की कार्रवाई और राशन कार्डधारकों की शिकायतों के निस्तारण से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।
शिक्षक एमएलसी चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा, विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियां तय करने पर मंथन

सिद्धार्थनगर में जिला कार्यालय पर संगठनात्मक बैठक, गोरखपुर में मुख्यमंत्री की प्रस्तावित जनसभा की तैयारियों पर भी चर्चा

सिद्धार्थनगर। चुनावी तैयारियों को मजबूत करने और संगठनात्मक गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय सिद्धार्थनगर में शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026 को लेकर संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियों के निर्धारण, संचालन समितियों के गठन और मतदान के दिन संगठन की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हुई। इसके साथ ही 12 अक्टूबर को गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में प्रस्तावित मुख्यमंत्री की जनसभा की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने की, जबकि संचालन चुनाव संयोजक अजय उपाध्याय ने किया। क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र पांडेय और क्षेत्रीय मंत्री कन्हैया पासवान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
चुनावी प्रबंधन को लेकर संगठन ने बनाई रणनीति
बैठक में शिक्षक एमएलसी चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए विधानसभा स्तर पर संगठनात्मक दायित्वों के निर्वहन पर जोर दिया गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विधानसभा प्रभारियों और संयोजकों के नाम तय किए गए। विधानसभा संचालन समितियों के गठन की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।
इसके अतिरिक्त मतदान के दिन मतदान स्थलों पर एजेंट और सह-प्रभारियों के रूप में जिम्मेदारी निभाने वाले कार्यकर्ताओं के नाम निर्धारित किए गए। पार्टी की ओर से इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य चुनाव के दौरान संगठनात्मक समन्वय को प्रभावी बनाना और निर्धारित जिम्मेदारियों का व्यवस्थित ढंग से निर्वहन करना बताया गया।
शिक्षक एमएलसी चुनाव में संगठनात्मक तैयारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण, कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल और चुनाव संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा है।
गोरखपुर की जनसभा को लेकर भी तैयारी
बैठक में 12 अक्टूबर को गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित होने वाली मुख्यमंत्री की विशाल जनसभा की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर विचार-विमर्श हुआ।
जिला स्तर पर आयोजित इस बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ जनसभा की व्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता दी गई। इससे स्पष्ट है कि पार्टी आगामी चुनावी गतिविधियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए संगठनात्मक स्तर पर समन्वय बनाने में जुटी है।
बैठक में इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
– शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026 की तैयारियों की समीक्षा।
– विधानसभा प्रभारियों एवं संयोजकों के नाम निर्धारित करना।
– विधानसभा संचालन समितियों के गठन की प्रक्रिया।
– मतदान स्थलों पर एजेंट और सह-प्रभारियों की जिम्मेदारियां तय करना।
– 12 अक्टूबर को गोरखपुर में प्रस्तावित मुख्यमंत्री की जनसभा की तैयारियां।
संगठनात्मक बैठकों का क्या है महत्व?
राजनीतिक दलों के लिए संगठनात्मक बैठकें चुनावी तैयारियों की समीक्षा और कार्यकर्ताओं के बीच जिम्मेदारियां स्पष्ट करने का माध्यम होती हैं। विधानसभा स्तर पर प्रभारियों, संयोजकों और समितियों की भूमिका तय होने से कार्यक्रमों के संचालन में समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसी भी चुनाव में संगठनात्मक तैयारी के साथ मतदाताओं की भागीदारी, चुनावी नियमों का पालन और निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
सारांश | चुनावी तैयारी और जनसभा, दोनों पर फोकस
सिद्धार्थनगर में भाजपा की बैठक में शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026 की संगठनात्मक तैयारियों और गोरखपुर में प्रस्तावित मुख्यमंत्री की जनसभा को लेकर चर्चा हुई। विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियों के निर्धारण तथा समितियों के गठन की प्रक्रिया पर जोर दिया गया। बैठक में जिला और क्षेत्रीय स्तर के पदाधिकारियों के साथ मंडल अध्यक्ष एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
टिप्पणी | जिम्मेदारियों का निर्धारण ही नहीं, प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी
चुनावी तैयारियों में संगठनात्मक बैठकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन किसी भी रणनीति की वास्तविक उपयोगिता उसके प्रभावी क्रियान्वयन, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय और नियमों के पालन से सामने आती है। शिक्षक एमएलसी चुनाव के संदर्भ में भी आवश्यक है कि सभी गतिविधियां निर्धारित चुनावी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित हों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मर्यादा बनी रहे।
राजनीतिक गतिविधियों की सफलता का आकलन अंततः उनके घोषित उद्देश्यों और धरातल पर किए गए कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक के सह-संयोजक मनोज कुमार मौर्य एवं दीपेंद्र चंद चौधरी उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त साधना चौधरी, जिला महामंत्री पवन कुमार मिश्रा, फतेह बहादुर सिंह, फूलचंद जायसवाल, दिलीप चतुर्वेदी, विजयकांत चतुर्वेदी, दशरथ चौधरी, केशवान राय, बजरंगी वर्मा, सच्चिदानंद चौबे, सुरेंद्र पांडेय, सिद्धार्थ पाठक, रामनारायण, सिद्धार्थ चौधरी और मधुसूदन अग्रहरि सहित मंडल अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
डिजिटल डेस्क | सिद्धार्थनगर
सेवा संकल्प की दो तस्वीरें: आंगनवाड़ी बहनों का सम्मान, दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भरता की राह
सिद्धार्थनगर में सेवा, सम्मान और सशक्तीकरण की पहल

सिद्धार्थनगर। किसी समाज की तरक्की का आकलन केवल विकास के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होता है कि वहां महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कितने सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। सिद्धार्थनगर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित दो कार्यक्रमों ने इसी सामाजिक जिम्मेदारी को केंद्र में रखा। पहले कपियां मिश्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान को सम्मान दिया गया, फिर विकास खंड नौगढ़ में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित करने के साथ रोजगार के अवसरों से जोड़ने की पहल की गई।

सांसद जगदंबिका पाल और सदर विधायक श्यामधनी राही की मौजूदगी में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य जनकल्याणकारी प्रयासों को समाज के जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचाने का संदेश देना रहा। हालांकि, इन पहलों की असली सफलता तभी मानी जाएगी, जब सम्मान के साथ सुविधाएं, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी निरंतर उपलब्ध हों।
87 दिव्यांगजनों में से 14 का प्रारंभिक चयन, सहायक उपकरणों का वितरण
सेवा संकल्प अभियान के तहत 10 अक्टूबर 2026 को विकास खंड नौगढ़ में दिव्यांग रोजगार मेला एवं सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, जिला सेवायोजन विभाग और रेडी फाउंडेशन के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम की जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रोजगार मेले में शामिल 87 दिव्यांगजनों में से 14 का प्रारंभिक रूप से चयन किया गया और उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में दिव्यांगजनों को 10 मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 24 ट्राइसाइकिल, 3 व्हीलचेयर, 10 बैसाखी, 5 कान की मशीनें, 3 स्मार्ट केन और 2 बेल किट वितरित किए गए। इन उपकरणों से लाभार्थियों के आवागमन और दैनिक जीवन में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। वहीं, रोजगार मेले के माध्यम से दिव्यांगजनों को आजीविका के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया गया।

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रारंभिक रूप से चयनित अभ्यर्थियों को आगे रोजगार के कितने अवसर मिलते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभागीय स्तर पर किस तरह का सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।
कपियां मिश्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान
दिव्यांगजन कार्यक्रम से पहले कपियां मिश्र में बाल विकास परियोजना, सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सांसद जगदंबिका पाल मुख्य अतिथि और सदर विधायक श्यामधनी राही विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया तथा उपहार स्वरूप साड़ियों का वितरण किया गया।
सांसद जगदंबिका पाल ने अपने संबोधन में कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, प्रारंभिक देखभाल और महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के हित में किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए सेवा और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया।
सदर विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अहम कड़ी हैं।
दिव्यांगजनों को मिले ये उपकरण
नौगढ़ में आयोजित कार्यक्रम की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वितरित सहायक उपकरणों का विवरण इस प्रकार है:
– 10 मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल
– 24 ट्राइसाइकिल
– 3 व्हीलचेयर
– 10 बैसाखी
– 5 कान की मशीनें
– 3 स्मार्ट केन
– 2 बेल किट
रोजगार मेले का विवरण: 87 दिव्यांगजनों में से 14 का प्रारंभिक चयन। इसे अंतिम नियुक्ति या स्थायी रोजगार मिलने की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका क्यों अहम?
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गांव और बस्ती के स्तर पर बच्चों के पोषण, प्रारंभिक देखभाल तथा महिलाओं को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके योगदान का सम्मान तभी व्यापक अर्थ हासिल करता है, जब उन्हें आवश्यक संसाधन, कार्य करने के लिए उचित सुविधाएं और विभागीय सहयोग भी मिलता रहे।
महिला एवं बाल कल्याण की योजनाओं को प्रभावी बनाने में जमीनी स्तर पर काम करने वाली कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सामाजिक सरोकार | सहायता नहीं, समान अवसर भी जरूरी
दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन सशक्तीकरण का लक्ष्य इससे आगे जाता है। सुगम आवागमन, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों तक आसान पहुंच ऐसे विषय हैं, जिन पर निरंतर काम करने की जरूरत है।
दिव्यांगजन समाज पर बोझ नहीं, बल्कि समान अवसर मिलने पर अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान देने वाले नागरिक हैं। इसलिए कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता वितरित करना नहीं, बल्कि बाधाओं को कम करके उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन के अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए।
इसी तरह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान भी एक दिन के आयोजन तक सीमित न रहे। उनके कार्यों को मजबूत करने के लिए नियमित सहयोग और सुविधाओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
सारांश | दो कार्यक्रम, एक सामाजिक संदेश
सेवा संकल्प अभियान के तहत कपियां मिश्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सम्मान और नौगढ़ में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल ने महिला एवं बाल कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तीकरण के विषयों को सामने रखा। रोजगार मेले में 14 अभ्यर्थियों का प्रारंभिक चयन और उपकरण वितरण कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियां रहीं।
अब इन पहलों की निरंतरता, पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच और रोजगार के वास्तविक अवसरों की उपलब्धता पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि सरकारी प्रयासों का लाभ जरूरतमंद लोगों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव ला सके।
टिप्पणी | सम्मान तभी सार्थक, जब अवसर भी मिलें
लोककल्याण की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान और दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लेकिन किसी भी योजना की सफलता का पैमाना केवल आयोजन, वितरण या प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि उससे होने वाला वास्तविक लाभ होना चाहिए।
यदि दिव्यांगजनों को उपकरणों के साथ कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलें तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जरूरी संसाधन और निरंतर सहयोग उपलब्ध हो, तो सेवा संकल्प का संदेश धरातल पर अधिक प्रभावी रूप से दिखाई देगा। यही समावेशी विकास की दिशा है, जहां सम्मान के साथ अधिकार, सहायता के साथ अवसर और योजनाओं के साथ परिणाम भी सुनिश्चित हों।
कार्यक्रम में मौजूद रहे अधिकारी
कपियां मिश्र के कार्यक्रम में जिला परियोजना निदेशक, उपायुक्त मनरेगा संदीप पाठक, परियोजना अधिकारी अनिल कुमार, साधना चौधरी, रमेश मणि, गंगा मिश्र, उद्योग विभाग से तौसलेन्द्र मिश्रा, सबलू सहानी, संजय कुमार, प्रमोद यादव सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
नौगढ़ के कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, उपायुक्त मनरेगा, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी तथा खंड विकास अधिकारी, नौगढ़ सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
डिजिटल डेस्क | सिद्धार्थनगर
मुलायम सिंह यादव की चौथी पुण्यतिथि पर मरीजों को बांटे फल, पूर्व विधायक विजय पासवान के नेतृत्व में हुआ आयोजन

माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज में सेवा कार्यक्रम आयोजित, सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि

सिद्धार्थनगर। समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक विजय पासवान के नेतृत्व में माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज में फल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों के बीच फल वितरित कर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने सेवा और सहयोग की भावना के साथ मरीजों के बीच पहुंचकर सामाजिक सरोकारों का संदेश दिया। पुण्यतिथि पर आयोजित इस पहल के माध्यम से जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय सेवा के महत्व को रेखांकित किया गया।
जनसेवा के जरिए दी श्रद्धांजलि
स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। समाजवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने और प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच उनकी स्मृतियां आज भी जुड़ी हुई हैं। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित फल वितरण कार्यक्रम उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बना।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व ब्लॉक प्रमुख इंद्रासन त्रिपाठी, विधानसभा महासचिव अमूल मकरानी, मनोज मिश्रा, अशोक पांडेय, जुनेद आलम, अखिलेश पासवान, लवकुश, सनी, अर्जुन पासवान, सोनू पासवान, गंगाराम कनौजिया और रवि पासवान सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
सामाजिक संदेश
अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों के बीच फल वितरण जैसे आयोजन समाज में सहयोग, संवेदना और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक संगठनों को जनहित से जुड़े कार्यों में भागीदारी का अवसर मिलता है।
FT News Digital | सिद्धार्थनगर
सात चोरी के मामले उजागर, तीन बाल अपचारी पकड़े गए! सवाल—बच्चों को सही राह कौन दिखाएगा?
पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन बाइक और ₹36,100 बरामद; किशोरों की कथित संलिप्तता ने परिवार और समाज की जिम्मेदारी पर खड़े किए सवाल

सिद्धार्थनगर। चोरी की एक घटना किसी परिवार की मेहनत की कमाई छीन सकती है, लेकिन जब ऐसी घटनाओं में किशोरों की कथित संलिप्तता सामने आती है, तो चिंता केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती। सवाल बच्चों की परवरिश, उनकी संगत, सामाजिक जिम्मेदारी और समय रहते सही दिशा देने का भी उठता है। सिद्धार्थनगर में सात चोरी के मामलों के अनावरण को लेकर पुलिस की कार्रवाई ने इसी गंभीर सामाजिक पहलू की ओर ध्यान खींचा है।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, एंटी थेफ्ट टीम, थाना सिद्धार्थनगर पुलिस और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में एक वयस्क अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया तथा तीन बाल अपचारियों को पकड़ा गया। पुलिस ने तीन मोटरसाइकिलें और चोरी की घटनाओं से संबंधित कुल 36,100 रुपये नकद बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई जनपद के छह थाना क्षेत्रों में दर्ज सात मुकदमों से संबंधित मामलों के अनावरण में महत्वपूर्ण रही।
जमुआर नाला के पास घेराबंदी, तीन बाइक बरामद
पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 की रात जमुआर नाला के पास रात्रि गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान तीन मोटरसाइकिलों पर सवार चार लोगों को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस का कहना है कि उन्होंने भागने की कोशिश की, जिसके बाद टीम ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बरामद मोटरसाइकिलों में दो स्प्लेंडर और एक अपाचे शामिल हैं। इनके पंजीकरण नंबर UP58Z7152, UP55J5736 और UP47Z0815 बताए गए हैं। इसके अलावा अलग-अलग चोरी के मामलों से संबंधित कुल 36,100 रुपये नकद बरामद किए जाने की बात कही गई है।
छह थाना क्षेत्र, सात मुकदमे—पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस के मुताबिक, अनावरण किए गए मामलों में सिद्धार्थनगर थाने के दो मुकदमे तथा मोहाना, लोटन, चिल्हिया, गोल्हौरा और मिश्रौलिया थानों के एक-एक मुकदमे शामिल हैं। इनमें मोटरसाइकिल चोरी और अन्य चोरी की घटनाएं बताई गई हैं।
पुलिस ने बरामदगी के आधार पर संबंधित मामलों में आगे की विधिक कार्रवाई की जानकारी दी है। हालांकि, प्रत्येक मामले में आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण साक्ष्यों एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
तीन बाल अपचारी पकड़े गए: समाज के लिए चेतावनी, बच्चों पर ठप्पा नहीं
इस प्रकरण का सबसे संवेदनशील पहलू तीन बाल अपचारियों का पकड़ा जाना है। यह घटना बच्चों के व्यवहार, संगत और मार्गदर्शन को लेकर गंभीर सामाजिक चर्चा की जरूरत बताती है। लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि किसी मामले में किशोर का नाम आने मात्र से उसे जीवनभर के लिए अपराधी मान लेना न तो उचित है और न ही सुधार की भावना के अनुकूल।
बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, परिवार, विद्यालय और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार, उनकी संगत और अचानक आए बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों से संवाद, नैतिक शिक्षा, अनुशासन और सही-गलत के परिणामों की समझ विकसित करना जरूरी है। यदि कोई बच्चा गलत गतिविधियों की ओर बढ़ रहा हो, तो समय रहते उसे रोकना और उचित मार्गदर्शन देना उसके भविष्य को बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
साथ ही, समाज को भी बच्चों की पहचान उजागर करने, अफवाह फैलाने या उनके परिवार को अपमानित करने से बचना चाहिए। किशोरों से जुड़े मामलों में कानून की प्रक्रिया, गोपनीयता, संरक्षण और सुधार की संभावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है।
पुलिस की कार्रवाई और सामाजिक सुधार—दोनों जरूरी
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के आदेश पर, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशान्त कुमार प्रसाद के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान के नेतृत्व में की गई। अभियान में प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार सिंह, एंटी थेफ्ट टीम और सर्विलांस सेल के पुलिसकर्मी शामिल रहे।
चोरी की घटनाओं का खुलासा, बरामद संपत्ति की पहचान और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, समाज को यह भी समझना होगा कि अपराध की रोकथाम केवल गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि जागरूकता, जिम्मेदार परवरिश और समय पर सुधारात्मक कदमों से भी मजबूत होती है।
Zzसामाजिक टिप्पणी | बच्चों का भविष्य बचाना भी समाज की जिम्मेदारी
गलत रास्ते पर बढ़ते कदमों को समय रहते रोकना जरूरी है। बच्चों को ईमानदारी, मेहनत की कमाई का सम्मान और कानून के प्रति जिम्मेदारी सिखाना परिवार तथा समाज का दायित्व है। वहीं, कानून का पालन सुनिश्चित करते हुए किशोरों को सुधार का अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सिद्धार्थनगर की इस कार्रवाई से चोरी के मामलों की जांच को दिशा मिलने की बात सामने आई है। अब जरूरी है कि मामले में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़े और समाज इस घटना से सीख लेकर बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अपनी भूमिका निभाए।
यह समाचार पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। आरोप सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। बाल अपचारियों की पहचान गोपनीय रखी गई है।
FT News Digital | सच और… कुछ नहीं।
सिद्धार्थनगर के होनहार डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी का SGPGI लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन, जिले का बढ़ाया मान
सिद्धार्थनगर के होनहार डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी का SGPGI लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन, जिले का बढ़ाया मान

गौतम बुद्ध की जन्मस्थली सिद्धार्थनगर की प्रतिभा ने फिर बिखेरी चमक, कठिन चिकित्सा शिक्षा और जनसेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे युवा चिकित्सक

सिद्धार्थनगर/लखनऊ। प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प जब एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो सफलता की नई इबारत लिखी जाती है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद के निवासी युवा चिकित्सक डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी ने अपनी शैक्षणिक यात्रा और चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ते कदमों से जिले को गौरवान्वित किया है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI), लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर उनके चयन की खबर से परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है।

संस्थान की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को जारी चयन संबंधी परिपत्र के अनुसार, डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी का चयन ट्रॉमा सर्जरी विभाग में संविदा आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए किया गया है। जारी दस्तावेज में उन्हें चयनित अभ्यर्थियों की सूची में शामिल किया गया है। परिपत्र के अनुसार, चयनित अभ्यर्थियों को 22 अक्टूबर 2026 तक कार्यभार ग्रहण करने के लिए कहा गया है। यह उपलब्धि उनके चिकित्सा करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
सरस्वती विद्या मंदिर से शुरू हुआ सफर, KGMU तक पहुंची प्रतिभा
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सिद्धार्थनगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से प्राप्त की। हाईस्कूल की पढ़ाई के बाद उन्होंने गोरखपुर के महात्मा गांधी इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ से एमबीबीएस और एमएस की पढ़ाई की।
चिकित्सा के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए निरंतर अध्ययन, अनुशासन और व्यावहारिक दक्षता की आवश्यकता होती है। परिवार के अनुसार, डॉ. द्विवेदी ने स्वाध्याय और कठिन परिश्रम को अपनी तैयारी का महत्वपूर्ण आधार बनाया। उनकी शैक्षणिक यात्रा उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने का सपना देखते हैं।
ट्रॉमा सर्जरी के क्षेत्र में नई जिम्मेदारी
SGPGI जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में ट्रॉमा सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। ट्रॉमा सर्जरी में दुर्घटनाओं, गंभीर चोटों और आपातकालीन परिस्थितियों में घायल मरीजों के उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं।
डॉ. द्विवेदी की इस उपलब्धि से उनके परिवार के साथ-साथ सिद्धार्थनगर के उन लोगों में भी उत्साह है, जो जिले की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। हालांकि, उनकी पेशेवर उपलब्धियों और भविष्य की जिम्मेदारियों का वास्तविक आकलन उनके संस्थागत दायित्वों तथा चिकित्सा कार्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
परिवार का सहयोग और समाजसेवा की प्रेरणा
परिवार के अनुसार, डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी के पिता रमेश चंद्र द्विवेदी फार्मासिस्ट हैं। परिवार ने उनकी शिक्षा और करियर की यात्रा में सहयोग दिया है। उनकी बड़ी बहन शुभांगी द्विवेदी भी उन्हें जनपद के लोगों की सहायता और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील बने रहने के लिए प्रेरित करती हैं।
शुभांगी द्विवेदी का कहना है कि चिकित्सा का उद्देश्य केवल पेशेवर उन्नति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता और मानवीय संवेदना भी इसका अभिन्न हिस्सा हैं। उनके अनुसार, “दरिद्र नारायण की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।”
परिवार का कहना है कि वे चाहते हैं कि डॉ. द्विवेदी अपनी व्यस्त चिकित्सकीय जिम्मेदारियों के बीच भी अपने गृह जनपद के लोगों की यथासंभव सहायता करते रहें। यह भावना समाज में चिकित्सा सेवा के मानवीय पक्ष को रेखांकित करती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है यह उपलब्धि
सिद्धार्थनगर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जनपद है, जिसे गौतम बुद्ध की जन्मस्थली के रूप में विश्वभर में जाना जाता है। ऐसे जिले के एक युवा का देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में महत्वपूर्ण शैक्षणिक पद पर चयन स्थानीय युवाओं के लिए उत्साहवर्धक संदेश है।
डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी की यात्रा यह प्रेरणा देती है कि शिक्षा, निरंतर अभ्यास और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ने के अवसर तलाशे जा सकते हैं। उनकी उपलब्धि पर परिवार और शुभचिंतकों की ओर से बधाइयां दी जा रही हैं।
जिले की प्रतिभाओं का राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ना तभी व्यापक सामाजिक उपलब्धि बनता है, जब उससे शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़े, युवा चिकित्सा एवं अन्य क्षेत्रों में आगे आने के लिए प्रेरित हों और समाज में सेवा की भावना मजबूत हो।
FT News Digital की ओर से डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं। आशा है कि वे अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करते हुए चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञान, संवेदनशीलता और सेवा भावना के साथ आगे बढ़ेंगे।
उपलब्धि एक नजर में
– नाम: डॉ. रंबित चंद्र द्विवेदी
– गृह जनपद: सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश
– स्कूली शिक्षा: सरस्वती विद्या मंदिर, सिद्धार्थनगर
– इंटरमीडिएट: महात्मा गांधी इंटर कॉलेज, गोरखपुर
– चिकित्सा शिक्षा: एमबीबीएस एवं एमएस, KGMU, लखनऊ — परिवार से प्राप्त जानकारी के अनुसार
– वर्तमान उपलब्धि: SGPGI, लखनऊ में ट्रॉमा सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर संविदा आधार पर चयन
– चयन संबंधी परिपत्र: 8 अक्टूबर 2026
संपादकीय टिप्पणी:
नियुक्ति की प्रकृति और पदनाम संस्थान के जारी परिपत्र के अनुरूप रखे गए हैं। अन्य संस्थानों में चयन, पुरस्कारों, विशेष ऑपरेशनों तथा अतिरिक्त विशेषज्ञता से जुड़े दावों को संबंधित प्रमाण मिलने पर अलग से शामिल किया जा सकता है।
बर्डपुर में आयोजित हुआ ‘सेवा सेतु’ कार्यक्रम, पात्र लाभार्थियों को जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर

सांसद जगदंबिका पाल बोले— समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, विभिन्न विभागों ने लगाए सहायता शिविर

बर्डपुर, सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से शुरू हुए भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बर्डपुर ब्लॉक परिसर में सेवा सेतु कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पात्र लाभार्थियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने, आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन देने तथा सरकारी योजनाओं और जरूरतमंद नागरिकों के बीच संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया गया। भाजपा का सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र के सांसद जगदंबिका पाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने की। इस दौरान क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र पांडेय, खंड विकास अधिकारी अजय प्रताप सिंह, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं की सार्थकता तभी है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने सेवा सेतु की अवधारणा को जनता और सरकारी योजनाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि जानकारी के अभाव, आवेदन प्रक्रिया की कठिनाइयों और आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण कोई भी पात्र नागरिक योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे, इसके लिए जागरूकता और मार्गदर्शन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज के बीच पहुंचकर जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को समझना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने में सहयोग करना है। सेवा सेतु इसी भावना के अनुरूप पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और उनकी समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाने का माध्यम है।
विभिन्न विभागों के लगे पंडाल, लाभार्थियों को मिला मार्गदर्शन
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों की ओर से पंडाल लगाए गए। इन पंडालों के माध्यम से लोगों को संबंधित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने और पात्रता, आवेदन तथा आवश्यक दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया समझाने की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विभागीय सेवाओं को लोगों के करीब लाना और जरूरतमंद नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना रहा।
वक्ताओं ने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी समाज के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय जरूरी है, ताकि पात्र लोगों को समय पर सही जानकारी मिल सके।
जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की रही मौजूदगी
इस अवसर पर क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र पांडेय, परियोजना अधिकारी, खंड विकास अधिकारी अजय प्रताप सिंह, एडीओ पंचायत, एडीओ एजी मनीष त्रिपाठी, उपेंद्र सिंह, एस.पी. अग्रवाल, सबलू साहनी, दीपेंद्र चौधरी, मंगलेश शुक्ला, नितेश पांडेय, जयराम यादव, अनुराग श्रीवास्तव, रमेश मणि, अजय चौधरी, अनिरुद्ध विश्वकर्मा, रमेश गुप्ता, जेपी मौर्य और रिंकू पाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इसके साथ ही जिला पंचायत सदस्य शीतल सिंह के प्रतिनिधि उपेंद्र प्रताप सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, पात्र लाभार्थियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के संकल्प को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
सिद्धार्थनगर पुलिस के उपनिरीक्षक मान सिंह का निधन, पुलिस परिवार में शोक की लहर
सिद्धार्थनगर पुलिस के उपनिरीक्षक मान सिंह का निधन, पुलिस परिवार में पसरा मातम
सिद्धार्थनगर | 10 अक्टूबर 2026 | एफटी न्यूज़ डिजिटल

1988 में आरक्षी पद से शुरू किया था पुलिस सेवा का सफर, उपचार के दौरान ली अंतिम सांस; विभाग ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

सिद्धार्थनगर। जनपद के थाना कठेला समयमाता में तैनात उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस मान सिंह के निधन से पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। 9 अक्टूबर 2026 की सुबह अचानक तबीयत खराब होने के बाद उन्हें उपचार के लिए जिला मुख्यालय स्थित जे.जे. अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। पुलिस विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दिवंगत अधिकारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की गई।
वर्षों की सेवा के बाद दुनिया को कहा अलविदा
खाकी वर्दी केवल एक पहचान नहीं, बल्कि कर्तव्य, अनुशासन और जनसेवा की जिम्मेदारी का प्रतीक है। उपनिरीक्षक मान सिंह ने वर्ष 1988 में आरक्षी के पद से पुलिस विभाग में अपनी सेवा यात्रा शुरू की थी। लंबे सेवाकाल के बाद वह सिद्धार्थनगर जनपद के थाना कठेला समयमाता में उपनिरीक्षक के रूप में तैनात थे। उनके निधन की खबर ने विभागीय साथियों को भावुक कर दिया। पुलिस परिवार ने इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत अधिकारी के प्रति सम्मान प्रकट किया है।
सुबह अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में निधन
पुलिस विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, 9 अक्टूबर की सुबह उपनिरीक्षक मान सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई। इसकी सूचना मिलने पर उन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया। पुलिस बल के साथ उन्हें जे.जे. अस्पताल, सिद्धार्थनगर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

इस दुखद घटना के बाद पुलिस विभाग में शोक का माहौल बन गया। विभाग ने दिवंगत अधिकारी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य और संबल मिलने की कामना की।
1988 में आरक्षी के पद पर हुए थे भर्ती
उपलब्ध विभागीय जानकारी के मुताबिक, मान सिंह का जन्म 1 मई 1969 को हुआ था। वह मूल रूप से जनपद बलिया के निवासी थे। उन्होंने 28 फरवरी 1988 को आरक्षी के पद पर पुलिस विभाग में भर्ती होकर सेवाकाल की शुरुआत की थी। बाद में पदोन्नति के उपरांत वह उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के पद पर पहुंचे।

वह 28 नवंबर 2025 से थाना कठेला समयमाता में तैनात थे। उनका सेवाकाल पुलिस विभाग के साथ लंबी यात्रा का साक्षी रहा। उनके निधन से सहकर्मियों और परिजनों को गहरा दुख पहुंचा है।
सिद्धार्थनगर पुलिस ने अर्पित की श्रद्धांजलि
पुलिस विभाग की ओर से जारी शोक संदेश में दिवंगत अधिकारी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। साथ ही शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।
विभाग ने इस दुखद घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही और ईश्वर से प्रार्थना की कि परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति मिले।
एक नजर में
नाम: मान सिंह
पद: उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस
तैनाती: थाना कठेला समयमाता, सिद्धार्थनगर
मूल निवास: जनपद बलिया
जन्मतिथि: 1 मई 1969
पुलिस में भर्ती: 28 फरवरी 1988
वर्तमान थाने पर तैनाती: 28 नवंबर 2025 से
निधन: 9 अक्टूबर 2026 को उपचार के दौरान
पुलिस महकमे को लगा गहरा आघात
थाना कठेला समयमाता में तैनात उपनिरीक्षक मान सिंह का अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उपचार के दौरान निधन हो गया। वर्ष 1988 में आरक्षी के पद से पुलिस सेवा शुरू करने वाले मान सिंह वर्तमान में उपनिरीक्षक के रूप में कार्यरत थे। उनके निधन पर सिद्धार्थनगर पुलिस ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
संपादकीय टिप्पणी | वर्दी के पीछे छिपी होती है एक मानवीय कहानी
पुलिसकर्मी का जीवन कर्तव्य, अनुशासन और जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मी भी किसी परिवार के सदस्य, किसी के जीवनसाथी, किसी के पिता और किसी के अपने होते हैं। ऐसे में किसी साथी का बिछड़ना केवल विभागीय क्षति नहीं, बल्कि कई लोगों के जीवन में गहरा खालीपन छोड़ जाता है।
उपनिरीक्षक मान सिंह के निधन पर पुलिस विभाग की ओर से व्यक्त की गई संवेदना उस मानवीय रिश्ते को दर्शाती है, जो वर्दी से आगे बढ़कर आपसी सम्मान और साथ का प्रतीक बनता है। इस दुख की घड़ी में दिवंगत अधिकारी के योगदान को सम्मानपूर्वक याद करना और उनके परिवार के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
संवेदना | भावभीनी श्रद्धांजलि
उपनिरीक्षक मान सिंह के निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति दें।
एफटी न्यूज़ डिजिटल परिवार की ओर से दिवंगत अधिकारी को विनम्र श्रद्धांजलि एवं शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना।
सिद्धार्थनगर के लुचुइया में पौधरोपण, पीपल-पाकड़ के पौधों को ट्री गार्ड से सुरक्षा
हरियाली की ओर बढ़े कदम, प्राचीन शिव मंदिर परिसर में रोपे गए पीपल-पाकड़ के पौधे
लुचुइया में पर्यावरण संरक्षण की सराहनीय पहल; एसएसबी अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, विद्यार्थी और ग्रामीणों ने दिया प्रकृति बचाने का संदेश
लुचुइया/शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर। पेड़ केवल धरती की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि जीवन, प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण की भावना को आगे बढ़ाते हुए सिद्धार्थनगर जनपद के विकासखंड शोहरतगढ़ अंतर्गत लुचुइया स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में वन विभाग से प्राप्त पीपल एवं पाकड़ के पौधों का ट्री गार्ड के साथ रोपण किया गया। इस पहल में एसएसबी के असिस्टेंट कमांडेंट नितेश, एडीओ पंचायत संजय पटेल, प्रधान संगठन सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्र, खंड प्रेरक मनीष वर्मा, शिक्षक, स्कूली बच्चे और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम ने पौधरोपण के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार करने का संदेश दिया।

सामाजिक चेतना की पहल: पौधा लगाना ही नहीं, उसे बचाना भी जरूरी

आज जब पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्रों को बढ़ाने की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है, तब गांवों और सार्वजनिक परिसरों में पौधरोपण जैसी पहल विशेष महत्व रखती है। लुचुइया के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में पीपल और पाकड़ के पौधे लगाना इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।

इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि पौधों के साथ ट्री गार्ड भी लगाए गए, जिससे उन्हें शुरुआती दौर में सुरक्षा मिल सके। हालांकि, पौधरोपण की वास्तविक सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने, बढ़ने और वृक्ष बनने तक उनकी नियमित देखभाल से तय होती है। समय पर सिंचाई, पशुओं से सुरक्षा और पौधों की निगरानी जैसे छोटे-छोटे प्रयास इस पहल को दीर्घकालिक परिणाम देने में मदद कर सकते हैं।
अधिकारियों से लेकर बच्चों तक की भागीदारी, सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश
पौधरोपण कार्यक्रम में एसएसबी के असिस्टेंट कमांडेंट नितेश और एडीओ पंचायत संजय पटेल सहित विभिन्न सामाजिक एवं पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। प्रधान संगठन सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्र और खंड प्रेरक मनीष वर्मा भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

इसके साथ ही पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक संजय, अंजली और शेषकुमार तथा स्कूली बच्चों ने भी सहभागिता की। स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी ने इस पहल को सामुदायिक स्वरूप दिया।
बच्चों की भागीदारी सामाजिक जागरूकता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जब विद्यार्थी पौधे लगाने और उनकी देखभाल जैसी गतिविधियों से जुड़ते हैं, तो उन्हें प्रकृति के महत्व को व्यवहार में समझने का अवसर मिलता है। पर्यावरण संरक्षण की आदत बचपन से विकसित हो, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार और समाज तक पहुंच सकता है।
धार्मिक परिसर से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
प्राचीन शिव मंदिर परिसर में पौधरोपण ने धार्मिक आस्था से जुड़े सार्वजनिक स्थल को हरित बनाने की दिशा में भी ध्यान आकर्षित किया। ऐसे स्थानों पर स्थानीय समुदाय की भागीदारी से पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
पीपल और पाकड़ जैसे वृक्ष पक्षियों एवं अन्य जीवों को आश्रय देने, छाया उपलब्ध कराने और स्थानीय जैव विविधता को सहारा देने में उपयोगी होते हैं। इन पौधों के बेहतर विकास के लिए स्थान के अनुरूप देखभाल और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
इस तरह की पहल समाज को यह समझने का अवसर देती है कि प्रकृति का संरक्षण किसी एक व्यक्ति, विभाग या संस्था का काम नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है।
अब पौधों की नियमित देखभाल सबसे अहम
पौधरोपण अभियान की निरंतरता बनाए रखने के लिए लगाए गए पौधों की समय-समय पर निगरानी जरूरी है। ट्री गार्ड सुरक्षित हैं या नहीं, पौधों को पर्याप्त पानी मिल रहा है या नहीं और उनकी वृद्धि कैसी है—इन बिंदुओं पर ध्यान देकर कार्यक्रम के उद्देश्य को आगे बढ़ाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय से पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी साझा की जा सकती है। यदि नियमित संरक्षण सुनिश्चित होता है, तो आज लगाए गए छोटे पौधे भविष्य में छायादार वृक्ष बनकर क्षेत्र के पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं।
:पीपल-पाकड़ के पौधों का महत्व
– पर्यावरण संरक्षण: वृक्ष वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण और ऑक्सीजन चक्र में योगदान देते हैं।
– जैव विविधता: वृक्ष पक्षियों और कई छोटे जीवों को आश्रय तथा भोजन उपलब्ध कराने में सहायक होते हैं।
– छाया और हरित क्षेत्र: वृक्ष बड़े होने पर छाया प्रदान करते हैं और आसपास के क्षेत्र को हरित बनाने में मदद करते हैं।
– दीर्घकालिक संरक्षण: पौधों को नियमित पानी, सुरक्षा और उचित देखभाल मिलने पर उनके जीवित रहने की संभावना बेहतर होती है।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग
– नितेश — एसएसबी असिस्टेंट कमांडेंट
– संजय पटेल — एडीओ पंचायत
– डॉ. पवन मिश्र — प्रधान संगठन, सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष
– मनीष वर्मा — खंड प्रेरक
– संजय, अंजली एवं शेषकुमार — शिक्षक
– पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थी
– स्थानीय ग्रामीण
कार्यक्रम स्थल: प्राचीन शिव मंदिर परिसर, लुचुइया, विकासखंड शोहरतगढ़, जनपद सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश।
संपादकीय टिप्पणी: एक पौधा, एक जिम्मेदारी
पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े अभियानों के साथ स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण होते हैं। लुचुइया में पीपल और पाकड़ के पौधों का रोपण इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल है। लेकिन पौधरोपण की तस्वीरों से आगे बढ़कर पौधों को सुरक्षित रखना, उनकी नियमित देखभाल करना और अधिक लोगों को इस कार्य से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।
सामाजिक जागरूकता तभी सार्थक होती है, जब वह व्यवहार में दिखाई दे। यदि गांव के लोग सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए पौधों की जिम्मेदारी साझा करें और बच्चों को प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित करें, तो हरियाली का यह प्रयास व्यापक सामाजिक चेतना का माध्यम बन सकता है।
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11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन को लेकर ग्रामीणों में चिंता, हादसे की आशंका के बीच कार्रवाई की मांग

शिकायत-पत्र में विद्युत तारों की स्थिति पर उठाए सवाल; ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराने की लगाई गुहार, विभागीय जांच और जवाब का इंतजार

सिद्धार्थनगर। बिजली की हाईटेंशन लाइन और ट्रांसफॉर्मर से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की चिंता सामने आई है। सिद्धार्थनगर जनपद के बढ़नी क्षेत्र से संबंधित एक गांव के ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को प्रार्थना-पत्र देकर 11,000 वोल्ट की विद्युत लाइन से जुड़े तारों की स्थिति की जांच कराने और आवश्यक सुधार करने की मांग की है। शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और तस्वीरों ने मामले को जनसुरक्षा के नजरिये से महत्वपूर्ण बना दिया है।

शिकायत-पत्र में ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विद्युत लाइन और ट्रांसफॉर्मर से जुड़े तारों की मौजूदा स्थिति को लेकर आशंका बनी हुई है। उनका अनुरोध है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें और यदि तारों में कोई तकनीकी कमी या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसे तत्काल दूर कराया जाए। शिकायत में पुराने तारों को हटाने अथवा बदलने और जरूरत के अनुसार सुरक्षित व्यवस्था किए जाने की मांग भी की गई है।
ग्रामीणों की चिंता को हल्के में न लिया जाए
ग्रामीण इलाकों में बिजली की लाइनें लोगों के घरों, रास्तों, खेतों और पशुओं के आसपास से गुजरती हैं। ऐसे में हाईटेंशन लाइन से संबंधित किसी भी संभावित खतरे की शिकायत को गंभीरता से लेकर उसकी तकनीकी जांच कराना जरूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि मौके की वास्तविक स्थिति का आकलन करे और आवश्यक कदम उठाए।
इस मामले में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित विद्युत लाइन की वर्तमान स्थिति क्या है, क्या वहां सुरक्षा संबंधी कोई कमी मौजूद है और शिकायत मिलने के बाद विभाग की ओर से निरीक्षण या सुधार की कोई कार्रवाई की गई है? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट हो सकेगा।
मृत पशु की तस्वीर भी सामने, मौत के कारण की पुष्टि जरूरी
शिकायत से संबंधित उपलब्ध तस्वीरों में एक गाय मृत अवस्था में दिखाई दे रही है। इस तस्वीर के सामने आने से घटना की परिस्थितियों की जांच की आवश्यकता और महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, उपलब्ध तस्वीर मात्र से यह प्रमाणित नहीं होता कि गाय की मौत बिजली का करंट लगने से हुई है। मौत का कारण स्पष्ट करने के लिए घटनास्थल की परिस्थितियों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और आवश्यकतानुसार पशु चिकित्सकीय या तकनीकी जांच की जरूरत होगी।
यदि जांच में पशु की मौत का संबंध विद्युत लाइन से पाया जाता है, तो उस पहलू की भी नियमानुसार जांच की जानी चाहिए। फिलहाल, किसी निश्चित कारण या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करना तथ्यों की पुष्टि के बिना उचित नहीं होगा।
अब विभागीय निरीक्षण और जवाब का इंतजार
ग्रामीणों की शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विभाग को शिकायत की स्थिति स्पष्ट करते हुए यह बताना चाहिए कि मौके का निरीक्षण हुआ है या नहीं, विद्युत तारों की स्थिति में कोई कमी पाई गई या नहीं और आवश्यक सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
यदि मौके पर कोई खतरा पाया जाता है, तो लोगों और पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि शिकायत में लगाए गए आशंकाओं की पुष्टि नहीं होती है, तो निरीक्षण के निष्कर्षों से ग्रामीणों को अवगत कराना भी जरूरी है।
जनहित में उठे सवाल, जवाबदेही भी जरूरी
यह मामला किसी व्यक्ति या विभाग पर बिना जांच आरोप लगाने का नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े सवालों का है। शिकायत के आधार पर संबंधित विभाग से तथ्यात्मक जवाब और कार्रवाई की जानकारी मांगना जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
अब देखना होगा कि संबंधित विद्युत विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और मौके की जांच के बाद ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।
FT NEWS DIGITAL की ओर से संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त करने का प्रयास किया जाना चाहिए। आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों में विवाद, मारपीट के आरोप से मचा हड़कंप
FT NEWS DIGITAL | न्यूज़ पोर्टल स्पेशल रिपोर्ट
सड़क हादसे में घायल मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम को लेकर बढ़ा विवाद, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने का दावा, पुलिस हस्तक्षेप के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ी
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल में सड़क हादसे में घायल एक मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम कराने को लेकर तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। विवाद बढ़ने पर मारपीट के आरोप लगाए गए। घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की बात भी सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित किए गए हैं और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज का नेहरू अस्पताल एक बार फिर विवाद को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला किसी उपचार प्रक्रिया को लेकर नहीं, बल्कि एक मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम कराने की मांग और तीमारदारों-जूनियर डॉक्टरों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामला इतना बढ़ा कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
क्या हुआ था?
मिली जानकारी के अनुसार सिद्धार्थनगर क्षेत्र के रहने वाले करीब 45 वर्षीय उमाकांत चौधरी सड़क दुर्घटना में घायल हुए थे। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर रेफर किया गया।
बताया गया कि नेहरू अस्पताल के मेडिसिन इमरजेंसी वार्ड में उनका उपचार चल रहा था। मंगलवार रात करीब 12 बजे उपचार के दौरान मरीज की मौत हो गई।
मरीज की मौत के बाद परिजनों और अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों के बीच पोस्टमार्टम को लेकर मतभेद की स्थिति बनने की बात सामने आई। परिजनों की ओर से पोस्टमार्टम की मांग किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी दौरान विवाद बढ़ गया और तीमारदारों तथा जूनियर डॉक्टरों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट के आरोप लगाए गए। घटना का एक वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने की बात सामने आई है, जिसमें कथित तौर पर विवाद की स्थिति दिखाई दे रही है।
पुलिस के पहुंचने के बाद संभली स्थिति
विवाद की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
मामले में पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार किए जाने की बात सामने आई है।
प्रशासन ने क्या कहा?
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अशोक यादव के अनुसार, घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि सीसीटीवी फुटेज भी निकाला गया है और जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यानी फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है और जांच पूरी होने का इंतजार है।
अब जांच पर टिकी निगाह
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्पताल परिसर में विवाद की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई और मारपीट की स्थिति आखिर क्यों बनी। इसका जवाब अब जांच समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज से मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
सारांश
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सड़क हादसे में घायल मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम को लेकर तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद सामने आया। मारपीट के आरोप लगाए गए और घटना का वीडियो प्रसारित होने की बात कही गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। कॉलेज प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू कराई है।
सवाल सिर्फ विवाद का नहीं
अस्पताल में मरीज की मौत किसी भी परिवार के लिए बेहद संवेदनशील क्षण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकीय प्रक्रिया, परिजनों की शंकाओं और अस्पताल प्रशासन के बीच संवाद बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
दूसरी ओर, अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर किसी भी पक्ष द्वारा कानून हाथ में लेना उचित नहीं है। इस मामले में भी आरोपों के बजाय सीसीटीवी, वीडियो और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तथ्य सामने आना जरूरी है। दोषी जो भी हो, कार्रवाई तथ्यों और कानून के अनुसार होनी चाहिए।
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भारत-नेपाल सीमा पर SSB की सतर्कता, नाबालिग युवती युवक के साथ मिली
रात में बजहा सीमा क्षेत्र में हुई पूछताछ, AHTU पुलिस को सौंपा गया मामला

सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल की सतर्कता से एक नाबालिग युवती को एक युवक के साथ रोके जाने का मामला सामने आया है। बजहा सीमा चौकी क्षेत्र में नियमित नाका ड्यूटी के दौरान SSB जवानों ने दोनों को नेपाल की ओर से भारत में आते देखा। युवती की उम्र कम होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और AHTU टीम को सूचना दी गई। आवश्यक पूछताछ और औपचारिकताओं के बाद दोनों को AHTU पुलिस सिद्धार्थनगर के सुपुर्द कर दिया गया
भारत-नेपाल सीमा पर रात के अंधेरे में SSB की निगाह से एक युवक और युवती गुजर नहीं सके। बजहा सीमा चौकी क्षेत्र में नियमित नाका ड्यूटी के दौरान जवानों ने दोनों को रोककर पूछताछ की। युवती के नाबालिग होने की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को संवेदनशील मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।
SSB के अनुसार, घटना रात करीब 10:15 बजे की है। प्रारंभिक पूछताछ में युवक ने अपना नाम अब्दुल हलीम और उम्र 27 वर्ष बताई। साथ मौजूद युवती की उम्र कम होने की जानकारी मिलने पर नाका पार्टी के कमांडर ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी।
इसके बाद उपनिरीक्षक किशन लाल के साथ महिला कर्मियों को मौके पर भेजा गया। महिला कर्मियों द्वारा युवती से अलग से पूछताछ की गई। SSB के मुताबिक युवती ने बताया कि वह अपने माता-पिता को बताए बिना घर से निकली थी और युवक के साथ विवाह के उद्देश्य से मुंबई जाने की बात कह रही थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए AHTU पुलिस सिद्धार्थनगर तथा संबंधित SSB टीम को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची टीमों ने दोनों से पूछताछ की और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मामले को AHTU पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
सीमा पर SSB की पैनी नजर
भारत-नेपाल सीमा पर नियमित नाका, गश्त और अन्य निगरानी गतिविधियों के जरिए SSB लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखती है। बल की ओर से मानव तस्करी, नशीले पदार्थों, अवैध मुद्रा और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों की रोकथाम के लिए अभियान चलाए जाने की जानकारी दी गई है।
क्यों गंभीर है मामला?
नाबालिग की सुरक्षा बनी प्राथमिकता
नाबालिग से जुड़े मामलों में उसकी सुरक्षा और पहचान की गोपनीयता महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में भी युवती को सार्वजनिक रूप से पहचान योग्य बनाने वाली कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और तथ्यों की पुष्टि संबंधित पुलिस जांच के आधार पर होगी।
सारांश
बजहा सीमा चौकी क्षेत्र में SSB ने नेपाल की ओर से भारत में प्रवेश कर रहे एक युवक और नाबालिग युवती को रोका। पूछताछ के दौरान युवती के नाबालिग होने की जानकारी सामने आई। SSB ने संबंधित अधिकारियों को सूचना दी और आवश्यक प्रक्रिया के बाद दोनों को AHTU पुलिस सिद्धार्थनगर के सुपुर्द कर दिया। मामले की आगे जांच संबंधित पुलिस इकाई कर रही है।
टिप्पणी
भारत-नेपाल जैसी खुली और संवेदनशील सीमा पर सुरक्षा बलों की सतर्कता कई बार ऐसी परिस्थितियों को समय रहते सामने ला सकती है, जिनकी वास्तविक प्रकृति जांच के बाद ही स्पष्ट होती है। इस मामले में भी सबसे महत्वपूर्ण पहलू नाबालिग की सुरक्षा है। साथ ही, किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। इसलिए पूरे प्रकरण में तथ्यों की पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष का इंतजार किया जाना चाहिए।
भारत-नेपाल सीमा पर SSB की सतर्कता, नाबालिग युवती युवक के साथ मिली
रात में बजहा सीमा क्षेत्र में हुई पूछताछ, AHTU पुलिस को सौंपा गया मामला

सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल की सतर्कता से एक नाबालिग युवती को एक युवक के साथ रोके जाने का मामला सामने आया है। बजहा सीमा चौकी क्षेत्र में नियमित नाका ड्यूटी के दौरान SSB जवानों ने दोनों को नेपाल की ओर से भारत में आते देखा। युवती की उम्र कम होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और AHTU टीम को सूचना दी गई। आवश्यक पूछताछ और औपचारिकताओं के बाद दोनों को AHTU पुलिस सिद्धार्थनगर के सुपुर्द कर दिया गया
भारत-नेपाल सीमा पर रात के अंधेरे में SSB की निगाह से एक युवक और युवती गुजर नहीं सके। बजहा सीमा चौकी क्षेत्र में नियमित नाका ड्यूटी के दौरान जवानों ने दोनों को रोककर पूछताछ की। युवती के नाबालिग होने की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को संवेदनशील मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।
SSB के अनुसार, घटना रात करीब 10:15 बजे की है। प्रारंभिक पूछताछ में युवक ने अपना नाम अब्दुल हलीम और उम्र 27 वर्ष बताई। साथ मौजूद युवती की उम्र कम होने की जानकारी मिलने पर नाका पार्टी के कमांडर ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी।
इसके बाद उपनिरीक्षक किशन लाल के साथ महिला कर्मियों को मौके पर भेजा गया। महिला कर्मियों द्वारा युवती से अलग से पूछताछ की गई। SSB के मुताबिक युवती ने बताया कि वह अपने माता-पिता को बताए बिना घर से निकली थी और युवक के साथ विवाह के उद्देश्य से मुंबई जाने की बात कह रही थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए AHTU पुलिस सिद्धार्थनगर तथा संबंधित SSB टीम को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची टीमों ने दोनों से पूछताछ की और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मामले को AHTU पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
सीमा पर SSB की पैनी नजर
भारत-नेपाल सीमा पर नियमित नाका, गश्त और अन्य निगरानी गतिविधियों के जरिए SSB लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखती है। बल की ओर से मानव तस्करी, नशीले पदार्थों, अवैध मुद्रा और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों की रोकथाम के लिए अभियान चलाए जाने की जानकारी दी गई है।
क्यों गंभीर है मामला?
नाबालिग की सुरक्षा बनी प्राथमिकता
नाबालिग से जुड़े मामलों में उसकी सुरक्षा और पहचान की गोपनीयता महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में भी युवती को सार्वजनिक रूप से पहचान योग्य बनाने वाली कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और तथ्यों की पुष्टि संबंधित पुलिस जांच के आधार पर होगी।
सारांश
बजहा सीमा चौकी क्षेत्र में SSB ने नेपाल की ओर से भारत में प्रवेश कर रहे एक युवक और नाबालिग युवती को रोका। पूछताछ के दौरान युवती के नाबालिग होने की जानकारी सामने आई। SSB ने संबंधित अधिकारियों को सूचना दी और आवश्यक प्रक्रिया के बाद दोनों को AHTU पुलिस सिद्धार्थनगर के सुपुर्द कर दिया। मामले की आगे जांच संबंधित पुलिस इकाई कर रही है।
टिप्पणी
भारत-नेपाल जैसी खुली और संवेदनशील सीमा पर सुरक्षा बलों की सतर्कता कई बार ऐसी परिस्थितियों को समय रहते सामने ला सकती है, जिनकी वास्तविक प्रकृति जांच के बाद ही स्पष्ट होती है। इस मामले में भी सबसे महत्वपूर्ण पहलू नाबालिग की सुरक्षा है। साथ ही, किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। इसलिए पूरे प्रकरण में तथ्यों की पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष का इंतजार किया जाना चाहिए।
सेवा ज्योति कलश यात्रा ने दिया सेवा और विकसित भारत का संदेश

सिद्धार्थनगर। सेवा संकल्प अभियान के तहत बुधवार को भारत माता चौक पर सेवा ज्योति कलश यात्रा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने सहभागिता की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी देखा गया। वक्ताओं ने सेवा, सुशासन और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
सिद्धार्थनगर में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित सेवा ज्योति कलश यात्रा में कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। भारत माता चौक से आयोजित कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सेवा एवं राष्ट्र निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाने की बात कही। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संबोधन का लाइव प्रसारण भी देखा गया।

कार्यक्रम में जिला प्रभारी प्रवीण गुप्ता, विधायक जय प्रताप सिंह, विधायक श्यामधनी राही, पूर्व विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी सहित पार्टी के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने की।
कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्षों के राजनीतिक सफर और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही।

कार्यक्रम में क्या रहा खास?
– भारत माता चौक पर सेवा ज्योति कलश यात्रा का आयोजन
– बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने लिया हिस्सा
– प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण
– सेवा और सुशासन के संकल्प को दोहराया गया
– वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का संदेश दिया गया
– जिला व मंडल स्तर के पदाधिकारी रहे मौजूद

वक्ताओं ने क्या कहा?
प्रवीण गुप्ता

जिला प्रभारी प्रवीण गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति में 7 अक्टूबर का दिन महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंबे सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के कार्यों का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से सेवा भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
दीपक मौर्य

भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने कहा कि सेवा ज्योति कलश यात्रा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के संकल्प से प्रेरणा लेकर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
जय प्रताप सिंह

विधायक जय प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा यात्रा को तपस्या और राष्ट्र प्रथम की भावना का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सेवा और राष्ट्रहित की भावना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
श्यामधनी राही

विधायक श्यामधनी राही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश और प्रदेश के आगे बढ़ने की बात कही।
सारांश
सिद्धार्थनगर में सेवा ज्योति कलश यात्रा के जरिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने सेवा, सुशासन और विकसित भारत के संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

टिप्पणी
सेवा ज्योति कलश यात्रा जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को सेवा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना भी बताया गया। सिद्धार्थनगर में आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य और जनसेवा की भावना पर जोर दिया गया।
शोहरतगढ़ में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च’, बाबा साहब की प्रतिमा के सामने लिया वोट बचाने का संकल्प
सिद्धार्थनगर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश का हवाला देते हुए मंगलवार को शोहरतगढ़ तहसील मुख्यालय पर ‘वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च’ निकाला गया। समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा के नेतृत्व में गड़ाकुल तिराहे से शुरू हुआ पैदल मार्च बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तक पहुंचा। यहां प्रतिमा पर माल्यार्पण कर राष्ट्रगान का गायन किया गया और लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा मताधिकार की रक्षा के लिए संकल्प लिया गया।
शोहरतगढ़ में समाजवादी पार्टी की ओर से ‘वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च’ का आयोजन किया गया। गड़ाकुल तिराहे से बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तक निकाले गए मार्च में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र एवं मताधिकार को लेकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न नारे लगाए गए और संविधान में दिए गए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का उल्लेख किया गया।
मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं की ओर से “लोकतंत्र बचाना है, वोट बचाना है” जैसे नारे लगाए गए। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस दौरान “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” का नारा भी लगाया गया। यह नारा कार्यक्रम में शामिल लोगों की राजनीतिक मांग के रूप में सामने आया।
कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मणेन्द्र मिश्रा ने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को विफल किया जाएगा। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर समाजवादी पार्टी के आंदोलनरत होने की बात कही।
संविधान और मताधिकार पर जोर
कार्यक्रम के दौरान संविधान के अनुच्छेद 326 का सार्वजनिक पाठ किए जाने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई। नेताओं ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मताधिकार नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है।
प्रतिमा के सामने संकल्प
मार्च के समापन पर बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद राष्ट्रगान का गायन हुआ और उपस्थित लोगों ने वोट की रक्षा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
मार्च की अगुवाई समाजवादी पार्टी शोहरतगढ़ विधानसभा अध्यक्ष हरिनारायण यादव, जिला अध्यक्ष अल्पसंख्यक सभा शकील शाह, सपा छात्र सभा के राष्ट्रीय सचिव अजय चौरसिया, जिला अध्यक्ष सैनिक प्रकोष्ठ एवं शोहरतगढ़ नगर पंचायत के पूर्व प्रत्याशी गोपाल फौजी, जोनल प्रभारी राकेश दूबे, घनश्याम यादव और संजय यादव सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने की।
सारांश
शोहरतगढ़ में आयोजित मार्च के जरिए समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मताधिकार, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर अपनी राजनीतिक बात रखी। कार्यक्रम का समापन बाबा साहब की प्रतिमा के सामने माल्यार्पण, राष्ट्रगान और वोट बचाने के संकल्प के साथ हुआ।
टिप्पणी | FT News Digital
यह खबर उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति और उपलब्ध कार्यक्रम संबंधी विवरण के आधार पर तैयार की गई है। इसमें किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ स्वतंत्र रूप से कोई आरोप प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। कार्यक्रम में लगाए गए नारों और नेताओं के वक्तव्यों को उनके राजनीतिक बयान/कार्यक्रम के दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। संबंधित पक्षों की अतिरिक्त प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।

शोहरतगढ़ में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ मार्च’ के दौरान बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने मौजूद सपा नेता और कार्यकर्ता।
